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इंडिया में सबसे ज्यादा चलने वालें 10 बेस्ट मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस / Top 10 Manufacturing Business in India

Top 10 Manufacturing Business in India

दोस्तों! आज हम इंडिया में सबसे ज्यादा चलने वालें 10 बेस्ट मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस आइडियाज (Top 10 Manufacturing Business Hindi) के बारे में बात करेंगे। जिसमें हम 10 low investment manufacturing Business (लो इन्वेस्टमेंट मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस) को समझायेंगे। आज जो १० मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस आपको बताएँगे ये सभी भारत में 2021 के लिए जबरदस्त बिज़नस आइडियाज (Top 10 Manufacturing Business in India) है, जिसे आप कम पैसे में घर से शुरू कर सकते है। इन 10 Manufacturing Business की खास बात यह है की इसे आप पार्ट टाइम के रूप में या फुल टाइम दोनो रूप में कर सकते है।

Contents:-


1. एल्युमिनियम फॉयल मैन्युफैक्चरिंग

यह बिज़नस वर्तमान में सबसे कम कॉम्पिटिशन वाला बेहतरीन बिज़नस है जिसे आप घर से केवल एक लाख रूपये में शुरू कर सकते है। आप सभी को मालूम ही होगा, कि एल्युमिनियम में जंग प्रतिरोधकता और विधुत चालकता बहुत अच्छी होती है। जिसके कारण एल्युमिनियम फॉयल का उपयोग खाने के चीजो को नमी, बैक्टीरिया से बचाने के लिए किया जाता है। एल्युमिनियम फॉयल का उपयोग रेस्ट्रोरेन्ट, होटल, पार्टी के अलावा घरों में भी बहुतयात मात्रा में होता है। इनके अलावा दवाई और कॉस्मेटिक्स के पैकिंग में भी बहुत अधिक उपयोग होता है।

इंडिया में सबसे ज्यादा चलने वालें 10 बेस्ट मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस / Top 10 Manufacturing Business in India

Aluminum Foil Manufacturing Business को शुरू करने के लिए मशीन की जरुरत होगी। जिसकी विभिन्न वेराइटी मार्किट में उपलब्ध है। एल्युमीनियम फॉयल पैकिंग मशीन की कीमत 80 हजार रूपये से शुरू होती है। जिसे आप अपने बजट के अनुसार खरीद सकते है। इनके अलावा आपको रॉ मटेरियल में एल्युमीनियम फॉयल का रोल खरीदने की जरुरत होगी जो 200 रूपये प्रति किलो के हिसाब से मार्केट में उपलब्ध है।

आप एल्युमीनियम फॉयल पैकिंग बिज़नस को आप अपने घर से ही शुरू कर सकते है। और यदि आपको इस बिज़नस की अधिक जानकारी चाहिए तो आप हमारे YouTube चैनल Computervidya में विजिट करके अधिक जानकारी ले सकते है।


2. कोरगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरिंग

यदि आपके पास बजट का दिक्कत नहीं है तो आप कोरगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरिंग मशीन की उपयोग करके आप विभिन्न साइज़ के कार्टून बनाकर स्वयं का बिज़नस शुरू करके अच्छा प्रॉफिट ले सकते है। वर्तमान में यह बिज़नस बहुत ही प्रॉफिटेबल और यूनिक बिज़नस आइडियाज है।

इंडिया में सबसे ज्यादा चलने वालें 10 बेस्ट मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस / Top 10 Manufacturing Business in India

आप सभी जानते है की कार्टून बॉक्स एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसके बिना किसी भी सामान का पैकिंग अधुरा होता है। छोटे से सामग्री से लेकर टीवी फ्रिज सभी सामानों की पैकिंग के लिए कार्टून बॉक्स का प्रयोग किया जाता है। आज के समय में 80% इंडस्ट्रीज अपने प्रोडक्ट की पैकिंग के लिए कार्टून बॉक्स का प्रयोग करता है। तो दोस्तों आप खुद ही समझ सकते है की कोरगेटेड बॉक्स की डिमांड कितनी होगी।

यदि आप भी अपने एरिया में कोरगेटेड बॉक्स की मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस शुरू करते है तो 6 मशीन की जरुरत होगी। जिसमे पहला कोरगेटेड मशीन, दूसरा प्रिंटिग मशीन, तीसरा शीट कटिंग मशीन, चौथी पेस्टिंग मशीन, पांचवी पंचिंग और डाई कटिंग मशीन और छटवी स्टिचिंग मशीन शामिल है। इन मशीन की पुरे सेटअप की कीमत लगभग 15 से 20 लाख रूपये तक होती है। इनके अलावा आपको अन्य खर्चो के लिए 5 से 10 लाख रूपये की जरुरत पढेगी।

कोरगेटेड बॉक्स की मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस स्टार्ट करके अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं। यह बिजनेस स्टार्ट करने के लिए आपको थोड़ा ज्यादा निवेश करना पड़ेगा। लेकिन यह बिजनेस स्टार्ट करके आप बहुत बड़े Area को कवर कर सकते हैं।


3. पेपर कप मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस

दोस्तों आप सभी जानते है प्लास्टिक पर बैन लग चूका है। प्लास्टिक के कप में चाय पिने और कोई भी गरम चीज डालने पर प्लास्टिक से केमिकल निकलता है। जिनसे शरीर में कई तरह की बीमारी लग सकती है। और वर्तमान में लोग स्वास्थ के प्रति जागरूक भी है। इसलिए सभी जगह जैसे होटल, रेस्ट्रोरेन्ट एवम् छोटे बड़े फंक्शन में पेपर कप का इस्तेमाल किया जाता है जिसके कारण इसकी मांग बाजार में साल भर बनी रहती है। और खासकर शादी एवम् फंक्शन में इसकी डिमांड काफी अधिक रहती है।

इंडिया में सबसे ज्यादा चलने वालें 10 बेस्ट मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस / Top 10 Manufacturing Business in India

यदि आप भी पेपर कप मेकिंग बिज़नस (Paper Cup Making Business) शुरू करना चाहते है तो इसके लिए आपको विडियो में देखाई देने वाली पेपर कप मेकिंग मशीन की जरुरत होगी। जिसकी कीमत 2 लाख रूपये से शुरू होती है। इस बिज़नस में दो प्रकार के रॉ मटेरियल की जरुरत होती है। जिसमे ITC का पेपर होता है जो कटी कटाई पिस आती है। अलग अलग साइज़ के पेपर के लिए आलग-अलग पेपर आती है। यह 70 रूपये से लेकर 100 रूपये/ kg में आता है।

ये मशीन एक घंटे में 3200 पिस पेपर कप तैयार कर सकता है। जिसमे एक पेपर कप बनाने में आपको 31 पैसे का खर्च आता है। आप इसे अपने मार्किट में 40 से 45 पैसे में सेल कर सकते है। इस तरह इस मशीन में एक घंटे में आप 400 से 500 रूपये तक की कमाई कर सकते है। इस तरह आप सारा मेंटेनेंस कास्ट और रॉ मटेरियल कास्ट हटा कर एक महीने में 70 से 80 हजार तक की कमाई कर सकते है।

यदि आप भी पेपर कप मेकिंग बिज़नस करना चाहते है और इसकी पूरी जानकारी चाहते है तो आप निचे दिए गए विडियो को जरुर देखें। क्योकिं इसमें हमने पेपर कप बिज़नस की पूरी जानकारी दी है।


4. मेडिकल बैंडेड मैन्युफैक्चरिंग

यदि बिज़नस के नजरिये से देखे तो स्वास्थ से जुड़े सभी बिज़नस एक बहुत ही प्रॉफिटेबल बिज़नस है। जिसमें सर्जिकल बैंडेड एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसकी डिमांड घरों, हॉस्पिटल और मेडिकल स्टोर में हमेशा बनी रहती है। यदि आपके पास भी 4 लाख रूपये का बजट है तो आप सर्जिकल बैंडेड का मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस शुरू करके अच्छी कमाई कर सकते है।

इंडिया में सबसे ज्यादा चलने वालें 10 बेस्ट मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस / Top 10 Manufacturing Business in India

इस बिज़नस को शुरू करने के लिए आपको दो मशीन की जरुरत होगी जिसमे पहला रुल्ड/रूलिंग मशीन और दूसरा कत्तिंग मशीन जो आप विडियो में देख रहे है। जिनकी कीमत 3 लाख रूपये से शुरू होती है। रॉ मटेरियल के रूप में कपडे का पूरा थान आता है जो 5 रूपये प्रति मीटर से शुरू होती है। जिसे आप रूलिंग मशीन में फोल्ड करके कत्तिंग मशीन से काटते है। सर्जिकल बैंडेड बनाकर आप भी 10 से 12 रूपये प्रति किलो के हिसाब से प्रॉफिट ले सकते है।


5. किल मेकिंग बिज़नस

यदि आप कुछ ऐसा बिज़नस ढूढ़ रहे है जो बहुत ही यूनिक बिज़नस हो, तो किल मेकिंग बिज़नस आपके लिए बहुत ही अच्छा है। आप अपने घर में ही किल मैन्युफैक्चरिंग मशीन लगाकर इसका उत्पादन कर सकते है। किल का उत्पादन करके आप अपने एरिया के आसपास घरों में, कारपेंटर शॉप, हार्डवेयर शॉप इत्यादि में सप्लाई करके अच्छा प्रॉफिट ले सकते है।

कील बिज़नस को शुरू करने के लिए आपको 4 मशीन की जरुरत होगी जिसमे कटर मशीन, HB स्टैंड, ग्राइंडर और पॉलिशर शामिल है जो आप विडियो में देख सकते है। इनके पुरे सेटअप की कीमत 2 लाख रूपये से शुरू होती है। इनके अलावा आपको रॉ मटेरियल के रूप में HB वायर की जरुरत होगी। जो 30 रूपये प्रति किलो के हिसाब से मार्केट में मिल जाता है। इस बिज़नस की पूरी जानकारी के लिए आप हमारे चैनल में विजिट करें।


6. नोटबुक मेकिंग बिज़नस

दोस्तों, Small Industries से जुड़ा एक Popular Business नोटबुक मैन्युफैक्चरिंग का है। इस बिज़नस की खास बात यह है की नोटबुक, कॉपी, रजिस्टर, रिकॉर्ड बुक की डिमांड हर जगह बनी रहती है। चाहे स्कूल हो या ऑफिस इसकी डिमांड हर जगह बनी रहती है यहाँ तक की घरों में कई काम के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

इस बिज़नस को शुरू करने के लिए आप नोटबुक मशीन की जरुरत होगी जो विभिन्न वेरिएटी में आती है जिनकी कीमत भिन्न – भिन्न होती है। नोटबुक मेकिंग मशीन तिन मशीन का सेट होता है पहला नोटबुक cutting मशीन दूसरा edge square मशीन और तीसरा निप्पिंग मशीन होती है। प्रायः नोटबुक मेकिंग मशीन की कीमत 80 हजार रूपये से शुरू हो जाती है।

वर्तमान में कई छोटे-बड़ी कंपनीयां नोटबुक/कॉपी का मैन्युफैक्चरिंग करके अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे है। ऐसे में आप भी इस बिज़नस को शुरू करके अच्छी खासी कमाई कर सकते है। यदि आप भी नोटबुक बिज़नस (notebook making business) करना चाहते है और इसकी पूरी जानकारी चाहते है तो आप निचे दिए गए विडियो को जरुर देखें। क्योकिं इसमें हमने नोटबुक बिज़नस की पूरी जानकारी दी है।

 


7. सीमेंट ब्रिक्स मैन्युफैक्चरिंग

यदी आप कुछ ऐसा बिज़नस ढूढ़ रहे है, जिसमे लागत बहुत कम और प्रॉफिट बहुत अधिक हो, तो सीमेंट ब्रिक्स मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस (Cement Bricks Manufacturing Business Hindi) आपके लिए बहुत ही अच्छा है। क्योकि आज के समय में हर कोई पक्के मकानों में रहना चाहता है तथा हर कोई पक्के मकान बनाता है इन मकानों को बनवाने के लिए ईट की आवश्यकता पड़ती है अगर आप ईट बनाने का बिजनेस स्टार्ट करेंगे तो केवल 50 हजार के मशीन से आप सीमेंट ब्रिक्स मेकिंग बिज़नस को शुरू कर सकते है।

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हम विडियो में आपको केवल 50 हजार के सीमेंट ब्रिक्स मेकिंग (Cement Bricks Making Machine) मशीन दिखा रहे है जिसे आप मंगा कर आपना स्वयं का बिज़नस शुरू कर सकते है। यह बिजनेस आप गांव में बहुत आसानी से शुरू कर सकते हैं आप महीने में 50 से 80 हज़ार के बीच शुरुवात में कमा सकते हैं।

यदि आप भी सीमेंट ब्रिक्स बिज़नस करना चाहते है और इसकी पूरी जानकारी चाहते है तो आप निचे दिए गए विडियो को जरुर देखें। क्योकिं इसमें हमने सीमेंट ब्रिक्स बिज़नस की पूरी जानकारी दी है।


8. LED बल्ब मैन्युफैक्चरिंग

दोस्तों LED बल्ब का मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाकर लाखों रूपये कमाए जा सकते है। यदि आप LED बल्ब का मैन्युफैक्चरिंग शुरू करना चाहते है तो केवल 20 हजार रूपये के इन्वेस्टमेंट में इस बिज़नस को शुरू कर सकते है।

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आज के समय में सभी घरों में LED बल्ब का ही उपयोग किया जाता है जिसके कारण इसका मार्किट साल भर बना रहता है। अतः आप LED बल्ब का मैन्युफैक्चरिंग करके अच्छा खासा पैसा कमा सकते हैं।

अगर आप अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी अच्छी बनाएंगे तो आप इस बिजनेस में बहुत ज्यादा आगे जा सकते हैं। इस बिजनेस में आपको अपने आसपास के area को cover करना है और उनसे कांटेक्ट कर के अपने सामान को डिलीवर करना है यह बिजनेस करके आप अच्छा खासा पैसा तो कमा ही सकते हैं।
दोस्तों आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं कि आपको कौन सा बिजनेस आइडिया सबसे अच्छा लगा तथा आपकी रुचि किस बिजनेस में है।


9. अगरबत्ती मेकिंग बिज़नस

दोस्तों हमारे देश में सभी समुदायों के द्वारा अगरबत्ती का उपयोग किया जाता है और अगरबत्ती एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसका इस्तेमाल, घर में रोजाना होने के कारण, इसकी मांग बाजार में साल भर बनी रहती है। और खासकर त्यौहारों एवम् धार्मिक स्थलों में इसकी डिमांड काफी अधिक रहती है।

इंडिया में सबसे ज्यादा चलने वालें 10 बेस्ट मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस / Top 10 Manufacturing Business in India

अगरबत्ती मेकिंग बिज़नस (agarbatti making Business) को शुरू करने के लिए आपको अगरबत्ती मशीन की जरुरत होगी। जिसमे विभिन्न वेराइटी आती है। यदि हम मैन्युअल मशीन की बात करे तो यह 10 से 12 हजार रूपये में मिल जाती है। वैसे तो बहुत से वेराइटी में मशीन उपलब्ध है आप अपने बजट के अनुसार मशीन खरीद कर बिज़नस शुरू कर सकते है।

दोस्तों इस बिज़नस की अधिक जानकारी के लिए आप हमारे YouTube चैनल Computervidya में आइये। वहां पर हमने अगरबत्ती बिज़नस की पूरी जानकारी दी है। आप उस विडियो को देखकर इस बिज़नस को अच्छे से समझ सकते है।


10. कैंडल मेकिंग बिज़नस

यदि आप कम पैसे में मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस शुरू करना चाहते है तो कैंडल मेकिंग बिज़नस (Candle Making Business) बहुत ही जबरदस्त बिज़नस आइडियाज है जिसे आप केवल 10000 रूपये की लागत में शुरू कर सकते है। इस बिज़नस को कोई भी कम पढ़ा लिखा, नॉन टेक्निकल नॉन टेक्निकल व्यक्ति भी असानी से शुरू कर सकता है। घरेलु महिलाएं समूह के रूप में या अकेले भी शुरू कर सकती है।

इंडिया में सबसे ज्यादा चलने वालें 10 बेस्ट मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस / Top 10 Manufacturing Business in India

मोमबत्ती बनाने के लिए तिन चीजों की जरुरत होती है पहला मोम, दूसरा धागा और तीसरा मोमबत्ती बनाने की डाई अर्थात सांचा है। जो आपको विडियो में दिखाई दे रहा है। इन सभी चीजो को आप, विडियो के डिस्क्रिप्शन में दिए विक्रेता के नंबर से मंगा सकते है। जिनकी कीमत केवल 5 हजार रूपये है।

यदि हम कैंडल बिज़नस में प्रॉफिट की बात करें तो आप प्रतिदिन 2000 से 3000 रूपये असानी से कमा सकते है। इसकी पूरी जानकारी के लिए आप हमारें YouTube चैनल Computervidya में विजिट करें।

तो दोस्तों उम्मींद करता हु यह लेख Top 10 Manufacturing Business Hindi आपको बहुत पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख ( Top 10 Manufacturing Business in India) पसंद आया हो तो लाइक करें। लोगो को शेयर करें। ताकि वो भी इस 10 Manufacturing business ideas को अपने एरिया में शुरू करके अच्छी मुनाफा ले सके।

यदि आप कोई सवाल आप पूछना चाहते है तो निचे Comment Box में जरुर लिखे और अगर आपके को सुझाव है तो जरुर दीजियेगा। दोस्तों हमारे अन्य वेबसाइट nayabusiness.com एवं YouTube चैनल Computervidya को अगर आप अभी तक सब्सक्राइब नहीं किये तो तो जरुर सब्सक्राइब कर लेवें।

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Noodle Making Business in Hindi | नूडल बिज़नस कैसे शुरू करें?

