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एंटीवायरस क्या है? 10 बेस्ट एंटीवायरस कौन से है? – What is Antivirus in Hindi

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दोस्तो अगर आपने कंप्यूटर चलाया होगा तो एंटीवायरस का नाम तो सुना ही होगा। जिसका निर्माण कंप्यूटर system में मौजूद data को सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जाता हैं। यह वायरस को कंप्यूटर में आने से रोकता हैंl इसके माध्यम से हम अपने कंप्यूटर की digital सुरक्षा कर सकते हैं। दोस्तो अगर आपको एंटी वायरस के बारे में जानना है तो इस लेख को शुरू से अंत तक जरूर पढ़ें तो चलिए शुरू करते हैं।

एंटीवायरस क्या है? (What is Antivirus in Hindi)

दोस्तों antivirus को समझने से पूर्व आपके लिए virus को समझना जरूरी है। सरल शब्दों में समझें तो virus में instruction होते हैं। जिसका कार्य कंप्यूटर की कार्यप्रणाली को रोकना होता है तथा कंप्यूटर में सेव की गई सारी इंफॉर्मेशन को नष्ट करना होता है। दोस्तों आप समझ गए होंगे virus आने से computer पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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Antivirus एक सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम होता है। इसका उपयोग कंप्यूटर में virus का पता लगाने तथा वायरस को delete करने के लिए किया जाता है। इसलिए कंप्यूटर में एंटीवायरस का install होना बेहद आवश्यक है। बिना antivirus के इंटरनेट का इस्तेमाल करने पर आपका computer कुछ ही मिनटों में वायरस से संक्रमित हो सकता है। रोजाना 60,000 से अधिक मैलवेयर निर्मित होते हैं। कंप्यूटर को इन malware से बचाने के लिए डिटेक्शन टूल्स को अपडेट करना अत्यंत आवश्यक होता है।

एंटीवायरस के कार्य (Work)

एंटीवायरस एक प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर होता है। जिसके डेटाबेस में कंप्यूटर Virus की जानकारी दी जाती है।  एंटीवायरस के डेटाबेस में लगभग सभी प्रकार के कंप्यूटर वायरस की छाप होती है।

  • रीपर पहला एंटीवायरस है। जिसे Ray टॉमलिंसन द्वारा पहला कंप्यूटर वायरस क्रीपर को हटाने के लिए बनाया गया था।
  • एंटीवायरस को कंप्यूटर वायरस को हटाने के लिए बनाया गया था। आमतौर पर एंटीवायरस का काम कंप्यूटर को वायरस से सुरक्षित रखना है।
  • अगर कभी कंप्यूटर सिस्टम में वायरस आ जाता है।  तब एंटीवायरस कंप्यूटर सिस्टम को स्कैन करता है।  अगर इसके डेटाबेस से मिलता जुलता कोई फाइल या प्रोग्राम मिलता है।  तब उसे कंप्यूटर वायरस मानकर उपयोगकर्ता को सूचित करता है और उसे नष्ट भी कर देता है।
  • अगर कंप्यूटर सिस्टम में कोई नया वायरस नहीं है। तब ऐसे में वायरस का छाप उस एंटीवायरस के डेटाबेस में नहीं होता है।  इसलिए एंटीवायरस उस वायरस को पहचान नहीं पाता है और ना ही नष्ट कर सकता है।  इस तरह की स्थिति में एंटीवायरस भी कुछ नहीं कर सकता।
  • लेकिन जब भी कभी मार्केट में नए तरह का वायरस पता चलता है। तब अच्छे एंटीवायरस के कंपनी भी अपने एंटीवायरस के डेटाबेस में अपडेट कर देते हैं।  इस तरह एक नया वायरस भी एंटीवायरस डिटेक्ट कर लेता है। इसलिए कहा जाता है कि हमेशा अच्छी कंपनी का अपडेटेड एंटीवायरस ही इस्तेमाल करना चाहिए।

एंटीवायरस का इतिहास (History)

आज से 70 वर्ष पूर्व पहले computer virus का जन्म हुआ। पहला कप्यूटर वायरस creeper virus के नाम से जाना गया उस समय mainframe computer प्रचलन में थे. तो यह virus मेनफ्रेम कंप्यूटर सिस्टम को संक्रमित करता था. इस वायरस को हटाने के लिए “ray Tomlinson” द्वारा क्रीपर वायरस को destroy करने के लिए एक program बनाया गया जिसे “the reaper” के नाम से भी जाना जाता था. क्रीपर वायरस के बाद अनेक virus का जन्म हुआ।

पहले वायरस floppy disk के जरिए एक system से दूसरे system में जाते थे. परन्तु इंटरनेट के बढ़ते विकास से वायरस online तेजी से फैलने लगे. वर्ष 1987 में ही McAfee कंपनी द्वारा वायरस स्कैन नामक antivirus का पहला वर्जन लॉन्च किया गया.

1990 में कंप्यूटर एंटीवायरस अनुसंधान संगठन की स्थापना की गई. 1992 में AVG एंटीवायरस का पहला version लॉन्च किया गया. इस प्रकार समय के साथ विभिन्न कंपनियों द्वारा antivirus प्रोग्राम के निर्माण की ओर ध्यान दिया.

एंटीवायरस के प्रकार (Types)

Antivirus मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं। जो अपनी-अपनी गुणों के अनुसार वायरस से बचाव करने का कार्य करते हैं।

1. Standalone Antivirus

इसका उपयोग विशेष प्रकार के virus का पता लगाने और उन्हें कंप्यूटर से delete करने के लिए तैयार किया जाता हैं। इन्हे पोर्टेबल एंटीवायरस भी कहा जाता हैं। क्योंकि इस सॉफ्टवेयर का उपयोग USB ड्राइव के माध्यम से किया जाता हैं। यह हमें रियल टाइम प्रोटेक्शन जैसी सुविधा प्रदान करने में असमर्थ रहते हैं।

2. Security Software Suites

इस प्रकार का Antivirus पहले वाले कि तुलना में अच्छे तरीके से अपना काम करता हैं। यह सिर्फ वायरस को ही delete नहीं करता। बल्कि इसके साथ-साथ यह हमें एंटीस्पीवेयर और फायरवॉल जैसी सुविधाएं भी देता हैं। यह ऐसे virus से हमारी सुरक्षा करता हैं, जो किसी तरह हमारी file को नष्ट कर रहे होते हैं। यह Antivirus हमें 24 hours security प्रदान करता हैं।

Cloud-Based Antivirus Software

यह वर्तमान समय का सबसे सुरक्षित एंटीवायरस और उपयोगी Antivirus सॉफ्टवेयर हैं। यह कंप्यूटर के data को क्लाउड में Store करता हैं और यह वहीं से सभी files को स्कैन करता हैं। जिससे कंप्यूटर की इनपुट, आउटपुट प्रक्रिया तेज गति से चलती हैं। यह पूरे computer को कम समय रहते ही scan कर लेता हैं।

एंटीवायरस की विशेषताए

  • एंटीवायरस सॉफ्टवेयर आपके कंप्यूटर को वायरस से सुरक्षित रखता है।
  • वायरस न केवल आपके डेटा को नुकसान पहुंचाएंगे, बल्कि यह पूरे सिस्टम के प्रदर्शन को खराब कर सकते हैं।  लेकिन अगर आपके कंप्यूटर में एंटीवायरस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल है  तो उन्हें ये हटा देता है।
  • अधिकांश एंटीवायरस प्रोग्राम में firewall की सुविधा होती है, फ़ायरवॉल सुविधा में आपके कंप्यूटर पर सूचनाएँ जाने वाली और प्राप्त करने वाली जानकारी की दो बार छानबीन करता है। इसलिए हैकर्स आपके कंप्यूटर से व्यक्तिगत जानकारी को निकाल नहीं पाएंगे।
  • स्पैम, विज्ञापनों और ईमेल से भी वायरस computer में आ जाता है, तो इससे कंप्यूटर को भारी नुकसान होता है। एंटीवायरस इस प्रकार के सभी विज्ञापनों, स्पैम और ईमेल को block कर देता है।
  •  एंटीवायरस सॉफ्टवेयर इंटरनेट सर्फिंग के दौरान आपकी बहुमूल्य information की सुरक्षा करता है
  • एंटीवायरस सॉफ्टवेयर आपके कंप्यूटर सिस्टम को स्पाइवेयर से सुरक्षित रखता है। स्पाइवेयर एक प्रकार का मैलवेयर है जो आपके computer पर जासूसी करता है और सभी secret सूचनाएं चुराता हैं। जैसे क्रेडिट कार्ड, पासवर्ड, बैंक विवरण आदि.

एंटीवायरस के लाभ (Advantage)

  • सबसे पहले ये आपके सभी data को सुरक्षित रखता है।
  • आप किसी भी सॉफ्टवेयर को बेझिक डाउनलोड कर सकते हैं।
  • अगर आप भुगतान करते हैं, तो आपके सभी ऑनलाइन लेन-देन भी सुरक्षित रहेंगे।
  • आपका सिस्टम कभी हैंग या स्लो नहीं होगा
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर बहुत अच्छे से चलेंगे होंगे।
  • प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ेगी और कभी सिस्टम क्रैश भी नहीं होगा।
  • कंप्यूटर से कोई भी आपके डेटा को इंटरनेट से कोई भी चुरा नहीं सकता।

एंटीवायरस के हानि (Disadvantage)

  • प्रत्येक Antivirus आपके computer को हर तरह से scan नहीं करता है। जैसे अगर एंटीवायरस Internet के द्वारा आने वाले वायरस को scan करता है तो वह antivirus अन्य किसी भी तरीके से आपके कंप्यूटर में आने वाले virus को रोक नहीं सकता है।
  • सभी antivirus वायरस को scan या खोजने के लिए एक ही programming तरीका का उपयोग करते हैं, लेकिन यदि कोई नया virus मिलता है, तो एंटीवायरस इसे scan नहीं कर पाता है
  •  हमारे कंप्यूटर में बहुत सारी फाइलें होती हैं जब हम इन फाइलों को खोलते हैं तब एंटीवायरस सभी को स्कैन करता है जिससे हमें बहुत समय लगता है।
  • इसी तरह इंटरनेट पर भी अगर हमने antivirus का उपयोग किया है तो हमारी Internet गति भी कम हो जाती है।

एंटीवायरस को अपडेट क्यों करे?

हर रोज नए नए वायरस बन रहें कुछ लोगों का ये भी कहना है। जो कंपनी एंटी वायरस बनाती हैं. वही वायरस भी बनाती हैं। इसलिए आपको नए वायरस के हमले से बचने के लिए हर रोज अपडेट करना बहुत जरूरी है। अपडेट से लेटेस्ट डेफिनिशन फाइल्स भी स्टोर हो जाएंगी और नए वायरस को आसानी से पहचाना और ब्लॉक किया जा सकेगा।

एंटीवायरस किस प्रकार का सॉफ्टवेयर है?

antivirus सॉफ्टवेयर, कभी कभी anti-malware सॉफ्टवेयर के रूप में जाना जाता है, malware सॉफ्टवेयर का पता लगाने, हटाने और रोकने के लिए प्रयोग किया जाने वाला computer software है। इन software’s में कइं प्रकार की techniques का प्रयोग किया जाता है।

Top 10 Best Antivirus नाम और उसकी किमत

  1. Net protector Anti virus
  2. Quick Heal Antivirus
  3. McAfee Antivirus
  4. Bit Defender Antivirus
  5. Norton Antivirus
  6. Avast
  7. AVG
  8. Panda
  9. Avira
  10. Total security

1. Net protector Antivirus

एक ऐसा ही anti virus है जो कंप्यूटर में आने वाली प्रोब्लम, मैलवेयर को दूर करता है या कहें तो Computer को हर तरह से सुरक्षित रखता है। यह अन्य antivirus की तुलना में बेहद अलग एवं अच्छी गुणवत्ता वाला antivirus माना जाता है। इसके अंतर्गत मुख्य रूप से Internet Security, Total Security, Z-Security, NPAV Net Protector Anti-Virus Pro 2022 आते हैं। इसकी प्राइस लगभग 3000 होती है।

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2. Quick Heal Antivirus

आज के समय में सभी लोग अपनी फाइलें, डेटाबेस और सभी जरूरी दस्तावेज, यहां तक ​​कि ऑफिस की फाइलें और फोटो जैसी सभी महत्वपूर्ण चीजों को लैपटॉप या कंप्यूटर में सेव करके रखते है । क्विक हील एक ऐसा ही एंटी वायरस है जो कंप्यूटर में आने वाली तकनीकी समस्याओं को दूर करता है और कंप्यूटर को अपग्रेड रखने में मदद करता है। इसकी कीमत लगभग 1000 होती हैं।

Quick Heal Antivirus

3. McAfee Antivirus

यह भी बहुत पॉपुलर एंटीवायरस है जो कंप्यूटर में रखे हुए फाइल डाटा को सेव और सुरक्षित करके रखता है तथा कंप्यूटर को विभिन्न प्रकार की समस्याओं से भी बचाता है इसकी कीमत लगभग 1300 होती है.

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4. Bit Defender Antivirus

यह एंटीवायरस एक ऐसा ही वायरस है जो कंप्यूटर को वायरस मुक्त और सुरक्षित रखने का काम करता है। इसके साथ ही सभी Device सुरक्षित रहते हैं। बिटडिफेंडर फ्री और पेड दोनों तरह का होता है– पेड वर्जन में आपको कुछ अतिरिक्त फीचर मिल जाते हैं। लेकिन फ्री वर्जन में भी यह सॉफ्टवेयर सबसे अच्छा काम करता है। इसकी कीमत लगभग 700 होती है

5. Norton Antivirus

computer या लैपटॉप जैसे चीजों को सुरक्षित रखने के लिए नॉर्टन एंटीवायरस प्रोग्राम बनाया गया है. जिसके माध्यम से कंप्यूटर को और इसमें रखे गए डेटा को वायरस से सुरक्षित रखा जा सकता है। नॉर्टन एंटीवायरस एक लोकप्रिय एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर है, इसकी कीमत लगभग 2000 होती है

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6. Avast Antivirus

computer के लिए बेस्ट antivirus की बात करें तो Avast का नाम सबसे टॉप मे आता है। Avast एक सरल इंटरफ़ेस के साथ आता है. जिसका बड़े पैमाने पर आसानी से उपयोग किया जा सकता है। सभी मैलवेयर स्कैन करने के साथ में अपने डिवाइस में पहले से इंस्टॉल करें सभी software को भी अच्छे से स्कैन करते हैं। अगर आपके कंप्यूटर में कोई वायरस या मैलवेयर है तो ये उसे अपने आप ठीक करने का भी विकल्प देता है। इसमें आपको स्मार्ट गेमिंग मोड, सॉफ्टवेयर अपडेटर और ब्राउजर क्लीन अप जैसे कुछ फीचर भी मिलेंगे। इसकी कीमत लगभग 1365 होती है

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7. AVG Antivirus

AVG भी एक अच्छा एंटीवायरस है जो बिना आपके सिस्टम को स्लो किए एक solid protection प्रदान करता है। जब आप अपने नेटवर्क पर online हो तो भी ये उस पर पूरी नजर बनाए रखते हैं। आप कौन सी Website खोल रहे हैं और आपका E-mail, सभी तरह की online गतिविधियों को भी पूरी सुरक्षा देता है। इस सॉफ्टवेयर की एक विशेषता यह है कि AVG आपके कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम के कामकाज में कोई खलल नहीं डालता। उसके साथ इसकी वजह से सिस्टम बूट पर भी इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इसकी कीमत लगभग 699 होती है

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8. Panda Antivirus

यह एंटीवायरस आपके विंडो पीसी को वायरस और मैलवेयर से बचाता हैं। पांडा आपके सिस्टम को रियल टाइम प्रोटेक्शन देता है इसके साथ में क्लाउड क्लीनर और URL स्कैनिंग मिलती है जो सुरक्षित वेब ब्राउजिंग प्रदान करते हैं। इसमें USB सुरक्षा नाम की एक विशेषता है जो पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और मेमोरी कार्ड जैसे बाहरी उपकरण को आपके कंप्यूटर में घुसने पर उसमें मौजूद virus को सबसे पहले समाप्त कर देता है। इसकी कीमत लगभग 799 होती है

9. Avira Antivirus

यह काफी पॉपुलर एंटीवायरस सॉफ्टवेयर है। जब हम अपने laptop पर काम कर रहे होते हैं तब भी ये background में पूरी तरह से सुरक्षा होती है। आपका वेब ब्राउज़र और VPN के साथ भी ये बड़े सही से काम करते हैं। इसमें एक नेगेटिव भी हैं Avira के ब्राउज़र सेफ्टी कॉम्पोनेंट बस Google Chrome और Firefox के साथ ही काम करते हैं। इसकी कीमत लगभग 1365 होती है

10. Total security antivirus

यदि आप अक्सर usb और hard disk जैसे बाहरी उपकरणों का उपयोग करते हैं, तो ऐप एक स्कैनर प्रदान करता है जो इन उपकरणों को scan करता है और virus और मैलवेयर को आपके system में प्रवेश करने से रोकता है। Device में मौजूद वायरस के लिए, ऐप में एक system monitor है जो उन files की पहचान करता है और उन्हें अलग रखता है जो खतरा पैदा करती हैं। जब Network सुरक्षा की बात आती है, यह एक वाई-फाई सलाहकार, स्मार्ट फ़ायरवॉल,, घुसपैठ ब्राउज़र रक्षक, डिटेक्टर, वेबसाइट फ़िल्टर, इंटरनेट प्रॉक्सी, डेटा लॉकर और बहुत कुछ प्रदान करता. इसकी कीमत लगभग 1465 होती है

फ्री एंटीवायरस क्या है?

फ्री एंटीवायरस एंटीवायरस होते हैं जिनको इस्तेमाल करने के लिए आपको किसी भी प्रकार का पेमेंट नहीं करना पड़ता. इसे आप फ्री में कंप्यूटर में इंस्टॉल कर सकते हैं और कंप्यूटर को वायरस प्रोटेक्ट करके रख सकते हैं।

टॉप 5 फ्री एंटीवायरस

  1. Avast
  2. AVG
  3. Kaspersky
  4. Avira
  5. Defender

Total security antivirus बेस्ट क्यो है?

यह एक package में कंप्यूटर को कई सुरक्षा प्रदान करता है। यह malware और ransom ware सुरक्षा प्रदान करता है । यह आपके Device, नेटवर्क और E-mail को लगातार scan करते रहता है। इसमें एक उपयोगी spam फ़िल्टर और विज्ञापन blocker भी शामिल है । यह असुरक्षित लिंक पर Click करने से रोकता है। इसलिए टोटल सिक्योरिटी एंटीवायरस बेस्ट होता है।

Trial version और Full version क्या है।

Trial version मे कोई भी सॉफ्टवेयर को चलाते हैं तो वह केवल कुछ ही समय तक होता है। जब हम इस सॉफ्टवेयर चलाते हैं तो ये आज की तारीख और समय को सेव कर लेता है। सिमित अवधि के बाद उपयोगकर्ता उसे नहीं चला पाता और ब्लाक हो जाता है।और उस सॉफ्टवेयर को फुल वर्जन में चलाने के लिए हमें कुछ पेमेंट देना होता है। ट्रायल वर्जन में हमें कम फीचर मिलता है। फुल वर्जन में हमें उससे अधिक फीचर मिलता है.

FAQ

एंटीवायरस क्या है?

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एंटीवायरस या एंटीवायरस सॉफ्टवेयर, कभी कभी एंटी-मैलवेयर सॉफ्टवेयर के रूप में जाना जाता है, मैलवेयर सॉफ्टवेयर का पता लगाने, रोकने और हटाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला कंप्यूटर सॉफ्टवेयर है. इन सॉफ्टवेयरों में कइं प्रकार की तकनीकों का प्रयोग किया जाता है।

एंटीवायरस क्या है इसके प्रकार?

Antivirus ये एक Program है. यह भी बोल सकते हो ये एक एसा Software है जो Computer में छुपे हुए सारे Virus Program को ढूंड निकालता है और उसको Computer से Delete यानि ख़तम कर देना

आज आपने सिखा

यहाँ हमने एंटीवायरस (What is Antivirus in Hindi) की पूरी जानकारी देने की कोशिश की है। एंटीवायरस हमारे कंप्यूटर सिस्टम को दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर और प्रोग्राम से सुरक्षित रखता है। But इस पर पूरी तरह विश्वास कर के नहीं बैठ सकते। ऐसे में यदि कोई नया तरह का कंप्यूटर Virus आता है। तब यह एंटीवायरस (What is Antivirus in Hindi) उसे पता नहीं चलता। इसलिए हमेशा अपडेटेड एंटीवायरस का इस्तेमाल करना चाहिए। उम्मीद करता हूं या लेख आपको पसंद आया होगा तथा आप लोग इसे अपने सोशल मीडिया पर दोस्तों के साथ शेयर कर के ताकि उसको भी एंटीवायरस के बारे में अच्छे से जानकारी मिल सके।

यदि यह पोस्ट (What is Antivirus in Hindi) आपको अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों को फेसबुक, Whatsapp और इन्स्ताग्राम इत्यादि में शेयर जरुर करें. इसी प्रकार के नए-नए टेक्नोलॉजी और बिजनेस स्टार्टअप की जानकारी के लिए आप मेरे YouTube चैनल computervidya और मेरा वेबसाइट nayabusiness.in में विजिट जरुर करें.

वाई-फ़ाई क्या है और कैसे काम करता है? (हिंदी नोट्स) – What is Wi-Fi in Hindi

what is wifi in hindi

क्या आप सभी को पता है वाई-फ़ाई क्या है? (What is Wi-Fi in Hindi) और वाई-फ़ाई कैसे काम करता है? आप सभी लोगों ने इंटरनेट का उपयोग तो जरूर किए होंगे। सभी लोगों ने वाईफाई का नाम जरूर सुना होगा। इसका उपयोग भी किया होगा।

आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि वाईफाई क्या होता है?, यह कैसे काम करता है?, इसकी दूरी कितनी होती है?, इसका निर्माण किसने और कब किया है?, तो दोस्तो आज के इस आर्टिकल (What is Wi-Fi in Hindi) में हम आपके सारे सवालों का जवाब देंगे। हम वाईफाई के बारे में डिटेल से जानेंगे तो आइए शुरू करते हैं।

वाई-फ़ाई क्या है? (What is Wi-Fi in Hindi)

वाई फाई का पूरा नाम “Wireless Fidelity” है। वाईफाई वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क होता है। यह रेडियो तरंगों द्वारा चलता है। जैसे मोबाइल के नेटवर्क  को उपयोग करने के लिए कंप्यूटर में वायरलेस एडाप्टर लगाया जाता है। यह हमारे मोबाइल से आ रहे वाई फाई के सिग्नल को decode करता है।

What is Wi-Fi in Hindi

Wi-Fi का उपयोग मोबाइल, लैपटॉप, टेबलेट, कंप्यूटर आदि उपकरण में इंटरनेट चलाने के लिए किया जाता है। आप अपने किसी भी कंप्यूटर में वाई फाई को जोड़कर इंटरनेट चला सकते हैं। बहुत से लोगों के मन में यह सवाल होता है कि वाईफाई को हिंदी में क्या कहते हैं तो वाईफाई को हिंदी में “वायरलेस स्थानीय क्षेत्र तंत्र” कहा जाता है।

वाई-फ़ाई का इतिहास (History of Wi-Fi)

सन 1997 में वाईफाई तकनीक को लोगों के सामने लाया गया। लेकिन वाईफाई का आविष्कार बहुत पहले हो चुका था। इसको बनाने का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं बहुत से लोगों को जाता है। सन 1971 से लेकर 1991 तक वाईफाई तकनीक को और अधिक विकसित किया। ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक John O’Sullivan और उनकी पूरी टीम ने वाईफाई को और अधिक विकसित किया।

साल 1999 में एक संस्था जो nonprofit organization Wi-Fi एलायंस ने एक ट्रेड एसोसिएशन का गठन किया था। यह Wi-Fi टेक्नोलॉजी को प्रमोट करती है। 2009 में Wi-Fi का वर्जन आया जिसे 802.11n कहा गया। यह अधिक बेहतर और fast थी। लेकिन इसमें ओवरक्राउडेड की समस्या थी। आज करीब हर जगह Wi-Fi कनेक्टिविटी की सुविधा है। बहुत से पब्लिक जगह, रेलवे स्टेशन पर आपको हॉटस्पॉट की सुविधा मिल जाती है। इस क्षेत्र में लगातार वाईफाई का विस्तार हो रहा है .

वाई-फ़ाई के संस्करण (Version)

वाईफाई के सभी संस्करणों कोड नेम के साथ एक नाम भी दिया जाता है जैसे 802.11a को Wi-Fi 1 और 802.11b को Wi-Fi 2 कहते हैं। नीचे वाईफाई की प्रमुख संस्करण दिए गए हैं.

  1. Wi-Fi 1: 802.11a (1999)
  2. Wi-Fi 2: 802.11b (1999)
  3. Wi-Fi 3: 802.11g (2003)
  4. Wi-Fi 4: 802.11n (2009)
  5. Wi-Fi 5: 802.11ac (2014)
  6. Wi-Fi 6:802.11ax (2019)

802.11a

इसे IEEE ने 1999 में बनाया था। इसे व्यावसायिक, ओद्योगिक तथा ऑफिस use के लिए बनाया गया था। यह 5 GHz की frequency पर कार्य करता था। इसकी Speed 54 Mbps थी. इसकी Range 115 फीट तक थी. तथा यह बहुत Costly था। यह data लिंक लेयर protocol का उपयोग करता है।

802.11a वायरलेस Technique की श्रृंखला में से एक है। यह Wi-Fi नेटवर्किंग राउटर और antenna द्वारा भेजे गए radio signal के रूप तथा संरचना को प्रभावित करता है।

802.11b

इसे भी 1999 में बनाया गया था। 802.11a तथा 802.11b दोनों standards को IEEE ने एक साथ बनाया था. इस Wi-Fi को घर तथा घरेलू प्रयोग के लिए बनाया गया था.

यह 5 GHz की frequency पर कार्य करता है। इसकी स्पीड 11 Mbps तक है. इसकी Range 115 फीट तक थी। Wi-Fi 802.11a की तुलना में यह कम फ्रीक्वेंसी है। इसका मतलब यह है कि यह उचित दूरी पर Work करता है और इसकी लागत 802.11a की अपेक्षा कम होती है.

802.11g

इसे 2003 में बनाया गया था। इसको IEEE ने 802.11a तथा 802.11b के कॉम्बिनेशन से बनाया. यह 2.4 GHz की frequency पर कार्य करता है।

इसकी स्पीड 54 Mbps तक है. इसकी Range 125 फीट तक है. 802.11g  का hardware 802.11b के साथ पूरी तरह से एक जैसा है। 802.11g की सबसे बड़ी विशेषता गति है इसलिए user इसे तेजी से अपना रहे हैं.

Wi-Fi 802.11n

इसे 2009 में बनाया गया. वैसे Theoretical रूप से कहें तो इसकी स्पीड 500 एमबीपीएस तक है. तथा इसकी Range 230 फीट तक है. 802.11n नई Wi-Fi तकनीक है।

इसे 802.11g पर सुधार करने के लिए Design किया गया था। इसे 2009 में dual band राउटर की 2.4 GHz और 5 GHz दोनों frequency पर काम करने के लिए बनाया गया था.

802.11ac

इसे 2013 में बनाया गया था।हम इसे wifi का 5th generation भी बोल सकते है. इसकी स्पीड  802.11n से लगभग तीन गुना अधिक है।

यह 5 GHz की frequency पर कार्य करता है। इसकी Range 115 फीट है. आजकल ज्यादातर सभी Device इसी Wi-Fi का प्रयोग करते है. लेकिन अभी भी कुछ Device मे 802.11n का भी प्रयोग कर रहे है.

Wi-Fi 802. 11ax

802.11ax इसे “वाईफाई 6” भी कहा जाता है Wi-Fi 6 वायरलेस तकनीकी में अगली पीढ़ी का मानक है। यह अन्य वाईफाई की तुलना में अब तक की सबसे तेज गति से Work करने वाली Wi-Fi हैं।

इसकी अधिकतम स्पीड 10 जीबीपीएस तक की हैं। और यह 2.4 GHz और 5 GHz modem को support करता हैं। Wi-Fi 6 को 2019 में release किया गया था।

Wi-Fi कैसे काम करता है।

Wi-Fi टेक्नोलॉजी में एक ऐसी device लगी होती है। जो वायरलेस signal को ट्रान्समेंट करती है जो की Wi-Fi router या हॉटस्पॉट होता है. इसमें वायरलेस राउटर किसी इंटरनेट से जुड़कर सुचना को radio तरगों में बदल देती है। Wi-Fi device वातावरण में मौजूद Wi-Fi संकेतो से connect होकर अपने आस पास एक छोटा सा वायरलेस सिग्नल का Area बनाता है। जिसे Wi-Fi zone कहते है।

ये छोटा सा एरिया एक wireless local area का रूप लेता है। इससे छोड़ी गई तरंगो के Area में जितने भी Device होते है जैसे फोन, लैपटॉप जो इंटरनेट चला सके, वह सभी इसका Signal पकड़ते है। डैस्कटॉप कंप्यूटर में In Built Wi -Fi adapter नहीं होता है। इसलिए हम इसे यूएसबी कोड के माध्य्म से adapter लगाकर WI -Fi का इस्तमाल कर सकते है।

Wi-Fi की विशेषताएं

Wi-Fi का बहुत अधिक उपयोग उसके विशेषताएँ के कारण हो रहा है. आइये उनके बारें में चर्चा करते है.

  • Efficiency
  • Speed
  • Cost
  • No Limit
  • Multiple Devices
  • Easy to Use

Efficiency

हम अपने मोबाइल में इंटरनेट का उपयोग करने के लिए Cellular नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जब आप चलते ट्रेन बस गाड़ी में Cellular नेटवर्क का उपयोग करते हैं तो बार-बार नेटवर्क कटते जाते हैं और जुड़ते जाते हैं। इससे मोबाइल की एनर्जी यानी की बैटरी जल्दी खत्म होती है।

लेकिन वाईफाई मे ऐसा नहीं होता क्योंकि वाईफाई इंटरनेट के लिए रेडियो वेव का इस्तेमाल करता है इसके लिए आपको राउटर की जरूरत होगी।

Speed

मोबाइल Network की तुलना में Wi-Fi नेटवर्क की Speed काफी ज्यादा होती है। उदाहरण के लिए, अगर आप Wi-Fi के साथ Live Streaming कर रहे हैं तो आपको 1mbps से 100mbps तक की Speed मिलती है, जबकि मोबाइल में सिर्फ Loading ही चलता रहता है।

Cost

मोबाइल Data के मुकाबले Wi-Fi Price बहुत कम होता है। कम कीमत की वजह से ही घर, Office के लिए लोग Wi-Fi कनेक्शन का उपयोग करते हैं। वरना मोबाइल Data को अगर Wi-Fi के जितना उपयोग किया जाए तो आपका bill 50 गुना ज्यादा होगा।

No Limit

मोबाइल डाटा की एक लिमिट होती है। जैसे कि पर डे 1GB, 1.5 GB आदि लेकिन वाईफाई नेटवर्क में कोई लिमिट नहीं होती। लगभग आपको 50GB से ज्यादा डाटा मिलता है। मतलब आप जितना चाहे उतना इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं ।

Multiple Devices

वाईफाई नेटवर्क में एक साथ अनेक डिवाइस को जोड़ सकते हैं । अनेक मोबाइल और कंप्यूटर को एक साथ वाईफाई में जोड़कर आप इंटरनेट आसानी से चला सकते हैं।

Easy to Use

वाईफाई का इस्तेमाल करना बहुत ही आसान होता है आप अपने डिवाइस में वाईफाई को ऑन कर लीजिए और उसमें पासवर्ड इंटर कर दीजिए फिर वाईफाई का आप उपयोग कर सकते हैं ।

Wi-Fi का उपयोग

आज के समय में वाईफाई का उपयोग लगभग सभी क्षेत्रों में किया जाता है। जैसे कि लैपटॉप, स्मार्टफोन, कंप्यूटर आदि डिवाइस को वाईफाई से कनेक्ट करके इंटरनेट चलाया जाता है।

भारत में रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट आदि सार्वजनिक सरकारी क्षेत्रों में वाईफाई का उपयोग बड़ी मात्रा में किया जाता है। शिक्षा का ऑनलाइन होने के कारण घर, स्कूल-कॉलेज आदि स्थानों पर वाईफाई की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। ऑफिस में वाईफाई का उपयोग सभी डिवाइस को आपस में कनेक्ट करने के लिए किया जाता है।

Wi-Fi Advantage

  • Wi-Fi को आप से Smartphone, Tablet, Laptop को आसानी से कनेक्ट कर सकते है।
  • सेल्युलर नेटवर्क की तुलना में Wi-Fi की Speed काफी तेज़ होती है।
  • Wi-Fi को इस्तेमाल करना बहुत आसान है आपको केवल Wi-Fi ऑन करना है और पासवर्ड enter करना है, वाईफाई connect हो जाएगा।
  • वाईफाई सेवा में हर रोज़ लगभग 50GB से ज्यादा data मिलता है।मतलब आप Unlimited भी कह सकते है जिससे आप जितना चाहे उतना data का Use कर सकते है।
  • पहले के समय में हर जगह वाईफाई मिलना मुश्किल था लेकिन आज के समय में ट्रेन, कॉफी शॉप, रेलवे स्टेशन, सुपर मार्केट हर जगह Wi-Fi सेवा उपलब्ध है।
  • आप अपने Wi-Fi router को दुनिया के किसी भी देश में चला सकते हैं। मतलब आप Wi-Fi router का इस्तेमाल कहीं भी कर सकते हैं।
  • मोबाइल नेटवर्क की तुलना में Wi-Fi की इंटरनेट Speed बहुत ज्यादा होती है, आप 1 Mbps से लेकर 100 Mbps तक का लाभ उठा सकते हैं।

Wi-Fi Disadvantage

  • Wi-Fi केबल connection के साथ तो बहुत अच्छी इंटरनेट की Speed प्रदान करता है। लेकिन hotspot Wi-Fi शहर लोकेशन पर अच्छी Speed नहीं मिलती है।
  • ये wireless होने की वजह से इसमें आपको फुल सिक्योरिटी देना मुश्किल है।
  • Mobile connection की तुलना में Wi-Fi नेटवर्क की Security बहुत कमजोर होती है, इसे आसानी से छोटा सा hacker access कर सकता है।
  • जब एक ही Wi-Fi नेटवर्क एक साथ बहुत से Device से connect हो जाता है तब इसका Speed धीमा हो जाता है |
  • Wi-Fi की Range ज्यादा नहीं होती है जिससे आप ज्यादा दूर जाने पर ये disconnect हो जाता है।
  • आप एक फिक्स्ड लोकेशन और Area मैं ही इसका उपयोग कर सकते हो। अगर आप दीवार के दूसरी तरफ उसका इस्तेमाल करोगे तो इसकी Speed बहुत कम हो जाती है।

Wi-Fi का आविष्कार

John O’ Sullivan ने वाईफाई का आविष्कार 1991 में किया था. John O’ Sullivan उस समय एक कंपनी में नौकरी करते थे जिसका नाम CSIRO था। John O’ Sullivan और उसके पूरी टीम ने मिलकर ही वाईफाई का आविष्कार किया था।

John O’ Sullivan ने उसमें कुछ इंपॉर्टेंट बदलाव करके वाईफाई की स्पीड को और अत्यधिक बढ़ा दिया और सिग्नल को और भी अधिक बेहतर बना दिया। इस कारण इसे वाईफाई नेटवर्क का अविष्कारक कहा जाता है।

Wi-Fi की रेंज

घर या offices में लगाए जाने वाले आम Wi-Fi router की रेंज लगभग 20 से 30 meter तक की होती है। इस Range का पूरा Output भी तब मिल पाता है.

wifi kya hai

जब Wi-Fi खुले हुवे Area में लगा हो। लेकिन घर या Office के भीतर हर प्रकार से छोटा- बड़ा सामान मौजूद होता है जैसे की कमरे की दीवारें, दरवाजे,फर्नीचर या दूसरे electronic उपकरण इत्यादि। तो यह सब Wi-Fi signal के रेंज को काफी प्रभावित करते हैं। जिससे Wi-Fi Signal मैं रुकावट होती है। उनकी Range कम हो जाती है.

Wi-Fi Router क्या हैं?

Wi-Fi Router एक “नेटवर्किंग डिवाइस” है जिसका इस्तेमाल दो या दो से अधिक computer network के बीच डाटा को transfer करने के लिए किया जाता है।

वाई-फ़ाई क्या है और कैसे काम करता है? (हिंदी नोट्स) - What is Wi-Fi in Hindi

दूसरे शब्दों में, “Wi-Fi router एक इंटरनेटवर्क device है जिसका प्रयोग computer नेटवर्कों के मध्य data को सेंड तथा रिसीव करने के लिए किया जाता है। Wi-Fi राउटर एक ऐसा नेटवर्क डिवाइस है इसका प्रयोग यूजर के द्वारा Internet को एक्सेस करने के लिए किया जाता है।

Wi-Fi का Full form क्या है?

Wi-Fi का पूरा नाम “Wireless Fidelity” होता है, जिसे हिंदी में वायरलेस फिडेलिटी कहा जाता है, जो रेडियो तरंगों की मदद से Network और Internet तक पहुंचने के लिए एक उपकरण होता है. और यह Wi-Fi एक्सेस प्वाइंट के आसपास mobile phone को वायरलेस Internet प्रदान करने का काम करता है.

Wi-Fi 6 क्या है?

Wi-Fi 6 अगली पीढ़ी का मानक है. Wi-Fi 6 को और ज्यादा इंप्रूव कर build किया गया है. Wi – Fi 6 को आज के Time की सबसे तेज Wi-Fi कहना गलत नहीं होगा.

अगर आप लोगों को Wi-Fi की नयी तकनीक Wi-Fi 6 विषय में जानकारी नहीं है तब आप लोगों को बता दूँ की wireless तकनीक की World में यह एक  बहुत बड़ा क्रांति लाने वाला है.

Wi-Fi की कीमत और बेस्ट कंपनी के Wi-Fi

अब हम जानते हैं वाईफाई राउटर की कीमत क्या वैसे देखा जाए तो एक अच्छे वाईफाई राउटर की कीमत 1500 से शुरू होकर 10,000 तक या फिर उससे भी अधिक तक जाती है यह उसके क्वालिटी पर निर्भर करता है नीचे मैं आपको बेस्ट  कंपनी के वाईफाई राउटर की तथा उसके प्राइस के बारे में भी जानकारी दे रहा हूं।

  • TP-Link Archer C6 Router: Price – 2499 (Approx.)
  • TP-Link TL-WR940N Router: Price – 1279 (Approx.)
  • TP-Link Archer C7 AC1750  Router: Price – 3909 (Approx.)
  • Tenda AC10 Router: Price – 2699 (Approx.)
  • TENDA AC15 AC1900 Router: Price – 4999 (Approx.)
  • TP-Link TL-MR3620: Price – 1299 (Approx.)
  • ASUS RT-AX88U AX6000 Router: Price – 27590 (Approx.)
  • NETGEAR Nighthawk AC1900 Router: Price – 27999 (Approx.)
  • D-Link DIR-615 Router: Price – 1099 (Approx.)
  • TP-Link TL-MR6400 Router: Price – 4499 (Approx.)

सबसे अच्छा Wi-Fi कौन सा है?

2.5 गीगाहर्ट्ज़ स्टैंडर्ड Wi-Fi router की तुलना में 5 गीगाहर्ट्ज़ स्टैंडर्ड Wi-Fi router नेटवर्क बेहतर हो जाता है, लेकिन इसकी cost भी ज्यादा होती है. यदि नेटवर्क व्यवधान मुख्य समस्या नहीं है, तो 2.5GHz Wi-Fi router चुनें.

FAQ

Wi-Fi 6 क्या है?

Wi-Fi 6 अगली पीढ़ी का मानक है. Wi-Fi 6 को और ज्यादा इंप्रूव कर build किया गया है. Wi – Fi 6 को आज के Time की सबसे तेज Wi-Fi कहना गलत नहीं होगा.

Wi-Fi का पूरा नाम क्या होता है?

Wi-Fi का पूरा नाम “Wireless Fidelity” होता है, जिसे हिंदी में वायरलेस फिडेलिटी कहा जाता है, जो रेडियो तरंगों की मदद से Network और Internet तक पहुंचने के लिए एक उपकरण होता है.

Wi-Fi की रेंज कितनी होती है?

घर या offices में लगाए जाने वाले आम Wi-Fi router की रेंज लगभग 20 से 30 meter तक की होती है। इस Range का पूरा Output भी तब मिल पाता है.

वाई-फाई के अविष्कारक कौन है?

John O’ Sullivan ने वाईफाई का आविष्कार 1991 में किया था. John O’ Sullivan उस समय एक कंपनी में नौकरी करते थे

वाईफाई कितने प्रकार का होता है?

वाईफाई 6 प्रकार के होते है जो निम्न लिखित है.
Wi-Fi 1: 802.11a
Wi-Fi 2: 802.11b
Wi-Fi 3: 802.11g

Wi-Fi 4: 802.11n
Wi-Fi 5: 802.11ac
Wi-Fi 6:802.11ax

आज आपने सिखा

इस आर्टिकल के माध्यम से मैंने वाई-फ़ाई क्या है और कैसे काम करता है? (हिंदी नोट्स) – What is Wi-Fi in Hindi से जुड़ी हर एक जानकारी को आपके साथ साझा करने का प्रयास किया हूं। और मुझे आशा है कि आपने वाईफाई नेटवर्क के बारे में अच्छे से जान लीया होगा। हम वाईफाई का उपयोग इंटरनेट को आपस में एक दूसरे कंप्यूटर में जोड़ने के लिए करते हैं।

अच्छी स्पीड के साथ इंटरनेट का यूज कर पाते हैं। वाईफाई को ऑन करना उसमे पासवर्ड लगाकर यूज करना काफी ही आसान होता है। आपको हमारे द्वारा लिखा गया यह आर्टिकल (What is Wi-Fi in Hindi) पसंद आया होगा तो इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया में शेयर करें ताकि दूसरे लोग भी इस इंफॉर्मेशन पा सके।

यदि यह पोस्ट (What is Wi-Fi in Hindi) आपको अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों को फेसबुक, Whatsapp और इन्स्ताग्राम इत्यादि में शेयर जरुर करें. इसी प्रकार के नए-नए टेक्नोलॉजी और बिजनेस स्टार्टअप की जानकारी के लिए आप मेरे YouTube चैनल computervidya और मेरा वेबसाइट nayabusiness.in में विजिट जरुर करें.

युपीएस क्या है? और कैसे काम करता है? (हिंदी नोट्स) – What is UPS in Hindi

What is UPS in Hindi

आपने computer के साथ एक आयताकार box को तो जरुर देखा होगा जिससे आप डेस्कटॉप में Device को ऑन और ऑफ करते होंगे. इस Device का नाम UPS है जो computer को आपातकालीन पावर सप्लाई देता है. लेकिन क्या आप जानते हैं UPS क्या है?, UPS का full form क्या है?, UPS कैसे work करता है?, UPS कितने प्रकार के होते हैं?, UPS के मुख्य पार्ट कौन से हैं? और UPS के फायदे, नुकसान क्या हैं.

अगर आप इन सब प्रश्नों का जवाब जानना चाहते हैं तो इस लेख को शुरू से अंत तक जरुर पड़ें, इसको पढने के बाद आपको UPS के बारे में सम्पूर्ण जानकारी मील जायेगी तो चलिए शुरू करते हैं।

युपीएस क्या है? (What is UPS in Hindi)

UPS का फुल फॉर्म “Uninterrupted Power Supply” है. UPS एक ऐसा electrical equipment है जो main power विफल होने पर लोड को आपातकालीन Power प्रदान करता है. UPS हमेशा लोड को निरंतर पावर सप्लाई करती रहती है चाहे main supply ऑफ हो या फिर ऑन.

UPS kya hai hindi

UPS Main पॉवर सप्लाई के absence में हमें पॉवर सप्लाई करता है जिससे हमारे डिवाइस को कोई भी issue न हो.UPS की सोर्स ऑफ एनर्जी होती हैं बैटरीज. 

जब Main सप्लाई On रहती है तो UPS की बैटरी चार्ज होती है और जब Main सप्लाई Off हो जाती है तब UPS कंप्यूटर को इमरजेंसी पावर सप्लाई करता है. कोई भी UPS कितने समय तक लोड को Main पॉवर सप्लाई की अनुपस्थिति में पावर प्रदान कर सकता है यह UPS की बैटरी Quality पर निर्भर होता है.

UPS की battery को बदला भी जा सकता है. बाजार में अलग–अलग साइज के UPS मौजूद हैं पर आमतौर पर UPS का आकार आयताकार होता है. UPS में Device को ON और off करने के लिए एक स्विच लगा होता है. UPS कंप्यूटर के लिए एक इंपोर्टेंट Part तो नहीं है लेकिन इसका Use करना हमेशा फायदेमंद रहता है.

युपीएस कैसे काम करता है।

UPS में सबसे पहले Main पॉवर सप्लाई AC को UPS में इनपुट कराया जाता है। यहाँ से एक Line UPS के रेक्टिफायर तक जाती है। जब AC रेक्टिफायर तक पहुंचती है तब रेक्टिफायर AC को DC में बदल देता है और उसे बैटरी में संचित कर लेती है।

वहीं दूसरी Line UPS के स्विच तक जाती है और स्विच से डिवाइस को सेंड कर दिया जाता है। जब तक Main पॉवर सप्लाई Fail नहीं होता है तब तक UPS से जुड़े डिवाइस को इसी Line से पॉवर सप्लाई किया जाता है।

लेकिन जैसे ही Main पॉवर सप्लाई थोड़ी देर के लिए बंद होती है। तब स्विच मार्ग को बदल देता है और बैटरी से पॉवर सप्लाई लेना शुरू कर देती है। जैसे ही UPS को Main पॉवर सप्लाई Fail का पता चलता है। तब सबसे पहले UPS के बैटरी में संचित DC को इन्वर्टर तक पहुंचाता है। जिसके बाद इन्वर्टर उस DC को AC में बदल देता है और डिवाइस के लिए भेज देता है। कुछ इस तरह UPS डिवाइस को निरंतर पॉवर सप्लाई करते रहता है।

युपीएस के कार्य

  • UPS कंप्यूटर को सुरक्षा प्रदान करता है। जैसे कि हम कंप्यूटर चला रहे हैं और अचानक से बिजली चली जाती है तो कंप्यूटर को नुकसान पहुंचता है।
  • शॉर्ट सर्किट होने से हमारे कंप्यूटर सिस्टम को UPS बचाता है
  • यूपीएस ही बिजली चले जाने पर कंप्यूटर को बिजली प्रदान करता है
  • UPSबिजली की कमी को पूरी करता हैं। साथी कंप्यूटर को बिजली ठीक से पहुंच रही है कि नहीं इसकी Monitoring भी करता है।
  • UPS कंप्यूटर user’s को कंप्यूटर को सही ढंग से switch करने और कंप्यूटर को बैटरी देने में सक्षम है.
  • जब लंबी बिजली outage होती है तब devices को सही तरह से off करने का काम भी UPS का ही होता है।
  • UPS का पहला काम electronic उपकरणों जैसे PC, Servers, और Audio device, video device को main पॉवर cut हो जाने की स्थिति में बैटरी बैकअप प्रदान करना है.
  • Electronic उपकरणों को कम या ज्यादा वोल्टेज से भी प्रोटेक्ट करता है.

UPS के Advantage

  • इसका use आपात स्थिति में Electricity की पूर्ति के लिए किया जाता है.
  • वोल्टेज को regulate करता है यह ओवर वोल्टेज  की Problem को भी दूर करता है। UPS पावर फेलियर से भी बचाता है।
  • पावर outage की स्थिति में सभी computer और electronic systems को व्यवस्थित करता है।
  • अचानक computer के off हो जाने पर data loss हो जाता है लेकिन अगर कंप्यूटर में UPS कनेक्ट है तो Data सुरक्षित रहता है।

UPS के Disadvantage

  • UPS बैटरी ज्यादा देर तक नहीं चलती है आवश्यकता होने पर इसे change करना पड़ता है।
  • बड़े corporate कार्यालय में UPS बिजली की आपूर्ति की व्यवस्था के लिए एक बड़ा निर्देशक की आवश्यक होती है।
  • UPS का उपयोग न करने पर आपको पावर फेल्योर का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की बिजली चले जाने पर आप अपने computer पर जो भी काम कर रहे हैं उसे से सेव नहीं कर सकेंगे । जिसके कारण आपका  डाटा Loss  हो सकता है।
  • इसके साथ ही आपको ओवर वोल्टेज  की भी समस्या का सामना करना पड़ सकता है

युपीएस के भाग

  • Rectifier
  • Switch
  • Battery,
  • inverter

Rectifier.

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि रेक्टिफायर का मुख्‍य कार्य AC को DC में convert करना हैं। इसे बैटरी charge करने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता हैं। यह inverter circuit में फिट होता हैं। इसका आउटपूट, Load की आवश्यकता पर निर्भर करता है। रेक्टिफायर एक electronic device होती है।

Battery.