Noodle Making Business in Hindi

दोस्तों! आज हम नूडल मेकिंग बिज़नस (Noodle Making Business in Hindi) के बारे में बात करेंगे। जिसमें नूडल बिज़नस प्लान (Noodle Business Plan) को समझायेंगे। नुडल बनाने का बिज़नस 2021 के लिए जबरदस्त बिज़नस आइडियाज है, जिसे आप कम पैसे में घर से शुरू कर सकते है। Noodle Manufacturing Business की खास बात यह है की इसे आप पार्ट टाइम के रूप में या फुल टाइम दोनो रूप में कर सकते है।

अतः नुडल बिज़नस की पूरी जानकारी के लिए आप पूरा पोस्ट को जरुर पढ़े। इस पोस्ट में हम आपको नुडल मेकिंग बिज़नस की लागत, नुडल बिज़नस प्रॉफिट, मशीन, रॉ मटेरियल, मार्केटिंग, लाइसेंस और नूडल बिज़नस में रिस्क के बारें में विस्तार से बताएँगे।


नूडल बिज़नस की डिमांड

आज के समय में बच्चों से लेकर बड़ो तक सभी फास्टफूड खाना पसंद करते है। फास्टफूड में नुडल का एक अपना जगह है जिसे गाँव-शहर सभी जगह में खूब खाया जाता है। अतः नुडल की डिमांड बारहों महिना बनी रहती है। आजकल छोटे-छोटे फंक्शन जैसे बर्थडे, मीटिंग, एंव शादी पार्टी इत्यादि में नुडल की डिमांड काफी अधिक होती है जिसके कारण इसका बिज़नस काफी फायदेमंद है।साथ ही नुडल को सभी मौसम में खाया जाता है जिसके कारण इसका बिज़नस बारहों महिना चलने वाला बिज़नस है।

Noodle Making Business in Hindi | नूडल बिज़नस कैसे शुरू करें?


नुडल बनाने की मशीन (Noodle Making Business in Hindi)

नुडल बनाने के लिए मुख्यतः 3 मशीन का उपयोग किया जाता है।

    1. डफ्लर मशीन – आटा/मैदा गुथने की मशीन
    2. नुडल कटर मशीन – नुडल काटने की मशीन
    3. स्ट्रीम मशीन – नूडल को भाप में सुखाने की मशीन
    4. पैकेजिंग मशीन – लेमिनेशन मशीन और तराजू

नूडल बनाने का प्रोसेस

नूडल को असानी से घर में ही बनाया जा सकता है। नूडल बनाने का प्रोसेस बहुत ही असान है, जिसके पूरी जानकारी के लिए हमारा यह विडियो जरुर देखे। जिसमे हमने नुडल बनाने के पुरे प्रोसेस को दिखाया है। साथ ही नूडल फैक्ट्री की विभिन्न जानकारी भी दिया है।


नूडल मशीन की कीमत

दोस्तों वर्तमान में noodle making machine की विभिन्न वैरायटी मार्किट में उपलब्ध है। जिनकी कीमत 10 हजार रूपये से शुरू होती है। लेकिन यदि आप नूडल बिज़नस के लिए हैवी ड्यूटी मशीन खरीदना चाहते है, तो यह 50 हजार से शुरू हो जाती है।

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हमने जो विडियो में नूडल मेकिंग मशीन दिखाया है, उनकी पुरे सेटअप की कीमत 75 हजार रूपये है। वह तिन मशीन का सेटअप है, जिसमे डफ्लर मशीन की कीमत 25 हजार रूपये, नूडल कटर मशीन की कीमत 40 हजार रूपये और स्ट्रीम मशीन की कीमत 20 हजार रूपये है।


नूडल मेकिंग मशीन को कैसे ख़रीदे

हमारी सलाह यदि माने, तो आप सबसे पहले noodle making machine को अपने लोकल मार्किट में सर्च करें। अपने नजदीक के शहर से खरीदने का प्रयास करें। इसके लिए आप Indiamart वेबसाइट की मदद ले सकते है। यदि आप विडियो में दिखाए मशीन को खरीदना चाहते है तो मैंने मशीन सेलर का नंबर विडियो के डिस्क्रिप्शन में दे दिया है।


नूडल बिज़नस की लागत

यदि आप नुडल बिज़नस को घर से शुरू करना चाहते है, तो घर पर नूडल मैन्युफैक्चरिंग बिज़नस सेटअप करने की कुल लागत लगभग 50 हजार रूपये से लेकर एक लाख तक हो सकती है। यह लागत आपके मशीन की कीमत पर डिपेंड करता है। यदि आप ऑटोमैटिक नूडल मशीन खरीदना चाहते है, तो यह लागत और भी अधिक हो सकती है।

यदि आप नूडल बिज़नस को शॉप से शुरू करना चाहते है तो उनका खर्च और भी अधिक होगा। यह आप जिस शहर के अन्दर खोलना चाहते है, उसके उपर डिपेंड करेगा।


नुडल बिज़नस में रॉ मटेरियल

इस बिज़नस में रॉ मटेरियल की बात करें तो मुख्यतः केवल मैदा की जरुरत होती है। जिससे आप नुडल बना सकते है। लेकिन इनके अलावा स्टार्च, सोडियम बाई कार्बोनेट, खाने के रंग, नमक और पैकेजिंग इत्यादि की जरुरत होती है।


नूडल का उत्पादन

दोस्तों विडियो में हमने जो मशीन दिखाया है, वह मशीन एक घंटे में 100 kg नुडल का उत्पादन कर सकता है। यदि आप एक दिन में 8 घंटे कार्य करते हो, तो आप आसानी से 600 से 800 kg का उत्पादन असानी से कर सकते हो। साथ ही दोस्तों बिज़नस में प्रोडक्शन, मशीन और कारीगर पर डिपेंड करता है अधिक उत्पादन के लिए आप अधिक क्षमता वाले मशीन का प्रयोग कर सकते है।

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नूडल को कहा बेचें

नूडल को बेचने के लिए आप अपने नजदीकी मार्किट में होल सेलर और छोटे बड़े सभी दुकानदारों से संपर्क कर सकते है। या आप कुछ एजेंट रखकर घर घर में डिलीवरी करा सकते है। इसके अलावा अगर आपका बजट बड़ा है तो अपने ब्रांड के पेपर कप की advertisement के लिए अख़बार और टीवी में ऐड दे सकते है। जिससे थोड़ी ही दिनों में आपका नूडल बिकने लगेगा।


नूडल बिज़नस में कमाई

दोस्तों ये विडियो में दिखाई गयी मशीन एक घंटे में 100kg नूडल को तैयार कर सकता है। जिसमे एक किलो नुडल को बनाने में कुल खर्च आपको 25 रूपये का आता है। जिसे आप अपने मार्किट में 40 रूपये में सेल कर सकते है। इस तरह आप एक किलो नुडल में 15 रूपये की प्रॉफिट ले सकते है।

यह मशीन एक घंटे में 100 किलो नुडल तैयार कर सकता है अर्थात 100* 15 = 1500 रूपये की प्रॉफिट एक घंटे में होगी। यदि आप एक दिन में 6 घंटे भी कार्य करते है तो आप दिनभर में 9000 रूपये की कमाई आसानी से कर सकते हो।


नूडल मशीन के लिए इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन

विडियो में दिखाई गयी मशीन पर 2 HP का मोटर लगा हुआ है। यह मशीन सिंगल फेस इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन पर चल जाता है और आप अपने घर के इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन पर इस नूडल मशीन को चला सकते हैं। और यदि आप चाहें तो इसके लिए कमर्शियल कनेक्शन लेकर इस बिजनेस को शुरू कर सकते हैं।


नूडल मेकिंग बिज़नस की लाइसेंस

दोस्तों, यदि आप नूडल मेकिंग बिज़नस को छोटे पैमाने में शुरू करना चाहते है तो आपको सबसे पहले उद्योग आधार या भारत सरकार के MSME के अंतर्गत व्यापार को रजिस्टर कराना होगा। बिज़नस को सुचारू रूप से चलाने के लिए आपको ट्रेड लाइसेंस, फर्म का करंट अकाउंट, पैन कार्ड इत्यादि की आवश्यकता होगी।


नूडल मेकिंग बिज़नस में रिस्क

दोस्तों, हर बिज़नस की तरह इस नूडल मेकिंग बिज़नस में भी कुछ रिस्क है दोस्तों नूडल मशीन (Noodle Making Business in Hindi) को खरीदने से पहले, नूडल बिज़नस को शुरू करने से पहले, पूरी तरह से inquiry कर ले और नफे/नुकसान का अनुमान लगा ले, उसके बाद ही बिज़नस को शुरू करें।

तो दोस्तों उम्मींद करता हु यह लेख Noodle Making Business आपको बहुत पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख ( Noodle Business Ideas Hindi ) पसंद आया हो तो लाइक करें। लोगो को शेयर करें। ताकि वो भी इस new business ideas को अपने एरिया में शुरू करके अच्छी मुनाफा ले सके।

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What is Interpreter in hindi? इंटरप्रेटर क्या है? समझाइए।

दोस्तों! आज हम इंटरप्रेटर क्या है? (What is interpreter in hindi) के बारे में बात करेंगे। जिसमें इंटरप्रेटर के कार्य (interpreter work hindi) के साथ-साथ इंटरप्रेटर के विशेषताएं (advantage) और इंटरप्रेटर की कमियाँ (disadvantage) को समझायेंगे। साथ ही इस लेख में हम इंटरप्रेटर से जुड़े विभिन्न पहलु को जैसे compiler एवम् assembler के बारें में बताऊंगा।

इंटरप्रेटर क्या है? What is interpreter in Hindi

Interpreter एक प्रकार का Computer Program है जो ट्रांसलेटर का कार्य करता है। दुसरे शब्दों में कहे तो इंटरप्रेटर एक प्रकार का ट्रांसलेटर है तो हाई लेवल लैंग्वेज (High level Language) को निम्न लेवल लैंग्वेज (low level language) में ट्रांसलेट करता है। लो लेवल लैंग्वेज को ही मशीन लेवल लैंग्वेज कहा जाता है। अर्थात इंटरप्रेटर एक कंप्यूटर प्रोग्राम है जो हाई लेवल लैंग्वेज (PHP/Perl/Ruby etc.) में लिखे गए प्रोग्राम को मशीन लेवल लैंग्वेज (target/machine) में कन्वर्ट करता है।

interpreter in hindi

उदाहरण :- मान लीजिये आप हिंदी बोलते हो, आपको इंग्लिश नहीं आता है. ऐसे में यदि सामने वाला केवल इंग्लिश बोलता और समझता है। तो आपको उनसे बात करने के लिए एक ट्रांसलेटर की जरुरत पड़ेगी जिनके हेल्प से आप सामने वाले से बात कर पाएंगे।

इसी प्रकार कंप्यूटर केवल मशीन भाषा को समझता है उसे केवल 0 और 1 की भाषा समझ आता है। लेकिन प्रोग्रामर या यूजर को केवल इंग्लिश या हिंदी समझ आता है। ऐसे में कंप्यूटर और प्रोग्रामर के बिच कम्युनिकेशन के लिए ट्रांसलेटर की जरुरत पड़ती है। जिसे इंटरप्रेटर कहा जाता है। मशीन लैंग्वेज को ही लो लेवल लैंग्वेज कहा जाता है।

इंटरप्रेटर कैसे कार्य करता है?

इंटरप्रेटर में सोर्स कोड, प्री-कम्पाइल्ड कोड और स्क्रिप्ट शामिल होते है, जिसके कारण प्रोग्राम को कम्पाइल करने की जरुरत नहीं होती है, वह डायरेक्टली रन होती है। इंटरप्रेटर हाई लेवल लैंग्वेज (PHP/Perl/Ruby etc.) में लिखे गए प्रोग्राम को लो लेवल लैंग्वेज (machine code) में कन्वर्ट करता है। अर्थात इंटरप्रेटर यूजर/प्रोग्रामर और कंप्यूटर के बिच में इंटरफ़ेस का कार्य करता है।

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प्रोग्रामर जब किसी भी हाई लैंग्वेज जैसे PHP/Perl/Ruby इत्यादि में प्रोग्राम लिखता है। और उसे execute करता है तो सबसे पहले वह इंटरप्रेटर के पास जाता है। उसके बाद इंटरप्रेटर उस source code को लाइन बाई लाइन रन करके कंप्यूटर को देता है। यदि प्रोग्राम में एरर हो तो प्रत्येक लाइन के सामने एक एक करके एर्रो को दिखाता करता है। इंटरप्रेटर एक बार में केवल एक लाइन को ट्रांसलेट करता है इसलिए इसे लाइन बाई लाइन ट्रांसलेटर भी कहा जाता है जबकि कम्पाइलर पुरे प्रोग्राम को एक बार में एक साथ ट्रांसलेट करता है।

इंटरप्रेटर की विशेषताएं (Advantage)

    1. इंटरप्रेटर में सोर्स कोड, प्री-कम्पाइल्ड कोड और स्क्रिप्ट शामिल होते है, जिसके कारण प्रोग्राम को कम्पाइल करने की जरुरत नहीं होती है, वह डायरेक्टली रन होती है।
    2. जिनको प्रोग्रामिंग का ज्ञान कम है और जो अभी शुरवाती लेवल में सिख रहे है, उनके लिए अन्य ट्रांसलेटर की तुलना में इंटरप्रेटर का उपयोग करना बहुत ही असान है।
    3. डेवलपमेंट एनवायरनमेंट और प्रोग्राम के लिए इंटरप्रेटर बेस्ट आप्शन है।
    4. प्रोग्राम में एरर आने पर प्रत्येक लाइन के सामने एक-एक करके दिखता है जिससे एरर को solve करना बहुत ही असान हो जाता है।
    5. विभिन्न हाई लेवल लैंग्वेज जैसे PHP, Perl और Ruby में इंटरप्रेटर का उपयोग होता है।

इंटरप्रेटर की कमियाँ (Disadvantage)

    1. यह एक समय में केवल एक लाइन को ही ट्रांसलेट करता है जिसके कारण पुरे प्रोग्राम को ट्रांसलेट करने में समय लगता है।
    2. अन्य ट्रांसलेटर जैसे compiler की तुलना में यह स्लो कार्य करता है।
    3. डेवलपमेंट एनवायरनमेंट और प्रोग्राम के लिए इंटरप्रेटर बेस्ट आप्शन है। परन्तु प्रोडक्शन के लिए यह अच्छा आप्शन नहीं है।

तो दोस्तों उम्मींद करता हु यह लेख इंटरप्रेटर क्या है ( What is interpreter in hindi) आपको बहुत पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख ( interpreter kya hai ) पसंद आया हो तो लाइक करें। लोगो को शेयर करें।

अब दोस्तों यदि कोई ये इंटरप्रेटर क्या है ? interpreter in hindi से जुड़े तथ्यों की चर्चा करता है इंटरप्रेटर क्या है? (interpreter kya hai) तो आप आसानी से जवाब दे पाएंगे। दोस्तों कोई सवाल आप पूछना चाहते है तो निचे Comment Box में जरुर लिखे और अगर आपके को सुझाव है तो जरुर दीजियेगा। दोस्तों हमारे अन्य वेबसाइट https://www.nayabusiness.in एवं Youtube चैनल computervidya को अगर आप अभी तक सब्सक्राइब नहीं किये तो तो जरुर सब्सक्राइब कर लेवें।

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What is compiler in hindi? कम्पाइलर क्या है? विस्तार से समझाइए।

दोस्तों! आज हम कम्पाइलर क्या है? (What is compiler in hindi) के बारे में बात करेंगे। जिसमें कम्पाइलर के कार्य (compiler work hindi) के साथ-साथ कम्पाइलर के विशेषताएं (advantage) और कम्पाइलर की कमियाँ (disadvantage) को समझायेंगे। साथ ही इस लेख में हम कम्पाइलर से जुड़े विभिन्न पहलु को जैसे Interpreter एवम् assembler के बारें में बताऊंगा।

कम्पाइलर क्या है (What is Compiler in Hindi)

Compiler एक computer program है जो ट्रांसलेटर का कार्य करता है। दुसरे शब्दों में कहे तो कम्पाइलर एक प्रकार का ट्रांसलेटर है तो हाई लेवल लैंग्वेज (High level Language) को निम्न लेवल लैंग्वेज (low level language) में ट्रांसलेट करता है।

explain compiler in hindi

Compiler एक कंप्यूटर प्रोग्राम है जो हाई लेवल लैंग्वेज (C/C++/java etc.) में लिखे गए प्रोग्राम को लो लेवल लैंग्वेज (object/target/machine) में कन्वर्ट करता है।

उदाहरण :- मान लीजिये आप हिंदी बोलते हो, आपको इंग्लिश नहीं आता है. ऐसे में यदि सामने वाला केवल इंग्लिश बोलता और समझता है। तो आपको उनसे बात करने के लिए एक ट्रांसलेटर की जरुरत पड़ेगी जिनके हेल्प से आप सामने वाले से बात कर पाएंगे।

इसी प्रकार कंप्यूटर केवल मशीन भाषा को समझता है उसे केवल 0 और 1 की भाषा समझ आता है। लेकिन प्रोग्रामर या यूजर को केवल इंग्लिश या हिंदी समझ आता है। ऐसे में कंप्यूटर और प्रोग्रामर के बिच कम्युनिकेशन के लिए ट्रांसलेटर की जरुरत पड़ती है। जिसे कम्पाइलर कहा जाता है। मशीन लैंग्वेज को हो लो लेवल लैंग्वेज कहा जाता है।

कम्पाइलर कैसे कार्य करता है?