बैटरी Energy स्‍टोर करती हैं। यह main power फेल होने पर भविष्‍य मे किया जाता हैं। Battery एक इलेक्ट्रो केमिकल सेल होती है और यह Electricity के लिए charge की जाती है। इलेक्ट्रिक power supply करते समय बैटरी का पॉजिटिव टर्मिनल cathode होता है और नेगेटिव टर्मिनल anode होता है।

ups battery in hindi

Inverter.

इनवर्टर भी एक electrical device होती है। इसका मुख्य कार्य rectifier के कार्य से बिल्कुल उल्टा होता है। inverter DC करंट को AC करंट में परिवर्तित करता है। इसके साथ ही यह लो वोल्टेज DC करंट को high voltage AC करंट में convert करता है।

Static Switch or Transfer Switch.

पावर को transfer करने के लिए एक static switch या transfer switch की आवश्यकता होती है। इसका कार्य बहुत Fast होता हैं। आम तौर पर 10 mile second के अंदर switching करने वाले switch का उपयोग किया जाता है।

युपीएस की जरूरत क्यों होती हैं?

electronics डिवाइस और कंप्यूटर में सेसेटिव electronic उपकरण होते है जैसे डिजिटल कंट्रोलर, पर्सनल कंप्‍यूटर, डेटा प्रोसेसर इत्यादि। इस तरह के डिवाइसेस को लगातार बिजली कि आवश्यकता होती हैं क्योंकि यह डिवाइसेस मेमोरी और प्रोसेसर के साथ डेटा को handle करते हैं।

ये डिवाइस power supply के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप shut down करने के बजाय सीधे अपने personal computer को बंद करते हैं तो आप अपना data खो देंगे।

आपके कंप्यूटर कि Operating System करप्‍ट हो सकती है। इसलिए बड़े पैमाने पर उद्योगों में बड़े data कि सुरक्षा के लिए इन devices को लगातार power supply प्रदान करना आवश्यक है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए UPS का Use किया जाता है।

युपीएस के प्रकार

  • Standby
  • Line Interactive
  • Standby online hybrid
  • Standby-Ferro
  • Double Conversion On-Line
  • Delta Conversion On-Line

Standby UPS

Standby UPS का तब Use किया जाता है। जब पावर सप्लाई बंद हो जाता है। तब यह पॉवर Off होने पर उस Consumed पॉवर को कंप्यूटर में सप्लाई करता है। जिसमे Computer का data सुरक्षित रहता है। Standby UPS सबसे कॉमन होती है जिसे की पर्सनल कंप्यूटर में इस्तमाल किया जाता है.

standby ups in hindi

इस UPS में ट्रांसफर स्विच लगा होता है। ये UPS केवल तभी स्टार्ट होगा जब की पावर fail होता है, इसलिए इसका नाम है Standby.  Standby UPS उस समय तक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को बैटरी पावर में स्विच नही करते है जब तक कि ये किसी प्रोब्लम को पता न कर ले.

Line Interactive UPS

Line-Interactive UPS का डिजाईन standby UPS की तरह है। यह कार्य standby UPS के जैसा ही करता है. Line-Interactive UPS छोटे Business Web, और departmental server’s में उपयोग होने वाला UPS है. इस प्रकार के UPS में बैटरी से AC पॉवर कन्वर्टर हमेशा UPS के आउटपुट से कनेक्ट होता है.

Line Interactive UPS in hindi

जब इनपुट AC सामान्य रहता है तो ऑपरेटिंग Inverter बैटरी को चार्जिंग प्रदान करता है. और जब अचानक बिजली चली जाती है तो यह system को पावर सप्लाई करता है.

जब इनपुट की AC पॉवर नॉर्मल होती है तब ये इन्वर्टर को reverse ऑर्डर में डाल देता है। जिससे की वो चार्ज हो रहा होता है. यह डिजाइन एडिशनल फिल्टरिंग प्रदान करती हैं और standby ups की तुलना में कम स्विचिंग transients पैदा करती है इसके अलावा यह वोल्टेज रेगुलेशन भी ठीक तरह से करते हैं।

Standby On-Line Hybrid

Standby Online Hybrid को on-line ups भी कहा जाता हैं। इस ups का इस्तेमाल 10 kilovolt-ampere के अंतराल में किया जाता है। इन UPS में बैटरी के साथ Standby कन्वर्टर स्विच on किया जाता है.

स्टैंडबाई ऑनलाइन हाइब्रिड UPS में बैटरी को charge करने वाला चार्जर लाइन इंटरएक्टिव UPS की तुलना में बहुत छोटा होता है।

Standby On-Line Hybrid ups in hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि इसमें बैटरी चार्जर भी बहुत छोटी होती है बिल्कुल स्टैंडबाई यूपीएस की तरह होती है। इस UPS का उपयोग कभी कभी एक एडिशनल ट्रांसफर स्विच के साथ भी किया जाता है जिससे की कोई भी फंक्शन या ओवरलोड से इसे bypass किया जा सके।

The Standby-Ferry UPS

एक वक्त था जब Standby-Ferr UPS का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता था। इसकी रेंज लगभग 3-15 kilovolt-ampere के अंतर्गत थीं। इसकी मुख्य पावर path AC इनपुट से शुरू कर, ट्रांसफर स्विच से लेकर, ट्रांसफार्मर से लेकर, और  output तक होती है.

The Standby-Ferry UPS in hindi

Standby-Ferry का डिजाइन इनवर्टर स्टैंडबाई मॉड में होता है। यह तब पावरफुल होता है जब इनपुट पावर फेल हो जाता है और ट्रांसफर स्विच खुलता है। इस ट्रांसफार्मर की स्पेशल”Ferro-resonant” कैपेबिलिटी होती है, जो की इसे लिमिटेड वोल्टेज रेगुलेशन प्रदान करती है।

भले ही ये एक standby UPS डिजाइन है, फिर भी ये Standby-Ferr बहुत ही ज्यादा गर्मी उत्पन्न करता है इस UPS की डिजाइन भी बाकि के तुलना में बहुत वजनदार और बड़ी होती है. इन UPS का अब और उपयोग न होने का कारण यह प्रचलन से बाहर हो गए हैं ।

The Double Conversion On-Line UPS

यह बहुत ही सिंपल टाइप के यूपीएस होते हैं जो स्टैंडबाई की तरह होते हैं। इसमें मुख्य पावर पावर इनवर्टर होती हैं। यह इनपुट AC के फेल होने से इसमें ट्रांसफर स्विच एक्टिवेट नहीं होती है क्योंकि यहां इनपुट AC प्रायमरी सोर्स नहीं है बल्कि यह बैकअप सोर्स है।

The Double Conversion On-Line UPS

लेकिन ये on-line मोड ऑफ ऑपरेशन तभी ट्रांसफर time दिखाती है जब पाॅवर प्राइमरी बैटरी इन्वर्टर पावर पाथ से फेल हो जाता है. ये तब होता है जब कोई भी ब्लॉक इस पॉवर path में फेल हो जाता है. यहाँ पर इनवर्टर पॉवर भी कुछ समय के लिए छोड़ देते है, जिससे एक ट्रांसफर होता है.

ये ट्रांसफर तब भी हो सकता है अगर इन्वर्टर में आंतरिक नियंत्रण की समस्याएं पैदा हो. यह UPS भी ट्रांसफर टाइम दिखाती हैं लेकिन अलग-अलग कंडीशन के हिसाब से या standby यूपीएस से बिल्कुल अलग है.

The Delta Conversion On-Line UPS

Delta Conversion On-Line UPS की design, एक नयी टेक्नोलोजी है। इसकी रेंज लगभग 5 KVA से 1 MW के अंतराल में होती हैं। इसका उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि ये Double Conversion On-Line design के ड्रॉबैक को दूर कर सके।

What is UPS in Hindi

Delta Conversion On-Line UPS में भी हमेशा एक इन्वर्टर होता है जो लोड वोल्टेज को सप्लाई करता है. लेकिन यहाँ पर एडिशनल Delta कन्वर्ट इन्वर्टर आउटपुट को पावर देता है. लेकिन AC फेलियर होने के कारण यह डिजाइन डबल कन्वर्सेशन ऑनलाइन के जैसे ही व्यवहार करता है।

इस यूपीएस में मुख्य रूप से एनर्जी एफिशिएंसी में सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है डेल्टा कन्वर्जन टेक्नोलॉजी का मुख्य उद्देश्य एनर्जी को सेव करके रखने का होता है। ऐसा करने के लिए ये केवल शूरू और लास्ट पॉइंट्स के delta में ही energy Store करती हैं. और power को इनपुट से आउटपुट तक मूव करती है.

युपीएस की कीमत

मार्केट में Ups की कीमत लगभग 2000 से सुरू होती है। क्वालिटी के अनुसार 6000 से 10,000 इससे और अधिक जाती है। UPS होने की वजह से बिजली जाने पर ups से कंप्यूटर को चलाया जा सकता है क्योंकि यूपीएस में बैटरी होती है। तो जितना अधिक महंगा यूपीएस होगा उसकी बैटरी उतनी ही अच्छी और लॉन्ग टाइम चलने वाली होगी।

बेस्ट ups के लिस्ट नीचे दिया गया।

  • Foxin FPS-755
  • Zebronics Zeb-U725
  • APC Backups BX600C-IN
  • Ball Nirantar UPS 622 [cheap ups for computer]
  • V Guard UPS Sesto 600 [best ups for laptop]
  • Luminous Pro 600

यूपीएस और इन्वर्टर में अंतर

  • UPS बिजली कटौती के मामले मे बिजली देती है और ज्‍यादातर Inverter बैटरी और inverter circuit होते है जो DC को बिजली मे convert करता है।
  • UPS desktop computer के बिजली बैकअप लेने के लिए Use किया जाता है। ज्‍यादातर inverter का उपयोग घरों में बिजली backup लेने के लिए किया जाता है।
  • UPS का मुख्य कार्य बिजली को Store करना है जबकि इन्वर्टर AC power को dc power में convert करता है। inverter की तुलना में UPS अधिक महंगा है।

FAQ

UPS का Full form क्या है?

what is ups in hindi

UPS का पूरा नाम “Uninterrupted Power Supply” होता है. इसका ये मतलब है की हम UPS का इस्तमाल एक वैकल्पिक बिजली रूप में करते हैं। यह निरंतर हमें फ्री पावर सप्लाई प्रदान करती है.

यूपीएस कितने प्रकार के होते हैं?

UPS के 6 प्रकार होते है जो निम्न लिखित है.
1. Standby
2. Line Interactive
3. Standby online hybrid
4. Standby-Ferro
5. Double Conversion On-Line
6. Delta Conversion On-Line

यूपीएस और इनवर्टर में क्या अंतर है?

युपीएस और इन्वर्टर एक ही तरह के काम करते है पर युपीएस AC को DC में कन्वर्ट करके सप्लाई करता है और इन्वर्टर DC को AC में कन्वर्ट करता है.

आज आपने क्या सिखा

आज इस आर्टिकल UPS क्या है और कैसे काम करता है? – हिंदी में (What is UPS in Hindi) में मैंने आपको यूपीएस के बारे में समझाने का प्रयास किया है। मुझे आशा है कि आप लोग समझ आया होगा। अगर आपको यूपीएस से संबंधित और भी कोई जानकारी चाहिए तो आप कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। अगर यह आर्टिकल (What is UPS in Hindi) आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तों के साथ और सोशल मीडिया में शेयर जरूर करें।

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यूऍसबी क्या है और कितने प्रकार के है? (हिन्दी नोट्स) – What is USB in Hindi

What is USB in Hindi

यदि आप कंप्यूटर या टेक्नोलॉजी से जुड़े है तो आपने कभी न कभी USB (What is USB in Hindi) का नाम जरुर सुना होगा. इसका कारण यह है USB वर्तमान समय में सबसे अधिक उपयोग होने वाला डिवाइस बन गया है. USB डिवाइस प्लग & प्ले होते है जिनके चलते इसका उपयोग बहुत अधिक हो रहा है. अतः आज के इस लेख में हम आपको USB (What is USB in Hindi) के बारे में विस्तार से बतायेगे. तो दोस्तों आइये देखते है.

यूऍसबी (What is USB in Hindi)

USB का पूरा नाम “Universal Serial Bus” है. यह एक Connection हैं. जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर डिवाइस जैसे पेन ड्राइव, कीबोर्ड, माउस इत्यादि को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए किया जाता है.

USB डिवाइस प्लग & प्ले डिवाइस होते है अर्थात इनको कंप्यूटर में कनेक्ट करने पर किसी प्रकार के सॉफ्टवेर को इनस्टॉल करने की जरुरत नहीं होती है. उदाहरण के लिए जिस प्रकार पेन ड्राइव को कंप्यूटर में कनेक्ट करके तुरंत उपयोग किया जाता है.

What is USB in Hindi

युएसबी के हेल्प से कंप्यूटर और डिवाइस के बीच कनेक्शन स्थापित किया जाता है. विभिन्न डिवाइस के data को transfer करने के लिए USB का उपयोग करते है.

USB cable की मदद से computer को दुसरे device जैसे की printer, monitor, scanner, mouse और keyboard के साथ जोड़ा जाता है. ये USB interface का एक मुख्य भाग है जिसमें की बहुत से अलग अलग प्रकार के ports, cables और connectors होते हैं.

यूऍसबी पोर्ट क्या हैं? (USB port in Hindi)

USB Port उस जगह को कहा जाता हैं जहा से किसी भी डिवाइस को USB से जोड़ा या connect किया जाता हैं. जैसे की हमारे फ़ोन में चार्जिंग केबल insert करने के लिए एक जगह दी जाती है वह एक USB port होता हैं.

 usb port in hindi

उसी प्रकार सभी devices में USB Port दिया हुआ होता हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उसे किसी और डिवाइस से या प्लग से कनेक्ट किया जा सके.

USB device किसे कहते हैं?

वे सभी डिवाइस जिसमे कनेक्शन करने के लिए “USB इंटरफ़ेस” दिया जाता है उन सभी डिवाइस को USB डिवाइस कहते है. दुसरे शब्दों में USB device ऐसे डिवाइस होते है जिन्हें USB कनेक्शन का use करके connect किया जाता हैं.

ये USB डिवाइस बहुत ही important उपकरण है आज के समय में उपयोग किए जाने वाले, आज के समय मे अलग अलग प्रकार के बहुत सारे USB device उपयोग किए जाते हैं.

युएसबी डिवाइस के उदाहरण

usb device examples hindi
  • Printer
  • Mouse
  • Keyboard
  • Joystick
  • Microphone
  • Digital camera
  • Web Camera
  • Pen Drive
  • Cardreader

युएसबी पोर्ट के प्रकार (Types)

USB केबल भिन्न भिन्न प्रकार के होते है जिनका उपयोग करके डाटा शेयर किया जाता है. आइए देखते हैं भिन्न भिन्न प्रकार के USB connector के टाइप्स कौन कौन से हैं।

usb port types in hindi

USB Type A

Type A USB commonly use किया जाने वाला USB कनेक्टर है. जो आपको सामान्यतः हर जगह देखने को मिलता हैं. यहां तक हम अपने phone को चार्ज करने के लिए जिस cable का use करते हैं. उसका एक सिरा भी USB type A होता हैं। ज्यादातर इस type A USB का use laptop, computer, mobile charger आदि में देखने को मिलता हैं।

Type A mini

आजकल यह cable बहुत ही कम देखने को मिलता है, फिर भी कुछ जगह पर इसका उपयोग किया जाता हैं।

Type A micro

Type A micro भी अब करीब करीब लुप्त होगया हैं, बहुत कम ही देखने को मिलता हैं।

USB Type B

Type A micro भी अब करीब करीब लुप्त हो गया हैं, बहुत कम ही देखने को मिलता हैं।

USB type B ज्यादातर प्रिंटर में देखने को मिलता हैं, यह प्रिंटर में उपयोग किया जाता हैं। यह computer और laptop में भी use किया जाता हैं लेकिन इसका उपयोग उतना अधिक नहीं होता जितना USB type A ka होता हैं। यह आकार में छोटा होता हैं और वर्गाकार होता हैं।

Type B mini

Type B mini ज्यादातर पुराने फोन में use किया जाता था। आजकल बहुत कम ही उपयोग किया जाता हैं,इसलिए ये बहुत कम ही देखने को मिलता हैं।

Type B micro

आजकल ये बहुत ज्यादा उपयोग किया जाता हैं, आज जो नई नई technique उपयोग किए जाते हैं उसमें type B micro ही use किया जाता हैं जैसे :- smartphone, camera, power bank, smart watch etc. ये एक बहुत ही पॉपुलर कनेक्टर हैं जो काफी समय से उपयोग किया जा रहा हैं। पर अब type C आ गया है पर फिर भी type B micro बहुत सारे जगह पर उपयोग किया जा रहा हैं।

Type C

ये सबसे लेटेस्ट type का USB कनेक्टर हैं जो अभी हर जगह पर देखने को मिलता हैं,जो 2013 में लॉन्च हुआ हैं। यह एक reversible कनेक्टर हैं, यानि की इसे उल्टा और सीधा दोनो तरफ से उपयोग किया जा सकता हैं। यह USB का future है यानि की future में सभी device में type C port ही देखने को मिलेगा, इसकी शुरुआत अभी से हो चुकी हैं।

Lightning Connector

ये apple का खुद का connector है, इसे 2013 में लॉन्च किया गया था।जो apple के product में ही देखने मिलता हैं, iPhone, iPads, iPod आदि में यहीं कनेक्टर लगा होता हैं।ये USB कनेक्टर नहीं हैं, इसका USB से कोई लेना देना नहीं हैं। ये apple का अपना स्टैंडर्ड होता हैं।

USB का उपयोग क्यों करते हैं?

USB का उपयोग किसी एक device को किसीदुसरे device से जोड़ने के लिए करते हैं। तथा USB cable का उपयोग करके किसी भी डिवाइस में ऐक्सेस कर सकते है, डाटा टांसफर कर सकते है, एक दुसरे को आपस में जोड़कर।

USB के वर्जन?

USB के उपयोग के आधार पर उसके version को लाया गया जो निम्न है-

USB 1.0 – ये USB का पहला version था। जिसे 1996 में लॉन्च किया गया था, जिसकी स्पीड 1.5 maps थी। जो आज के समय के हिसाब से बहुत कम स्पीड है पर उस समय के हिसाब से एक बहुत अच्छी स्पीड थी। इस version का उपयोग बहुत अधिक किया गया।

USB 1.1 – ये USB का दूसरा version था जो की 1998 में लॉन्च किया गया था। इस USB में डाटा ट्रांसफर की speed 12Mbps थी जो उस समय के लिए पर्याप्त स्पीड थी।

USB 2.0 – इसे 2000 में लॉन्च किया गया, जैसे जैसे टाक्नोलॉजी का विकास हुआ वैसे वैसे हाई कैपेसिटी के साथ नए नए वर्जन आने लगे । इसकी speed 480mbps थी जो उस समय के हिसाब से बहुत अधिक थी। इसलिए इसका नाम हाई स्पीड रखा गया और यह बहुत ही लोकप्रिय हुआ।

USB 3.0 – इसे 2008 में लॉन्च किया गया जो की सीधे 8 साल बाद अपडेट किया गया। इसकी speed 5 gaps थी । ये अभी तक का सबसे एडवांस version था।

USB 3.1 – 2013 में USB 3.1 को रिलीज़ किया गया जो कि 10 Gaps की स्पीड से डेटा ट्रान्सफर कर सकता था, इसलिए इसे Superspeed Plus नाम दिया गया. इसके साथ ही एक USB कनेक्टर Type C को भी रिलीज़ किया गया, इसे superspeed+ के नाम से जाना जाता था। इसके साथ एक कनेक्टर भी लॉन्च किया गया था , जो की अब बहुत ही पॉपुलर है जिसे USB type C कहते है।

USB 3.2 – 2017 में USB का एक और नया संस्करण लांच किया गया जिसे USB 3.2 नाम दिया गया. इसकी स्पीड 20 Gaps थी यानि पिछले संस्करण के दुगना, पर इसे भी superspeed + के नाम से जाना जाता था।

USB 4.0 – साल 2019 में USB 4.0 को रिलीज़ किया गया, यह USB का अभी तक सबसे नवीनतम और फ़ास्ट संस्करण है जिसकी स्पीड 40 Gaps है, इसमें Thunderbolt का सपोर्ट भी है, इसलिए इसे superspeed+ and thunderbolt के नाम से जाना जाता था।

USB के Advantage

  • Multiple devices के लिए single interface: USB के versatile nature के वजह से ये अलग अलग devices के साथ में connect होने में आने वाली complexity को दूर करता है. बड़ी ही आसानी से ये दुसरे peripherals के साथ connect हो जाता है।
  • Expand करने में आसानी होना: आमतोर से personal computers (Motherboards) में 3 से 4 USB ports होते हैं. और अगर भविस्य में अधिक USB ports की जरुरत भी पड़े तो USB hubs के इस्तमाल से हम external ports add कर सकते हैं।
  • USB के सहायता से हम स्केनर और प्रिंटर को भी कनेक्ट कर सकते हैं और इसकी सहायता से हमें कुछ भी स्कैन करना हो या प्रिंट करना हो तो बड़ी आसानी से कर सकते हैं।
  • USB की कीमत भी बहुत कम होती है।
  • USB अधिक बिजली की खपत नहीं करते हैं।

USB के Disadvantages

  • USB में ब्राडकास्टिंग Feature नहीं होता है, इसके द्वारा केवल Peripheral और होस्ट के बीच केवल व्यक्तिगत मैसेज का कम्युनिकेशन किया जाता है।
  • Peer to peer communication: USB standard के अनुसार, कनेक्शन मेजबान और पेरीफेरल के बीच होता है। दो होस्ट एक दूसरे से सीधे कनेक्ट नहीं हो सकते हैं। यही हाल पेरीफेरल का है। इसी तरह, फायरवायर जैसे इंटरफेस पेरीफेरल कम्युनिकेशन को पेरीफेरल प्रदान करते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए, यूएसबी ने OTG (ऑन द गो) शब्द पेश किया। OTG डिवाइस आमतौर पर एक पेरीफेरल के रूप में कार्य करता है, लेकिन यह जरूरत पड़ने पर कुछ छोटी क्षमता वाले होस्‍ट के रूप में भी कार्य कर सकता है।
  • Distance का न होना: USB standards के हिसाब से connecting cable ज्यादा से ज्यादा 5 meters तक ही लम्बी हो सकती है, इसके बाद USB hubs का इस्तमाल होता है connectivity को expand करने के लिए।

कंप्यूटर पोर्ट क्या हैं? (computer Port)

Computer Port वे पोर्ट होते हैं जिनकी मदद से computer से किसी भी device को कनेक्ट किया जाता है, जैसे computer के पीछे पोर्ट दिए होते है जिससे हम USB cable के माध्यम से उसे किसी भी डिवाइस से जोड़ते है, वैसे ही CPU में भी बहुत सारे पोर्ट होते हैं जिसकी मदद से हम कीबोर्ड, माउस और मॉनिटर को CPU से connect करते हैं।

FAQ

USB का पूरा नाम क्या है?

यूऍसबी क्या है और कितने प्रकार के है? (हिन्दी नोट्स) - What is USB in Hindi

USB का पूरा नाम “Universal Serial Bus” है यह प्लग एंड प्ले को सपोर्ट करता है. यु एस बी वर्तमान में सबसे अधिक उपयोग होने वाला कनेक्शन इंटरफ़ेस है.

सुपर यूएसबी क्या है?

यह युएसबी का सबसे एडवांस वर्शन है इसमें USB के पिछले वर्शन की अपेक्षा बहुत अधिक स्पीड होते है. सुपर युएसबी के द्वारा कंप्यूटर और बाहरी होस्ट में डाटा बहुत अधिक स्पीड से ट्रान्सफर हो जाता है.

USB का अविष्कार किसने किया?

USB का अविष्कार अजय भट्ट ने 1996 में किया था।

यूएसबी कितने प्रकार के होते हैं?

यूएसबी मुख्य रूप से 3 प्रकार के होते है जिसमे USB Type A, USB Type B और USB Type C शामिल है. इनके अलावा इनके विभिन्न सब केटेगरी भी है.

USB का full form क्या है?

USB का full form है “universal serial Bus“.

USB का latest version क्या हैं?

USB का लेटेस्ट वर्जन USB 4.0 हैं।

Plug and play डिवाइस क्या है?

Plug and Play डिवाइस का अर्थ होता हैं की किसी एक डिवाइस को दुसरे से जोड़ा जा सकता हैं जिसे PnP भी कहते हैं।

यूएसबी कैसे काम करता है?

USB का फुल फॉर्म “Universal Serial Bus” है यह एक कनेक्शन इंटरफेस है इसके माध्यम से डिवाइस के मध्य डाटा ट्रान्सफर किया जाता है. यह प्लग & प्ले डिवाइस है जिसमे 127 से भी अधिक डिवाइस कनेक्ट होते है.

यूएसबीएस किससे बने होते हैं?

युएसबी को बनाने के लिए हार्ड-प्लास्टिक कोटिंग का उपयोग किया जाता है. इसके अलावा इन्हें लकड़ी या धातु के द्वारा भी बनाते है. इसमें लाइटिंग के लिए LED लाइट का उपयोग करते है.

आज आपने क्या सिखा

मैं उम्मीद करता हु आज का यह लेख यूऍसबी क्या है और कितने प्रकार के है? (हिन्दी नोट्स) – What is USB in Hindi आपको अच्छे से समझ जरुर आया होगा. यदि आपको आज के इस लेख (What is USB in Hindi) में कोई सवाल या सुझाव है तो आप इस लेख के अंत में हमें कमेंट जरुर करें.

यदि लेख (What is USB in Hindi) आपको अच्छा लगा हो तो आप अपने दोस्तों को फेसबुक और Whatsapp में शेयर जरुर करें. इसी प्रकार के नए नए टेक्नोलॉजी की जानकारी और बिजनेस स्टार्टअप के लिए आप मेरे YouTube चैनल computervidya और मेरा वेबसाइट nayabusiness.in में विजिट जरुर करें.

SMPS क्या है? इसके कार्य और प्रकार – हिन्दी नोट्स (What is SMPS in Hindi)

What is smps in hindi

इस लेख में आप जानेगें SMPS क्या है? जैसा कि हम जानते है पावर सप्लाई सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बिना किसी भी system को चालू नही किया जा सकता है।

लेकिन एक बात यहाँ समझने वाली है कि सभी electronic उपकरणों को समान वोल्टेज में इलेक्ट्रिक power की जरूरत नही होती है। अगर आप कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट में हाई वोल्टेज power supply देंगे तो उसके खराब होने के चांस ज्यादा है। इन्ही नुकसानों से बचने के लिए SMPS का इस्तेमाल किया जाता है, ये एक प्रकार की इलेक्ट्रिकल device है. इसका उपयोग अधिकतर PC, battery, mobile, charger, vehicles और TV में बिजली आपूर्ति के लिए किया जाता है। इस Post में आपको SMPS के बारे में पूरी जानकारी पढ़ने को मिलेगी जैसे SMPS क्या होता है और इसका पूरा नाम क्या है, कैसे काम करता है?, इसको अच्छे से जानते है.

SMPS क्या है? (What is SMPS in Hindi)

SMPS कंप्यूटर का एक हार्डवेयर होता है. जो कि एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट है. SMPS कंप्यूटर के अलग–अलग हार्डवेयर उपकरणों के लिए बिजली को प्रदान करता है. इसका मुख्य कार्य इलेक्ट्रिक बोर्ड से आने वाले AC करेंट (AlterNet Current) को DC करेंट (Direct Current) में बदलना है.

What is SMPS in Hindi

कंप्यूटर के अन्दर में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होते है जिसके अन्दर अनेक छोटे नाजुक पार्ट होते हैं. जिन्हें काम करने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है. अगर इस वोल्टेज को डायरेक्ट कंप्यूटर के पार्ट को देंगे तो वे जल जायेंगे. इसलिए बिजली की सप्तोलाई के लिए कंप्यूटर में SMPS का उपयोग होता है जो कंप्यूटर के अन्दर devices को आवश्यकतानुसार पावर सप्लाई करता है. SMPS AC करेंट को DC में परिवर्तित करके पावर सप्लाई करता है.

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो  “एसएमपीएस” एक प्रकार की बिजली आपूर्ति इकाई है, जो स्विचिंग उपकरणों का उपयोग करके अनियमित AC या DC वोल्टेज को विनियमित DC में परिवर्तित करता है।

SMPS बिजली की एक फॉर्म को दूसरे फॉर्म में बदलने के लिए स्विचिंग रेगुलेटर का उपयोग करता है। उदाहरण के लिए हमारे घरों में जो बिजली आती है, वो एक अल्टरनेटिंग करंट (AC) है। कंप्यूटर जैसे संवेदनशील उपकरण Stable 3 Welfare विद्युत आपूर्ति की आवश्यकता होती है। इसलिए pc के विभिन्न घटकों को बिजली प्रदान करने के लिए एसएमपीएस का उपयोग किया जाता है, जो AC को स्थिर ऊर्जा में बदल देता है। इसे हम डायरेक्ट करंट (DC) कहते हैं।

what is smps in hindi

SMPS Switching Mode Power Supply को भी कहा जाता है। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में डायोड और MOSFETS जैसे इंडक्टर्स, कैपेसिटर और सेमीकंडक्टर डिवाइस का संयोजन शामिल है।

कंप्यूटर में SMPS एक कंप्यूटर हार्डवेयर होता है जो कंप्यूटर केस के अंदर पीछे की तरह फिट हो जाता है। अगर आप कंप्यूटर खोलेंगे तो आपको बैकसाइड में एक टिन का डब्बा दिखाई देगा। एक कंप्यूटर इसका काम अलग-अलग हिस्सों को बिजली देना होता है, जैसे रैम और मदरबोर्ड का उपयोग करने के लिए उपयुक्त बिजली देना होता है। हमारे लगभग सभी घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बिजली की आपूर्ति के लिए SMPS का उपयोग होता है।

SMPS कैसे काम करता है?

आप सभी को पता ही होगा की कंप्यूटर DC (direct current) में काम करता है. जबकि घर में चलने वाले इलेक्ट्रोनिक डिवाइस जैसे टेलीविज़न, लाइट, फैन सभी AC (Alternat Current) में चलता है. अतः घर के इलेक्ट्रिसिटी में कंप्यूटर को चलाने के लिए एक पॉवर कोवेर्टर की जरुरत होती है. जिस काम को SMPS करता है.

SMPS इलेक्ट्रिक पावर को AC से DC में बदलने के लिए एक पावर रेगुलेटर का उपयोग करता है. यह विद्युत शक्ति के एक स्रोत से करंट और voltage की विशेषताओं में परिवर्तन करके Load में स्थानांतरित करता है। SMPS हमेशा Input विविधताओं के बावजूद लोड को एक अच्छी विनियमित Power प्रदान करता है.

smps work in hindi

SMPS के पास एक transistor होता है जो ऊर्जा waste को कम करने के लिए 50 हर्ट्ज और 1 MHz के बीच आम तौर पर बहुत तेजी से खुद को switch करता रहता है। SMPS के केबल से जो Current कंप्यूटर में चला जाता है, तो सबसे पहले Current एसएमपीएस के अंदर छोटे डिवाइस मौजूद होते हैं.

जो एसी Current फिल्टर की प्रक्रिया के दौरान तटस्थ और phase के बीच में एनटीसी, फ्यूज के दौरान एसी Current फिल्टर के पास जाता है, लाइन फिल्टर, puff  कैपेसिटर का उपयोग होता है, इस प्रक्रिया से जो आउटपुट तैयार होता है उसे फिर रेक्टिफायर और फिल्टर दिया जाता है. जो कि इस आउटपुट को एसी से डीसी में कन्वर्ट करता है। SMPS में मौजूद रेक्टिफायर और फिल्टर दो कैपेसिटर की मदद से एसी करंट को स्मूथ डीसी में कन्वर्ट करता है.

इस प्रक्रिया से जो आउटपुट तैयार होता है वो प्योर डीसी होता है और आउटपुट तैयार होने के बाद इसे स्विचिंग ट्रांजिस्टर दिया जाता है यहां पर  हम दो NPN ट्रांजिस्टर का उपयोग करते हैं जो स्विचिंग साइकिल की मदद से फिर से एसी आउटपुट तैयार करता है फिर इस तैयार किए गए आउटपुट को हम SM ट्रांसफॉर्मर नाम की प्रक्रिया में रखते हैं।

इसके बाद इस आउटपुट को एक और बार रेक्टिफायर और फिल्टर को दिया जाता है. ये रेक्टिफायर और फिल्टर फिर से इस AC सप्लाई को स्मूथ DC में कन्वर्ट करता है (आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आपके ट्रांसफार्मर में जो करेंट आता है वो एसी करंट होता है और वही बैटरी में जो करंट आता है वो डीसी करंट होता है) इस प्रक्रिया के बाद जो आउटपुट सिस्टम होते हैं वो 12 वोल्ट, 5 वोल्ट, 3 वोल्ट तीन फॉर्म में होता है जो कि SMPS का प्राइमरी और सेकेंडरी सर्किट है।

एसएमपीएस से जो तीन आउटपुट केबल निकलते हैं उसे मदरबोर्ड से जोड़ दिए जाते हैं उसके बाद स्विचिंग ट्रांजिस्टर और एम्पलीफायर IC को एक ड्राइवर के साथ कनेक्ट किया जाता है और फिर इसे एम्पलीफायर IC की मदद से नियंत्रित किया जाता है सेकेंडरी स्विचिंग सर्किट से एक सेंसिंग वायर निकलता हैं.

जो एम्पलीफायर आईसी को यह बताता है कि लोड बढ़ रहा है, ये जानकारी मिलती है कि ड्राइवर स्विचिंग ट्रांजिस्टर के ऑन-ऑफ प्रक्रिया को बढ़ाता है जिसके कारण निरंतर गति में वोल्टेज रहता है जो कुछ इस तरह होता है +12 वोल्ट, + 5 वोल्ट और + 3 वोल्ट।  करंट के एक मोड से दूसरे मोड में बदलाव करने के कारण इस प्रक्रिया को स्विचिंग मोड पावर सप्लाई कहा जाता है मुझे आशा है कि अब आप समझ गए होंगे कि एसएनपीएस कैसे काम करता है।

SMPS कहाँ उपयोग होता है।

SMPS या स्विच्ड मोड पावर सप्लाई एक electronic पावर सप्लाई है. जिसमें इलेर्क्टिकल Power को कुशलतापूर्वक convert करने के लिए एक स्विचिंग रेगुलेटर शामिल होता है। अन्य पावर सप्लाई की तरह, एक SMPS डीसी या एसी स्रोत से डीसी Load, जैसे कि एक पर्सनल computer, वोल्टेज और Current कैरेक्टरिस्टिक को convert करते हुए power transfer करता है।

Haier इफेसिएंशी या हल्के वजन की आवश्यकता होने पर switching रेगुलेटर को लिनियर regulators के प्रतिस्थापन के रूप में उपयोग किया जाता है। उनके प्रदर्शन के परिणामस्वरूप, Switch-Mode Power Supply का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक system के अधिकांश form के लिए Power का एक कुशल और प्रभावी स्रोत प्रदान करने के लिए सबसे सटीक application में किया जाता है।

SMPS के प्रकार

मार्केट में अनेक प्रकार के पावर सप्लाई मौजूद हैं पर जो सबसे ज्यादा उपयोग किये जाते हैं वो इस प्रकार से हैं –

  1. DC – DC Convertor
  2. Forward Converter
  3. Fly back Converter
  4. Self-Oscillating Fly back Converter

1. DC – DC Convertor

इस प्रकार के SMPS में एसी मेन से हाई वोल्टेज डीसी के रूप में बिजली प्राप्त की जाती है जिसे रेक्टिफाइड और फिल्टर किया जाता है। इसके बाद हाई डीसी वोल्टेज को स्विच किया जाता है और करंट स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर के प्राइमरी साइड से गुजारा जाता है। स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर के दूसरी तरफ रेक्टिफाइड और फिल्टर में आउटपुट कलेक्ट किया जाता है जिसे आउटपुट के रूप में पावर सप्लाई के लिए भेजा जाता है।

DC- DC CONVERTOR IN HINDI

ये एक SMPS कन्वर्टर का टाइप है जिसमें आपको बस, SMPS के पास जो करंट दिखता है वो AC होती है उसे DC में कन्वर्ट करने से पहले, जो करंट DC कन्वर्टर से पास होता है वो पहले स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर का प्राइमरी साइड से गुजरता है, ये स्टेप डाउन ट्रांसफरर SMPS का ही एक हिस्सा है जो 50 Hz का होता है, ये वोल्टेज रेक्टिफाइड और फिल्टर होक ट्रांसफर्मर के सेकेंडरी पार्ट में जाता है, अब ये आउटपुट वोल्टेज पावर से बहर निकल कर अलग-अलग हिस्सों में जा पहुंचायां है. इसका आउटपुट भेजा जाता है और एक बार वापस स्विच के पास जाता है वोल्टेज को कंट्रोल करने के लिए।

2. Forward Converter

ये भी एक कनवर्टर है जो की choke के जरिये करेंट को लेके ज्याता है चाहे ट्रांजिस्टर अपना काम करता हो या नहीं. जब ट्रांजिस्टर पूरा बंद हो ज्याता है तब ये काम Diode करता है. तो इसी वजह से लोड के अंदर एनर्जी जाता है वो दोनों off और on के time होता है, लेकिन choke एनर्जी को रखता है, ON Period के time और कुछ एनर्जी को वो आउटपुट लोड के पास भेजता है.

3. Fly back Converter.

fly back converter में जब स्विच ऑन रहता है तो प्रारंभ करनेवाला का चुंबकीय क्षेत्र विद्युत स्टोर करता है। जब स्विच खुला अवस्था में होता है तो विद्युत आउटपुट वोल्टेज सर्किट खाली हो जाता है। फ्लाईबैक कन्वर्टर में ड्यूटी साइकिल आउटपुट वोल्टेज निर्धारित किया जाता है।

4. Self-Oscillating Fly back Converter

ये सबसे आसान और बेसिक कन्वर्टर है जो फ्लाईबैक के उपर काम करता है। चालन के समय स्विचिंग ट्रांजिस्टर, स्थानांतरण से प्राथमिक रूप से रैखिक के रूप में एक ढलान के हिसाब से बढ़ता है जो कि Win/LP. होता है।

SMPS के कनेक्टर

SMPS पावर ट्रांसफर का उपयोग कर एक कंप्यूटर सिस्टम के अलग-अलग (घटक) जैसे कि हार्ड डिस्क ड्राइव, मदरबोर्ड और अन्य उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करता है, power connector डीसी वोल्टेज को ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक इलेक्ट्रिक चार्जर है, ये 5 प्रकार के होते हैं.

  1. ATX Power Connectors
  2. 24 Pin Connectors
  3. ATX P4 Power Connector
  4. Molex Connector
  5. SATA Power Connectors
  6. PCI-E 6 Pin Connectors

ATX Power Connectors

यह एक 20 पिन connector है जिसमें से 6 प्रकार के Voltas बाहर आ रहे हैं। ATX का इस्तेमाल हम मदरबोर्ड को power supply करने के लिए करते हैं। Pin पर तार के रंग उससे संबंधित voltage दर्शाता है।

ATX POWER CONNECTORS

24 Pin Connectors

यह 24 पिन एसएमएसएस भिन्न पावर कनेक्टर्स की एटीएक्स शैली के साथ बनाया गया है।  इस अनुपात को बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए उपयोग किया जाता है।  इसलिए, इसे पीसी मुख्य शक्ति ट्रांसफर के रूप में जाना जाता है 24 पिन SMPS में 4 अतिरिक्त पिन होते हैं जो 20 पिन connector की तुलना में भिन्न voltage स्तर लेते हैं। पिन नंबर 11, 12 और 23 क्रमशः +12 V, +3.3 V, +5 V और Pin नंबर 24 को ग्राउंड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

इस कनेक्टर से आपके मदरबोर्ड और उससे जुड़े सभी कंपोनेंट्स जैसे रैम, ऑनबोर्ड, पीसीआई ग्राफ़िक, कार्ड, कार्ड्स इत्यादि को पावर सप्लाई की जाती है। इसमे कुल 24 pin होते है, जिसमे 20 pin अलग और 4 pin अलग होते है। अगर आपके पास पुराने motherboard मौजूद है। तो उसमें 20 पिन लगेंगे। लेकिन आधुनिक मदरबोर्ड में 24 पिन के पावर कनेक्टर की आवश्यकता होती है।

24 PIN SMPS CONNECTORS

ATX P4 Power Connector

ये कनेक्टर मदरबोर्ड में लगे CPU को पावर सप्लाई करता है। इसके द्वारा दी जानी वाली Current 12V होती है। आमतौर पर कुछ मदरबोर्ड में CPU को पावर सप्लाई करने के लिए 4 पिन वाले सॉकेट होते है और कुछ में 8 पिन वाले सॉकेट उपलब्ध होते है। इसीलिये ये 8 पिन (4+4) में आते है।

ATX P4 POWER CONNECTOR IN HINDI

Standard Peripheral Power Connectors (Molex)

Disk Drive पावर कनेक्टर्स 4 Wire कनेक्टर्स का उपयोग करते हैं जिन्हें आमतौर पर Molex connector कहा जाता है। हार्ड डिस्क ड्राइव, डीवीडी ड्राइव, सीडी आदि Molex connector का उपयोग करते हैं I Pin के तारों के रंग उनके संबंधित voltage को दर्शाता है।

Standard Peripheral Power Connectors IN HINDI

SATA Power Connectors

SATA पॉवर कनेक्टर के द्वारा computer के हार्ड डिस्क ड्राइव, सीडी/डीवीडी ड्राइव को connect करने और power supply करने के लिए होता है । यह एक 15-पिन connector होता है। बड़ी संख्या में pins का उपयोग तीन अलग-अलग voltage-3.3 V, 5 V, और 12 V के लिए किया जाता है। प्रत्येक voltage को तीन pins द्वारा एकत्रित किया जाता है और ground के लिए 6 पिन होते हैं।

SATA POWER CONNECTORS IN HINDI

PCI-E 6 Pin Connectors

इन कनेक्टर में 6 से 8 पिन होते है। ये कनेक्टर कंप्यूटर के PCI-E एक्सप्रेस devices जैसे ग्राफिक्स कार्ड को power supply करते है। ये कनेक्टर 12V की पावर सप्लाई करते है। इन्हें कभी-कभी PCI Express केबल या PEG (पीसीएल एक्सप्रेस ग्राफिक्स) केबल कहते हैं।

PCI -E 6 PIN CONNECTORS IN HINDI

ATX Power Supply क्या?

यह एक मदरबोर्ड कनेक्टर है जो कि संबद्धता और उससे जुड़े अन्य घटक को विद्युत आपूर्ति करता है। इसमें कुल 24 पिन होते हैं। पुराने मदरबोर्ड में 20 पिन होते हैं और आधुनिक मदरबोर्ड में 24 पिन कनेक्टर वाली होती हैं।

SMPS के output वोल्टेज कलर Wire क्या है?

SMPS के एम्पलीफायर IC से 3 मेजर केबल निकलते हैं एक है हरा जो केबल की on पावर है दूसरा बैंगनी रंग में आता है जो की +5 वोल्ट का स्टैंड बाई करंट देता है, और तीसरा जो वो gray रंग में आता है, जिसको पावर बूड केबल बोला जाता है। ये तीनों आउटपुट Cable मदर बोर्ड को दिए गए हैं.

SMPS के advantage

  • SMPS कम पावर की कमी को भी easily पूरा कर सकता है.
  • SMPS वजन में हल्का और आकार में छोटा होता है.
  • SMPS सभी इलेक्ट्रोनिक Device को उनकी आवश्यकतानुसार पावर Supply करता है.
  • SMPS आकार में छोटा और वजन में लाजिमी होता है।
  • SMPS सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को उनके सॉकेट में पॉवर सप्लाई करता है।
  • इनपुट वोल्टेज चाहे कितना भी ऐफिसिअल क्यों न हो लेकिन SMPS आउटपुट वोल्टेज बिल्कुल स्थिर ही रखता है।
  • SMPS की आउटपुट Range बहुत ज्यादा होती है।
  • ये बहुत कम ऊष्मा निकलता है वो भी इसकी क्षमताओं पर ही निर्भर करता है।
  • SMPS का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें Work करने की Capacity होती है क्योंकि यह कम Power की Shortage को भी आसानी से पूरा कर देता है।

SMPS के disadvantage

  • इसके कार्य काफी जटिल होते हैं।
  • इसमें केवल एक ही आउटपुट वोल्टेज होता है।
  • SMPS के कार्य को समझना बहुत ही difficult होता है।
  • इसके अलावा SMPS हार्मोनिक गड़बड़ी का कारण भी बन सकता है।
  • इसमें High Frequency का विद्युत शोर होता है।
  • SMPS लगाने से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कीमत बढ़ जाती है।

SMPS की किमत, कोन कोन कंम्पनी की आते है।

एसएमपीएस हर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है जो हर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस आंतरिक उपकरण को आवश्यकतानुसार बिजली सप्लाई करता है वैसे देखा जाए तो एसएमपीएस का प्राइस 500 से शुरू होकर 5000 तक या उससे और अधिक उसके क्वालिटी के अनुसार चला जाता है. नीचे कुछ प्रमुख कंपनी के SMPS और उसके प्राइस के बारे जानकारी दिया गया।

  • Frontbench PS-0006Price approx. – 1120
  • DEW SMPS – Price approx. – 400
  • ZEBRONICS ZEB – Price approx. – 799
  • LAPCARE LPS – Price approx. – 750
  • Art Sports VS-0006LPrice approx. – 2,249

AC क्या है?

AC का फुल फॉर्म अल्टरनेटिंग करंट होता है और इसे हिंदी में “प्रत्यावर्ती धारा” कहते है। इस प्रकार के Current की प्रक्रिया में, करंट एक निश्चित Time के बाद ही अपना डायरेक्शन और वैल्यू बदलता है, इसलिए इस प्रकार के करंट को अल्टरनेटिंग करंट कहते हैं।

alternating current का उत्पादन अधिक से अधिक करंट वोल्ट पैदा की जा सकती है, इससे लगभग 33000 वोल्ट तक बिजली पैदा की जा सकती है। इस Current को जहां पर भी भेजना है वहां पर भेज सकते है और तो और voltage को कम या ज्यादा कर सकते है।

अल्टरनेटिंग करंट ज्यादा महंगी नहीं है, क्योंकि ac current को आसानी से जेनरेट किया जा सकता है। AC करंट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि, इसे Transformer की मदद से कम या ज्यादा किया जा सकता है। इसलिए alternating current को ज्यादा दूरी तक भेजा जा सकता है।

AC करंट उदाहरण Alternating Current से मशीन, मशीनरी और अन्य उपकरण चलते है, और हमारे घर में TV, – grinder, mixer, juicer, microwave oven, cook top, water pump, Induction, cooler, etc. में Ac करंट का उपयोग होता है।

DC क्या है?

DC का फुल फॉर्म “डायरेक्ट करंट” होता है और इसे हिंदी में “दिष्ट धारा” कहते है। इस प्रकार के Current की प्रक्रिया में Direction और Value नहीं बदलता इसलिए इसे direct current कहा जाता हैं। DC करंट का उत्पादन केवल 650 volt तक ही किया जा सकता है।

DC करंट उदाहरण आजकल alternating current का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है। मगर कुछ जगह पर DC करंट की आवश्यकता होती है जैसे की हम mobile phone का इस्तेमाल करते है उसकी बैटरी में DC करंट होता है।

कई जगह पर Welding Machine में, Television, Radio, Computer, Mobile, Electronics Appliances, Multimeter Tester, Battery और Cell इत्यादी में भी DC करंट का प्रयोग होता है। किसी भी प्रकार की battery को चार्ज करने के लिए सिर्फ DC का इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योंकि ac current को स्टोर नहीं कर सकते और DC current को बैटरियों में Store किया जा सकता है।

FAQ

SMPS का उपयोग कहाँ होता है?

SMPS क्या है? इसके कार्य और प्रकार - हिन्दी नोट्स (What is SMPS in Hindi)

SMPS का उपयोग डेस्कटॉप कंप्यूटर में होता है. SMPS का पूरा नाम Switched Mode Power Supply है. यह एक हार्डवेयर डिवाइस है जो AC करेंट को DC करेंट में बदलकर कंप्यूटर के विभिन्न भाग में सप्लाई करता है.

पावर सप्लाई का क्या काम होता है?

पॉवर सप्लाई का मुख्य काम इलेक्ट्रिक बोर्ड से AC करेंट लेकर DC करेंट में बदलकर कंप्यूटर के विभिन्न हार्डवेयर डिवाइस में सप्लाई करना होता है. साथ ही वोल्टेज के कम या ज्यादा होने पर उसका इफ़ेक्ट कंप्यूटर डिवाइस में नहीं होने देता है.

एसएमपीएस का आउटपुट कितना होता है?

एसएमपीएस कंप्यूटर के अलग-अलग भाग को उनके जरुरत के हिसाब से DC (3.3V से 12V) तक सप्लाई करता है. SMPS मेन सप्लाई से AC करेंट लेकर DC में कन्वर्ट करके सप्लाई करता है.

निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने एसएमपीएस क्या होता है? (What is SMPS in Hindi) इसके बारे में जाना है इस लेख के माध्यम मैने एसएमपीएस (What is SMPS in Hindi) के बारे में जानकारी दी है। अगर यह आर्टिकल What is SMPS in Hindi आपको पसंद आया होगा तो अपने दोस्तों के साथ या फिर अन्य सोशल मीडिया में शेयर करें ताकि आपके माध्यम से बहुत से लोगों को एसीएम की पूरी जानकारी मिल सके।

अगर आप सभी को ये पोस्ट पसंद आया होगा तो आप हमारी द्वारा बनाये गये YouTube चैनल computervidya में जाकर विजिट कर सकते है और इसके साथ ही आप हमारे वेबसाइट nayabusiness.in में जा कर नए नए बिजनेस आइडिया के बारे में जान सकते है.

History of computer in Hindi – कम्प्युटर का इतिहास और विकास

computer ke itihas

History of computer in Hindi

वर्तमान में कंप्यूटर का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है. दैनिक जीवन में इसका उपयोग बहुत अधिक होने लगा है. आप कोई भी क्षेत्र देख लो कंप्यूटर का योगदान अतुलनीय है. अतः हमारें लिए कंप्यूटर के इतिहास और उसके विकास का अध्धयन करना बहुत ही महत्वपूर्ण है.

आज के इस लेख में हम कंप्यूटर के इतिहास और विकास की विस्तार से चर्चा करेंगे. साथ ही भारत में हुए कंप्यूटर क्रांति की जानकारी में इस लेख में देंगें.

कम्प्युटर का इतिहास और विकास (History)

आज के आधुनिक कंप्यूटर का इतिहास लगभग 300 ई.पु. को माना जाता है. उस समय मनुष्य गणना के लिए पत्थर, ऊँगली इत्यादि का प्रयोग करते थे. शुरुवात में कंप्यूटर की खोज एक गणक के रूप में हुआ. आइये विस्तार से कंप्यूटर के विकास की चर्चा करते है.

computer एक ऐसी मानव निर्मित मशीन है जिसने हमारे काम करने, खेलने, रहने  इत्यादि सभी के तरीकों में परिवर्तन कर दिया इसने हमारे जीवन के हर पहलू को किसी-न-किसी तरह से छूआ है। यह अविश्वसनीय अविष्कार ही कम्प्यूटर है।

कंप्यूटर का महत्व हमारे जीवन में बहुत अद्भुत है, उसी प्रकार इसके इतिहास को जानना हमारे लिए जरूरी है, जैसे की कंप्यूटर का निर्माण किसने किया था? इसका जन्म और कंप्यूटर के father कौन थे? क्या पहले भी लोग computer पर, गाने सुनते या letter type, game खेलतेकरते थे आदि.

1. ABACUS (अबेकस)

अबेकस का पूरा नाम Abundant Beads, Addition and Calculation Utility System है।

इसका उपयोग पहले यूरोप रूस और चीन में किया जाता था प्राचीन काल में जब लोगों के पास ज्यादा सुविधाएं नहीं थे तो उस समय लोग जीवन यापन के लिए शिकार पर निर्भर रहते थे तब लोग हड्डि, पत्थर और लाठी का उपयोग करके गणना करते थे फिर जैसे-जैसे समय बीता लोगों के मस्तिष्क में विकास हुआ और लोगों ने ऐसे मशीन बनाने की कल्पना की जो गणना करने में आसान हो। कहां जाता है कि अबेकस का विकास से कंप्यूटर के विकास की शुरुआत हुई

Abundant Beads, Addition and Calculation Utility System

अबेकस की खोज चीन में हुआ था. जिसको लि काई चेन ने बनाया था. यह एक ऐसा कंप्यूटर है जिसका उपयोग आज भी किया जाता है इसमें कैलकुलेट करने के लिए आपको कॉपी पेन की आवश्यकता नहीं होती। इस डिवाइस की मदद से आप आसानी से गणितीय कार्य को कर सकते थे।

इस डिवाइस को बनाने के लिए आता का लकड़ी का प्रयोग किया जाता था जिसमें तार को लगाया जाता था और उन तारों पर मोतियों पिरोई जाती थी और गणना करने के लिए इन मोतियों को सरकाया जाता था। इसमें जोड़ घटा गुणा भाग आदि गणितीय क्रियाएं की जाती थी।

2. Napier’s Bones (नेपियर बोंनस)

अबेकस के बाद Napier’s Bones का आविष्कार हुआ जिसको 1617 में सर जॉन नेपियर ने बनाया। जॉन नेपियर ने एक ऐसे डिवाइस की कल्पना की जिससे हम आसानी से कैलकुलेट कर सकें इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने नेपियर बोंन का आविष्कार किया। नेपियर बोन को बनाने के लिए हड्डियों, लकड़ी, मेटल के रोड और हाथी के दांत आदि का उपयोग किया जाता था और इसको प्रॉपर सेफ में काटकर इसमें 0 से 9 तक के अंक लिखे जाते थे। इसमें केवल जोड़, गुणा, भाग ही संभव था।

Napier’s Bones computer in hindi

3. Pascaline (पास्कल)

पास्कलाइन का आविष्कार एक फ्रांस गणितज्ञ ब्लेज़ पास्कल (Blaise Pascal) द्वारा 1642 में किया गया। मात्र 19 वर्ष की आयु में ब्लेज़ पास्कल ने एक ऐसे कैलकुलेटर मशीन का आविष्कार किया जो आगे जाकर कंप्यूटर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पास्कल ने इसे मुख्य रूप से अपने पिता की सहायता करने के लिये बनाया था, जो कि एक टेक्स अकाउंटेंट थे।

इस मशीन को एडिंग मशीन (Adding Machine) कहते थे, क्योकि यह केवल जोड़ या घटाव कर सकती थी। यह मशीन घड़ी और ओडोमीटर के सिद्धान्त पर कार्य करती थी। इसमें एक लकड़ी का बॉक्स होता है जिसमें गियर्स और व्हील्स लगी होती हैं। इस पर कैलकुलेशन करने के लिए इन व्हील्स को घुमाया जाता है।

Pascaline computer in Hindi

4. Reckoning Machine (रेक्कनिग मशीन)

1673 में जर्मन गणितज्ञ व दर्शनिक गॉटफ्रेड वॉन लेबनीज ने Pascaline का नया रूप तैयार किया, जिसे Reckoning Machine  कहते हैं । Pascaline गणना यंत्र केवल जोड़ने व घटाने का ही काम कर सकता था, जबकि Reckoning Machine जोड़ घटा के अलावा गुणा व भाग काम भी कर सकता था।

Reckoning Machine in hindi

Jacquard’s Loom (जेकार्ड लूम)

jacquard loom का निर्माण Joseph Marie Jacquard ने 1801 में किया। इस machine को कपड़ों पर pattern या design अंकित करने के लिए किया गया था। इस machine को पंच कार्ड्स से नियंत्रित किया जाता था। इन punch cards पर पैटर्न बने होते थे जिन्हें कपड़ों पर लगाया जाता था।

Jacquard’s Loom

जेकार्ड के इस लूम ने कंप्यूटर के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दिया. इसकी मदद से ही यह जानकारी प्राप्त हुई कि पंच कार्ड पर हम सूचना को अंकित करके रख सकते हैं तथा पंच कार्ड पर संग्रहित निर्देशों के अनुसार कंप्यूटर को चला सकते हैं

Difference engine (डिफ़रेंस इंजन)

1820 की शुरुआत से Charles Babbage ने Difference engine का अविष्कार किया था, जोकि 1822 तक पूरा हुआ था। यह एक मेकैनिकल कंप्यूटर था। Charles Babbage ने इस कंप्यूटर का निर्माण 1822 में किया। Charles Babbage ने इसे सिम्पल कैलकुलेशन करने के लिए बनाया गया था।

इस machine में गियर व शाफ्ट लगे थे तथा यह भाप से चलती थी, यह पूर्णतः स्वचालित machine थी, यह 60 जोड़ एक मिनट में कर सकती थी Difference engine पैसों की कमी के चलते चार्ल्स बैबेज ने इसको प्रॉपर रूप से डिवेलप नहीं किया लेकिन इस मशीन को पूरा करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने मदद की क्योंकि वह जानते थे कि इस मशीन के आने से अनेक फायदे होंगे.

Difference engine hindi

Charles Babbage (चार्ल्स बैबेज)

Charles Babbage को कंप्यूटर का पिता कहा जाता है। यह इंग्लिश गणितज्ञ, पॉलीमैथ, दार्शनिक, आविष्कारक और ये मैकेनिकल इंजीनियर थे।

Babbage ने डिजिटल प्रोग्रामेबल कंप्यूटर की कल्पना की थी। इन्होंने डिफरेंस इंजन के बाद 1837 में first modern कंप्यूटर “Analytical engine” का बनाया।

Charles Babbage

एनालिटिकल इंजिन में Integrated मेमोरी और arithmetic logical unit यानी (ALU) मौजूद थे। पैसों की कमी के कारण उन्होंने अपने जीवनकाल कभी भी पूर्ण रूप से कंप्यूटर का अविष्कार नहीं किया।

Henry Babbage 1910 में मशीन के एक हिस्से का कार्य पूरा किया जो बेसिक कैलकुलेशन करने योग्य था. यह और कोई नहीं Charles Babbage का ही छोटा बेटा था. चार्ल्स बैबेज द्वारा बनाए गए एनालिटिकल इंजन कंप्यूटर से ही प्रेरणा लेकर कंप्यूटरों का विकास हुआ वर्तमान समय में हम जो computer प्रयोग में लाते हैं। इस computer को इतना विकसित बनाने में चार्ल्स बैबेज का बहुत योगदान रहा तथा उनके महान विचारों और computer के प्रति अवधारणाए बहुत पक्की थी। इसलिए उन्हें फादर ऑफ कंप्यूटर या कंप्यूटर का जनक कहते हैं।

Analytical Engine (एनालिटिकल इंजन)

computer के इतिहास में इस कंप्यूटर की अहम भूमिका हैं। डिफरेंस इंजन के बाद Charles Babbage ने 1837 में एनालिटिकल इंजन का निर्माण किया। Charles Babbage ने एनालिटिकल इंजन में पंच कार्ड्स का प्रयोग किया कंप्यूटर को इनपुट प्रदान करने के लिए। एनालिटिकल इंजन उस समय पूर्व विकसित हुई मशीनों से बेहतर था।

यह कंप्यूटर लगभग हर प्रकार की गणितीय समस्याओं को हल कर सकता था। यह पंचकार्डो पर संग्रहित निर्देशों के अनुसार कार्य करने में सक्षम थी इसमें निर्देशों को संग्रहित करने की क्षमता थी और इसके द्वारा स्वचालित रूप से परिणाम भी छापे जा सकते थे। यह कंप्यूटर आधुनिक तकनीकों से युक्त था, जिस कारण इसको कंप्यूटर के विकास की नींव कहा जाता हैं। इसी कंप्यूटर के आधार पर आधुनिक (Fifth Generation of Computer) का निर्माण हूआ।

Analytical Engine hindi

कीबोर्ड का आविष्कार

जैसे-जैसे कंप्यूटर का विकास हो रहा था. वैसे वैसे ही उसके अन्य उपयोगी डिवाइस का भी निर्माण आरंभ हो रहा था. जिसमें से एक है कीबोर्ड कीबोर्ड का आविष्कार क्रिस्टोफर लैथम शोलेज ने किया जिसे टाइपराइटर और QWERTY कीबोर्ड के जनक के नाम से भी जाना जाता है। फिर 1990 के आसपास के बोर्ड का अच्छा खासा विकास हो गया था जिसके माध्यम से हम कंप्यूटर को न्यूमैरिक डाटा और अंक तथा सिंबल के माध्यम से निर्देश दे सकते थे। कीबोर्ड के अविष्कार से कंप्यूटर को चलाना और भी आसान हो गया।

Tabulating machine

हर्मन होलेरिथ जो एक अमेरिकी वैज्ञानिक थे उन्होंने अमेरिका की जनगणना को तीव्र गति से करने के लिए 1890 में एक मशीन का निर्माण किया जिसका नाम था Tabulating machine पहले अमेरिका में परंपरागत रूप से जनगणना होते थे घर-घर जाकर लोगों की जनगणना करते थे तो उस में बहुत समय लगता था लगभग 7 वर्षों का समय लग जाता था लेकिन हर्मन होलेरिथ के Tabulating machine मशीन आने के कारण जनगणना का कार्य 7 वर्षों की बजाय केवल 3 वर्षों में ही पूर्ण हो गया। इस मशीन में पंच कार्ड का उपयोग किया जाता था डाटा को संग्रहित कर के रखने के लिए। हर्मन होलेरिथ ने 1911 में टैबुलेटिंग मशीन कंपनी की स्थापना की थी । सन् 1924 में इस company का नाम बदलकर International Business Machine (IBM) रखा गया. जो आज पूरे विश्व में कंप्यूटर निर्माण करने वाली सबसे बड़ी कंपनी हैं.

Tabulating machine hindi

प्रारम्भ के प्रसिद्ध कम्प्युटर

Mark 1 (मार्क 1)

यह कंप्यूटर History of computer में एक बड़ा बदलाव लाया, जब पहला programmable digital computer बनाया गया। Mark 1 computer को 1944 में IBM और Harvard University के प्रोफेसर Howard Aiken ने मिलकर बनाया गया था। यह विश्व का सबसे पहला विद्युत यांत्रिक कंप्यूटर (electro mechanical) क्योंकी इसमें विद्युतीय व यान्त्रिक दोनों ही प्रकार के उपकरण लगे थे. यह कंप्यूटर आकार में अत्यधिक बड़ा और बनावट में काफी जटिल था। इसकी मदद से जोड़, घटाव, गुणा, भाग इत्यादि की क्रियाएँ सम्पूर्ण होती थी. यह 6 सेकंड में 1 गुना और 12 सेकंड में 1 भाग की क्रिया कर सकता था।

mark1 computer in hindi

ABC (Atanasoff Berry Computer)

गणित के प्रोफ़ेसर डॉ. जाँन एटानासॉफ ने अपने सहयोगी क्लिफार्ड-बैरी के साथ मिलकर प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर बनाया. जिसका नाम Atanasoff Berry Computer अर्थात ABC रखा गया. इस computer का उपयोग एक साथ अनेक equation का सामाधान करने के लिए किया गया. ABC सबसे पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर था। ABC में नियंत्रण और अंकगणितीय गणनाओं के लिए लगभग 300 vacuum tube, लॉजिकल ऑपरेशन, मेमोरी कैपेसिटर, बाइनरी नंबरों का उपयोग और input/output units के रूप में पंच कार्ड शामिल थे।

Atanasoff Berry Computer

ENIAC (एनिअक)

एनिअक दुनिया का सबसे पहला, बृहद रूप से, सामान्य उद्देश्यीय, पूर्णत: इलेक्ट्रानिक कम्प्यूटर था। जिसका निर्माण सन् 1946 में पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जे. प्रेस्पर एकर्ट और जॉन मौशली (J. Prosper Eckert and John Mauchly) के निर्देशन में वैज्ञानिकों की एक टीम ने किया था। UNIVAC का पूरा नाम Universal Automatic Computer है। यूनिवैक प्रथम का निर्माण रेमिंग्टन रेण्‍ड (Remington Rand) द्वारा किया यह प्रथम ऐसा डिजिटल कम्प्यूटर था जिसका प्रयोग व्ययसायिक कार्यों में किया गया, और जो कई तरह के कार्यों को कर सकने में सक्षम था

aniac in Hindi

EDSAC

EDSAC पूरा नाम Electronic Delay Storage Automatic calculator है। इसे हिंदी में इलेक्ट्रॉनिक देरी भंडारण स्वचालित गणना प्रणाली कहते है. इसे सन् 1940 ई. में don Newman के सिद्धांत के आधार पर प्रोफ़ेसर मांस विलेज, जो की गणित प्रयोगशाला Cambridge University में थे उन्होंने ने ही इसको निर्माण किया था. यह सबसे पहला संग्रहित program कंप्यूटर था। इस कंप्यूटर पर पहली बार प्रोग्राम को Run किया गया था. EDSAC पर काम सन 1947 मे शुरू हुआ और इसने अपना पहला कार्य 6 मई 1949 को किया जब इसने वर्ग संख्याओं की तालिका बनाई और अभाज्य संख्याओं की गणना की। EDSAC को 1958  मे बंद कर दिया गया,

EDSAC computer in hindi notes

EDVAC

EDVAC Computer का पूरा नाम Electronic Discrete Variable Automatic Computer है, सन् 1950 में Bon Newman ने EDVAC का निर्माण किया जिसमें अंकगणितीय गणनाए हेतु बाइनरी अंक प्रणाली का उपयोग किया तथा निर्देशों को भी डिजिटल रूप में स्टोर किया गया. यह मशीन पूरी तरह से प्रोग्राम को स्टोर करके रखती थी यह एक ऐसा डिवाइस था जिसमें पहली बार computer game को रन किया गया था इसे फर्स्ट मेनफ्रेम कंप्यूटर भी कहा जाता है जो दशमलव प्रणाली की जगह भरी नंबर पर काम किया। EDVAC में magnetic tape का उपयोग किया जाता था जिसके कारण यह दिनभर चल सकता था। यह 5.5 kb की memory capacity के साथ mathematical कार्यों को पूरा करता था।

EDVAC in Hindi Mein

UNIVAC

1946 के समय Eckert एवं Mauchly ने UNIVAC कंप्यूटर का निर्माण किया लेकिन यह उतना सफल नहीं हुआ. फिर इसी का विकसित रूप Univac 1 कंप्यूटर बनाया। इस कंप्यूटर में लगभग 5000 वैकेंसी लगे हुए थे और इसका वजन भी काफी था लगभग 9 टन का। तथा यह कंप्यूटर बहुत बिजली की खपत भी करता था।

univac computer in hindi

इसका Size बहुत बड़ा था और यह 35 स्क्वायर मीटर की जगह लेता था। इसमें input के लिए tape driver का उपयोग किया जाता था। इसकी Main मेमोरी में 1000 words तक store हो सकते थे। UNIVAC पूरा नाम Universal Automatic Computer है। यह पहला कमर्शियल electronic कंप्यूटर है जिसका उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया गया था।

यह पहला ऐसा कंप्यूटर था जो न्यूमेरिकल इंफॉर्मेशन के साथ साथ टेक्सचुअल इंफॉर्मेशन भी देता था | न्यूमेरिकल जैसे 572, 39089 और टेक्सचुअल जैसे thank you ji, how are you.

UNIVAC पहला अमेरिकन कंप्यूटर था. जिसे बिजनेस के हिसाब किताब और काम काज के लिए बनाया गया था। इस कंप्यूटर के द्वारा हम math के कार्यों जैसे कि add, subtract, multiply, divide करना आदि को आसानी से हल कर सकते थे। UNIVAC का मूल्य बहुत ही High था इसे बड़ी company ही खरीदती थी। इसकी कॉस्ट लगभग 1.1 करोड़ रुपये के आसपास थी।

IBM

हर्मन होलेरिथ 1924 में टैबुलेटिंग मशीन कंपनी का नाम बदलकर आईबीएम रखा याने की हर्मन होलेरिथ ने ही आईबीएम कम्पनी की स्थापना की। IBM का फुल फॉर्म इंटरनेशनल बिजनेस मशीन है। IBM ने सबसे पहले 1953 में एक पहला computer IBM 701 बनाया गया यह एक electronic कंप्यूटर था जिस पर calculate किया जाता था. इसके बाद इस कंपनी में Programming Language का विकास किया गया. 1972 में IBM कंपनी के द्वारा ATM IBM 2984 बनाया गया. 1981 में IBM एक personal computer बनाया गया जिसका नाम IBM pc रखा गया.

IBM Computer in Hindi

First Mini Computer

दुनिया का पहला minicomputer IBM कंपनी ने बनाया था. IBM ने लगभग 1960 के दशक में Programmable Data Processor 1 (PAP 1) नाम का mini computer बनाया.PAP 1 एक बहुत ही popular मिनी कंप्यूटर है, IBM ने इस computer को business को ध्यान में रखकर बनाया था. Mini computer को आकार में माइक्रो कंप्यूटर से बड़ा बनाया गया था तथा इसकी कीमत भी बहुत अधिक थी. PAP 1 की कीमत उस समय 16000 अमेरिकी Dollar थी, टेक्नोलॉजी के बढ़ने के साथ आज mini computer आकार में छोटे हो गए हैं, और इनकी भी कीमत कम हो गयी है.

History of computer in Hindi

Microprocessor

माइक्रोप्रोसेसर कंप्यूटर का मुख्य भाग होता है इसे कंप्यूटर का मस्तिष्क भी कहा जाता है। इसे शार्ट में सीपीयू भी कहा जाता है जिसका पूरा नाम सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट है इसे अंग्रेजी में चिप भी कहा जाता है।

microprocessor in hindi

माइक्रोप्रोसेसर का इतिहास

सन् 1969 मैं सबसे पहला माइक्रोप्रोसेसर इंटेल 4004 बनाया गया था लेकिन इसकी प्रोसेसिंग क्षमता बहुत कम थी। उसके बाद सन् 1971 में इंटेल 1008 माइक्रोप्रोसेसर का विकास हुआ इसी चीफ के कारण माइक्रो कंप्यूटर अर्थात पर्सनल कंप्यूटर का भी निर्माण आरंभ हुआ। उसके बाद 16 बीट 8086 प्रोसेसर का विकास हुआ सन 1978 में, उसके बाद 32 बिट प्रोसेसर का आविष्कार हुआ सन 1990 में। इस माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग व्यवसायिक रूप से उपलब्ध हुआ जिसमें 1 से अधिक प्रोग्राम को Run करने की क्षमता थी यानी कि यूजर इसमें मल्टीटास्किंग कर सकता था अर्थात एक ही समय में अनेक कार्य कर सकता था।

निष्कर्ष

इसके बाद लगातार माइक्रो प्रोसेसर का विकास होता गया और उसे इतना विकसित किया गया कि कंप्यूटर का उपयोग हम वैज्ञानिक अनुसंधान, शिक्षा, बैंकिंग प्रकाशन, मनोरंजन, रेलवे, व्यापार, चिकित्सा, संचार आदि के क्षेत्र में सरलता से व सुविधा पूर्वक कार्य कर सकें और आज के समय में हम सभी लोग जानते हैं कि इन क्षेत्रों में कंप्यूटर का उपयोग बड़ी सरलता से और सुविधा पूर्वक किया जा रहा है इसने हमारे काम करने के तरीकों में व्यापक परिवर्तन लाया है घंटों का काम अब मिनटों में हो रहा है सभी क्षेत्रों में कंप्यूटर का अविष्कार अहम और अतुलनीय है।

FAQ

कंप्यूटर की खोज कब हुई?

History of computer in Hindi - कम्प्युटर का इतिहास और विकास

कंप्यूटर के खोज के लिए Charles Babbage को जाना जाता है जिन्होंने सन 1837 में पहला मैकनिकल कंप्यूटर का आविष्कार किया था.

भारत में कंप्यूटर की खोज कब हुई?

भारत में कंप्यूटर की खोज “भारतीय सांख्यिकी संस्थान कोलकाता” ने सन 1952 में किया था.

कंप्यूटर का पुराना नाम क्या है?

कंप्यूटर का पुराना नाम “यूनिवर्सल ट्यूरिंग मशीन” है इस नाम को कंप्यूटर के आविष्कार के शुरुवाती समय में मिला था.

कंप्यूटर क्या है इसके प्रकारों 

कंप्यूटर के  इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (Electronic Device) है और उपयोगकर्ता द्वारा इनपुट किये गये डाटा को प्रोसेस करने के रूप में किया जाता है.
1. सुपर कंप्यूटर (Super Computer)
2. मेनफ़्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer)
3. मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)
4. माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer )

मुझे आशा है की मैंने जो कम्प्युटर का इतिहास और विकास (History of computer in Hindi) का जानकारी दिया है वो आप लोगो को पसंद आया होगा. अगर आप किसी को कोई भी डाउत या सुझाव देना हो तो आप इस लेख History of computer in Hindi में कमेंट कर के बता सकते है.

अगर आप सभी को ये पोस्ट पसंद आया होगा तो आप हमारी द्वारा बनाये गये YouTube चैनल computervidya में जाकर विजिट कर सकते है और इसके साथ ही आप हमारे वेबसाइट nayabusiness.in में जा कर नए नए बिजनेस आइडिया के बारे में जान सकते है.

कंप्यूटर हार्डवेयर क्या है? इसके प्रकार, कार्य और उदाहरण – Computer Hardware in Hindi

computer hardware kya hai hindi

Computer Hardware in Hindi

कंप्यूटर में उपस्थित वे सभी भाग/ डिवाइस जिन्हें देख और छू सकते है उन्हें कंप्यूटर हार्डवेयर कहा जाता है. दुसरे शब्दों में कंप्यूटर के फिजिकल कोम्पोनेनेट को हार्डवेयर कहा जाता है.