Compiler एक कंप्यूटर प्रोग्राम है जो हाई लेवल लैंग्वेज (C/C++/java etc.) में लिखे गए प्रोग्राम को लो लेवल लैंग्वेज (object/target/machine) में कन्वर्ट करता है। अर्थात कम्पाइलर यूजर/प्रोग्रामर और कंप्यूटर के बिच में इंटरफ़ेस का कार्य करता है। प्रोग्रामर जब किसी भी हाई लैंग्वेज जैसे C/C++/Java इत्यादि में प्रोग्राम लिखता है। और उसे execute करता है तो सबसे पहले वह कम्पाइलर के पास जाता है। उसके बाद कम्पाइलर उस source code को object code में बदलकर कंप्यूटर को देता है। यदि सोर्स कोड में कोई एरर होता हो तो उसे डिस्प्ले करता है। कम्पाइलर एक बार में पुरे प्रोग्राम को एक साथ ट्रांसलेट करता है। जबकि इंटरप्रेटर और असेम्बलर लाइन बाय लाइन ट्रांसलेट करता है।

what is compiler in hindi

कम्पाइलर की विशेषताएं (Advantage)

    1. compiler पुरे प्रोग्राम को एक साथ स्कैन करके मशीन कोड में ट्रांसलेट करता है। जिसे इंटरप्रेटर एक-एक लाइन करके करता है।
    2. इंटरप्रेटर और असेम्बलर की तुलना में कम्पाइलर तेज ट्रांसलेट करता है।
    3. विभिन्न हाई लेवल लैंग्वेज जसी c, c++ और java में कम्पाइलर का उपयोग होता है।

कम्पाइलर की कमियाँ (Disadvantage)

    1. compiler पुरे प्रोग्राम को scan करने के बाद ही लास्ट में error message देता है। जिसके कारन प्रोग्राम को debug करना थोडा कठिन हो जाता है।
    2. कम्पाइलर object code जेनरेट करता है जिसके कारण अधिक मेमोरी की जरुरत पड़ती है।
    3. पुरे प्रोग्राम के execution time को देखा जाये तो यह थोडा slow होता है।

तो दोस्तों उम्मींद करता हु यह लेख कम्पाइलर क्या है ( What is compiler in hindi) आपको बहुत पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख ( compiler kya hai ) पसंद आया हो तो लाइक करें। लोगो को शेयर करें।

अब दोस्तों यदि कोई ये कम्पाइलर क्या है ? (What is compiler in hindi) से जुड़े तथ्यों की चर्चा करता है कम्पाइलर क्या है? (What is compiler in hindi) तो आप आसानी से जवाब दे पाएंगे। दोस्तों कोई सवाल आप पूछना चाहते है तो निचे Comment Box में जरुर लिखे और अगर आपके को सुझाव है तो जरुर दीजियेगा। दोस्तों हमारे अन्य वेबसाइट https://www.nayabusiness.in एवं Youtube चैनल computervidya को अगर आप अभी तक सब्सक्राइब नहीं किये तो तो जरुर सब्सक्राइब कर लेवें।

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How to start Hero Bike Dealership Hindi | हीरो बाइक डीलरशीप कैसे ले?

Hero Bike Dealership Hindi

दोस्तों! आज हम हीरो की बाइक डीलरशीप बिज़नस (bike dealership business) के बारे में बात करेंगे। जिसमें बाइक डीलरशीप प्लान (hero bike dealership Business Plan) को समझायेंगे। साथ ही इस लेख में हम हीरो बाइक डीलरशीप से जुड़े विभिन्न पहलु को जैसे hero bike dealership hindi एवम् bike agency business के बारें में बताऊंगा।

 

यदि आप ऐसे बिज़नस के बारे में सोंच रहे है जिसमे कुछ इन्वेस्टमेंट जरुर हो जाये लेकिन बड़ा बिज़नस-बड़ा मुनाफा और लाखों का income हो तो आपके लिए बाइक डीलरशीप का बिज़नस बेस्ट रहेगा।

बाइक डीलरशीप तो बहुत से कंपनी देते है लेकिन हीरो कंपनी हमारे इंडिया की कंपनी है जो इंडिया ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में टू व्हीलर कंपनी में टॉप ब्रांड में से एक है जो कि इंडिया ही नहीं पुरे विश्व में बहुत बड़े लेवल पर बिज़नस कर रही है।

हीरो कंपनी टू व्हीलर, थ्री व्हीलर, स्पोर्ट्स बाइक और इलेक्ट्रोनिक बाइक बनाती है हो लोगो को बहुत अधिक पसंद आता है। तो दोस्तों यदि आपको भी हीरो कंपनी की बाइक डीलरशीप मिल जाये तो आप भी अपने एरिया में बिज़नस करके अच्छी अर्निंग ले सकते है।

तो दोस्तों आज मै आपको बताऊंगा –

    1. हीरो की बाइक डीलरशीप आप कैसे ले सकते है?
    2. हीरो बाइक डीलरशीप की ऑनलाइन प्रोसेस क्या है?
    3. हीरो बाइक डीलरशीप में टोटल इन्वेस्टमेंट कितना लगेगा।
    4. हीरो बाइक डीलरशीप में आवश्यक डॉक्यूमेंट क्या है।
    5. हीरो बाइक डीलरशीप में आवश्यक जमीन कितना है।
    6. हीरो बाइक डीलरशीप में प्रॉफिट क्या है।

हीरो की बाइक डीलरशीप कैसे ले?

हीरो कंपनी की बाइक डीलरशीप दो तरह से लिया जाता है।

    1. मेन डीलरशीप
    2. सर्विस डीलरशीप

मेन डीलरशीप – यदि आपके पास बड़ी इन्वेस्टमेंट के लिए पर्याप्त जमीन है तो आपको मेन डीलरशीप ही लेना चाहिए। मेन डीलरशीप में आप कंपनी से डायरेक्ट जुड़े रहेंगे। साथ ही आपको बाइक सेलिंग के साथ बाइक के पार्टस की सेलिंग और सर्विसिंग की ऑथरिटी भी रहेगा।

सर्विस डीलरशीप – सर्विस डीलरशीप लेने पर आप कंपनी से डायरेक्ट न जुड़कर मेन डीलरशीप से जुड़े रहेंगे। साथ ही आपको बाइक सेलिंग की ऑथरिटी नही रहेगा। लेकिन आप बाइक के पार्टस सेलिंग के साथ-साथ बाइक सर्विसिंग कर सकते है। बाइक सर्विसिंग के लिए लोग प्रायः सर्विस डीलरशीप के पास ही जाते है न कि मेन डीलरशीप के पास। जो कि सर्विस डीलरशीप का मेन बेनिफिट है।

हीरो बाइक डीलरशीप में इन्वेस्टमेंट

1. मेन डीलरशीप- यदि जमीन आपकी खुद की है। तो शोरूम के इंटीरियर में 30 से 40 लाख रुपये और वर्किंग केपिटल में लगभग 40 से 50 लाख रूपये का खर्च आएगा। इस प्रकार टोटल खर्च लगभग 1 करोड़ के आसपास होगी।

2. सर्विस डीलरशीप- 50 से 60 लाख रूपये के अलावा 3 से 4 लाख रूपये ब्रांड सेक्योरिटी के रूप में देना होता है।

शोरूम में इंटीरियर का खर्च

शोरूम के डिज़ाइन और डेकोरेशन अपने हिसाब से चाहती है जो कि शोरूम में सेल्स एरिया,स्टॉक एरिया,सर्विस एरिया और पार्किंग जरुरी है।

वर्किंग कैपिटल का खर्च

जब आपकी हीरो कंपनी से बाइक डीलरशीप पक्की हो जाए उस स्थिति में आपके लोकेशन से एक महीने में सेल की जाने वाली गाड़ी आपको कंपनी से व्हीकल स्टॉक के लिए खरीदना होगा। सर्विस डीलरशीप- 30 से 40 लाख रूपये के अलावा 3 से 4 लाख रूपये ब्रांड सेक्योरिटी के रूप में देना होता है।

बाइक डीलरशीप के लिए जमीन

मेन डीलरशीप के लिए 3000 से 4000 स्क्वेयर फीट और सर्विस डीलरशीप के लिए 1200 से 1500 स्क्वेयर फीट की आवश्यकता होगी।

हीरो बाइक डीलरशीप में डाक्यूमेंट

इसमें दो प्रकार के डाक्यूमेंट की आवश्यकता होती है-

    1. पर्सनल डाक्यूमेंट- आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, बैंक अकाउंट,फोटोग्राफ,ईमेल आईडी और कांटेक्ट नंबर।
    2. प्रापर्टी के डाक्युमेंट- यदि जमीन आपकी निजी है तो आपको अपनी जमीन की कम्प्लीट डाक्यूमेंट विथ टाइटल एड्रेस प्रूफ होना चाहिए।

और यदि जमीं आपने रेंट में ले रखी हो तो रेंट जमीन का लीज एग्रीमेंट एन ओ सी के साथ होना चाहिए।

हीरो डीलरशीप में कंपनी हेल्प

शोरूम के डिज़ाइन और डेकोरेशन अपने हिसाब से चाहती है, इसलिए कंपनी एक इंजीनियर भेजती है साथ ही आपके एजेंसी की बेहतर सेल्स एवं सर्विस के लिए आपके साथ आपके हेल्पर और वर्कर को ट्रेनिंग भी देती है और आपके एजेंसी के विज्ञापन में भी हेल्प करती है।

हीरो बाइक डीलरशीप बिज़नस में रिस्क

हर बिज़नस की तरह इस बिज़नस में भी रिस्क है। यदि दोस्तों आपको बाइक एवं बाइक के पार्ट्स और सर्विस का अच्छे से ज्ञान नहीं है। और बाइक के विभिन्न फाल्ट और प्रकार की जानकारी नहीं है तो यह बिज़नस आपके लिए रिस्क हो सकता है।

दोस्तों कोई भी बिज़नस करने से पहले अपने एरिया में सर्वे कर लेवे। नफे/ नुकसान का अनुमान लगा लो। पहले से बाइक डीलरशीप बिज़नस कर रहे लोगो से सलाह लो। उसके बाद ही बिज़नस को शुरू करो। नहीं तो आपको नुकसान भी हो सकता है।

दोस्तों इनके अलावा हीरो कंपनी की बाइक डीलरशीप बिज़नस से जुड़े विभिन्न जानकारी के लिए आप हमारे इस विडियो को देख सकते है। जिसमे हमने hero bike dealership hindi को विस्तार से बताया है। इस विडियो में हीरो बाइक डीलरशीप बिज़नस के रिस्क, स्किल्स और विभिन्न तथ्यों के बारें में चर्चा किया है।

तो दोस्तों उम्मींद करता हु यह लेख Hero MotoCorp Bike Dealership आपको बहुत पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख ( hero bike dealership Hindi ) पसंद आया हो तो लाइक करें। लोगो को शेयर करें। ताकि वो भी इस new business ideas को अपने एरिया में शुरू करके अच्छी मुनाफा ले सके।

यदि आप कोई सवाल आप पूछना चाहते है तो निचे Comment Box में जरुर लिखे और अगर आपके को सुझाव है तो जरुर दीजियेगा। दोस्तों हमारे अन्य वेबसाइट https://www.nayabusiness.in एवं YouTube चैनल Computervidya को अगर आप अभी तक सब्सक्राइब नहीं किये तो तो जरुर सब्सक्राइब कर लेवें।

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Top 10 cow dung business in india | गोबर से जुड़े 15 बेस्ट बिज़नस आइडियाज

 

Top 10 Cow Dung Business in India

दोस्तों! आज हम गोबर से जुड़े 15 बेस्ट बिज़नस आइडियाज (Top 10 cow dung business) के बारे में बात करेंगे। जिसमें गोबर से जुड़े 15 बिज़नस प्लान (cow dung business Plan) को समझायेंगे। साथ ही इस लेख में हम गोबर बिज़नस से जुड़े विभिन्न पहलु को जैसे cow dung Business Ideas एवम् gobar se business के बारें में बताऊंगा।

हाल ही में हरेली के दिन से छ.ग. सरकार ने खुले में चराई को बंद करने और कृषि के प्रति युवाओं के रूचि को बढ़ाने के उद्देश्य से ‘गोधन न्याय योजना’ की शुरूआत कर दी है, और इसके पहले ‘गौठान योजना’ और उसके पहले छ.ग. के चार चिन्हारी नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती को बढ़ावा दिया है। इन योजनाओं ने न सिर्फ गोबर के महत्व को बढ़ावा दिया है बल्कि मार्केट में गोबर से बिकने वाले प्रोडक्ट की डिमांड को भी बढ़ा दिया है। इस कारण गोबर से संबंधित बिजनेस करने वाले आज लाखों का इन्कम ले रहे है।

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आप गोबर से कौन-कौन से 15 बिजनेस कर सकते है। गोबर से बिजनेस करने के लिए कौन-कौन सी मशीनों (cow dung machine) की आवश्यकता होगी। तैयार माल को आप कहाँ सेल कर सकते है। प्रत्येक बिजनेस में आपकी लागत और मुनाफा कितनी होगी। तो दोस्तों आइये देखते है कि गोबर से 15 बिजनेस कौन-कौन से है-


गोबर से धुपगत्ती का बिजनेस

आजकल मार्केट में गोबर के धूपबत्ती का काफी डिमांड और चलन है। क्योंकि गोबर से बने होने के कारण मंदिरों और धार्मिक स्थलों और घरों में पूजा , हवन आदि के लिए गोबर के धूपबत्ती का उपयोग बढ़ गया है। गाय के गोबर से धूपबत्ती बनाना बहुत ही आसान है इसे आप छोटे-छोटे सांचो से या अधिक मात्रा में बनाने के लिए मशीनों का उपयोग कर सकते है। इसे 10 किलो गोबर में 5 किलो लकड़ी का बुरादा ,आधा किलोग्राम चंदन 10 टिकिया कपूर, 250 ग्राम सरसों जौ का आटा और 250 ग्राम गौमूत्र जो तीन बार उबला हो को मिक्स करके बनाया जाता है। 4 इंच की 15 स्टिक 30 से 40 रू में बिक जाती है।

cow dung business

यदि आप भी गोबर से धूपबत्ती का बिजनेस (cow dung dhupbatti business) करना चाहते है और इसकी पूरी जानकारी चाहते है तो आप निचे दिए गए विडियो को जरुर देखें। क्योकिं इसमें हमने गोबर से धूपबत्ती का बिजनेस की पूरी जानकारी दी है।


गोबर से गमला का बिजनेस

गोबर का जो गमला बनता है वह मिट्टी और सीमेंट के गमला की अपेक्षा विशेष क्वालिटी का होता है क्योंकि गोबर का गमला हल्का, ताप नियंत्रक और वायु का वाष्पोत्सर्जक होता है। जो कि पौधे के वृद्धि एवं पोषण के लिए बेहतर है। साथ ही यदि किसी कारणवश गोबर का गमला टूट जाता है तो वह खाद के रूप में काम आ जाता है। गोबर का गमला मशीन से एक दिन में 500 गमला तैयार हो जाता है जिसे आप 20 से 25 रू़ में सेल कर सकते है।