हार्डवेयर के बिना computer का कोई अस्तित्व नही है। क्योंकि इनके मिलने से ही एक computer पूर्ण हो पाता है। hardware से कुछ काम करवाने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग करना पड़ता है. हम कह सकते हैं की hardware कंप्यूटर का शरीर है और Software कंप्यूटर की आत्मा की तरह होता है.

अतः आज के इस पोस्ट में हम कंप्यूटर हार्डवेयर के बारें में विस्तार से चर्चा करेंगे. इस पोस्ट में हम कंप्यूटर हार्डवेयर के प्रकार, कार्य और उदाहरण के बारें में चर्चा करेंगे.

कंप्यूटर हार्डवेयर क्या है?

Computer के वे पार्ट जिन्हें हम देख सकते हैं और छू सकते हैं वे सभी Computer Hardware कहलाते हैं. हार्डवेयर computer का शरीर हैं ये computer को आकार प्रदान करते हैं. जैसे Monitor, keyboard, mouse, आदि कंप्यूटर के हार्डवेयर हैं.

कंप्यूटर के वे सभी पार्ट जिन्हें देख और छू सकते है. उन सभी को कंप्यूटर हार्डवेयर कहा जाता है. जैसे कीबोर्ड, माउस, मॉनिटर, सी.पी.यु., हार्डडिस्क, रैम, मदरबोर्ड इत्यादि.

कम्प्युटर हार्डवेयर के प्रकार

अब तो आप जान गए होंगे कि कंप्यूटर हार्डवेयर क्या है, अब जानते हैं ये कितने प्रकार के होते हैं. Computer hardware 6 प्रकार के होते हैं जिसके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है –

1. Internal computer parts

इंटरनल हार्डवेयर ऐसे हार्डवेयर होते जो computer के अंदर मौजूद होते है, यह computer hardware CPU के अंदर होते है CPU को कंप्यूटर case या cabinet भी कहा जाता है। internal hardware के उदाहरण.

  • Motherboard
  • Video card
  • Sound card
  • RAM & ROM
  • Power supply
  • hard drive, SSD

2. External Computer Parts

यह कंप्यूटर का बाहरी पार्ट्स है। कंप्यूटर के बाहरी कंपोनेंट्स को एक्सटर्नल कंप्यूटर पार्ट्स कहते हैं। चूँकि यह कंप्यूटर के बाहर होते हैं। इसलिए इन कंपोनेंट्स को बहुत आसानी से छू व देख सकते हैं और इसके लिए कंप्यूटर open करने की जरूरत भी नहीं होती है।

एक्सटर्नल कंप्यूटर Parts के उदाहरण.

  • Keyboard
  • Mouse
  • Monitor
  • Printer
  • Scanner
  • Projector

3. Input Device

कंप्यूटर के वे सारे Device जिसके द्वारा user कंप्यूटर को निर्देश देता है उसे input device कहते हैं, बिना इनपुट डिवाइस के कंप्यूटर को Instructions नहीं दिया जा सकता है. Input device के द्वारा निर्देश प्राप्त करने के बाद ही computer अपना काम शुरू करते हैं. सभी इनपुट डिवाइस hardware होते हैं.

Hardware Input Device के उदाहरण:-

  • Keyboard
  • Mouse
  • Touch Screen
  • Scanner
  • Microphone
input device in hindi

4. Output Device

कंप्यूटर input device से निर्देश प्राप्त करता है और फिर उन निर्देशों को प्रोसेस करके परिणामों को output device में दिखाता है. अर्थात कंप्यूटर के वे Device जिसमें कंप्यूटर प्राप्त instructions के अनुकूल परिणाम प्रदर्शित करता है उसे output device कहते हैं. कंप्यूटर के सभी output device भी hardware होते हैं.

computer hardware in Hindi

Hardware Output Device के उदाहरण.

  • Monitor
  • Headphone
  • Printer
  • Projector
  • Plotter

5. System Unit

System unit को अक्सर लोग CPU भी कहते हैं जो कि गलत है CPU कंप्यूटर की इंटरनल डिवाइस है. सिस्टम यूनिट एक प्रकार का कनेक्टर रहता है जिसमें computer के विभिन्न electronic उपकरण लगे होते हैं. इसका size एक छोटे Box के सामान होता है.

6. Storage Device

यह वह हार्डवेयर होते है, जो data को स्टोर करने का कार्य करते है। स्टोरेज डिवाइस किसी भी computer के कोर components में से एक है। यह कंप्यूटर पर सभी प्रकार के data और Applications को स्टोर करते है।

  • RAM & ROM
  • HDD & SSD
  • Optical Disk Drive
  • Flash Memory

कंम्प्यूटर के मुख्य भाग

Cabinet

कंप्यूटर के कुछ नाजुक और important parts एक Box में बंद रहते है. यह बॉक्स लौह या plastic का बना होता है. इस Box को ही कंप्यूटर Case या Cabinet कहा जाता है.

computer cabinet in hindi

Printer

प्रिंटर वह hardware device होता है. जो कंप्यूटर से प्राप्त जानकारी को Paper पर छापता है कागज पर आउटपुट की यह प्रतिलिपि हार्ड कॉपी कहलाती है. कंप्यूटर से जानकारी का आउटपुट बहुत तेजी से मिलता है और प्रिंटर में भी एक मेमोरी होती है जहाँ से प्राप्त परिणामों को धीरे-धीरे प्रिंट करता है.

printer kya hai hindi

Motherboard

motherboard एक processing डिवाइस होता है। यह कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण hardware है। क्योकि इसी से computer का हर एक Device connect रहता है। इसके बिना computer चालू भी नहीं हो सकता। motherboard कंप्यूटर के सभी Device को Electricity पहुंचाने का काम भी करता है।

motherboard kya hai hindi

Keyboard

keyboard कंप्यूटर के लिए बहुत महत्वपूर्ण hardware device होता है। इसके बिना computer में किसी भी टेक्स्ट को नहीं लिखा जा सकता। Computer में किसी भी कैरेक्टर को लिखना है चाहे वो कोई लेटर हो, नंबर हो या फिर कोई सिंबल हो बिना keyboard के नहीं लिखा जा सकता।

keyboard kya hai hindi

SMPS

SMPS का पूरा नाम Switched Mode Power Supply है। यह एक वोल्टेज कनवर्टर है जो AC वोल्टेज को DC में कन्वर्ट करके कंप्यूटर को सप्लाई करता है. ये डिवाइस कंप्यूटर के सभी अलग-अलग डिवाइस को पावर देता है जैसे की RAM, मदरबोर्ड, फैन को पावर सप्लाई देता है।

कंप्यूटर हार्डवेयर क्या है? इसके प्रकार, कार्य और उदाहरण - Computer Hardware in Hindi

Mouse

माउस एक input device होता है। इसको pointing Device भी कहा जाता है। यह भी computer के लिए उतना ही important होता है जितना की एक keyboard, माउस में 3 बटन होते हैं लेफ्ट राइट और स्क्रोल बटन तथा जैसे ही माउस हिलता है साथ ही साथ यह कंप्यूटर स्क्रीन में cursor भी हिलाता है.

mouse kya hai hindi

Hard Disc

यह computer के अंदर लगने वाली Data स्टोरेज Device होती है। यह कंप्यूटर में उस Data और इंस्ट्रक्शन को स्टोर करती है जिनकी जरुरत अभी नहीं है. लेकिन बाद में पढ़ सकती है। hard disk में डाटा को store करने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है।

hard disk hindi

RAM

RAM को प्राइमरी storage भी कहते है। यह कप्यूटर में process होने वाले Data और Instruction को कुछ Time के लिए अपने पास रखती है। ताकि जब भी उस Data और इंस्ट्रक्शन की जरूरत पड़े। तो CPU hard disk में ढूंढ़ने के बजाए सीधा यही से information प्राप्त कर ले। यह Data और इंस्ट्रक्शन को तब तक अपने पास रखती है. जबतक computer ON रहता है।

ram kya hai hindi mein

ROM

ROM का full form रीड ओनली मेमोरी होता है. इसका Data केवल read किया जा सकता है. इसमें नया Data जोड़ नहीं सकते हैं. यह एक Non-Volatile मेमोरी होती है. इस memory में कम्प्यूटर Functionality से संबंधित दिशा निर्देश Store रहते है Computer को चालु करना के निर्देश इसी memory में Store रहते है. जिसे हम “बुटिंग” के नाम से जानते है. कम्प्यूटर के अलावा Washing machine अन्य electronic उपकरणों को ROM द्वारा ही programmed किया जाता है.

Rom kya ha hindi mein

कम्प्युटर सॉफ्टवेयर क्या हैं?

कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर instructions या program का एक समूह होता है जिसका उपयोग कंप्यूटर को operated करने व computer में विशेष कामों को करने के लिए किया जाता है. Software कंप्यूटर का एक important भाग है इसके बिना computer एक plastic के डिब्बे के समान है. जिस प्रकार से हम hardware को देख व छू सकते हैं, लेकिन Software को हम देख तो सकते हैं लेकिन छू सकते हैं क्योकि Software का कोई Physical अस्तित्व नहीं होता है इसे हम महसूस कर सकते हैं व समझ सकते है.

Software kya hai hindi

सॉफ्टवेयर हैं और हार्डवेयर मे अंतर

  • hardware कंप्यूटर का शरीर हैं जबकि Software उनमें जान डालते हैं.hardware के बिना कंप्यूटर का कोई अस्तित्व नही है, तथा इसके बिना computer चल नहीं सकता लेकिन बिना हार्डवेयर के सॉफ्टवेयर चल तो सकता है. लेकिन कई error उत्पन्न करेगा और Output भी नहीं मिलेगा.
  • हार्डवेयर पर कंप्यूटर वायरस का कोई फर्क नही पड़ता।जबकि computer virus सॉफ्टवेयर को प्रभावित कर सकते है.
  • Hardware computer का भौतिक भाग हैं जिन्हें हम देख छू सकते हैं जबकि Software को हम देख तो सकते हैं लेकिन छू नहीं सकते.
  • अगर हार्डवेयर खराब हो जाये तो इसे ठीक कर सकते हैं या या फिर नया लगा सकते हैं, लेकिन Software corrupt हो जाये तो आपको इसको डिलीट करके फिर से इंस्टॉल करना पड़ सकता है.
  • Hardware को हमें एक बार खरीदने पड़ता है. जबकि Software को अलग – अलग काम के आधार install किया जाता है.
  • हार्डवेयर को भौतिक सामग्री या कम्पोनेंट्स के इस्तेमाल से बनाया जाता है। सॉफ्टवेयर को बनाने के लिये प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में इंस्ट्रक्शन्स लिखे जाते है.
  • Hardware के बिना सॉफ्टवेयर Work नहीं कर सकते हैं और Software के बिना हार्डवेयर Work नहीं सकते हैं.
  • Hardware एक physical डिवाइस है, जो computer के साथ भौतिक रूप से जुड़ा हुवा होता है। Software निर्देशों का एक समूह या program है, जो कंप्यूटर को एक विशेष task करने के लिये Instructions देता है.

FAQ

कंप्यूटर हार्डवेयर क्या है समझाइए?

कंप्यूटर के वे सभी भाग जिनको देख और छू सकते है उन सभी पार्ट्स को कंप्यूटर हार्डवेयर कहा जाता है. इसके उदाहरण जैसे माउस, मॉनिटर, प्रिंटर, रैम, मदरबोर्ड, की बोर्ड इत्यादि.

कंप्यूटर हार्डवेयर कितने प्रकार के होते हैं?

कंप्यूटर हार्डवेयर मुख्य रूप से 6 प्रकार के होते है जिनकी जानकारी हम निचे दे रहे है.
1. इनपुट डिवाइस (Input Device)
2. आउटपुट डिवाइस (Output Device)
3. प्रोसेसिंग डिवाइस (Processing Device)
4. मेमोरी (स्टोरेज) डिवाइस (Memory Device)
5. इंटरनल कंप्यूटर पार्ट्स (Internal computer parts)
6. एक्सटर्नल कंप्यूटर पार्ट्स (External Computer Parts)

हार्डवेयर का क्या कार्य है?

कंप्यूटर में उपस्थित सभी हार्डवेयर पार्ट्स का कार्य अलग-अलग होता है जैसे प्रोसेसिंग डिवाइस का कार्य टास्क को प्रोसेस करना, इनपुट डिवाइस का कार्य डाटा का इनपुट करना और आउटपुट डिवाइस का कार्य आउटपुट देना होता है.

आज का यह पोस्ट कंप्यूटर हार्डवेयर क्या है? (Computer Hardware in Hindi) इसके प्रकार,कार्य और उदाहरण आपको कैसा लगा है आप मुझे कमेंट करके जरुर बताएं. मैं उम्मीद करता हु आपको कंप्यूटर हार्डवेयर की बेसिक जानकारी (Computer Hardware in Hindi) इस पोस्ट के माध्यम से आपको जरुर मिल गया होगा. यदि आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो अपने दोस्तों को जरुर शेयर करें.

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मदरबोर्ड क्या है और कैसे काम करता है? – What is Motherboard in Hindi

motherboard in hindi

Motherboard in Hindi

मदरबोर्ड कंप्यूटर में मौजूद एक “(PCB) Main Printed Circuit Board” है. जो विभिन्न इंटरनल कंपोनेंट्स को आपस में कनेक्ट करता है और बाहरी उपकरणों को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए कनेक्टर्स प्रदान करता है. इसे computer सिस्टम का सबसे important भाग माना जाता है.

motherboard kya hai hindi mein

मदरबोर्ड से जुड़े कुछ इंपोर्टेंट इक्विपमेंट में CPU, Hard disk, RAM, और Input/output devices जैसे Mouse, Keyboard, Monitor, USB devices etc. को जोड़ने के लिए कनेक्टर्स शामिल है. देखा जाये तो कंप्यूटर में पावर सप्लाई करने से लेकर अन्य हार्डवेयर कंपोनेंट्स के बिच कम्युनिकेशन करवाने तक का सारा काम मदरबोर्ड का होता है. यहाँ तक की computer का हर एक Part किसी न किसी तरह से motherboard में जुड़ा होता है.

मदरबोर्ड के कार्य

  • कंप्यूटर सिस्टम में mother board के फंक्शन की बात करें तो सबसे पहले इसका Main काम है कि यह छोटे-छोटे कंपोनेंट जैसे रजिस्टर, ट्रांजिस्टर, चिप, IC इत्यादि को एक दुसरे से जोड़कर सर्किट बनाने का काम करता है.
  • कम्प्यूटर motherboard सहायक उपकरणों को जोडने के लिए location उपलब्ध करवाता है. इसलिए इसे कम्प्यूटर की Backbone मतलब रीड की हड्डी भी कहा जाता हैं.
  • कंप्यूटर की BIOS Setting और Information को सुरक्षित रखता है ताकि Computer आसानी से चालु हो सके.
  • computer सिस्टम का सबसे मुख्य उपकरणों जैसे- Graphic Card, CPU, RAM इत्यादि के अटैचमेंट के लिए जगह एक Device की दूसरे Device के साथ Communication करवाता हैं.
  • यह SMPS या Adapter से आनेवाली Power को अलग-अलग भागों के सभी device तक रिक्वायर्ड पावर सप्लाई पहुंचाने का कार्य करता है। यह कनेक्टेड डिवाइस को पावर सप्लाई पहुँचाता भी है साथ ही उन्हे मैनेज भी करता हैं.

मदरबोर्ड के मुख्य भाग (function)

  1. CPU Socket
  2. Input/output Ports
  3. RAM Slots
  4. North Bridge Chipset
  5. South-Bridge Chipset
  6. Power Connector
  7. BIOS
  8. CMOS Battery
  9. AGP slot
  10. PCI slot
  11. Heat Sink
  12. CPU Power Connector

CPU Socket

ये मदरबोर्ड में लगा सबसे important सॉकेट है, क्युकी इसमें CPU (Central processing unit) यानि कंप्यूटर brain को फिट किया जाता है. अलग- अलग प्रकार के मदरबोर्ड में अलग-अलग प्रकार के CPU लगते है. जैसे ड्यूल कोर प्रोसेसर का मदरबोर्ड i3 प्रोसेसर के मदरबोर्ड (Motherboard in Hindi) से भिन्न होता है. अतः उसके सॉकेट भी अलग होते है.

CPU Socket in Hindi

Input/output Ports

मदरबोर्ड में मौजूद ये पोर्ट्स कंप्यूटर के इनपुट / आउटपुट Device को कंप्यूटर से कनेक्ट करने का काम करते है. इनमे mouse, keyboard, monitor, mic, speaker, USB devices, internet network cable और हेडफोन को जोड़ने के लिए विभिन्न Ports बनाए जाते है।

motherboard port in hindi

RAM Slots

मदरबोर्ड के जिस हिस्से में RAM (random access memory) को लगाया जाता है. उस स्लॉट को RAM Slot कहा जाता है. Ram के हिसाब से मदरबोर्ड में लगने वाला स्लॉट अलग-अलग होता है.

Ram slot in hindi

North Bridge Chipset

North bridge या host bridge एक माइक्रोचिप है, जो सीधे सीपीयू से जुडी होती है. इसका काम RAM, हार्ड डिस्क और PCI डिवाइस को मैनेज करना है.

pc northbridge chipset kya hai

South-Bridge Chipset

इसे IC चिप भी कहते है, जो north-bridge से कनेक्ट होता है. ये सभी इनपुट/आउटपुट functions को कंट्रोल करने का काम करता है. 

southbridge chipset in hindi

Power Connector

ये 20-24 पिन का एक power connector है. जो SMPS यानी Switch Mode Power Supply से कनेक्ट होता है. इसका काम इलेक्ट्रिसिटी खींचना और मदरबोर्ड में पावर सप्लाई करना होता है. आप कह सकते है, कंप्यूटर सिस्टम को operated करने के लिए आवश्यक Electricity कि आपूर्ति का काम इन्ही कनेक्टर द्वारा किया जाता है.

मदरबोर्ड क्या है और कैसे काम करता है? - What is Motherboard in Hindi

BIOS

BIOS का पूरा नाम Basic Input Output System है यह Rom का एक भाग है. BIOS की जरुरत कंप्यूटर को boot up करने के लिए यानी Computer को Start करने में होता है.

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CMOS Battery

CMOS यानी Complementary Metal Oxide Semiconductor ये battery संचालित चिप है, जो date एंड time और हार्डवेयर सेटिंग जैसी इंफॉर्मेशन को Store करके रखती है.

CMOS Battery kya hai hindi mein

AGP slot

AGP का पूरा मतलब Accelerated Graphics Slot होता है , इसका उपयोग video card को system से जोड़ने के लिए किया जाता है. AGP एक high speed स्लॉट है, यह डाटा को high speed पर transfer करता है.

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PCI slot

PCI का पूरा मतलब peripheral component interface होता है. इसका उपयोग कंप्यूटर पर expansion card को डालने के लिया जाता है.

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Heat Sink

एक मेटल डिवाइस  है, जो motherboard के गर्म होने पर हाई टेंपरेचर को absorb कर लेता है. जिससे गर्म हुए parts अधिक गर्म नहीं होते और वे सही तरह से Work कर पाते है.

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CPU Power Connector

कंप्यूटर में CPU को पॉवर देने के लिए मदरबोर्ड में एक कनेक्टर दिया जाता है जिसे CPU Power Connector कहा जाता है. यह 12 वोल्ट का एक कनेक्टर होता जिसका इमेज निचे दे रहे है.

cpu power connector in hindi

मदरबोर्ड का चयन कैसे करे?

आप अपने computer निर्माण की Plan बना रहे हों या अपने वर्तमान pc को upgrade कर रहे हों, अपने motherboard के घटकों को समझना महत्वपूर्ण है। तभी आप एक अच्छा मदरबोर्ड(Motherboard in Hindi) का चयन कर पाएंगे.

मदरबोर्ड अकेले किसी काम का नहीं है, लेकिन computer को ऑपरेट करने के लिए इसका काफी महत्व है. इसका main Work है की कंप्यूटर के माइक्रो चिप को होल्ड करना उसके साथ साथ बाकि सारे कंपोनेंट्स को आपस में जोड़ना।

वो सारी चीज़ें जो की कंप्यूटर को चलने में मदद करता है या फिर इसके परफॉर्मेंस को बढ़ता है वो या तो मदरबोर्ड का ही एक पार्ट होता है या फिर इसके साथ किसी स्लॉट या पोर्ट से जुड़ा हुआ होता है. मदरबोर्ड रिक्वायरमेंट के अनुसार ही इसकी डिजाइन, cases, पावर सप्लाई और size को बनाया जाता है. इसी कारण मदरबोर्ड का चयन काफी सोच विचार करके ही करना चाहिए सभी मदरबोर्ड(Motherboard in Hindi) सभी प्रकार के कॉम्पोनेंट को support नहीं करते।

3. Form Factor क्या है?

किसी भी मदरबोर्ड के लाइट को Form Factor कहते हैं. इसी Form Factor से पता चलता है की किस कंपोनेंट्स को किस जगह रखा जाये और इससे उस computer का डिजाईन पता चलता है. वैसे तो Form Factor के कई स्टैंडर्ड है पर यूजर के रिक्वायरमेंट के अनुसार ही इसे उपयोग किया जाता है.

मदरबोर्ड के Layout या Shape को Motherboard का form factor कहा जाता है.

form factor of motherboard in hindi

4. Chipset क्या है?

एक Chipset किसी भी computer का मिडिल man होता है, जिसके मदद से computer के अन्दर डाटा का ट्रांसफर होता है एक पार्ट से दुसरे पार्ट से. ये माइक्रोप्रोसेसर को कंप्यूटर के दुसरे पार्ट्स से जोड़ता है. एक कंप्यूटर में इसके दो भाग होते हैं जिसे North- south bridge कहते है. कंप्यूटर के सारे parts CPU के साथ इसी Chipset की मदद से कम्युनिकेट करते हैं

Chipset

5. BUS क्या है?

एक Bus का कंप्यूटर में मतलब होता है एक रास्ता जिससे किसी भी सर्किट में एक कंपोनेंट दुसरे के साथ जुड़ता है. किसी भी BUS का स्पीड को Megahertz (MHz) में मापा जाता है. स्पीड से ही मालूम पड़ता है की कितनी Data उस bus से गुजर सकती है. जितनी बेहतर Bus होगी उतनी ही जल्दी और ज्यादा डाटा को ट्रांसफर किया जा सकता है,

मदर बोर्ड के प्रकार

Mother board के कोई प्रकार नहीं है लेकिन इनकी डिजाइन के आधार पर इन्हें दो भागों में बांटा गया है-

  1. Integrated Motherboard
  2. Non-Integrated Motherboard

1. Integrated Motherboard

आज के computer में यही motherboard इस्तेमाल में लाए जाते हैं। जिन mother board में कंप्यूटर के उपकरणों को जोड़ने के लिए अलग से port बनाए जाते हैं उन्हें इंटीग्रेटेड मदरबोर्ड कहते हैं।

मदरबोर्ड के parts को आसानी से change भी किया जा सकता है।

2. Non-Integrated Motherboard

जिस मदरबोर्ड में विभिन्न प्रकार के Device को जोड़ने या लगाने के लिए अलग से पोर्ट्स नहीं होते हैं। ऐसे मदरबोर्ड को Non-Integrated मदरबोर्ड कहा जाता है। स्मार्टफोन और टैबलेट में Non-Integrated मदरबोर्ड का ही इस्तेमाल होता है। जिसे आवश्यकता अनुसार सुधार नहीं किया जा सकता है।

मदरबोर्ड की विशेषताये

  • मदरबोर्ड एक सर्किट board है जिसके उप्पर सभी महत्वपूर्ण इंटर्नल कंप्यूटर हार्डवेयर जैसे – सीपीयू इत्यादि लगे होते है।
  • मदरबोर्ड इससे जुड़े सभी कंप्यूटर घटकों के लिए जरुरी पावर सप्लाई का काम भी करती है. अर्थात computer को चालू करने से लेकर ऑपरेट करने तक सभी important कार्यो में मदरबोर्ड की अहम भूमिका है।
  • Video Card, Sound Card, Hard drive, को ठीक से काम करने के लिए मदरबोर्ड इसे अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।
  • मदरबोर्ड में कई स्लॉट्स लगे होते है, जो एक्सटर्नल डिवाइस जैसे – माउस, कीबोर्ड, मॉनीटर और प्रिंटर आदि को कंप्यूटर में जोड़ने का काम करते है. जिससे आप कंप्यूटर को इनपुट देते है और आउटपुट प्रदान करते है.
  • यदि हम सीपीयू को कंप्यूटर का brain मानते है, तो motherboard उसका नर्वस system है.
  • एक मदरबोर्ड ना सिर्फ उन कंपोनेंट्स के बैठने के लिए जगह प्रदान करता है, बल्कि उनका CPU के साथ कम्युनिकेशन भी कराता है , जिससे वे डाटा को आपस में शेयर कर पाते है.