यदि आप भी गोबर से गमला बनाने का बिजनेस (flower pot business) करना चाहते है और इसकी पूरी जानकारी चाहते है तो आप निचे दिए गए विडियो को जरुर देखें। क्योकिं इसमें हमने गोबर से गमला बनाने का बिजनेस की पूरी जानकारी दी है।


गोबर से दिये का बिजनेस

आजकल आप मार्केट में हल्की और विभन्न डिजाइनों में रंग-बिरंगी दिये देखते है। वो गोबर से बने होते है, इस गोबर दिये की डिमांड दूसरे राज्यों के साथ विदेशों में भी बहुत है। गोबर को छोटे-छोटे गोले के रूप में सूखाकर उसे बारीक पाउडर बना लिया जाता है। उस पाउडर में गोबरगम मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाकर किसी डिजाइन में आकार दे दिया जाता है। हल्की धूप या खुली छांव में सूखाकर उसे फेब्रिक कलर से पेंट करके मार्केट में आकार के अनुसार 1,2 या 3 रू में बेच कर अच्छा-खासा मुनाफा ले सकते है।

इस बिजनेस को महिलाएं ज्यादातर समूह के रूप में करती है। इस दिये में भी मिट्टी के दिये के समान ही गुण होते है साथ ही इसका वजन भी कम होता है। जो संस्थाएं मिट्टी के दिये को बिजनेस करते है उसको भी आप सेल कर सकते है। दिये को हाथ से बनाये जाते है लेकिन ज्यादा फिनिसिंग और अधिक मात्रा में शीघ्रता से बनाने के लिए आप सांचा या मशीन का भी उपयोग कर सकते है।

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गोबर से कागज का बिजनेस

यदि आपके पास 8 -10 लाख का बजट है। तो आप गवर्नमेंट की योजना के अनुसार आप 12 लाख के गोबर से पेपर बनाने का उद्योग लगाकर एक ही महिने में लाखों को इन्कम ले सकते है। इस प्रोजेक्ट में सरकार सब्सिडी भी देती है। यह प्रोजेक्ट दूसरे राज्यों में लग चुके है लेकिन छ.ग. में अभी ये यूनिक बिजनेस है यदि आप यह बिजनेस करते है। तो इसकी डिमांड मार्केट में बहुत ज्यादा है साथ ही आप पेपर से और भी बिजनेस कर सकते है। इस बिजनेस की एक और खासियत है। कि इस बिजनेस का कोई भी वेस्ट पर्यावरण को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुँचाता है।

यदि आप भी गोबर से कागज बनाने का बिजनेस करना चाहते है और इसकी पूरी जानकारी चाहते है तो आप निचे दिए गए विडियो को जरुर देखें। क्योकिं इसमें हमने गोबर से कागज बनाने का बिजनेस की पूरी जानकारी दी है।


गोबर से गोकाष्ट लकड़ी का बिजनेस

गोकास्ट की खोज के बाद जलाऊ पेड़ो को काटने की क्रिया में कमी आयी है विशेष दाह संस्कार में सबसे ज्यादा बिकने वाली उत्पाद है। साथ ही इसके धूएं से उस स्थान के समस्त रोगाणु,जीवाणु और विषाणु भी खत्म हो जाते है। साथ ही उस स्थान में शुद्ध वायु का प्रवाह हो जाता है। गोबर से गौकास्ट बनाना अन्य उत्पाद की तुलना में सबसे सरल है। गोबर को 3-4 दिन स्टाक करके उसके मायस्चर को कम करके गौकास्ट बनाने वाली मशीन के हापर में डाला जाता है। उसके बाद धूप में सूखने के बाद गोबर से गोकास्ट तैयार हो जाता है। मार्केट में इस गोकास्ट की कीमत 5-7 रू. /किलो है। 50000 की मशीन से आप एक दिन में 20 क्विंटल लकड़ी तैयार कर एक महिना में आप 1 लाख इन्कम ले सकते है।

यदि आप भी गोबर से गौकास्ट का बिजनेस करना चाहते है और इसकी पूरी जानकारी चाहते है तो आप निचे दिए गए विडियो को जरुर देखें। क्योकिं इसमें हमने गोबर से गौकास्ट का बिजनेस की पूरी जानकारी दी है।


गोबर से साबुन का बिजनेस

केमिकल सोप हमारी स्किन में चर्मरोग जैसी कई बिमारियो को आमंत्रित करती है, बल्कि इसके विपरित गोबरसोप अनेक रोगों से बचाव करती है। गोबर के साथ नीम के तेल, कपूर, हल्दी, सरसो का तेल, नारियल तेल और साइट्रिक एसिड को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर गोबर सोप बनाया जाता है। गोबर सोप से चर्मरोग संबंधी अनेक समस्या के लिए बेहतर होता है। एक गोबर सोप को आप 25 से 35 रू. में बेचकर अच्छा-खासा इन्कम ले सकते है। गोबरसोप को आप होममेड भी तैयार कर सकते है। या फिर गोबरसोप बनाने की मशीन खरीद कर प्रोडक्शन कर सकते है।


गोबर से अगरबत्ती का बिजनेस

बाहर चरने वाली गाय के एक किलो गोबर में अगरबत्ती बनाने का मसाला को मिलाया जाता है, उसमें थोड़ा सा घी मिलाकर अच्छी तरह मिलाकर आवश्यक साइज में बनाकर अगरबत्ती तैयार किया जाता है । तैयार अगरबत्ती को धूप या खुली छांव में सूखाया जाता है। सूखने के बाद 10,12,15 या 20 अगरबत्ती के सेट मे पैकेट तैयार किया जाता है। मार्केट में 15 अगरबत्ती के पैकेट की कीमत 35 से 45 रू़ तक होता है।


गोबर से ईट का बिजनेस

गोबर से बनने वाली ईट ताप नियंत्रक,हल्का और रेडियेशन को कम करता है। साथ ही इकोफैंडली है। दोस्तो छ.ग. में ये बिजनेस एक यूनिक बिजनेस है, इस बिजनेस से आप अनियमित कमाई कर सकते है। इस बिजनेस की एक और खासियत है कि इस बिजनेस का कोई भी वेस्ट पर्यावरण को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुँचाता है। गोबर में जिप्सम,चूना,फ्लाईएश ,साइट्रिक एसिड को ईट बनाने के फार्मूला के अनुसार निश्चत अनुपात में मिलाकर ईट बनाया जाता है। जो लोग गोबर से ईट बनाने के मशीन सेल करते है वे फार्मूला के साथ ट्रेनिंग भी देते है। मार्केट में ये ईट 4 से 5 रू़. में सेल होती है।


गोबर से खाद का बिजनेस

गोबर खाद मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाने के साथ पर्यावरण से इकोफैंडली है। गोबर खाद से जो भी पौधा या फसल तैयार होता है। वह स्वास्थ्य के लिए लाभवर्धक है। जो कि विभिन्न बिमारियों से बचाती है। इसी कारण गोबर से बने खाद की डिमांड बहुत ज्यादा है। गोबर खाद को आप किसानों के अलावा नर्सरी वालों को, पौधारोपण करने वालों को और तुलसी, एलोविरा और सतावर जैसी औषधी पौधे की खेती करने वालों को सेल कर सकते है।

गोबर के मायस्चर को कम करके उसमें भूसी मिलाकर गोबर से खाद बनाने की मशीन से खाद बनाया जाता है। आप गोबर खाद बनाकर 10 रू./किलो में बेचकर अच्छा इन्कम ले सकते है।।


गोबर से वर्मी कंपोस्ट

गोबर को छायादार जगह पर 2-3 फूट ऊंचे किसी टंकी या गड्ढे को आवश्यकतानुसार लम्बाई – चौड़ाई देकर उसमें गोबर डालकर उसमें थोड़े से केंचुए डालकर जूट की बोरी या खरपतवार से ढ़क दिया जाता है। और समय – समय पर पानी का छिड़काव किया जाता है और 2 महिने के अंदर केंचुए गोबर से वर्मी कंपोस्ट में परिवर्तित कर देते है। वर्मी कंपोस्ट को आप 8-10 रू/किलो में सेल कर सकते है। गोधन न्याय योजना के तहत वर्मी कंपोस्ट को अब छ.ग. सरकार भी 8 रू/किलो से गौठानों में खरीदेगी।


गोबर से उपला (केक, कंडे)

दाल, रोटी, दूध घी और प्रसाद इत्यादि को गैस के बजाय कंडे से बनाने पर उनके गुणवत्ता में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं आती है। इसके अलावा धार्मिक स्थलों और दाह संस्कार में गोबर के उपलों की विशेष उपयोगिता है। गोबर से उपला का बिजनेस बहुत पुराना है गोबर से उपले बनने के बाद उसको बेचने के लिए परिश्रम की आवश्यकता ही नही है। ग्राहक स्वयं ढूंढ़ता हुआ आता है और यदि आपको अधिक कीमत में बेचना है। अमेजान या फ्लिपकार्ट में 10-12 उपला को 50 रू. बिक जाती है।

ऑनलाइन सेलिंग के लिए ई-कॉमर्स में एकाउंट बनाना होता है। उपला बनाने के लिए किसी प्रकार की विशेष मशीन की आवश्यकता होती नहीं है। यदि आप चाहे तो सांचा से परफेक्ट सेफ और फिनिसिंग दे सकते है। गोबर से उपला बनने के बाद उसे धूप में रखने से एक सप्ताह में सूख कर तैयार हो जाता है।


साम्ब्रानी धूपबत्ती का बिज़नस

आजकल मार्किट में गोबर से साम्ब्रानी धूपबत्ती का खूब डिमांड और चलन है। क्योकिं यह गोबर से बनने के वजह से इसका विशेष महत्व है। हमारे देश में धार्मिक आस्था को विशेष महत्त्व दिया जाता है। अतः साम्ब्रानी धूपबत्ती का डिमांड मंदिरों, पूजा स्थलों एवं धार्मिक अनुष्ठानों में बहुत अधिक होता है। साम्ब्रानी धूपबत्ती को सांचे की सहायता से बनाया जाता है। अधिक मात्रा में प्रोडक्शन के लिए मशीन का उपयोग किया जाता है।

यदि आप भी साम्ब्रानी धूपबत्ती का बिज़नस करना चाहते है और इसकी पूरी जानकारी चाहते है तो आप निचे दिए गए विडियो को जरुर देखें। क्योकिं इसमें हमने साम्ब्रानी धूपबत्ती की पूरी जानकारी दी है।


गोबर से वैदिक प्लास्टर का बिज़नस

जयपुर में रोहतक के भारत कालोनी के डॉ शिवदर्शन में आयुर्वेद और साइंस का मेल करके वैदिक प्लास्टर को तैयार किया है। वैदिक प्लास्टर को गाय के गोबर से बनाया जाता है। वैदिक प्लास्टर गर्मियों के दिनों में टेम्प्रेचर को 8 से 10 डिग्री तक कम कर देता है। और सर्दी के दिनों में टेम्प्रेचर को 8 से 10 डिग्री तक बढ़ा देता है।

वैदिक प्लास्टर बनाने के प्रोसेस में 10 प्रतिशत गोबर और 70 प्रतिशत जिप्सम 15 प्रतिशत रेतीली मिटटी और 5 प्रतिशत ग्वारगम और निम्बू के रस के पाउडर को मिलाकर बनाया जाता है। यदि वैदिक प्लास्टर की सेल्लिंग की बात करें तो 30 रूपये प्रति वर्ग फिट की दर से मार्किट में बिक जाता है और इसका मार्किट में बहुत अधिक डिमांड है। वैदिक प्लास्टर का बिज़नस बहुत ही यूनिक बिज़नस आईडिया है। अतः आप भी इस बिज़नस को अपने एरिया में शुरू करके बहुत अच्छा प्रॉफिट ले सकते है।


गोबर गैस प्लांट का बिज़नस

यदि आप डेयरी का बिज़नस करते है या फिर पशुपालन करते है। और आपके पास अधिक मात्रा में गोबर उपलब्ध है तो आप गोबर गैस प्लांट शुरू करके अच्छी प्रॉफिट ले सकते है। गोबर गैस प्लांट से उत्पन्न गोबर गैस को अपने आस पास के घरों में सप्लाई करके इस बिज़नस की शुरवात कर सकते है।


गोबर से मच्छर क्वाइल का बिजनेस

केमिकल वाली क्वाइल बच्चों, बुजुर्ग के साथ युवाओं में श्वास संबंधी विभिन्न प्रकार के रोगों को आमंत्रिव करती है। लेकिन गोबर से जो क्वाइल बनती है वह 100 प्रतिशत हर्बल होने के कारण किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुँचाता है।गोबर में कपूर, और नीम का तेल से गोबर क्वाइल बनाया जाता है जो कि मार्केट केमिकल क्वाइल से कम कीमत में बेचकर भी ज्यादा मुनाफा लिया जा सकता है।

तो दोस्तों उम्मीद करते है कि इस पोस्ट गोबर से जुड़े 15 बेस्ट बिज़नस आइडियाज (Top 10 cow dung business in india) आपको जरुर पसंद आया होगा दोस्तों अगर यह पोस्ट (gobar se jude 15 best business) आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों को फेसबुक, व्हात्सप्प, इन्स्ताग्राम इत्यादि में शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो पोस्ट के निचे कमेंट करना ना भूलें। धन्यवाद् !……

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What is TDMA in Hindi | TDMA क्या है ? TDMA advantages and Disadvantages

TDMA in Hindi

दोस्तों! आज हम TDMA (Time Division Multiple Access) के बारे में बात करेंगे। जिसमें TDMA के प्रोसेस (TDMA in Hindi) को समझायेंगे। साथ ही इस लेख में हम TDMA से जुड़े विभिन्न पहलु को जैसे TDMA advantages एवम् TDMA disadvantages के बारें में बताऊंगा।

TDMA क्या है? (TDMA kya hai?)

TDMA का पूरा नाम Time Division Multiple Access (TDMA in Hindi) है। यह एक चैनल एक्सेस मेथड है। जिसमे कम्युनिकेशन लिंक को नेटवर्क में उपस्थित सभी स्टेशन को समय के अनुसार बाँट दिया जाता है। प्रत्येक स्टेशन के लिए अलग अलग टाइम स्लॉट होता है। अर्थात सभी स्टेशन को ट्रांसमिशन के लिए समय आबंटित कर दिया जाता है। जिस समय जिस स्टेशन का टाइम स्लॉट होता है केवल उसी का कैरियर उपस्थित रहता है।

TDMA

उदहारण:- जिस प्रकार रेलवे में प्रत्येक ट्रेन के लिए एक समय स्लॉट होता है। उसी के अनुसार वह ट्रेन एक से दूसरी जगह जाता है। जबकि रेल पटरी एक ही होती है। इसी प्रकार नेटवर्क में उपस्थित प्रत्येक स्टेशन को एक टाइम स्लॉट दे दिया जाता है उसी में वह ट्रांसमिशन का कार्य करता है।

TDMA के लाभ (TDMA Advantages Hindi )

    1. किसी भी दिए गए समय में केवल एक स्टेशन ट्रांसमिट कर सकता है। जिसके कारण collision की संभावना बहुत कम होती है।
    2. TDMA एक प्रभावी ट्रांसमिशन सिस्टम है। क्योकिं इसमें कम्युनिकेशन लिंक का अच्छा यूटिलाइजेशन होता है।
    3. TDMA के अंतर्गत टाइम स्लॉट में सिग्नल को तैयार करना बहुत ही असान होता है।

TDMA के हानियाँ (TDMA Disadvantages Hindi )

    1. TDMA नेटवर्क में सभी स्टेशन को सिंक्रोनाइज करना आवश्यक होता है।
    2. प्रत्येक स्टेशन के द्वारा ट्रांसमिशन दिए गए निश्चित समय में हो जाना चाहिए।
    3. एक स्टेशन ही दिए गए स्टेशन में ट्रांसमिट कर सकता है। और वो भी दिए गए टाइम स्लॉट में ही ट्रांसमिट कर सकता है।

तो दोस्तों उम्मीद करते है कि इस पोस्ट What is TDMA in Hindi? (TDMA kya hai) आपको जरुर पसंद आया होगा दोस्तों अगर यह पोस्ट (TDMA in Hindi) आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों को फेसबुक, व्हात्सप्प, इन्स्ताग्राम इत्यादि में शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो पोस्ट के निचे कमेंट करना ना भूलें। धन्यवाद् !…..

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How to start mushroom farming business in Village | मशरूम की खेती कैसे शुरू करें?

 

दोस्तों! आज हम मशरूम फार्मिंग बिज़नस आइडियाज (mushroom farming business) के बारे में बात करेंगे। जिसमें मशरूम की खेती (Mushroom Farming in India) को विस्सतार से समझायेंगे। साथ ही इस लेख में हम मशरूम फार्मिंग बिज़नस से जुड़े विभिन्न पहलु को जैसे प्रॉफिट जमींन, लागत, डिमांड इत्यादि की विस्तार से चर्चा करेंगे।

मशरूम की खेती किसान भाइयों के लिए बहुत ही जबरदस्त बिज़नस है। क्योकिं इसकी सेल्लिंग बहुत ही महँगी होती है और आजकल लोगो में इसकी काफी अधिक डिमांड है। क्योकिं मशरूम में प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है जिसके कारण यह एक बहुत ही फायदेमंद बिज़नस आइडियाज है।

अतः आज के इस पोस्ट में हम आपको mushroom farming की पूरी जानकारी देंगे। यह पोस्ट केवल किसान भाइयों के लिए नहीं है बल्कि उन सभी बेरोजगार साथी और नौजवान युवक जो खेती के क्षेत्र में कुछ अच्छा करना चाहते है। और वे सभी लोग जो farming business ideas करना चाहते है।

मशरूम की खेती क्यों करें?

मशरूम में बहुत अधिक प्रोटीन होता है जिसके कारण यह स्वास्थ के लिए बहुत लाभदायक है। और यदि बिज़नस की नजरिये से बात करें तो यह best farming business ideas है जिसे आप सरलता से उगा सकते है। घर में यदि एक रूम भी खाली है तो आप 100 बेग से इसकी खेती कर सकते है।

मशरूम की खेती को आप बहुत ही कम पैसे में शुरू कर सकते है और इसकी खेती में बहुत अधिक प्रॉफिट है क्योंकि इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। आजकल लोग स्वास्थ के प्रति बहुत जागरूक है और डॉक्टर भी अपने प्रिस्क्रिप्शन में इसको शामिल कर रहे है।

मशरूम की खेती कहा शुरू करें?

मशरूम की खेती के लिए बहुत ज्यादा जमींन की जरुरत नहीं होती है। आप mashroom farming की शुरवात घर से ही कर सकते है। यदि आपके घर में छोटा सा कमरा खाली है तो आप वही से मशरूम फार्मिंग कर सकते है।

How to start mushroom farming business in Village | मशरूम की खेती कैसे शुरू करें?

मशरूम की खेती कब करें?

मशरूम की खेती को बारहों महिना किया जा सकता है केवल मई और जून के माह में तापमान को मेंटेन करने में थोड़ा सा दिक्कत हो सकता है। और यदि आप कमरे के तापमान को मेन्टेन कर सकते है तो फिर आप मशरूम की खेती बारहों महिना कर सकते है।

कमरे का तापमान कितना होना चाहिए?

ऑयस्टर मशरूम की खेती के लिए कमरे का तापमान लगभग 20 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड के बिच होना चाहिए। साथ ही एक और ध्यान देने वाली बात है की कमरे की आद्रता (humidity) 70 से 90 के बिच होनी चाहिए।

मशरूम फसल की समयावधि

मशरूम की एक फसल चक्र 45 से 55 दिन की होती है जिसमे मशरूम की पहली फ्रूटिंग 25 से 30 दिन में आ जाता है उसके बाद दूसरी फ्रूटिंग 7 से 10 दिन बाद और तीसरी फ्रूटिंग उसके 7 से 10 दिन बाद आ जाता है। इस तरह मशरूम की एक फसल चक्र लगभग 2 महीने में पूरा हो जाता है जिसमे हम मशरूम की तिन बार तोड़ाई करते है। यदि एक पुरे साल की बात की जाये तो आप 5 से 6 बार मशरूम की फसल चक्र पूरा कर सकते है।

मशरूम का उत्पादन

यदि मशरूम के उत्पादन की बात की जाये तो एक बैग में लगभग 2 किलो मशरूम का उत्पादन होता है यदि आप 50 बैग की खेती करते है तो आप लगभग 100 किलो मशरूम का उत्पादन ले सकते है।

Mashroom farming

मशरूम से कमाई

50 बैग मशरूम की खेती यदि आप एक छोटे से कमरे में करते है तो एक बैग में आपको 30 से 40 रूपये का खर्च आता है इस तरह 50 बैग का खर्च 2000 रूपये आएगा जिसमे 500 रूपये अन्य खर्च होंगें।

50 बैग में आप 100 kg मशरूम उत्पादन करेंगे। एक किलो मशरूम की कीमत 200 रूपये होती है। इस तरह आप 20 हजार रूपये में मशरूम सेल करेंगे जिसमे आपको 17500 रूपये का आमदनी होगा । यदि हम 2500 रूपये अन्य खर्च और निकाल दे तो आपको लगभग 15000 रूपये शुद्ध प्रॉफिट होगा। अतः आप अनुमान लगा सकते है की बढे लेवल पर मशरूम फार्मिंग की जाये तो कितना प्रॉफिट होगा।

मशरूम खेती की ट्रेनिंग कहा से लें?

यदि आप भी मशरूम की खेती करना चाहते है तो आप इसकी ट्रेंनिंग केवल एक हजार रूपये में ले सकते है और अपने घर पर मशरूम खेती करके अच्छा प्रॉफिट ले सकते है। हमने अपने विडियो के डिस्क्रिप्शन में अशोक वर्मा जी का नंबर दिया है। जो पिछले 30 वर्षो से इसकी खेती कर रहे है आप इनसे मशरूम ट्रेनिंग ले सकते है। आप चाहे तो हमारे youtube channel computervidya को सब्सक्राइब करके उनके विडियो देखकर भी आप मशरूम फार्मिंग की पूरी जानकारी ले सकते है।

फार्मिंग के लिए शुरवाती खर्च

मशरूम फार्मिंग के लिए यदि आपके पास 10 बाई 12 का भी रूम है तो इसमें आप मशरुम के 100 बेग की खेती की शुरवात कर सकते है। जिसमे एक बेग का खर्च 30 से 40 रूपये तक आता है। इससे आप अनुमान लगा सकते है की मशरूम फार्मिंग में आपको कितना खर्च आएगा। यदि आप 50 बेग भी लगाते है तो 2000 रूपये से इसकी शुरवात कर सकते है।

मशरूम फार्मिंग के लिए मशीनरी

मशरूम की खेती के लिए कोई विशेष मशीन की जरुरत नहीं होती है केवल पानी छिडकने के लिए स्पेयर की जरुरत पड़ती है जो आपको मार्किट में 1000 से 1500 रूपये में असानी से मिल जायेगा। इनके अलावा आपको तापमान और आद्रता मापने के लिए एक डिवाइस की जरुरत होगी जो मेडिकल शॉप में 4 से 5 सौ रूपये में असानी से मिल जायेगा।

मशरूम खेती के लिए मजदूर

यदि आप मशरूम फार्मिंग को छोटे से कमरे में कर रहे है तो आपको कोई मजदुर की जरुरत नहीं होगी। एक अकेला व्यक्ति इसे असानी से कर सकता है। यदि आप बड़े लेवल पर करेंगे तो आपको मजदुर की जरुरत होगी।

यदि आप मशरूम फार्मिंग की अधिक जानकारी लेना चाहते है तो आप इसके अन्य पार्ट को जरुर पढ़े साथ ही ट्रेंनिंग विडियो देखने के लिए computervidya youtube चैनल में विजिट जरुर करें।

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Logistics Business Ideas – How to Start a Delivery Business Ideas at Home

दोस्तों! आज हम लोजिस्टिक्स बिज़नस आइडियाज (Logistics Business Ideas) के बारे में बात करेंगे। जिसमें डिलीवरी बिज़नस प्लान (Logistics Business Plan) को समझायेंगे। साथ ही इस लेख में हम डिलीवरी बिज़नस से जुड़े विभिन्न पहलु को जैसे Logistics Business Ideas एवम् Home Delivery business ideas के बारें में बताऊंगा।

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स्वागत है आपका एक और शानदार बिज़नस आईडिया में
दोस्तों, यदि आप बिज़नस की तलाश में है या कोई नया बिज़नस करना चाहते है, तो आपके लिए आज का विडियो बहुत ही खास है क्योकिं आज मैं आपके लिए एक बेस्ट फ्रैंचाइज़ी बिज़नस लेकर आया हूँ।

Logistics Business Ideas

आज के इस विडियो में हम एक ऐसे बेस्ट कंपनी के बारें में बता रहे है जो पिछले कुछ सालों में इंडिया में बहुत अधिक ग्रो कर चूका है। इनका बिज़नस बहुत अधिक चल रहा है और वर्तमान में यह कंपनी एक बहुत अच्छी Business Opportunity दे रहा है। जिसमे जुड़कर आप भी बिज़नस कर सकते है और इनसे अच्छी कमाई कर सकते है।

दोस्तों, इस बिज़नस की खास बात यह है की इसे कोई भी महिला, हाउस वाइफ या फिर कोई भी जो पहले से बिज़नस कर रहे है वह उस बिज़नस के साथ भी, इस बिज़नस को भी कर सकते है। और इसे पार्ट टाइम या फुल टाइम में करके अच्छी कमाई कर सकते है।

इंट्रोडक्शन (कंपनी की जानकारी)

आइये दोस्तों, कंपनी के बारें में जान लेते है कंपनी का नाम है Flye. दोस्तों Flye एक Logistics कंपनी है और यह कंपनी Subsidiary Company है। यह कंपनी Inyt Technologies Pvt Ltd की है जो सबसे सस्ता दुकान को चलाता है।

सबसे सस्ता दुकान एक इ फार्मेसी प्लेटफार्म है जिसकी शुरुवात 2018 में दो दोस्त अनिश अग्रवाल और अनंत जैन ने मिलकर किया है। अभी वर्तमान में सबसे सस्ता दुकान से जुड़कर 50000 से भी ज्यादा कस्टमर अपने दवाईयों का आर्डर करते है।

Flye वर्तमान में सबसे सस्ता दुकान की शिपमेंट डिलीवर करता है और भविष्य में इ-कॉमर्स प्लेयर के शिपमेंट को भी डिलीवर करना शुरू करेगी। यह कंपनी 4 लाख से भी ज्यादा आर्डर को डिलीवर कर चूका है और यह 2000 से भी अधिक पिन कोड वालें एरिया में कार्य कर रहा है। वर्तमान में Flye की 250 से भी अधिक फ्रैंचाइज़ी है जो बंगाल, बिहार, झारखण्ड और उड़ीसा में कार्य कर रहा है।

बिज़नस से कमाई

दोस्तों, यदि हम इस बिज़नस में हम आपको प्रॉफिट मार्जिन की बात करें तो इसमें आपको हर डिलीवरी पर कमीशन दिया जाता है। जिससे आपकी कमाई होगी। जितना ज्यादा आप डिलीवर करेंगे उतना ज्यादा आपको प्रॉफिट होगा। यदि आप इस बिज़नस से जुड़कर फुल टाइम काम करते है तो इनसे आप 60 से 70 हजार रूपये तक महिना कमा सकते है।

फ्रैंचाइज़ी कैसे ले?

दोस्तों इस बिज़नस की फ्रैंचाइज़ी लेना बहुत ही असान है। सबसे पहले आपको इनकी फ्रैंचाइज़ी फीस ढेड लाख रूपये देना होगा जिसमे एक लाख रूपये आपका डिपाजिट फीस होगा जो रिफंडेबल है। और 50 हजार रूपये फ्रैंचाइज़ी खर्च है तो नॉन-रिफंडेबल है।

इसके बाद कंपनी आपके साथ एक एग्रीमेंट करेगी जिसमे आपको पैन कार्ड, आधार कार्ड, करंट अकाउंट के कैंसिल चेक और GST नंबर की जरुरत होगी।

यह सभी प्रोसेस पूरा होने के बाद कंपनी आपको स्टोर को सेटअप करने में हेल्प करेगी साथ में बिज़नस से जुड़े ट्रेनिंग भी प्रोवाइड करेगी।

तो दोस्तों, इस तरह से आप सबसे सस्ता दुकान की Logistics Segment Flye के साथ बिज़नस को शुरू कर सकते है। कंपनी की वेबसाइट और कांटेक्ट डिटेल को हमने विडियो के डिस्क्रिप्शन में दे दिया है। आप चाहे तो वेबसाइट में विजिट करके enquiry From भर सकते है जिससे कंपनी खुद आपको कांटेक्ट करेगी। और इस तरह आप भी एक बेहतर बिज़नस शुरू करके आत्मनिर्भर बन सकते है।

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How to Start Slipper Making Business at Home in low investment

दोस्तों! आज हम स्लिपर मेकिंग बिज़नस (Slipper Business Ideas) के बारे में बात करेंगे। जिसमें स्लिपर मेकिंग बिज़नस प्लान (Slipper Making Business Plan) को समझायेंगे। साथ ही इस लेख में हम स्लिपर बिज़नस से जुड़े विभिन्न पहलु को जैसे Slipper Business plan एवम् Hawai Chappal business के बारें में बताऊंगा।

स्लीपर बनाने का प्रोसेस

दोस्तों आइये स्लिपर बनाने के प्रोसेस को आपको मै लाइव दिखाता हु जिससे आप जान जायेंगे की स्लिपर कैसे बनता है और यदि आप इसका स्लिपर बिज़नस (Slipper Making Business) करना चाहते है तो आपको क्या क्या करना होगा और आपको कौन कौन से मशीन और रॉ मटेरियल की जरुरत होगी।

स्लिपर बनाने के लिए मुख्यतः 3 मशीनों की जरुरत पड़ती है जिसे मैं आप विडियो में लाइव देख सकते है।  जिसमे पहला मशीन सोल कटिंग मशीन होता है जो विडियो में देख सकते है इस मशीन के माध्यम से स्लिपर शीट की कटिंग किया जाता है। मैं इस विडियो में आपको तीन प्रकार के आधुनिक सोल कटिंग मशीन को लाइव दिखाऊंगा अतः विडियो के लास्ट तक बने रहे।

दूसरा मशीन जो प्रयोग होता है इसे ग्राइंडर मशीन कहते है जो विडियो में आप देख रहे हो जिससे माध्यम से कटिंग किये गए स्लिपर के एज को फिनिशिंग करते है उसको सुन्दरता प्रदान करते है। इस ग्राइंडर मशीन के दुसरे सिरे पर ड्रिल लगा होता है जिसका उपयोग करके स्लिपर के कटे हुए सोल को में हाफ राउंड होल करते है जिससे स्लिपर का फीता असानी से फिट या सेट हो जाये।

स्लिपर बनाने में जो तीसरी मशीन उपयोग होता है उसे स्ट्रेप फिटिंग मशीन कहा जाता है जो आप विडियो में देख रहे है इसके माध्यम से सोल पर फीता को लगाया जाता है।

स्लिपर बनाने के लिए इन मशीनों के अलावा ड्राई और स्लिपर शीट की जरुरत पड़ती है ड्राई का उपयोग अलग अलग साइज़ के स्लिपर कटिंग के लिए किया जाता है। लेडिस के लिए अलग डाई आते है जेन्स और बच्चों के लिए अलग डाई आते है डाई 3 से 9 नंबर तक के आते है जो अलग साइज़ के स्लिपर बनाने में उपयोग होता है।

दोस्तों आज जो विक्रेता मैं आपको बता रहा हु उनकी खास बात यह है की वो केवल मशीन सेल नहीं करते, वो मशीन के साथ साथ रॉ मटेरियल भी सप्लाई करते है।

Slipper Machine की जानकारी

दोस्तों इस विडियो में मैं आपको 3 प्रकार के स्लिपर मशीन के बारें में बताऊंगा तो 2020 की बेस्ट मशीनें है। जो नये ज़माने की स्लिपर मशीनें है। ये मशीनें बहुत ही अच्छी क्वालिटी के है जिनका खरीद करके आप स्लिपर बिज़नस असानी से शुरू कर सकते है।

पहली स्लीपर मशीन

दोस्तों जो पहली मशीन मैं आपको बता रहा हु जिसे आप विडियो में देख रहे है यह नये ज़माने की हाइड्रोलिक मशीन है जिसे अवतार मशीन कहा जाता है। यह मशीन बिल्कुल नया है वर्तमान में ही लांच हुआ है। इस मशीन का प्रेसर लगभग 5 टन के बराबर होता है। जिससे आप असानी से स्लिपर की कत्तिंग कर सकते है।

avtar-slipper-machine

यह मशीन का लीवर है जिसके माध्यम से मशीन का पैनल निचे आता है और जिसमे लगभग 10 टन का प्रेसर होता है। आइये सबसे पहले इस मशीन के माध्यम से मै आपको स्लिपर शीट को कटिंग करके लाइव दिखाता हु।