मदरबोर्ड को बनाने वाली मुख्य कम्पनीया

  • Intel
  • ASUS
  • Gigabyte Technology
  • ACER
  • AMDEVGA Corporation
  • MSI (Micro Star International)
  • Bistar
  • ABIT
  • AS Rock
  • ESC

FAQ

मदरबोर्ड के कार्य क्या हैं?

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उत्तर – मदरबोर्ड कंप्यूटर का ही भाग है. जिसके द्वारा कंप्यूटर के सभी उपकरणों के एक साथ जोड़ने का कार्य करता है. जितने भी डिवाइस कंप्यूटर से जुड़े होते है उसको मदरबोर्ड पॉवर सप्लाई करता है.

मदरबोर्ड के प्रकार 

उत्तर – 1.एकीकृत मदरबोर्ड Integrated Motherboards
2. गैर-एकीकृत मदरबोर्ड Non-Integrated Motherboards

मदरबोर्ड के मुख्य भाग

उत्तर – CPU, RAM, HDD, Monitor, BIOS, CMOS, Mouse, Keyboard आदि जुड़े रहते हैं।

उम्मीद है की आपको यह लेख Motherboard क्या है? (Motherboard in Hindi) पसंद आया होगा. यदि आपके मन में मदरबोर्ड (Motherboard in Hindi) के बारें में कुछ सवाल या सुझाव हो तो आप हमको कमेंट कर के जरुर बताये.

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Microprocessor क्या है? और इसके विकास, भाग, कार्य, प्रकार और जनरेशन के हिन्दी नोट्स / Processor in Hindi

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प्रोसेसर एक प्रकार का चीप (chip) होता हैं जो की मोबाइल, computer, लैपटॉप आदि गैजेट्स में प्रयोग किया जाता हैं और सभी गैजेट्स का प्रोसेसर एक प्रमुख अंग होता हैं। आज के इस पोस्ट में हम आपको प्रोसेसर क्या है?(What is Processor in Hindi) प्रोसेसर के इतिहास, विकास, भाग, कार्य और जनरेशन के बारें में विस्तार से चर्चा करेंगे। यदि आप कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट है तो माइक्रो प्रोसेसर का यह हिन्दी नोट्स आपके लिए बहुत ही फायदेमंद हो सकता है।

प्रोसेसर क्या हैं (what is processor in Hindi?)

प्रोसेसर एक प्रकार का चीप (chip) होता हैं जो की मोबाइल, computer, लैपटॉप आदि गैजेट्स में प्रयोग किया जाता हैं और सभी गैजेट्स का प्रोसेसर एक प्रमुख अंग होता हैं। ये हार्डवेयर और software के बीच होने वाले गतिविधियों को समझाता हैं। प्रोसेसर हमारे और computer के बीच होने वाली हर गतिविधियों को समझता हैं तब जाकर computer हमारी दो हुई commands को समझ पाता हैं और उस पपर काम करके हमें जो जानकारी चाहिए उसे screen पर show करता हैं।

micro processor in hindi

हमारे और computer के बीच का माध्यम हैं प्रोसेसर , हमारे दिए गए commands को computer को इसके भाषा में समझाता हैं और फिर हमारा काम computer सॉफ्टवेयर की मदद से करके देता हैं। जो हम माउस या keyboard के द्वारा निर्देश देते हैं उसके आधार पर, करके देता हैं। इसीलिए प्रोसेसर को सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट कहते हैं यानी CPU कहते हैं। और इसे computer, Mobile का दिमाक भी कहा जाता हैं।

प्रोसेसर का इतिहास (History)

प्रोसेसर का इतिहास नीचे दिया गया हैं यह बहुत अर्से से चला आ रहा हैं बहुत सारी कंपनियों ने बहुत सारे प्रोसेसर बनाए तथा नए नए तकनीकों का इस्तेमाल किया जिससे कार्य करने की क्षमता को बढ़ाया जा सके और आज भी बहुत सारे नए नए प्रोसेसर लॉन्च किए जा रहे है आज के उपयोग के आधार पर design किया हुआ। नीचे प्रोसेसर के इतिहास की सूची हैं जिससे पता लगाया जा सकता हैं की कैसे प्रोसेसर continue upgrade होते जा रहा हैं समय के साथ साथ चल रहा हैं।

  1. 1823 : बैरन जॉन्स जैकब बर्जेलियस ने सिलिकॉन (सी) की खोज की, जो आज प्रोसेसर का मूल घटक है।
  2. 1903 : निकोला टेस्ला ने 1903 में “गेट्स” या “स्विच” नामक इलेक्ट्रिकल लॉजिक सर्किट का पेटेंट कराया।
  3. 1948 : 1948 में जॉन बार्डीन , वाल्टर ब्रेटन और विलियम शॉक्ले ने पहले ट्रांजिस्टर का पेटेंट कराया।
  4. 1958 : फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर के रॉबर्ट नॉयस और टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स के जैक किल्बी द्वारा पहला कामकाजी एकीकृत सर्किट विकसित किया गया था । पहले आईसी का प्रदर्शन 12 सितंबर, 1958 को हुआ था।
  5. 1965 : 19 अप्रैल, 1965 को, गॉर्डन मूर ने एकीकृत परिपथों के बारे में एक अवलोकन किया जिसे मूर के नियम के रूप में जाना गया ।
  6. 1968 : Intel Corporation की स्थापना 1968 में रॉबर्ट नोयस और गॉर्डन मूर द्वारा की गई थी।
  7. 1969 : एएमडी (एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेस) की स्थापना 1 मई, 1969 को हुई थी।
  8. 1971 : टेड हॉफ की मदद से इंटेल ने 15 नवंबर, 1971 को दुनिया का पहला माइक्रोप्रोसेसर , इंटेल 4004 पेश किया। 4004 में 2,300 ट्रांजिस्टर थे, 60,000 ओपीएस (ऑपरेशन प्रति सेकंड) किए, 640 बाइट्स मेमोरी को संबोधित किया, और लागत $200.00 थी।
  9. 1972 : इंटेल ने 1 अप्रैल, 1972 को 8008 प्रोसेसर पेश किया।
  10. 1974 : मोटोरोला ने अपना पहला प्रोसेसर 1974 में पेश किया, MC6800, एक 8-बिट प्रोसेसर जिसमें 1-2 मेगाहर्ट्ज क्लॉक फ्रीक्वेंसी होती है।
  11. 1974 : इंटेल की बेहतर माइक्रोप्रोसेसर चिप को 1 अप्रैल, 1974 को पेश किया गया था; 8080 कंप्यूटर उद्योग में एक मानक बन गया ।
  12. 1975 : MOS Technology 6502 प्रोसेसर को 1975 में Intel 8080 के तेज और कम खर्चीले संस्करण के रूप में पेश किया गया था। 6502 का उपयोग वीडियो गेम कंसोल में किया गया था, जैसे अटारी 2600 और निंटेंडो एंटरटेनमेंट सिस्टम, और कंप्यूटर, जैसे Apple II और कमोडोर 64।
  13. 1975 : MN1610 प्रोसेसर 1975 में Panafacom द्वारा जारी किया गया था। MN1610 पहला सिंगल-चिप 16-बिट प्रोसेसर था, जैसा कि Fujitsu द्वारा रिपोर्ट किया गया था ।
  14. 1976 : Intel ने मार्च 1976 में 8085 प्रोसेसर पेश किया।
  15. 1978 : Intel 8086 को 8 जून 1978 को पेश किया गया था।
  16. 1979 : इंटेल 8088 को 1 जून 1979 को जारी किया गया था।
  17. 1979 : मोटोरोला 68000, एक 16/ 32 -बिट प्रोसेसर, 1979 में जारी किया गया था और बाद में इसे Apple Macintosh और Amiga कंप्यूटरों के लिए प्रोसेसर के रूप में चुना गया था।
  18. 1982 : Intel 80286 को 1 फरवरी 1982 को पेश किया गया था।
  19. 1985 : Intel ने अक्टूबर 1985 में पहला 80386 पेश किया।
  20. 1988 : इंटेल 80386SX को 1988 में पेश किया गया था।
  21. 1991 : AMD ने मार्च 1991 में AM386 माइक्रोप्रोसेसर परिवार की शुरुआत की।
  22. 1991 : Intel ने Intel 486SX चिप को अप्रैल में $258.00 में बेचने वाले पीसी बाजार में कम लागत वाले प्रोसेसर लाने में मदद करने के लिए पेश किया।
  23. 1992 : इंटेल ने 2 मार्च, 1992 को 486DX2 चिप जारी की, जिसमें क्लॉक डबलिंग क्षमता थी जो उच्च परिचालन गति उत्पन्न करती थी।
  24. 1993 : इंटेल ने 22 मार्च, 1993 को पेंटियम प्रोसेसर जारी किया। प्रोसेसर एक 60 मेगाहर्ट्ज प्रोसेसर था, जिसमें 3.1 मिलियन ट्रांजिस्टर शामिल थे, और यह 878.00 डॉलर में बिकता है।
  25. 1994 : इंटेल ने 7 मार्च, 1994 को इंटेल पेंटियम प्रोसेसर की दूसरी पीढ़ी जारी की।
  26. 1995 : इंटेल ने नवंबर 1995 में इंटेल पेंटियम प्रो पेश किया ।
  27. 1996 : इंटेल ने 4 जनवरी, 1996 को 60 मेगाहर्ट्ज बस के साथ पेंटियम 150 मेगाहर्ट्ज और 66 मेगाहर्ट्ज बस के साथ 166 मेगाहर्ट्ज की उपलब्धता की घोषणा की ।
  28. 1996 : AMD ने K5 प्रोसेसर को 27 मार्च, 1996 को 75 MHz से 133 MHz की गति और 50 MHz, 60 MHz, या 66 MHz की बस गति के साथ पेश किया। K5 AMD द्वारा पूरी तरह से इन-हाउस विकसित किया गया पहला प्रोसेसर था।
  29. 1997 : एएमडी ने अप्रैल 1997 में 166 मेगाहर्ट्ज से 300 मेगाहर्ट्ज की गति और 66 मेगाहर्ट्ज बस गति के साथ अपनी के6 प्रोसेसर लाइन जारी की।
  30. 1997 : Intel Pentium II को 7 मई 1997 को पेश किया गया था।
  31. 1998 : AMD ने 28 मई, 1998 को अपनी नई K6-2 प्रोसेसर लाइन पेश की, जिसमें 266 MHz से 550 MHz की गति और 66 MHz से 100 MHz की बस गति थी। K6-2 प्रोसेसर AMD के K6 प्रोसेसर का एक उन्नत संस्करण था।
  32. 1998 : Intel ने जून 1998 में पहला Xeon प्रोसेसर, Pentium II Xeon 400 (512 K या 1 M कैश, 400 MHz, 100 MHz FSB) जारी किया।
  33. 1999 : Intel ने 4 जनवरी, 1999 को Celeron 366 MHz और 400 MHz प्रोसेसर जारी किए।
  34. 1999 : AMD ने अपना K6-III प्रोसेसर 22 फरवरी, 1999 को 400 MHz या 450 MHz की गति और 66 MHz से 100 MHz की बस गति के साथ जारी किया। इसमें एक ऑन-डाई L2 कैश भी शामिल है।
  35. 1999 : इंटेल पेंटियम III 500 मेगाहर्ट्ज को 26 फरवरी, 1999 को जारी किया गया था।
  36. 1999 : इंटेल पेंटियम III 550 मेगाहर्ट्ज को 17 मई, 1999 को जारी किया गया था।
  37. 1999 : एएमडी ने 23 जून, 1999 को एथलॉन प्रोसेसर श्रृंखला की शुरुआत की। एथलॉन का उत्पादन अगले छह वर्षों के लिए 500 मेगाहर्ट्ज से 2.33 गीगाहर्ट्ज तक की गति में किया जाएगा।
  38. 1999 : इंटेल पेंटियम III 600 मेगाहर्ट्ज को 2 अगस्त 1999 को जारी किया गया था।
  39. 1999 : Intel Pentium III कॉपरमाइन श्रृंखला को पहली बार 25 अक्टूबर, 1999 को पेश किया गया था।
  40. 2000 : Intel ने 4 जनवरी 2000 को 66 MHz बस प्रोसेसर के साथ Celeron 533 MHz जारी किया।
  41. 2000 : एएमडी ने पहली बार 19 जून, 2000 को 600 मेगाहर्ट्ज से 1.8 गीगाहर्ट्ज की गति और 200 मेगाहर्ट्ज से 266 मेगाहर्ट्ज की बस गति के साथ ड्यूरॉन प्रोसेसर जारी किया। Duron को उसी K7 आर्किटेक्चर पर एथलॉन प्रोसेसर के रूप में बनाया गया था।
  42. 2000 : इंटेल ने 28 अगस्त को घोषणा की कि वह अपने 1.3 GHz पेंटियम III प्रोसेसर को एक गड़बड़ी के कारण वापस बुलाएगा। इन प्रोसेसर वाले उपयोगकर्ताओं को रिकॉल के बारे में अतिरिक्त जानकारी के लिए अपने वेंडर से संपर्क करना चाहिए।
  43. 2001 : 3 जनवरी 2001 को, Intel ने 100 MHz बस के साथ 800 MHz Celeron प्रोसेसर जारी किया।
  44. 2001 : 3 जनवरी 2001 को, इंटेल ने 1.3 गीगाहर्ट्ज़ पेंटियम 4 प्रोसेसर जारी किया।
  45. 2001 : एएमडी ने 9 अक्टूबर, 2001 को एक नई ब्रांडिंग योजना की घोषणा की। प्रोसेसर को उनकी घड़ी की गति से पहचानने के बजाय, एएमडी एथलॉन एक्सपी प्रोसेसर 1500+, 1600+, 1700+, 1800+, 1900+, 2000+, आदि के मोनिकर धारण करेंगे। प्रत्येक उच्च मॉडल संख्या एक उच्च घड़ी की गति का प्रतिनिधित्व करती है।
  46. 2002 : Intel ने Celeron 1.3 GHz को 100 MHz बस और 256 kB लेवल 2 कैश के साथ रिलीज़ किया।
  47. 2003 : इंटेल पेंटियम एम को मार्च 2003 में पेश किया गया था।
  48. 2003 : AMD ने 22 अप्रैल, 2003 को 1.4 GHz से 2.4 GHz और 1024 KB L2 कैश की गति के साथ पहला सिंगल-कोर ओपर्टन प्रोसेसर जारी किया।
  49. 2003 : AMD ने पहला Athlon 64 प्रोसेसर, 3200+ मॉडल और पहला Athlon 64 FX प्रोसेसर, FX-51 मॉडल 23 सितंबर, 2003 को जारी किया।
  50. 2004 : AMD ने 28 जुलाई, 2004 को 1.5 GHz से 2.0 GHz क्लॉक स्पीड और 166 MHz बस स्पीड के साथ पहला Sempron प्रोसेसर जारी किया।
  51. 2005 : AMD ने 21 अप्रैल, 2005 को अपना पहला डुअल-कोर प्रोसेसर, एथलॉन 64 X2 3800+ (2.0 GHz, 512 KB L2 कैश प्रति कोर) जारी किया।
  52. 2006 : AMD ने 9 जनवरी, 2006 को अपना नया Athlon 64 FX-60 प्रोसेसर जारी किया, जिसमें 2x 1024 KB L2 कैश शामिल है।
  53. 2006 : इंटेल ने 22 अप्रैल, 2006 को कोर 2 डुओ प्रोसेसर E6320 (4 M कैशे, 1.86 GHz, 1066 MHz FSB) जारी किया।
  54. 2006 : Intel ने 27 जुलाई, 2006 को Intel Core 2 Duo प्रोसेसर को Core 2 Duo प्रोसेसर E6300 (2 M कैश, 1.86 GHz, 1066 MHz FSB) के साथ पेश किया।
  55. 2006 : Intel ने अगस्त 2006 में लैपटॉप कंप्यूटर के लिए Intel Core 2 Duo प्रोसेसर को Core 2 Duo प्रोसेसर T5500 और अन्य Core 2 Duo T सीरीज प्रोसेसर के साथ पेश किया।
  56. 2007 : Intel ने जनवरी 2007 में कोर 2 क्वाड प्रोसेसर Q6600 (8 M कैशे, 2.40 GHz, 1066 MHz FSB) जारी किया।
  57. 2007 : Intel ने 21 जनवरी, 2007 को Core 2 Duo प्रोसेसर E4300 (2 M कैशे, 1.80 GHz, 800 MHz FSB) जारी किया।
  58. 2007 : Intel ने अप्रैल 2007 में कोर 2 क्वाड प्रोसेसर Q6700 (8 M कैशे, 2.67 GHz, 1066 MHz FSB) जारी किया।
  59. 2007 : Intel ने 22 अप्रैल, 2007 को Core 2 Duo प्रोसेसर E4400 (2 M कैशे, 2.00 GHz, 800 MHz FSB) जारी किया।
  60. 2007 : AMD ने Athlon 64 X2 प्रोसेसर लाइन का नाम बदलकर Athlon X2 कर दिया और 1 जून, 2007 को ब्रिसबेन सीरीज़ (1.9 से 2.6 GHz, 512 KB L2 कैश) में उस लाइन में पहला रिलीज़ किया।
  61. 2007: Intel ने 22 जुलाई, 2007 को Core 2 Duo प्रोसेसर E4500 (2 M कैशे, 2.20 GHz, 800 MHz FSB) जारी किया।
  62. 2007: Intel ने 21 अक्टूबर, 2007 को Core 2 Duo प्रोसेसर E4600 (2 M कैशे, 2.40 GHz, 800 MHz FSB) जारी किया।
  63. 2007 : एएमडी ने 19 नवंबर, 2007 को पहला फिनोम एक्स4 प्रोसेसर (2 एम कैश, 1.8 गीगाहर्ट्ज से 2.6 गीगाहर्ट्ज, 1066 मेगाहर्ट्ज एफएसबी) जारी किया।
  64. 2008 : Intel ने मार्च 2008 में Core 2 Quad प्रोसेसर Q9300 और Core 2 Quad प्रोसेसर Q9450 जारी किया।
  65. 2008 : Intel ने 2 मार्च, 2008 को Core 2 Duo प्रोसेसर E4700 (2 M कैशे, 2.60 GHz, 800 MHz FSB) जारी किया।
  66. 2008 : AMD ने 27 मार्च, 2008 को पहला Phenom X3 प्रोसेसर (2 M कैश, 2.1 GHz से 2.5 GHz, 1066 MHz FSB) जारी किया। 
  67. 2008 : इंटेल ने 19 अक्टूबर, 2008 को कोर 2 डुओ प्रोसेसर E7400 (3 M कैश, 2.80 GHz, 1066 MHz FSB) जारी किया।
  68. 2008 : Intel ने नवंबर 2008 में पहला Core i7 डेस्कटॉप प्रोसेसर जारी किया: i7-920, i7-940, और i7-965 एक्सट्रीम एडिशन।
  69. 2009 : AMD ने 8 जनवरी, 2009 को पहला Phenom II X4 (क्वाड-कोर) प्रोसेसर (6 M कैश, 2.5 से 3.7 GHz, 1066 MHz, या 1333 MHz FSB) जारी किया।
  70. 2009 : AMD ने 9 फरवरी, 2009 को पहला Phenom II X3 (ट्रिपल-कोर) प्रोसेसर (6 M कैश, 2.5 से 3.0 GHz, 1066 MHz, या 1333 MHz FSB) जारी किया।
  71. 2009 : Intel ने अप्रैल 2009 में कोर 2 क्वाड प्रोसेसर Q8400 (4 M कैश, 2.67 GHz, 1333 MHz FSB) जारी किया।
  72. 2010 : Intel ने जनवरी 2010 में कोर 2 क्वाड प्रोसेसर Q9500 (6 M कैशे, 2.83 GHz, 1333 MHz FSB) जारी किया।
  73. 2011 : इंटेल ने जनवरी 2011 में चार कोर, i5-2xxx श्रृंखला के साथ सात नए कोर i5 प्रोसेसर जारी किए।
  74. 2011 : AMD ने 7 सितंबर, 2011 को अपनी A4 लाइन, A4-3300 और A4-3400 में पहला डेस्कटॉप प्रोसेसर जारी किया।
  75. 2012 : AMD ने 1 अक्टूबर, 2012 को अपनी A10 लाइन, A10-5700 और A10-5800K में पहला डेस्कटॉप प्रोसेसर जारी किया।
  76. 2013 : AMD ने 28 जनवरी, 2013 को Athlon II X2 280 जारी किया। इसमें दो कोर हैं और यह 3.6 GHz पर चलता है।
  77. 2013 : Intel ने BGA-1364 सॉकेट का उपयोग करने के लिए अपना पहला प्रोसेसर जारी किया और इसमें Iris Pro ग्राफ़िक्स 5200 GPU शामिल है। जून 2013 में जारी किया गया, यह 3.2 गीगाहर्ट्ज पर चलता है और इसमें 6 एमबी एल3 कैश है।
  78. 2014 : AMD ने अप्रैल 2014 में सॉकेट AM1 आर्किटेक्चर और संगत प्रोसेसर पेश किया, जैसे Sempron 2650।
  79. 2014 : एएमडी ने जून 2014 में अपना पहला प्रो ए सीरीज एपीयू प्रोसेसर, ए6 प्रो-7050बी, ए8 प्रो-7150बी और ए10 प्रो-7350बी जारी किया। वे एक या दो कोर पर फीचर करते हैं और 1.9 गीगाहर्ट्ज से 2.2 गीगाहर्ट्ज तक चलते हैं।
  80. 2017 : AMD ने 2 मार्च, 2017 को अपना पहला Ryzen 7 प्रोसेसर, 1700, 1700X और 1800X मॉडल जारी किया। उनके पास आठ कोर हैं, जो 3.0 से 3.6 GHz पर चल रहे हैं, और 16 एमबी L3 कैश की सुविधा है।
  81. 2018 : Intel ने अप्रैल 2018 में पहला Core i9 मोबाइल प्रोसेसर, i9-8950HK जारी किया। यह BGA 1440 सॉकेट का उपयोग करता है, जो 2.9 GHz पर चलता है, इसमें छह कोर हैं, और इसमें 12 MB L3 कैश है।
  82. 2020 : NVIDIA ने 13 सितंबर, 2020 को $40 बिलियन में आर्म का अधिग्रहण करने की घोषणा की।

प्रोसेसर का कार्य (work of processor)

प्रोसेसर computer में बहुत सारे इनपुट आउटपुट operation perform करता हैं वो इनपुट लेता हैं और उसे आगे प्रोसेस कर सही आउटपुट provide करता हैं। computer ऑन होने से लेकर बंद करने तक जितने भी कार्य करता हैं सभी को कंट्रोल करता हैं प्रोसेसर। सभी काम शुरू होने से लेकर पुरा होने तक पूरी जिम्मेदारी प्रोसेसर की होती हैं। प्रोसेसर एक समय में बहुत सारे task perform कर सकता हैं billions of instructions को ऑपरेट कर सकता हैं एक समय में प्रोसेसर। इसकी स्पीड बहुत तेज़ होती हैं इनपुट देते साथ ये तुरंत उसको समझ के computer को आगे कमांड देता हैं जिससे हमे तुरंत आउटपुट मिल जाता हैं।

micro processor in hindi

कौन कौन से company प्रोसेसर बनाते हैं?

आज के समय में बहुत सारी कंपनी processor बनाती हैं लेकिन कुछ प्रमुख कंपनियां हैं। जिनके नाम हम निचे दे रहे है।

  • Intel
  • ADM
  • Qualcomm
  • NVIDA
  • IBM
  • Samsung
  • Hewlett Packard (HP)
  • Motorola

इनके अलावा भी बहुत सारी कंपनीज़ है जो processor बनाती हैं। दोस्तो इन सारी कम्पनियों में से intel और AMD की सबसे ज्यादा डिमांड होती हैं। क्योंकि ये कंपनी अच्छा प्रोसेसर बनाती हैं। और निरंतर प्रोसेसर की बेहतर से बेहतर बनाने की कोशिश में लगी रहती हैं। इसलिए इसकी डिमांड market में बहुत ज्यादा रहती हैं साथ ही ये reliable होते हैं। इनका प्रोसेसर शुरुआत से चलते आ रहा हैं और कोई भी परेशानी देखने को नहीं मिली अभी तक इसलिए लोगों की पहली पसंद बनी हुई हैं ये दोनो कंपनीज़।

CPU in hindi

Intel के कुछ प्रोसेसर I series के उदाहरण हैं :- i3,i5,i7,i9 etc.