सबसे पहले विडियो के अनुसार स्लिपर शीट को मशीन के पैनल के निचे रख दिया जाता है उसके पश्चात् जिस भी साइज़ की चप्पल बनाना है उस साइज़ के डाई को विडियो के अनुसार शीट के उपर रख दिया जाता है अब मशीन के लीवर को निचे किया जाता है जिससे मशीन 10 टन का प्रेसर जनरेट करके डाई को प्रेस करता है जिससे आप विडियो में देख सकते है शीट असानी से डाई के साइज़ में कट जाता है। इसके पश्चात् लीवर को उपर किया जाता है जिससे पैनल उपर चले जाता है।

दोस्तों यह मशीन घरेलु इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन में चल जायेगा इसके लिए सिंगल फेज कनेक्शन की जरुरत होती है। इस मशीन के माध्यम से आप एक दिन में लगभग 500 से 1000 स्लिपर की कटिंग असानी से कर सकते है।

दूसरी स्लीपर मशीन

दोस्तों विडियो में जो आप दूसरी मशीन देख रहे है यह सेमी आटोमेटिक स्लिपर कटिंग मशीन है यह एक हाइड्रोलिक मशीन है जो अवतार का बड़ा मॉडल है। दोस्तों यह सेम अवतार मशीन है लेकिन बस फर्क इतना है की वह अवतार मशीन 5 टन प्रेसर देती है और यह अवतार मशीन 10 प्रेसर देता है। जिसके कारण यह मशीन तेज गति से सोल शीट और हाई शीट को असानी से कटिंग कर सकता है।

यह मशीन का लीवर है इसके माध्यम से पैनल उपर एवं नीचे आता जाता है। इस मशीन को चलाने के लिए बिजली की जरुरत होगी यह मशीन भी सिंगल फेस इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन से चल जाता है आप इसे अपने घरेलु कनेक्शन से चला सकते है।

तीसरी स्लीपर मशीन

दोस्तों यह तीसरी स्लिपर मशीन है जो आप विडियो में देख रहे है यह पूरी तरह से मैन्युअल मशीन है इसमें सोल कटिंग का काम आपको हाथों से ही करना होगा। इस मशीन को चलाने के लिए आपको बिजली की जरुरत नहीं होगी। इस मशीन के साथ पुरे सेटअप की कीमत केवल 16000 रूपये है। इस सेटअप को यदि आप खरीदते है तो इसमें आपको 4 मशीन मिलेगी। पहला सोल कटिंग मशीन मिलेगा जिसके माध्यम से आप स्लिपर के सोल को काटेंगे। दोस्तों दूसरा ग्राइंडर मशीन मिलेगा जिसके माध्यम से आप स्लिपर के एज को फिनिशिंग करते है और स्लिपर के कटे सोल में हाफ राउंड होल करेंगे।

तीसरा मशीन आपको ये स्ट्रेप फिटिंग मशीन मिलेगा जिसके माध्यम से आप स्लिपर में फीते को लगाते है। दोस्तों आप विभिन्न प्रकार के फीते को सोल पर लगा सकते है। यह मशीन भी आपको स्लिपर सेट के साथ मिलेगा। और चौथा आपको डाई अर्थात चप्पल के सांचे मिलेंगे। विडियो में दिखाए किसी भी मशीन को खरीदने पर आपको 9 डाई फ्री में दिया जायेगा। जिनका उपयोग करके आप विभिन्न साइज़ के चप्पल बना सकते है। इस मशीन से आप महिलाओं के चप्पल, पुरषों एवं बच्चों के चप्पल असानी से बना सकते है।

मैन्युअल मशीन की कीमत

दोस्तों जो विडियो में हमने स्लिपर बनाने के मैन्युअल मशीन आपको दिखाई है उसके पुरे सेट की कीमत केवल 16000 रूपये है। सोल कटिंग मशीन के साथ आपको ग्राइंडर मशीन, स्ट्रेप फिटिंग मशीन और 9 डाई आपको फ्री में मिलेंगे। दोस्तों इस मशीन विक्रेता के खास बात यह है की यह मशीन के साथ साथ रॉ मटेरियल भी सप्लाई करते है और मशीन की क्वालिटी भी बहुत है अच्छी है अतः यदि आप 16000 की मशीन के साथ 4000 का रॉ मटेरियल लेते है तो आप केवल 20000 रूपये में अपने गाँव या छोटे कस्बे में शुरू करके अच्छी कमाई कर सकते है।

How to Start Slipper Making Business at Home in low investment

अवतार मशीन की कीमत

दोस्तों जो विडियो में हमने स्लिपर बनाने के अवतार मशीन आपको दिखाई है उसके पुरे सेट की कीमत केवल 45000 रूपये है। जो एक सेमी आटोमेटिक हाइड्रोलिक मशीन है जिसका प्रेसर 5 टन का है यह एक दिन में 300 से 500 स्लिपर तैयार कर सकता है। अवतार मशीन के साथ भी आपको ग्राइंडर मशीन, स्ट्रेप फिटिंग मशीन और 9 डाई आपको फ्री में मिलेंगे।

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बड़ा अवतार मशीन की कीमत

दोस्तों जो विडियो में हमने स्लिपर बनाने के अवतार मशीन की बड़ी मॉडल जो आपको दिखाई है उसके पुरे सेट की कीमत केवल 60000 रूपये है। जो एक सेमी आटोमेटिक हाइड्रोलिक मशीन है जिसका प्रेसर 10 टन का है यह एक दिन में 400 से 500 स्लिपर तैयार कर सकता है। अवतार मशीन के साथ भी आपको ग्राइंडर मशीन, स्ट्रेप फिटिंग मशीन और 9 डाई आपको फ्री में मिलेंगे।

रॉ मटेरियल की जानकारी

दोस्तों यदि आप स्लिपर मेकिंग बिज़नस शुरू करना चाहते है तो आपको तीन प्रकार के रॉ मटेरियल की जरुरत होगी जिसमे पहला स्लिपर शीट होता है जो आप विडियो में देख रहे है यह विभिन्न वेराइटी और क्वालिटी में आता है। यह 16 mm और 18 mm में आती है जिसकी कीमत 400 से 500 रूपये प्रति शीट होती है। यदि स्लिपर बनाने की बात करें तो एक शीट में 15 जोड़े जेन्स के या 22 जोड़े लेडिस के स्लिपर बनाये जा सकते है।

दोस्तों स्लिपर मेकिंग जो दूसरा रॉ मटेरियल होता है उसे स्ट्रेप, फीता या रिबन कहते है जो आप विडियो में देख रहे है इसकी कीमत 6 रूपये से लेकर 11 रूपये तक होती है। स्ट्रेप विभिन्न कलर एवं डिजाईन में आती है जिसे आप सेलर से मंगा सकते है।

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इनके अलावा आपको तीसरे रॉ मटेरियल में डाई अर्थात चप्पल के सांचे होते है जो मशीन खरीदने पर आपको 9 डाई फ्री में मिलेंगे। शुरुवात में आप इन 9 डाई से बिज़नस शुरू कर सकते है लेकिन यदि आपको और डाई की जरुरत पड़ती है तो आप सेलर से मंगा सकते है।

अब आइये दोस्तों सेलर से हम रॉ मटेरियल के वेराइटी और प्राइस की जानकारी ले लेते है मैं इनका नंबर विडियो के डिस्क्रिप्शन में दे दूंगा जहाँ से आप इन्हें कांटेक्ट कर सकते है।

दोस्तों Slipper Making Business की पूरी जानकरी के लिए आप हमारे विडियो को पूरा देखे जिसमे हमने स्लिपर मेकिंग बिज़नस के बारें में डिटेल जानकारी दिया है। इस विडियो में हमने स्लिपर मेकिंग बिज़नस की जानकारी के साथ साथ, लागत, मुनाफा, लाइसेंस, मशीन, और रिस्क के बारें में विस्तार से बताया है।

तो दोस्तों उम्मींद करता हु यह लेख Slipper Business Ideas आपको बहुत पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख ( Slipper business in Hindi ) पसंद आया हो तो लाइक करें। लोगो को शेयर करें। ताकि वो भी इस new business ideas को अपने एरिया में शुरू करके अच्छी मुनाफा ले सके।

अब दोस्तों यदि कोई ये Slipper Business Ideas से जुड़े तथ्यों की चर्चा करता है स्लीपर बिज़नस प्लान (battery business plan) तो आप आसानी से जवाब दे पाएंगे। दोस्तों कोई सवाल आप पूछना चाहते है तो निचे Comment Box में जरुर लिखे और अगर आपके को सुझाव है तो जरुर दीजियेगा। दोस्तों हमारे अन्य वेबसाइट https://www.nayabusiness.in एवं Youtube चैनल computervidya को अगर आप अभी तक सब्सक्राइब नहीं किये तो तो जरुर सब्सक्राइब कर लेवें।

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Battery Business – How to Start Car Battery Business Plan in India

Battery Business – How to Start Car Battery Business Plan in India

दोस्तों! आज हम बैटरी बिज़नस (Battery Business Ideas) के बारे में बात करेंगे। जिसमें बैटरी बिज़नस प्लान (Battery Business Plan) को समझायेंगे। साथ ही इस लेख में हम बैटरी बिज़नस से जुड़े विभिन्न पहलु को जैसे car battery business plan एवम् home inverter business के बारें में बताऊंगा।

नए ज़माने का नया बिज़नस

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका एक और शानदार और नया बिज़नस के साथ computervidya में.। आज का यह पोस्ट उन लोगो के लिए है। जो मध्यमवर्गी परिवार से है और जो हमसे पूछते है की सर कुछ ऐसा बिज़नस बताओ। जो वर्तमान और भविष्य में अच्छे से चल सके। जिसमे बहुत अधिक प्रॉफिट हो और जो नए ज़माने का नया बिज़नस हो।

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तो आज मैं उन्ही ले लिए एक जबरदस्त नया बिज़नस (New Business Ideas) लेकर आया हु। जिस बिज़नस का नाम इन्वर्टर बैटरी बिज़नस है। जिसे आप केवल 5 लाख के इन्वेस्टमेंट में शुरू करके अच्छा प्रॉफिट ले सकते है।

बैटरी बिजनेस की डिमांड

दोस्तों बैटरी बिजनेस को करने के दो मुख्य वजह है। पहला गाड़ियों की बढ़ती संख्या और दूसरा बदलता हुआ लाइफस्टाइल है। आज कल आपने देखा होगा सभी घरों में दो से तीन गाड़ियां तो होती ही है। साथ ही कुछ घरों में थ्री व्हीलर, फोर व्हीलर और कमर्शियल व्हीकल भी होती है। इसके अलावा प्रत्येक घर में कुछ ऐसी चीजें होती है जो बैटरी से चलती है।

दोस्तों, लाइफस्टाइल की बात करूं तो पावर कट की समस्या एक बहुत बड़ी समस्या है। कोई भी 2 मिनट से अधिक लाइट ऑफ नहीं रह सकता है। यदि आप छोटे से गांव, क़स्बा या शहर में भी रहते हैं तो आप इस समस्या से वाकिफ जरुर होंगें। तो आपको पता चल ही गया होगा की बैटरी और इनवर्टर का बिज़नस कितना डिमांडेबल बिज़नस है। यह एक प्रॉफिटेबल बिज़नस है जो वर्तमान और भविष्य काफी फायदेमंद है।

Battery Business investment (लागत)

दोस्तों यदि आप बैटरी बिज़नस शुरू करना चाहते है तो बैटरी बिज़नस की शुरुवाती लागत (Battery Business Investment) लगभग 5 लाख रूपये की होती है। जो आपके बजट के अनुसार 10 लाख तक जा सकती है।

बैटरी बिज़नस में जो 5 लाख का शुरवाती इवेस्टमेंट बताया हु वह बैटरी के स्टॉक के लिए होगा। जिसमे आप विभिन्न कंपनी के बैटरी को खरीदकर स्टॉक रखेंगे। साथ ही दोस्तों कार के अलग-अलग मॉडल, बाइक के विभिन्न मॉडल, घर के इन्वर्टर बैटरी अलग-अलग होती है जिसे आप एक दो पिस शुरुवात में रख सकते हो। इन सब में आपको लगभग 5 लाख का खर्च आएगा।

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इनके अलावा आपको जगह, दुकान और दुकान के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अलग से खर्च करना होगा। इसे आप अपने बजट के अनुसार खर्च कर सकते है।

बैटरी कंपनी की जानकारी

दोस्तों वर्तमान में बहुत सारें कंपनीयों की बैटरीयां मार्किट में उपलब्ध है जिसमे पॉपुलर बांडेड कंपनी जैसे लुमिनस, एक्साइड, माइक्रोटेक, okaya इत्यादि है। इनके अलावा अलग-अलग लोकेशन पर अलग-अलग लोकल बैटरी भी होते हैं।

ब्रांडेड बैटरीयों में 4 साल से 5 साल की वारंटी होती है और जिनकी लाइफ अच्छी होती है। लेकिन जो लोकल बैटरी होती है। उनकी लाइफ इनकी तुलना में बहुत कम होती है और उसके गारेंटी नहीं होती है।

कस्टमर हैंडलिंग

दोस्तों सभी बिज़नस में ग्राहक बहुत ही मायने रखते है। क्योकि इनसे ही हमारा बिज़नस चलता है। अतः कस्टमर को हैंडल करने के लिए आपको ब्रांडेड कंपनी और लोकल कंपनी के इनवर्टर और बैटरी रखने की आवश्यकता होगी। क्योंकि ग्राहक कई प्रकार के होते हैं जिस कस्टमर के पास अच्छा बजट होता है वह ब्रांडेड कंपनी की बैटरी को लगवाते हैं। लेकिन जिस कस्टमर के पास बजट कम होता है वह लोकल बैटरी को लगवाते हैं।

यदि आपके Battery Shop में कोई कस्टमर आता है, जिनकी बैटरी वारंटी पीरियड में ही ख़राब हो गयी है। तो आपको एक सर्विस बैटरी देना होगा ताकि उनकी बैटरी के बनते तक उनका उपयोग कर सके और उनका काम न रुके। इस तरह Battery Business को बढ़ाने के लिए कस्टमर को हैण्डल कर सकते है।

Battery Business Profit (मुनाफा)

बैटरी बिज़नेस में मुनाफा कई प्रकार से लिया जा सकता हैं। पहला जिसमे आप गाड़ियों की बैटरी को चार्ज करके ले सकते है। लोकेशन के हिसाब से बैटरी चार्ज के 40 से 50 रूपये तक लिया जा सकता है। दूसरा आप बैटरी की किराये में देकर भी मुनाफा ले सकते है। जिसमे आपको 200 से 300 रूपये / प्रतिदिन प्रॉफिट ले सकते है। तीसरा जिसमे आप बैटरी और इन्वर्टर को सेल करके मुनाफा लेंगे इसमें आपको 15 से 25% तक का मार्जिन मिल जायेगा।

car Battery Business computervidya

बिजनेस के लोकेशन

बैटरी बिज़नेस में परफेक्ट लोकेशन की बात करें तो यह जो बिजनेस गाड़ियों से जुड़ा हुआ है। अतः जहां पर भी ऑटो रिपेयर शॉप, ऑटो सर्विस सेंटर, ऑटो गैरेज एवम बाइक डीलरशिप का शॉप होगा। वहां पर इस बिजनेस को करना बेहतर होगा ताकि गाड़ियों में जब बैटरी की प्रॉब्लम होगी तो मकैनिक आपके शॉप से बैटरी खरीदकर रिपेयर करें। ताकि मकैनिक को बैटरी के लिए ज्यादा दूर जाने की जरुरत न पड़े।

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IEEE 802 in Hindi | IEEE 802 क्या है? (IEEE 802 Standard in Hindi)

IEEE 802 in Hindi

दोस्तों आज हम IEEE 802 क्या है (IEEE 802 in Hindi) के बारे में बात करेंगे। आसान भाषा में कहा जाये तो IEEE 802 Project एक स्टैण्डर्ड है। जिसमें नेटवर्क एडाप्टर और नेटवर्क केबल के लिए बनाया गया है। 802 प्रोजेक्ट को IEEE के द्वारा बनाया गया है जिसे फरवरी 1980 को लाया गया था।

दुसरे शब्दों में, LAN में उपयोग होने वाले सभी हार्डवेयर के लिए डिफाइन किये गए स्टैण्डर्ड (मानदंड) के सामूहिक रूप को 802 प्रोजेक्ट कहा जाता है। जब भी आप IEEE 802 kya hai की चर्चा करते है तो बहुत सारें चीजों की बात भी करते है। आज मैं आप लोगो को इस IEEE 802 Project के बारें में पूरी जानकारी देना चाहता हु तो फिर देरी किस बात की आइये शुरू करते है और जानते है की IEEE 802 क्या है?

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IEEE in Hindi (IEEE क्या है?)

IEEE का पूरा नाम Institute of Electrical and Electronic Engineers है। यह न्यू जर्सी यूनाइटेड स्टेट की एक organization है जिसकी शुरवात 1 जनवरी 1963 को हुआ था। यह बहुत सारें टेक्निकल प्रोफ़ेसनल का ग्रुप है तो विभिन्न एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के उपर कार्य करते है।

IEEE 802-X Standard kya hai (IEEE 802 in Hindi)

दोस्तों आप सभी को मालूम ही होगा की OSI Reference model में सात लेयर है जिनके दो निचले लेयर फिजिकल लेयर और डाटा लिंक लेयर है जो कि नेटवर्क हार्डवेयर से सम्बंधित है। ये दोनों लेयर प्रायः नेटवर्क एडाप्टर (NIC) और नेटवर्क केबल (Transmission Media) पर कार्य करते है।

अतः इन दोनों लेयर में ऑपरेट होने वाले NIC (Network Interface Card) और कम्युनिकेशन मीडिया को improve करने के लिए एवं इनके नेटवर्क सपोर्ट को बढ़ाने के लिए IEEE (Institute Of Electrical and Electronic Engineers) ने 2 फरवरी 1980 में एक प्रोजेक्ट बनाया। जिसमें फरवरी के 02 और 1980 के 80 को लेकर इस प्रोजेक्ट का नाम IEEE 802 रखा गया।

IEEE 802 प्रोजेक्ट के अन्दर अलग-अलग NIC और नेटवर्क केबल के लिए अलग- अलग मापदंड निर्धारित किया गया है। इन सभी मापदंडों का उपयोग LAN नेटवर्क में किया जाता है और इन सभी मापदंडो को ही IEEE 802 Standards कहा जाता है।

History of IEEE 802 in hindi

जब 1970 में कंप्यूटर नेटवर्क अर्थात LAN (Local Area Network) का उपयोग बढ़ने लगा तब IEEE (Institute Of Electrical and Electronic Engineers) ने LAN नेटवर्क के स्टैण्डर्ड(मानदंड) को डिफाइन करने की आवश्यकता महसूस की और IEEE ने इसके लिए एक committee का गठन किया। IEEE ने इस committee का गठन 02 फरवरी 1980 में किया था जिसके दिनाँक के आधार पर फरवरी के 02 और 1980 के 80 को लेकर इस प्रोजेक्ट का नाम IEEE 802 रखा गया।

IEEE 802 Specifications

IEEE 802 specification को निम्नलिखित नेटवर्क हार्डवेयर और केबल के लिए निर्धारित किया गया है।

    1. Network Interface Card (NIC)
    2. Hardware Component for WAN
    3. Twisted Pair Cable & Component
    4. Coaxial Cable & Component

IEEE 802 Project Categories

IEEE ने 802 प्रोजेक्ट को आसानी से मैनेज करने के लिए इन्हें अलग- अलग केटेगरी में बाँट दिया। IEEE ने LAN नेटवर्क के Standard को डिफाइन करने के लिए अलग – अलग Committees का गठन किया, जिन्हें 16 अलग – अलग केटेगरी में बाँटा गया है। अतः IEEE 802 Project की 16 category है जो निम्नलिखित है:-

    1. IEEE 802.1 :- IEEE 802.1 प्रोजेक्ट में ब्रिजिंग और नेटवर्क मैनेजमेंट से संबधित सभी स्टैण्डर्ड को डिफाइन किया गया है। IEEE 802.1 के विभिन्न वर्शन है जो समय के साथ अपडेट होते गए है जैसे :- 802.1D-2004, 802.1BA-2011, 802.1BR-2012, 802.1CB-2017, 802.1Qcy-2019, 802.1X-2020 इत्यादि।
    2. IEEE 802.2 :- यह प्रोजेक्ट मुख्यतः LLC (Logical Link Control) स्पेसिफिकेशन को डिफाइन करता है। चुकी LLC डाटा लिंक लेयर का ऊपरी सब लेयर है। अतः यह कह सकते है की यह OSI मॉडल के डाटा लिंक लेयर के स्टैण्डर्ड को डिफाइन करता है।
    3. IEEE 802.3 :- यह IEEE 802 का सबसे प्रमुख स्टैण्डर्ड है। यह ईथरनेट स्टैण्डर्ड है जो की CSMA/CD को डिफाइन करता है। वर्तमान में इसकी रेंज 10 Mbps से 10 Gbps तक होती है।
    4. IEEE 802.4 :- टोकन बस LAN के MAC लेयर को डिफाइन करता है।
    5. IEEE 802.5 :- यह टोकन रिंग नेटवर्क के लिए MAC लेयर को डिफाइन करता है।
    6. IEEE 802.6 :- यह MAN Network से Related स्टैण्डर्ड को डिफाइन करता है।
    7. IEEE 802.7 :- यह Broadband Technical से Related स्टैण्डर्ड को डिफाइन करता है।
    8. IEEE 802.8 :- यह Fiber Optics से Related स्टैण्डर्ड को डिफाइन करता है।
    9. IEEE 802.9 :- यह Integrity Voice/Data Network से Related स्टैण्डर्ड को डिफाइन करता है।
    10. IEEE 802.10 : – यह Network Security से Related स्टैण्डर्ड को डिफाइन करता है।
    11. IEEE 802.11 : – यह Wireless Network Standards को डिफाइन करता है।
    12. IEEE 802.12 :- यह Demand Priority Access LAN से Related स्टैण्डर्ड को डिफाइन करता है।
    13. IEEE 802.13 :- यह फाइबर ऑप्टिक्स से Related स्टैण्डर्ड को डिफाइन करता है।
    14. IEEE 802.14 :- यह Cable Modem से Related स्टैण्डर्ड को डिफाइन करता है।
    15. IEEE 802.15 :- यह Wireless Personal Area Network स्टैण्डर्ड को डिफाइन करता है।
    16. IEEE 802.16 :- यह Wireless Broadband से Related स्टैण्डर्ड को डिफाइन करता है।

IEEE 802 प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी (IEEE 802 in Hindi)

तो दोस्तों आज की जानकारी काफी महत्वपूर्ण है जो स्टूडेंट के अलावा इन्टरनेट से जुड़े सभी लोगो के लिए जानना बहुत ज्यादा जरुरी है। अब दोस्तों यदि कोई ये IEEE 802 Project से जुड़े तथ्यों की चर्चा करता है की IEEE 802 क्या है(what is IEEE 802 in Hindi) तो आप आसानी से जवाब दे पाएंगे।

दोस्तों यदि आप कोई सवाल पूछना चाहते है तो निचे Comment Box में जरुर लिखे और अगर आपके को सुझाव है तो जरुर दीजियेगा। दोस्तों हमारे ब्लॉग https://www.nayabusiness.in एवं Youtube चैनल computervidya को अगर आप अभी तक सब्सक्राइब नहीं किये तो तो जरुर सब्सक्राइब कर लेवें।

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How to Fix Not Registered On Network (नॉट रजिस्टर्ड नेटवर्क मीन्स)

How to Fix Not Registered On Network

दोस्तों आज हम लोग Not Registered Network Error क्या है (Not Registered Network Error in Hindi) के बारे में बात करेंगे। दोस्तों आसान भाषा में कहूँ तो यह एक मोबाइल नेटवर्क का एरर है जो ज्यदातर देखा गया है जब कोई मोबाइल यूजर अपने मोबाइल से किसी अन्य यूजर को कॉल या मेसेज करता है तो इस प्रकार का error नॉट रजिस्टर्ड नेटवर्क एरर आ जाता है।

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Not Registered Network Error क्या है?

यह मोबाइल नेटवर्क का एरर है जो आपके इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) के द्वारा दिया जाता है। जब ISP आपके मोबाइल के IMEI Number को नोटिफाई नहीं कर पता है तो नोट रजिस्टर्ड नेटवर्क एरर आपके मोबाइल स्क्रीन में आ जाता है।

Not Registered Network Error क्यों आता है?

दोस्तों आपके मोबाइल में नॉट रजिस्टर्ड नेटवर्क एरर आने के कई कारण हो सकते है जो निचे दिए गए कारणों में से एक या अधिक हो सकते है।

    1. यदि आपके मोबाइल का os/सॉफ्टवेर या फर्मवेयर अपडेट नहीं है तो यह नोट रजिस्टर्ड नेटवर्क एरर आने का एक कारण हो सकता है।
    2. यदि आपका मोबाइल rooted है तो भी यह एरर आने की संभावना होती है यह एंड्राइड मोबाइल का कॉमन प्रॉब्लम है।
    3. यदि आपके सिम कार्ड या सिम कार्ड स्लॉट में कोई भी ख़राब है तो भी इस प्रकार के एरर आ जाते है।

नॉट रजिस्टर्ड नेटवर्क एरर को कैसे ठीक करें?

दोस्तों यदि आपके मोबाइल में भी Not Registered Network Error आ रहा है तो आप चिंता मत कीजिये मैं आपको निचे से solve करने के विभिन्न तरीके बता रहा हु जिसे आप अपनाकर इस एरर से छुटकारा पा सकते है।

    1. यदि दोस्तों आपके मोबाइल में भी यह एरर आ रहा है तो सबसे पहले आप अपने मोबाइल के सॉफ्टवेर को up टू डेट कर लीजिये। साथ ही आपके मोबाइल में जितने भी एप्लीकेशन इनस्टॉल है उन्हें भी अपडेट कर लीजिये। अब आप अपने मोबाइल को restart करके चेक कीजिये।
    2. दूसरा तरीका यह है दोस्तों आप अपने मोबाइल को कुछ समय के लिए flight mode में रख दीजिये। लगभग 5 मिनट तक फ्लाइट मोड में रखने के बाद फ्लाइट मोड को ऑफ करके चेक करें।
    3. यदि अभी तक आपका प्रॉब्लम ठीक नहीं हुआ है तो आप सिमकार्ड को स्वैप करके चेक करें या कोई दूसरा सिमकार्ड लगाकर चेक करें।

तो दोस्तों आज की जानकारी काफी महत्वपूर्ण है। क्योकिं आज के समय में हर कोई मोबाइल का उपयोग करता है और यह एरर एंड्राइड मोबाइल की आम समस्या है। अब दोस्तों यदि आपके मोबाइल में नोट रजिस्टर्ड नेटवर्क एरर आ जाता है तो आप नॉट रजिस्टर्ड ों नेटवर्क मीन्स (Not Registered Network Means) को समझकर असानी से ठीक कर पाएंगे।

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Basic Internet Terminology in Hindi | बेसिक इन्टरनेट टर्मिनोलॉजी हिंदी में

Basic Internet Terminology in hindi

दोस्तों आज हम Basic Internet Terminology क्या है (Basic Internet Terminology in Hindi) के बारे में बात करेंगे। आसान भाषा में कहा जाये तो इन्टरनेट टर्मिनोलॉजी एक शब्दावली है जिसमें इन्टरनेट से जुड़े सभी शब्दों को रखा गया है अर्थात आप जब भी इन्टरनेट की उपयोग करते है या इन्टरनेट की बात करते है तो बहुत सारें टर्म (शब्द) की बात करते है जैसे डाउनलोड, अपलोड, ईमेल, यूआरएल इत्यादि। इन सभी शब्दों या टर्म के कलेक्शन को ही Basic Internet Terminology कहा जाता है।

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दुसरे शब्दों में, इन्टरनेट से जुड़े सभी तथ्यों को ही बेसिक इन्टरनेट टर्मिनोलॉजी कहा जाता है। जब भी आप इन्टरनेट की चर्चा करते है तो बहुत सारें चीजों की बात भी करते है। आज मैं आप लोगो को इस बेसिक इन्टरनेट टर्मिनोलॉजी के बारें में पूरी जानकारी देना चाहता हु तो फिर देरी किस बात की आइये शुरू करते है और जानते है की बुनयादी इन्टरनेट शब्दावली क्या है?

Internet (इन्टरनेट):-

इन्टरनेट दुनिया का सबसे बड़ा पब्लिक नेटवर्क है जिसे नेटवर्क का नेटवर्क कहा जाता है। इन्टरनेट की शुरूवात ARPANET के रूप में अमेरिका में हुआ था जिसमे कंप्यूटर के बिच में पहला कनेक्शन 29 अक्टूबर सन् 1969 हो हुआ था। भारत में 15 अगस्त 1995 को इन्टरनेट की शुरुवात हुआ था।

Intranet (इंट्रानेट):-

इंट्रानेट एक प्राइवेट नेटवर्क होता है जिसे कंपनी या आर्गेनाइजेशन के अन्दर employee के कम्युनिकेशन एवम् इनफार्मेशन को शेयर करने के लिए उपयोग किया जाता है। इंट्रानेट में भी इन्टरनेट की तरह TCP/IP प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता है फर्क सिर्फ इतना है की इन्टरनेट पब्लिक नेटवर्क है और इंट्रानेट प्राइवेट नेटवर्क है जिसके कारण इंट्रानेट ज्यादा Secure नेटवर्क होता है।

Extra-net (एक्सट्रानेट):-

एक्सट्रानेट एक Controlled Private Network है जिसे दो या दो से अधिक कंपनी या आर्गेनाइजेशन के अन्दर employee के कम्युनिकेशन एवम् इनफार्मेशन को शेयर करने के लिए उपयोग किया जाता है। एक्सट्रानेट में भी इन्टरनेट की तरह TCP/IP प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता है फर्क सिर्फ इतना है की इन्टरनेट पब्लिक नेटवर्क है और एक्सट्रानेट प्राइवेट नेटवर्क है जिसके कारण एक्सट्रानेट ज्यादा Secure नेटवर्क होता है।

URL:-

URL का तात्पर्य Uniform Resource Locator है URL एक Web Address या इन्टरनेट एड्रेस है URL के मदद से वेब ब्राउज़र इन्टरनेट में उपस्तिथ सभी Website, Server एवम् Resource को Access करता है। दुसरे शब्दों में इन्टरनेट से website को Access करने के लिए जिस एड्रेस का use किया जाता है उसे यूआरएल या वेब एड्रेस कहा जाता है।

Example:-

इस उदाहरण में http प्रोटोकॉल का नाम है तथा www.computervidya.com होस्ट का नाम है तथा intex.html फाइल का नाम है।

ISP (Internet Service Provider):-

वे सभी कंपनी या आर्गेनाइजेशन जो इन्टरनेट की सर्विस प्रदान करने का कार्य करती है उन सभी कंपनी को ISP अर्थात Internet service Provider कहा जाता है। इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर, इन्टरनेट के साथ साथ कई अन्य सर्विसेस भी प्रोवाइड करती है जैसे Web page Hosting, मेल सर्विसेस, फाइल ट्रान्सफर इत्यादि।

Example:-

इंडिया में इस समय बहुत सारें ISP कार्य कर रहे है ज्यादातर फ़ोन कंपनीयां, cable कंपनी और उपग्रह कंपनीयां इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइड करने का कार्य करती है।जैसे Airtel, Jio, Idea, Videophone और BSNL इत्यादि। ISP कोई भी कंपनी, आर्गेनाइजेशन या इंस्टिट्यूट हो सकते है जो इन्टरनेट एक्सेस की सर्विस प्रदान करती है ISP को Internet Access Provider भी कहा जाता है।

Website (वेबसाइट):-

दो या दो से अधिक web page के collection को website है। ये webpage आपस में एक दुसरे से link होते है अर्थात जुड़े होते है।
दुसरे शब्दों में दोस्तों वेबसाइट एक एड्रेस है जिसमे बहुत सारें वेब पेज को स्टोर करके रखा जाता है। ये वेब पेज विभिन्न प्रकार के इनफार्मेशन को स्टोर करके रखते है ये इनफार्मेशन text, ऑडियो, विडियो, इमेज और एनीमेशन के रूप में हो सकते है।

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ब्लॉग (Blog):-

दोस्तों ब्लॉग को personal website कहना ज्यादा अच्छा होगा क्योकिं इस तरह के साईट में व्यक्ति अपने रूचि और जानकारी के आधार विभिन्न इनफार्मेशन को शेयर करते है। जैसे मान लीजिये आपको कंप्यूटर और technology का अच्छा ज्ञान है और आपको इस विषय पर लिखना अच्छा लगता है और आपने इस पर एक छोटा वेबसाइट बनाया है तो इस तरह के वेबसाइट को ब्लॉग कहा जाता है। वर्तमान में ऐसे कई प्लेटफार्म है जिनपर आप फ्री में ब्लॉग लिख सकते है जैसे google का blogspot.com, Word press इत्यादि।

Forums (फ़ोरम्स):-

दोस्तों वे सभी वेबसाइट जिनमे लोग सवाल पूछते है और विभिन्न टॉपिक पर चर्चा करते है इन सभी वेबसाइट को forums कहा जाता है।इन वेबसाइट को आप question और answer साईट भी कह सकते है। ये बहुत ही महत्वपूर्ण साईट होते है जिनमे लोगो को उनके सवालों के जवाब आसानी से मिल जाते है। और साथ ही अगर आपको किसी टॉपिक में अच्छी जानकारी है तो लोगो के सवाल के जवाब देकर आप उनकी मदद कर सकते हो।