प्रोसेसर के भाग (parts of processor)

दोस्तो हम देखते हैं प्रोसेसर के कितने भाग होते हैं जिससे वो basic ऑपरेशन perform करता हैं या कोई भी तरह के काम को करने के लिए सक्षम होता हैं। प्रोसेसर के अंदर भी बहुत सारे डिवीज़न होते है जो की अलग अलग कामों को करने में सक्षम होते है।

cpu part in hindi

1. ALU (अरिथमेटिक लॉजिक यूनिट)

इसका पुरा नाम हैं आरिथमेटिक लॉजिक यूनिट, ये computer में होने वाली सभी मैथेमेटिकल operation को perform करती हैं जैसे प्लस +, माइनस – , मल्टीप्लिकेशन*, डिवीजन/ जैसे और भी बहुत सारे काम करता हैं ALU को दो पार्ट में बाटा जाता हैं एक हैं आरिथमैटिक यूनिट और दूसरा हैं लॉजिक यूनिट । यहां पर आरिथमेटिक यूनिट तो मैथेमेटिकल काम करता हैं और लॉजिकल यूनिट सारे लॉजिकल काम करता हैं जैसे comparison less than, greater than, equal ये सारे काम करता हैं।

2. CU (कंट्रोल यूनिट)

इसका पुरा नाम हैं कंट्रोल यूनिट । ये प्रोसेसर का एक बहुत ही important part हैं ये सारे प्रोसेस को कंट्रोल करने का काम करता हैं।डाटा कहां से लेना है उसको स्टोरेज डिवाइस में कब डालना है एलयू को एक बार डेटा कब लेना है और डेटा का क्या करना है और अंतिम परिणाम को आउटपुट डिवाइस तक कैसे भेजना है यह सारे काम कंप्यूटर सिस्टम के कंट्रोल यूनिट (CU) से ही संभव होते हैं वह प्रोग्राम निर्देशों को सेलेक्ट करता है उनका समझता है तथा कंट्रोल यूनिट पूरी सिस्टम की कार्यप्रणाली को निर्देशित करने का काम करता है और प्रोग्राम का पालन करने में सक्षम होता है।

3. Registers (रजिस्टर)

यह एक स्टोरेज डिवाइस होते है जिनके अंदर तुरंत use किया जाने वाला डाटा स्टोर करके रखते हैं ये बहुत फास्ट मेमोरी होते हैं तथा इनकी स्टोरेज क्षमता कम होती हैं। प्रोसेसर में बहुत सारे रजिस्टर्स लगे होते हैं जो अभी current प्रोग्राम या डाटा को स्टोर करने का काम करते हैं।

प्रोसेसर की क्लॉक स्पीड क्या है? (clock speed)

यहां पर क्लॉक स्पीड से ये मतलब हैं की प्रोसेसर को किसी एक इंस्ट्रक्शन को ready करने में कितना समय लगता हैं जितना समय लगता हैं उसे ही उसकी क्लॉक स्पीड कहते हैं इसे गीगाहर्ट्ज में मापते हैं ।यहां पर जितना अधिक क्लॉक स्पीड होगा उतना ही अच्छा होगा क्योंकि उतने ही जल्दी instruction तैयार होगा और यदि जल्दी तैयार हुआ तो जल्दी आउटपुट देगा जिससे प्रोसेसर की प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ेगी। और ये हमारे सिस्टम के परफॉर्मेंस को बढ़ाएगा।

Note: प्रोसेसर के ताकत को गीगाहर्टज (GHz) से मापा जाता है अर्थात प्रोसेसर जितने ज्यादा गीगाहर्टज (GHz) का होगा वह उतना ही शक्तिशाली और महंगा होगा।

प्रोसेसर मे core क्या हैं? (what is core in processor)

प्रोसेसर में कोर प्रोसेसर की पावर को दर्शाता हैं कितनी क्षमता का हैं अगर सिंगल कोर हैं तो या डबल कोर हैं तो कितनी क्षमता का है मतलब यह capacity बताता हैं प्रोसेसर की जो की कोर के माध्यम से decide किया जाता हैं यदि प्रोसेसर single core का होगा तो वो heavy काम नहीं कर पाएगा  और आपका computer या फिर मोबाइल फोन hang हो जायेगा।

इसीलिए दोस्तों महंगे computer में मोबाइल में 4core, 6 core, 8core प्रोसेसर होता हैं जिसके कारण इसके काम करने की क्षमता बहुत अधिक बढ़ जाती हैं। तो आइए जानते हैं कोर कितने प्रकार के होते हैं।

  • Dual core processor – dual core प्रोसेसर  इसका मतलब है 2 कोर प्रोसेसर।
  • Quad core processor – quad core processor का मतलब होता है 4 कोर प्रोसेसर ।
  • Hexa core processor – hexa core processor का मतलब हैं 6 कोर प्रोसेसर।
  • Octa core processor – octa core processor का मतलब हैं 8 कोर प्रोसेसर।
  • Deca core processor – deca core processor का मतलब हैं 10 कोर प्रोसेसर।

जैसे जैसे ये प्रोसेसर की size बढ़ती जाती हैं इसकी capacity या कार्य करने की क्षमता भी बढ़ जाती हैं। जिस तरह से पानी को लीटर में, बिजली को वाट में मापते हैं उसी प्रकार प्रोसेसर को गीगाहर्ट्ज में मापते हैं । जिस processor में जितने अधिक गीगाहर्ट्स होंगे वह प्रोसेसर उतना ही ज्यादा better होगा।

प्रोसेसर कैसे काम करता हैं? (work)

प्रोसेसर एक हार्डवेयर हैं जो की कंप्यूटर का एक अभिन्न हिस्सा है इसे कंप्यूटर का मस्तिष्क कहते हैं ये बहुत सारे काम करता हैं जब हम अपने computer को कोई कमांड देते हैं ये तुरंत उसे समझकर computer को देता हैं तथा प्रोसेस होने के बाद तुरंत आउटपुट भेज देता हैं। ये इसी प्रकार सभी इनपुट आउटपुट का काम को करता हैं। ये सारे काम को करने के लिए इसे कुछ steps की हेल्प लेनी पड़ती हैं –

  • Fetch – इस स्टेज में जब कोई इनपुट दिया जाता हैं computer को तो ये प्रोसेसर उसे सबसे पहले fetch करता हैं या कहें तो उसे receive करता हैं और पूरे इंस्ट्रक्शन को अच्छे से देखता हैं और समझने की कोशिश करता हैं। Fetch करने के बाद ये अगले स्टेज में जाता हैंइन्हें ये एक IR यानी Instruction register में रखते हैं।
  • Decode – fetch करने के बाद डाटा को decode करता हैं ये decoder इन instruction को signals’ या Binary form (0,1) convert करके CPU के दूसरे पार्ट arithmatic logic unit के पास action लेने के लिये भेज देता है।
  • Execute – डिकोड करने के बाद ये instruction को एक्जिक्यूट करता हैं।और ये instruction को execute करके output generate करता है फिर उसे दुबारा मेमोरी में भेजा जाता है जो इसे कंट्रोल और मैनेज करती है।

प्रोसेसर के जेनरेशन क्या हैं? (generations)

प्रोसेसर का जेनरेशन अर्थात् हर साल प्रोसेसर अलग अलग क्वालिटीज के साथ अपग्रेट होकर मार्केट में आता हैं कुछ नए फीचर्स के साथ इसे ही हम प्रोसेसर का जेनरेशन कहते हैं जैसे की intel हर साल नए नए फीचर्स डालके प्रोसेसर अपग्रेड करते जा रहा हैं 2010 से अभी तक, जिसमे हर वर्जन पहले वाले प्रोसेसर से कई गुना तेज और विश्वसनीय हैं आइए जानते हैं कौन कौन से प्रोसेसर आए हैं।

  • Intel i3 1st generation
  • Intel i3 2nd generation
  • Intel i3 3rd generation
  • Intel i3 4th generation
  • Intel i3 5th generation
  • Intel i3 6th generation
  • Intel i3 7th generation
  • Intel i5 1st generation

ये सारे पप्रोसेसर के जेनरेशन लॉन्च किए हैं जो हर साल अपग्रेड होते हैं, जितना ज्यादा अपग्रेड होगा उतना ही अच्छा काम करेगा प्रोसेसर और बहुत सारे फीचर्स के साथ काम करेगा। यही प्रोसेसर के जेनरेशन h जो दिन ब दिन विस्तृत होते जा रहें हैं।

FAQ

माइक्रोप्रोसेसर क्या है समझाइए

Microprocessor क्या है? और इसके विकास, भाग, कार्य, प्रकार और जनरेशन के हिन्दी नोट्स / Processor in Hindi

माइक्रो प्रोसेसर एक प्रकार का चिप है जो कंप्यूटर में प्रोसेसिंग के लिए उपयोग किया जाता है. यह विभिन्न प्रकार के होते है जैसे इंटेल i3,i5,i7,i9 इत्यादि.

माइक्रो प्रोसेसर कितने प्रकार के होते हैं?

Microprocessor क्या है? और इसके विकास, भाग, कार्य, प्रकार और जनरेशन के हिन्दी नोट्स / Processor in Hindi

माइक्रो प्रोसेसर विभिन्न प्रकार के होते है जैसे
4 बिट के प्रोसेसर ( intel 404 4004),
8 बिट के प्रोसेसर(Motorola 6800, intel 008,8080,8085),
16 बिट के प्रोसेसर(Intel 8086,8088,80186,80286),
32 बिट के प्रोसेसर(Intel PENTIUM, 80386,80486,80387),
64 बिट के प्रोसेसर(Intel Pentium, dual-core, core to duo, Core i3, Core i5, and Core i7),

माइक्रोप्रोसेसर के क्या कार्य हैं?

माइक्रो प्रोसेसर को प्रोसेसिंग डिवाइस कहा जाता है कंप्यूटर में इसका मुख्य कार्य किसी भी टास्क की प्रोसेसिंग करना इसका मुख्य कार्य है. माइक्रो प्रोसेसर को ही cpu या प्रोसेसर भी कहा जाता है.

सबसे पावरफुल प्रोसेसर कौन सा है?

सबसे पावरफुल प्रोसेसर की श्रेणी में एप्पल का A सीरीज का A13 प्रोसेसर को माना जाता है.

माइक्रोप्रोसेसर के तीन मुख्य घटक क्या हैं?

माइक्रो प्रोसेसर के तिन महत्वपूर्ण घटक में ALU, CU और ALU शामिल है.

आज आपने क्या सिखा

आज के इस पोस्ट में हमने आपको बताया की माइक्रोप्रोसेसर क्या है? (Processor in Hindi) माइक्रो प्रोसेसर का विकास, भाग, कार्य, प्रकार और जनरेशन के हिन्दी नोट्स / Processor in Hindi . दोस्तों उम्मीद करता हु यह पोस्ट आपको अच्छा लगा होगा. यदि आपका कोई सवाल है तो पोस्ट में कमेंट जरुर करें.

कंप्यूटर के विभिन्न सब्जेक्ट के हिन्दी नोट्स और बिज़नस आइडियाज / स्टार्टअप आइडियाज की जानकारी के लिए आप हमारे Youtube चैनल computervidya और nayabusiness.in वेबसाइट में विजिट कर सकते है. धन्यवाद्

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम (DOS) क्या है? डॉस के वर्शन और कमांड के हिन्दी नोट्स / DOS in Hindi

ms dos kya hai hindi

माइक्रोसॉफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम एक फ्री ऑपरेटिंग सिस्टम है. डॉस सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम है तो कमांड लाइन में कार्य करता है. आज के इस लेख में हम आपको disk operating system in Hindi (Disk Operation system क्या हैं।) के बारे में विस्तार से बताएंगे, साथ ही दोस्तो disk operating system के प्रकार और dos operating system के commands के बारे में बताएंगे।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? (DOS in Hindi)

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसके द्वारा हम विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन परफॉर्म करते है। यह एक 16 bit operating system हैं।ऑपरेटिंग सिस्टम user और system के बीच interface की तरह कार्य करता है। इसे माइक्रोसॉफ्ट के द्वारा विकसित किया गया था,Winsows operating system के आने से पहले DOS(disk operating system) का use computer के ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में किया जाता था। इसका यूज 1981 से 1995 तक बहुत ज्यादा किया जाता था । दूसरे शब्दों में कहें तो यह एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच एक इंटरफेस का कार्य करता है, यह एक सिंगल यूजर operating system हैं।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम एक command line system है इसमें हम commands का use करके different types के ऑपरेशन perform कर सकते है। यह mouse के द्वारा दिए गए instructions (input) को accept नही करता।सिर्फ commands के द्वारा दिए गए instructions को accept करता है। इसलिए इसे command line operating system भी कहते है।

DOS के commands easy और understandable होते है इनको use करना आसान होता हैं और ये commands case sensitive नही होते , जिससे हम इसको uppercase तथा lowercase दोनो मे लिख सकते है।

यह एक free और open source operating system हैं। अर्थात इसे डाउनलोड तथा install करने में user को पैसे खर्च नही करने पड़ते है।

यह GUI (Graphical user interface) को support नही करता यह सिर्फ़ CUI (Character user interface) को support करता है, अर्थात् सिर्फ characters को समझता है।

DOS की सरंचना (Structure)

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम की सरंचना में 4 लेयर शामिल है जिसमे डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम कार्य करता है।

  • HARDWARE : यह सबसे निचला लेयर है. जिसमे सिस्टम के सभी हार्डवेयर पार्ट्स शामिल होता है. सिस्टम के बूट के समय डॉस सभी हार्डवेयर पार्ट को इनेबल करता है।
  • DOS KERNAL: यह हार्डवेयर उअर डॉस शेल कम मध्य इंटरफ़ेस का काम करता है. इसमें मुख्य डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम के सभी कोड शामिल होते है।
  • DOS SHELL: यह तीसरा लेयर है जिसमे शैल एक टर्मिनल की तरह काम करता है यह एक कमांड प्रांप्ट है जिसमे कमांड रन किये जाते है।
  • USER: अंतिम लेयर सिस्टम को उपयोग करने वाला या टास्क परफॉर्म करने वाला उपयोगकर्ता होता है.
Structure of DOS in Hindi

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम के संस्करण (Version)

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम के निम्नलिखित versions है –

  • 1981 – Microsoft PC-DOS 1.0 यह ऑपरेटिंग सिस्टम का पहला official version है, जो अगस्त 1981 में जारी किया गया था।
  • 1982 – MS-DOS 1.25  यह OS का पहला version था, जिसका नाम ” MS-DOS ” रखा गया था।
  • 1984 – MS-DOS 3.0    इसे अगस्त 1984 में IBM PC AT के लिए जारी किया गया था। Large hard disc drive support करता था।
  • 1985 – MS-DOS 3.1 यह DOS का पहला version था जोकि local area networks को support करता था।microsoft network को support करता था।
  • 1986 – MS-DOS 3.2 यह फ्लॉपी डिस्क ड्राइव के 3 1/2 इंच, 720 KB को support करता था।
  • 1987 – MS-DOS 3.31 जिसे Compaq computers के लिए डिज़ाइन किया गया था।
  • 1988 – MS-DOS 4.01 इसमें volume serial numbers को  support किया गया था।
  • 1991 – MS-DOS 5.0 इसकी विशेषता थी कि यह 3.5 इंच 2.88 MB फ्लॉपी डिस्क और full screen text editor को support करता था।
  • 1993 –  MS-DOS 6.0 इसमें QBASIC, disk compression, UMA optimization, और antivirus software MSAV की विशेषता मौजूद थी।
  • 1994 – MS-DOS 6.22  यह MS-DOS का अंतिम stand-alone version था।
  • 1995 MS-DOS 7.0 MS-DOS 7.0 को Windows 95 command line में index किया था। FAT 32 file system support करता था।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम की विशेषता (Feature)

  • यह एक 16 bit operating system है।
  • यह file management me सहायता करता है file बनाना, delete करना, manage करना यह कार्य करता है।
  • यह एक character based interface system हैं।
  • यह एक सिंगल यूजर operating system हैं।
  • डॉस डायरेक्ट कमांड के माध्यम से चलता है जिसके कारण यह बहुत ही तेज होता है।
  • डॉस को रन करने के लिए कंप्यूटर में ज्यादा रिसोर्स की जरूरत नहीं होती है।
  • इसके उपयोग करने के लिए पैसे की जरूरत नहीं है अर्थात यह फ्री में उपलब्ध है।
  • इसको कंप्यूटर में चलाने के लिए केवल 2 GB स्पेस की जरुरत होती है।
  • इसके हेल्प से नए फोल्डर क्रिएट कर सकते है और फोल्डर को रीनेम तथा डिलीट भी कर सकते है।

DOS के कमांड (Commands of DOS)

डिस्क एक CUI (Character user interface) बेस्ड ऑपरेटिंग सिस्टम है अतः इसमें काम करने के लिए कमांड रन करने की जरुरत होती है। छोटे से बड़े सभी प्रकार के ऑपरेशन केवल कमांड के माध्यम से परफोर्म किया जाता है. इसमें विंडोज की तरह GUI (graphical user interface) में काम नहीं हो सकता है।

डॉस कमांड के प्रकार

डॉस में रन किये जाने वाले सभी कमांड को 2 केटेगरी में बाँटा गया है।

DOS in Hindi
  1. Internal commands
  2. External commands

डॉस के इंटरनल कमांड क्या है? (Internal)

जब डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम (dos) को computer में load करते है तब ये commands अपने आप ही load हो जाती है कंप्यूटर में अलग से load करने की जरूरत नहीं होती है। इन सभी कमांड को इंटरनल कमांड कहा जाता है।

उदाहरण:– break, rd, md, cd, for, copy, erase, goto, vol, cls, echo, rmdir, if, path, ver, shift, ren, exit, time, rmdir, chdir, verify, prompt, chcp,type, mkdir, for, date इत्यादि।

Internal commands ऐसे कमांड्स होते है जो booting process के दौरान स्वतः ही मेमोरी में load हो जाते है। ये कमांड्स common jobs के लिए use किए जाते है जैसे – copying ,erasing, remaining files.

इंटरनल डॉस कमांड के उदाहरण

  • call इसका use बैच फ़ाइल को किसी अन्य फ़ाइल से कॉल करने के लिए किया जाता है।
  • cd – इस कमांड का use सिस्टम डिरेक्टरी को change करने के लिए किया जाता है।
  • cls इस कमांड का use system के screen को clean करने के लिए किया जाता है।
  • cmd – इसका उपयोग कमांड इंटरप्रेटर को open करने के लिए किया जाता है।
  • color – इसका use window  स्क्रीन के फोरग्राउंड और बैकग्राउंड रंग को modify करने के लिए किया जाता है।
  • copy  इसका use एक या एक से अधिक फाइलों को किसी अलग जगह पर कॉपी करने के लिए किया जाता है।
  • date इसका use system में date को देखने या बदलने के लिए किया जाता है।
  • del – इसका उपयोग एक या एकाधिक files को delete करने के लिए किया जाता है
  • erase  इसका उपयोग सिस्टम से files को delete करने के लिए किया जाता है।
  • exit – इस कमांड का use डॉस कमांड इंटरप्रेटर से बाहर निकलने के लिए किया जाता है।
  • goto – इसका उपयोग batch file को किसी विशेष लेबल या स्थान पर ले जाने के लिए किया जाता है।
  • mkdir – इस कमांड का प्रयोग सिस्टम में एक नई डिरेक्टरी बनाने के लिए किया जाता है।
  • move – इसका उपयोग एक या एक से अधिक फाइल को एक डिरेक्टरी से दूसरी डिरेक्टरी में ले जाने या change करने के लिए किया जाता है।

डॉस के एक्सटर्नल कमांड क्या है? (External)

ये वो commands है जो dos me already नही होते इनके लिए अलग से seprate file use करना पड़ता है। ये अपने आप load नही होते है सिस्टम में।.exe , .com ये हार्ड ड्राइव में already exist होती है हम इनका यूज करके external commands का use कर सकते है। Dos- prompt को execute करके।

उदाहरण:– more, mem, move, sort, attrib, dosshell, keyb, msav, sys, chkdsk, expand, label, tree, deltree, xcopy, graphics,restore, diskcomp, sys, append, doskey, help, more, msbackup, backup, nlsfunc, undelete, mem, fastopen, keyb इत्यादि।

ये ऐसे कमांड्स होते हैं जो system में separate files में रखे जाते है। ये एक तरह के छोटे programs होते है जिनको system अपने need के according use करता हैं। ये commands system में file के रूप मे मौजूद होते है इन्हे modify ,delete या copy किया जा सकता है।

इंटरनल डॉस कमांड के उदाहरण

  • find इस कमांड का use file में टेक्स्ट को खोजने के लिए किया जाता है।
  • edit इसका कमांड का use फाइलों को देखने और एडिट करने के लिए किया जाता है।
  • Tree इस कमांड की मदद से हम file और डायरेक्टरी को tree फॉर्मेट में देखने के लिए करते हैं।
  • Move इस कमांड का use करके आप किसी भी file को एक स्थान से दुसरे स्थान पर move कर सकते है।
  • Chkdsk इस command का use करके disk कि जांच की जा सकती हैं।
  • Print इस कमांड का use करके एक या एक से अधिक file को printer की help से print किया जा सकता है।

डॉस और विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम में अंतर

DOS Windows
1. ये single user Operating system हैं।1. ये एक multiuser Operating system हैं।
2. ये CUI (character User interface) को सपोर्ट करता है।   2. ये GUI ( graphical User interface) को सपोर्ट करता है।
3. एक समय में एक ही टास्क परफॉर्म कर सकता है। अर्थात मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं है।3. एक समय में एक से अधिक टास्क परफॉर्म कर सकता है अर्थात मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम है।
4. ये नेटवर्किंग को सपोर्ट नहीं करता है।4. ये नेटवर्किंग को सपोर्ट करता है।
5. ये कमांड लाइन ऑपरेटिंग सिस्टम है।5. ये ग्राफिकल ऑपरेटिंग सिस्टम है।
6. ये मल्टीमीडिया सपोर्ट नहीं करता है।6. ये मल्टीमीडिया सपोर्ट करता है।
7. उपयोग करना बहुत कठिन है।7. उपयोग करना बहुत ही आसान है।

DOS की हानि – Disadvantages of DOS

  • यह सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम है अर्थात एक समय में एक ही यूजर कार्य कर सकता है
  • इसमें एक समय में एक ही टास्क परफॉर्म किया जा सकता है अर्थात मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं है।
  • नार्मल यूजर के लिए चलाना बहुत ही कठिन होता है क्योकिं यह ऑपरेटिंग सिस्टम कमांड बेस्ड होता है।
  • यह केवल 16 बिट का ही ऑपरेटिंग सिस्टम है।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम (DOS) के फंक्शन

  • ये keyboard से कमांड लेता है और उसे इंटरप्रेट करता है।
  • ये सारे फाइल्स को सिस्टम में show करता है।
  • ये नई फाइल बनाता है और उसे space allocate करता है प्रोग्राम के लिए।
  • ये फाइल के नाम को change करके new name create करता है।
  • ये information को floppy में copy करता है।
  • ये permanently file को remove कर सकता है।
  • ये file को locate करने मे help करता है।

FAQ

  1. डॉस क्या है इसकी विशेषताएं?

    डॉस एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसे डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम कहा जाता है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम को माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरशन ने बनाया है।

  2. MS डॉस कमांड क्या है?

    MS डॉस एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जो कमांड बेस्ड होता है. यह वर्तमान के नए कंप्यूटर में कमांड प्रांप्ट के रूप में काम करता है। यह एक सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम है जो कमांड में कार्य करता है।

  3. DOS की विशेषता क्या है?

    डॉस डायरेक्ट कमांड के माध्यम से चलता है जिसके कारण यह बहुत ही तेज होता है।
    डॉस को रन करने के लिए कंप्यूटर में ज्यादा रिसोर्स की जरूरत नहीं होती है।
    डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम 16 बिट का है।
    इसके उपयोग करने के लिए पैसे की जरूरत नहीं है अर्थात यह फ्री में उपलब्ध है।

  4. एमएस डॉस का नाम क्या है?

    एमएस डॉसका पूरा नाम माइक्रोसॉफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम है. जो एक सिंगल यूजर, करैक्टर बेस्ड ऑपरेटिंग सिस्टम है।

आज आपने क्या सीखा

मुझे यह उम्मीद है हमारा यह छोटा सा प्रयास माइक्रोसॉफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? (MS-DOS in Hindi) आपको अच्छा लगा होगा। हमारे इस लेख से जुड़े यदि आपके मन में कोई सवाल या सुझाव हो तो आप हमें कमेंट करके बता सकते है।

आपका सुझाव या डाउट हमें और लिखने में प्रेरित करता है। यदि आपको यह लेख डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? (MS-DOS in Hindi) पसंद आया हो तो आप अपने दोस्तों को इसे शेयर करें। ताकि वो भी इसकी जानकारी का लाभ ले सकते। यदि आप इसी प्रकार के टेक्नोलॉजी और बिजनेस आइडियाज की अधिक जानकारी लेना चाहते है तो आप हमारे यूट्यूब चैनल computervidya से जरुर जुड़े। इनके अलावा लाइसेंस और स्टार्टअप की जानकारी के लिए मेरे अन्य वेबसाइट nayabusiness.in में विजिट करें।

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