उदाहरण:-

Yahoo! Groups, Ubuntu Forums, Student Edge, Stack Overflow, Quora, DSL Report इत्यादि।

वेबपेज (Web page):-

वेबपेज एक सिंगल पेज का डॉक्यूमेंट होता है जो की html फॉर्मेट में होती है। जिसमे इनफार्मेशन स्टोर होती है ये इनफार्मेशन text, image, audio, video या एनीमेशन के रूप में हो सकती है। जब दो या दो से अधिक वेबपेज को आपस में लिंक दिया जाता है तो इस webpage के समूह को वेबसाइट कहा जाता है। वेब पेज को वेब डॉक्यूमेंट भी कहा जाता है।

होम पेज (Home Page):-

जब हम किसी भी website पर visit करते है तो जो पेज सबसे पहले open होता है उस पेज को वेबसाइट का Home page कहा जाता है प्रत्येक website की पहली पेज जिसमे वेबसाइट के अन्य पेज की information होती है उसे होम पेज कहा जाता है।

सभी वेबसाइट में होम पेज होता ही है और होम पेज में अन्य सभी पेज का लिंक होता है जिसके मदद से हम वेबसाइट के सभी पेज में विजिट कर सकते है।

वेब ब्राउज़र (Web Browser):-

वेब ब्राउज़र एक छोटा सा software या application है जिसे मोबाइल या कंप्यूटर में इनस्टॉल करके यूजर internet को एक्सेस कर सकते है। दुसरे शब्दों में web browser एक ऐसा software है जिनका उपयोग इन्टरनेट को access करने के लिए किया जाता है। कंप्यूटर या मोबाइल में इन्टरनेट का प्रयोग करने के लिए उसमे इन्टरनेट ब्राउज़र होना जरुरी है इसके बिना कंप्यूटर या मोबाइल में इन्टरनेट का उपयोग नहीं किया जा सकता है।

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उदहारण:-

Google Chrome, Mozilla Firefox, Opera Web Browser, Internet Explorer, Safari Web Browser, Netscape Navigator, Monkey Browser इत्यादि।

वर्ल्ड वाइड वेब (WWW):-

WWW का पूरा नाम World Wide Web है। यह इन्टरनेट की एक सर्विस है जिसे W3 या वेब भी कहा जाता है वर्ल्ड वाइड वेब दुनियाभर के वेबसाइट के एड्रेस का कलेक्शन है। जिसके द्वारा HTML में बनाये गए विभिन्न प्रकार के document आपस में Hyperlink के माध्यम से जुड़े होते है। ये HTML डॉक्यूमेंट अर्थात web page में विभिन्न प्रकार के इमेज, टेक्स्ट, ऑडियो और विडियो फाइल से बने होते है।

दुसरे शब्दों में कहे तो वर्ल्ड वाइड वेब दुनियाभर के वेबसाइट के address का समूह है जो आपस में एक-दुसरे से hyperlink अर्थात एक दुसरे से जुड़े होती है। जब यूजर इन्टरनेट में वेबसाइट को सर्च करता है तब www यूजर के उस वेबसाइट तक पहुचाने का कार्य करता है इस तरह www इन्टरनेट पर एक सर्विसेस की तरह कार्य करता है। वर्ल्ड वाइड वेब इनफार्मेशन को एक जगह से दुसरे जगह भेजने के लिए Hypertext transfer protocol का उपयोग करता है।

सर्च इंजन (Search Engine):-

वर्ल्ड वाइड वेब में इनफार्मेशन को खोजने के लिए जिस प्रोग्राम का प्रयोग किया जाता है उसे सर्च इंजन कहा जाता है।दोस्तों आप जानते ही होंगे कि वर्ल्ड वाइड वेब दुनियाभर के वेबसाइट के address का समूह है जो आपस में एक-दुसरे से hyperlink अर्थात एक दुसरे से जुड़े होती है। इस तरह WWW में करोड़ो वेब पेज स्टोर है जिन्हें इन्टरनेट के help से प्राप्त किया जा सकता है।इन सभी इनफार्मेशन एवम् web page को ढूढने में सर्च इंजन हमारी मदद करता है।

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प्रत्येक सर्च इंजन का अपना एक डेटाबेस होता है जिसमे सर्च इंजन वेब पेज की index बना कर रखता है।प्रत्येक वेब पेज के Title तथा उसमे कुछ keyword होते है। जब यूजर इन्टरनेट में इनफार्मेशन सर्च करता है तब सर्च इंजन यूजर द्वारा टाइप किये गए शब्दों को अपने database से match करता है और जिस-जिस पेज में यूजर के द्वारा टाइप किये गए शब्द match करते है उनकी लिस्ट को यूजर के कंप्यूटर स्क्रीन पर show कर देता है इस तरह सर्च इंजन कार्य करता है।

दोस्तों दुसरे शब्दों में कहे तो Search engine इन्टरनेट की एक सर्विस है जिसके माध्यम से यूजर इनफार्मेशन को खोज सकता है और उसे प्राप्त कर सकता है।

उदहारण:-

Google, Yahoo!, Ask.com, Alta Vista, Bing इत्यादि।

डाउनलोड (Download):-

जब इन्टरनेट या नेटवर्क से किसी भी प्रकार के फाइल या इनफार्मेशन को यूजर अपने लोकल कंप्यूटर पर ट्रान्सफर या स्टोर करता है तो इस कार्य को डाउनलोड कहा जाता है।

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उदहारण:-

दोस्तों जब हमें किसी भी सॉफ्टवेर, Song या विडियो की जरुरत पड़ती है और तब हम लोग इन्टरनेट में उनको सर्च करके हम अपने कंप्यूटर में स्टोर करते है इस प्रक्रिया को डाउनलोड कहा जाता है। जैसे इन्टरनेट से सॉफ्टवेर को डाउनलोड करना।

अपलोड (Upload):-

जब इन्टरनेट या नेटवर्क में उपस्थित किसी भी कंप्यूटर या वेबसाइट में यूजर अपने इनफार्मेशन या फाइल को डालता है तो इस कार्य को अपलोड कहा जाता है।

उदहारण:-

दोस्तों YouTube या फेसबुक के अपने account में हम लोग विडियो या पिक्चर को डालते है। इस प्रक्रिया को अपलोड कहा जाता है। जैसे YouTube में विडियो अपलोड करना।

ऑफलाइन (Offline):-

जब यूजर का कंप्यूटर या मोबाइल इन्टरनेट से disconnect होता है या किसी कारण से इन्टरनेट से नहीं जुड़ा होता है तो इसे ऑफलाइन कहा जाता है।

साईंन अप (Sign up):-

यूजर द्वारा इन्टरनेट के किसी भी वेबसाइट में account खोलने के कार्य को Sign up कहा जाता है। मानलीजिये किसी वेबसाइट में आपका एकाउंट नहीं है और आप उसमे एकाउंट खोलना चाहते है और एकाउंट खोलने के लिए आप वेबसाइट में अपना इनफार्मेशन भरते है इस प्रक्रिया को ही Sign up कहा जाता है।

बेसिक इन्टरनेट टर्मिनोलॉजी की पूरी जानकारी

तो दोस्तों आज की जानकारी काफी महत्वपूर्ण है जो स्टूडेंट के अलावा इन्टरनेट से जुड़े सभी लोगो के लिए जानना बहुत ज्यादा जरुरी है। अब दोस्तों यदि कोई ये इन्टरनेट से जुड़े तथ्यों की चर्चा करता है की बेसिक इन्टरनेट टर्मिनोलॉजी क्या है(Basic Internet Terminology in Hindi) तो आप आसानी से जवाब दे पाएंगे।

दोस्तों कोई सवाल आप पूछना चाहते है तो निचे Comment Box में जरुर लिखे और अगर आपके को सुझाव है तो जरुर दीजियेगा। दोस्तों हमारे ब्लॉग https://www.nayabusiness.in एवं Youtube चैनल computervidya को अगर आप अभी तक सब्सक्राइब नहीं किये तो तो जरुर सब्सक्राइब कर लेवें।

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SBI eMudra – how to Apply Online for SBI e-Mudra loan in 2020

दोस्तों! आज हम एसबीआई ई-मुद्रा (SBI eMudra) के बारे में बात करेंगे। साथ ही एसबीआई ई-मुद्रा लोन (SBI e-Mudra Loan) को कैसे ऑनलाइन अप्लाई (Online apply) करना है इसकी पूरी जानकारी देंगे।

दोस्तों यदि आप छोटा सा बिज़नस करते है। और अपने बिज़नस को बढ़ाना चाहते है। लेकिन बिज़नस को बढ़ाने के लिए आपके पास पैसे नहीं है तो यह पोस्ट बिलकुल आपके लिए है. क्योकि इसमें हम आपको e-Mudra Loan SBI के बारें में बताएँगे जिसमे आप घर बैठे ऑनलाइन अप्लाई करके 50 हजार से 1 लाख का लोन असानी से ले सकते है।

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आज हम केद्र सरकार के मुद्रा योजना के तहत चल रहे SBI E Mudra loan के बारें में बात करेंगे। आज के इस पोस्ट में हम उन सभी लोगो के लिए बात करेंगे जो माध्यम वर्गी परिवार से है और जो छोटा व्यवसाय करते है।

SBI e-Mudra Loan क्या है?

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपने ग्राहकों के लिए मुद्रा लोन लेने की सुविधा चालू किया है जिसे एसबीआई इ मुद्रा लोन (SBI E-Mudra) योजना का नाम दिया गया है । इस योजना के तहत सभी छोटे व्यापारी को 50 हजार से एक लाख तक का लोन दिया जायेगा।

SBI E-Mudra का उद्देश्य

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के इ मुद्रा लोन योजना को केद्र सरकार के मुद्रा योजना के तहत चलाया जा रहा है। जिसका मुख्य उद्देश्य यह है की जो छोटे-छोटे व्यापारी या उद्यमी है अर्थात जो लोग छोटे-छोटे दुकान खोलकर बिज़नस करते है। उन सभी लोगो को सरकार की तरफ से लोन प्रदान की जाये ताकि वे अपने बिज़नस को बढ़ा सके।

SBI E-Mudra में कितना लोन मिलेगा?

एस बी आई इ मुद्रा में 50 हजार से 1 लाख तक का लोन दिया जाता है। जिसमें 50 हजार तक के लोन के लिए आपको बैंक जाने की जरुरत नहीं होती है। आप अपने घर से या नजदीक के CSC सेंटर में जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हो। यदि आप 50 हजार से अधिक लोन लेना चाहते है जो अधिकतम एक लाख तक का होगा। अर्थात 50 हजार से 1 लाख तक लोन लेना चाहते है तो आपको एक बार अपने SBI के होम ब्रांच जाना होगा

SBI E-Mudra Loan के लिए योग्यता

    1. आवेदक भारत का नागरिक हो और उसकी उम्र 18 से 65 वर्ष होनी चाहिए।
    2. एसबीआई की वेबसाइट के अनुसार सभी प्रकार छोटे-छोटे व्यापारी जैसे किराना, नाई, कपड़ा, फैन्सी, फल, सब्जी इत्यादि इसको अप्लाई कर सकते है।
    3. स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का 6 महिना पुराना अकाउंट होना चाहिए जो सेविंग या करंट दोनों में कोई भी हो चल जायेगा।
    4. एसबीआई ई-मुद्रा लोन अधिकतम पांच साल के लिए होगी।

एसबीआई ई-मुद्रा लोन के तहत 50,000/- रुपए तक का लोन घर बैठे ऑनलाइन पा सकते हैं। यदि आप 50 हजार से अधिक लोन लेना चाहते है जो अधिकतम एक लाख तक का होगा। अर्थात 50 हजार से 1 लाख तक लोन लेना चाहते है तो आपको एक बार अपने SBI के होम ब्रांच जाना होगा।

SBI E-Mudra Online Apply कैसे करें

    1. सबसे पहले आप इस SBI E-Mudra Portal पर क्लीक करें।
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    2. उसके बाद मोबाइल नंबर को डालकर वेरीफाई करें। एसबीआई ई मुद्रा लोन को अप्लाई करने के लिए मोबाइल नंबर आधार और बैंक दोनों से लिंक होना अनिवार्य है।
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    3. SBI अकाउंट नंबर और लोन की अमाउंट डालकर प्रोसेस बटन पर क्लीक करना है।
    4. अब जो आवेदन फ्रॉम खुलेगा उसके ध्यानपूर्वक भर देवें।
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    5. जिसके बाद आप अपने व्यापार से जुड़े डॉक्यूमेंट को अपलोड कर देवें।

आवेदन फ्रॉम को पूरी तरह से भरने के बाद आप आधार नंबर भरकर OTP को verify कर देवें। निचे दिए विडियो में हमने पूरा लोन अप्लाई करके दिखाया है। अधिक जानकारी के लिए उसे पूरा देखें।

           

SBI eMudra के लिए डॉक्यूमेंट

        1. स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का 6 महिना पुराना अकाउंट होना चाहिए जो सेविंग या करंट दोनों में कोई भी हो चल जायेगा।
        2. पैन कार्ड
        3. आधार कार्ड
        4. व्यापार का एड्रेस प्रूफ
        5. व्यापार से जुड़े दस्तावेज जैसे (GST No, उद्योग आधार, रेंटल एग्रीमेंट)

SBI e-Mudra Loan से जुड़े सवाल- FAQs

SBI E Mudra Loan में Interest Rate

एसबीआई ई मुद्रा लोन की ब्याज दर (Interest Rate) पहले 9% रखा गया था, जिसे वर्तमान में बढ़ाकर 9.75% दिया गया है।

SBI E Mudra Loan में Subsidy

अभी वर्तमान में एसबीआई ई मुद्रा लोन की तहत किसी भी प्रकार की सब्सिडी उपलब्ध नहीं है।

कौन-कौन से बैंक के ग्राहक के लिए यह लोन मिलेगा?

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपने ग्राहकों के लिए इ मुद्रा लोन लेने की सुविधा चालू किया है। अतः इसका फायदा केवल sbi एकाउंट वालें ही ले पाएंगे। अन्य बैंक के ग्राहक इस sbi mudra loan में अप्लाई नहीं कर पाएंगे।

SBI मुद्रा लोन को कौन अप्लाई कर सकता है?

आप यदि छोटे व्यापारी है छोटे से दुकान चलाते है। तो आप एसबीआई ई मुद्रा लोन को अप्लाई कर सकते है। छोटे-छोटे व्यापारी जैसे किराना, नाई, कपड़ा, फैन्सी, फल, सब्जी इत्यादि अप्लाई कर सकते है। SBI E Mudra Loan को सभी छोटे व्यापारी ऑनलाइन अप्लाई कर सकते है।

SBI E-Mudra loan कितने दिनों के लिए दिया जाता है?

SBI E-Mudra loan को अधिकतम 5 वर्षो के लिए दिया जाता है।

sbi emudra in hindi

Important Note:-

दोस्तों! कुछ दिनों से यह देखा जा रहा है की एसबीआई ई मुद्रा ऑफिसियल वेबसाइट खुल नहीं रही है। या उसमे ऑनलाइन अप्लाई करते समय कुछ एरर आ रहा है तो इसमें आपको घबराने की जरुरत नहीं है यह वेबसाइट के लोड बढ़ने और वेबसाइट में चल रहे मेंटेनेंस के कारण हो रहा है।

जब एसबीआई ई मुद्रा लोन में ऑनलाइन अप्लाई किया जाता है। और सही तरीके से अप्लाई नहीं किया जाता, तो बहुत सारें एरर और प्रॉब्लम आ सकते है। अतः हमने जो कॉमन एरर आते है उनके ऊपर हमने विडियो बनाया है। जिसका लिंक निचे दिया गया है आप उसे देखकर एसबीआई ई मुद्रा ऑनलाइन अप्लाई करेंगे तो यह एरर आपको नहीं आएगा।

एसबीआई ई मुद्रा लोन की पूरी जानकारी

तो दोस्तों उम्मीद है की आज की इस लेख से SBI E Mudra Loan की पूरी जानकारी मिल गयी होगी। आज की जानकारी एसबीआई ई मुद्रा ऑनलाइन अप्लाई (SBI E Mudra) काफी महत्वपूर्ण है। जो छोटे व्यापारी के अलावा बिज़नस से जुड़े सभी लोगो को जानना बहुत जरुरी है। अब दोस्तों यदि कोई ये मुद्रा लोन की चर्चा करता है तो आप एसबीआई ई मुद्रा लोन की जानकारी दे पाएंगे।

कोई सवाल आप पूछना चाहते है तो निचे Comment Box में जरुर लिखे और अगर आपके को सुझाव है तो जरुर दीजियेगा। दोस्तों हमारे ब्लॉग https://www.nayabusiness.in एवं Youtube चैनल computervidya को अगर आप अभी तक सब्सक्राइब नहीं किये तो तो जरुर सब्सक्राइब कर लेवें।

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