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नये ज़माने का नया बिज़नस 2020 – Start High Security Registration Plate Business

High Security Registration Plate Business

दोस्तों! आज हम हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट बिज़नस आइडियाज (High Security Registration Plate Business Ideas) के बारे में बात करेंगे। जिसमें हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट बिज़नस प्लान (High Security Number Plate Business Plan) को समझायेंगे। साथ ही इस लेख में हम हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट से जुड़े विभिन्न पहलु को जैसे High Security Number Plate Business Ideas एवम् Number Plate business ideas के बारें में बताऊंगा।

दोस्तों रोड एक्सीडेंट और रोड क्राइम को घ्यान में रखते हुए सड़क एवम् परिवहन मंत्रालय ने 1 अप्रेल 2019 को ये आदेश जारी किया है कि प्रत्येक वाहन चालक को अपने वाहन में High Security Number Plate लगाना अनिवार्य है। दोस्तों यदि कोई भी वाहन चालक इस नियम का पालन नहीं करता है तो उन्हें हाई पेनाल्टी देना होगा।

नये ज़माने का नया बिज़नस 2020 - Start High Security Registration Plate Business

सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के इस आदेश के कारण दोस्तों जो पुराने पध्दति के नंबर प्लेट का बिज़नस (Number Plate business) कर रहे थे उनका बिज़नस पूरी तरह से धप हो चूका है क्योकिं दोस्तों हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट का बिज़नस वर्तमान में नये मशीन से और नए प्रोसेस से हो रहा है। अतः दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से आइये मैं आपको हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट बिज़नस की पूरी जानकारी देता हु।

High Security Number plate क्या है? HSNP kya hai

दोस्तों वर्तमान में वाहनों पर लगने वाली एक ऐसी नंबर प्लेट जो केन्द्रीय वाहन अधिनियम के नियम को ध्यान में रखकर बनायीं गयी हो उस नंबर प्लेट को हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट या हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट कहा जाता है। दोस्तों इस high security Registration plate की खास बात यह है की इसमें IND के साथ बारकोड नंबर भी होता है जिससे वाहन की पहचान असानी से किया जा सकता है। यह नंबर प्लेट 1 MM एल्युमिनियम की मोटी शीट से बना होता है जिसे एक बार वाहन में लगा दिया जाये तो दोबारा उसे हटाया नहीं जा सकता है।

नये ज़माने का नया बिज़नस 2020 - Start High Security Registration Plate Business

High Security Number Plate Business की डिमांड

दोस्तों आपने देखा होगा की जो लोग पुराने नंबर प्लेट का बिज़नस कर रहे थे उनके तुलना में हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट के बिज़नस करने वालों की संख्या बहुत ही कम है। वर्तमान में यह नया बिज़नस बड़े बड़े शहर एवं कस्बो में नजर नहीं आता है अतः दोस्तों यह एक बेस्ट बिज़नस आइडियाज है जिसे आप अपने शहर में शुरू कर सकते है। यदि दोस्तों आप भी इस हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट के बिज़नस को शुरू करना चाहते है तो आप एक profitable Business के बारें में सोच रहे है।

हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट बिज़नस में प्रॉफिट

दोस्तों यदि आप इस High Security Number Plate के बिज़नस को शुरू करते है तो आपके पास नंबर प्लेट के लिए two wheeler, four wheeler और three wheeler गाड़िया आयेंगी।

यदि दोस्तों हम फोर व्हीलर गाड़ी के नंबर प्लेट की बात करें तो एक साइड की चार्ज 600 रूपये तक लिया जाता और दोनों साइड मिलकर इसमें आप 1000 से 1200 रूपये तक चार्ज ले सकते है।

इसी प्रकार दोस्तों हम यदि टू व्हीलर और थ्री व्हीलर गाड़ी की बात करें तो इनमें एक साइड के नंबर प्लेट के लिए 300 रूपये और आगे पीछे दोनों साइड के लिए 500 से 600 रूपये का चार्ज लिया जाता है। साथ ही दोस्तों इस हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट बिज़नस की खास बात यह है की इसके साथ आप दुसरे बिज़नस को असानी से कर सकते है जैसे रेडियम वर्क और सीट कवर का कार्य भी आप इस नंबर प्लेट बिज़नस के साथ असानी से कर सकते है।

हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट बिज़नस में लागत

दोस्तों इस बिज़नस की लागत की बात करें तो इस high security number plate business को शुरू करने के लिए शुरुवाती इन्वेस्टमेंट करीब 2 लाख तक होती है। जिसमे मुख्य लागत high security number plate machine की होती है जिसकी कीमत ढेड़ लाख तक होती है इस ढेड़ लाख रूपये में आपको दो मशीन की सेट दिया जाता है। दोस्तों मशीन के अलावा आपको डाई और अल्युमिनियम की प्लेट की आवश्यकता होगी और दोस्तों साथ ही आपको दुकान को सेटअप करने की जरुरत होगी इन्हें आप अपने बजट के अनुसार कर सकते है।

High Security Number Plate Machine की जानकारी

दोस्तों हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट बिज़नस में दो मशीन की जरुरत होती है। जिसमे पहला IND Dye Press Machine और दूसरा IND Plate Press Machine होता है। दोस्तों जो IND Dye Press Machine होता है। वो डाई के नंबर को पंच करता है और दूसरा मशीन IND Plate Press Machine नंबर प्लेट के उभार में ब्लैक कोटेड करने का काम करता है।

नये ज़माने का नया बिज़नस 2020 - Start High Security Registration Plate Business

बिज़नस के लिए मशीन की लिस्ट

    1. IND Dye Press Machine
    2. IND Plate Press Machine
    3. Drill Machine
    4. Number Dye
    5. Other Tools

नये ज़माने का नया बिज़नस 2020 - Start High Security Registration Plate Business

बिज़नस के लिए रॉ मटेरियल

    1. एल्युमिनियम प्लेट
    2. पैकिंग सामग्री
    3. टेप इत्यादि।

नये ज़माने का नया बिज़नस 2020 - Start High Security Registration Plate Business

हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट बिज़नस के लिए लाइसेंस और पंजीयन

दोस्तों हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट बिज़नस के लिए आप अपने जिले के ट्रांसपोर्ट ऑफिस से लाइसेंस ले सकते है इनके अलावा आप बिज़नस को उद्योग आधार से पंजीयन करा सकते है। लेकिन दोस्तों सबसे अहम् बात यह है की आप हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट को केन्द्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार ही बनाये। साथ ही दोस्तों अलग अलग राज्यों के स्थानीय नियम राज्य के अनुसार विभिन्न हो सकते है।

दोस्तों हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट बिज़नस की अधिक जानकारी और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को लाइव देखने के लिए आप हमारे इस विडियो को भी देख सकते है और इसी प्रकार के विभिन्न बिज़नस आइडियाज के लिए आप हमारे YouTube चैनल computervidya को सब्सक्राइब कर सकते है।

 

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Assignment Question | BCA 2nd Semester | Subject: – Internet Programming

Assignment Question

Que:01 What do you mean by Internet? Explain in detail about History and Application of internet. इन्टरनेट से क्या समझते हो इन्टरनेट के उपयोग और इतिहास को विस्तार से समझाइए।

Que:02 What is HTML? Write Element of HTML. HTML क्या है HTML के अवयव को लिखिए।

Que:03 Write in detail about basic internet terminology. बेसिक इन्टरनेट टर्मिनोलॉजी के बारें में विस्तार से लिखिए।

Que:04 What is browsers? Explain its uses and advantages. ब्राउज़र क्या है ब्राउज़र के उपयोग और फ़ायदे की बताइये।

Que:05 What is E-mail? Explain Limitation of Email. ई मेल क्या है ? ईमेल की कमियां को समझाइए।

Que:06 What do you mean by Website? Explain its types and Web Publishing. वेबसाइट से आप क्या समझते हो वेबसाइट के प्रकार और वेब पब्लिशिंग को विस्तार से समझाइए।

Que:07 Write is detail about CSS? CSS के बारें में विस्तार से लिखिए।

Que:08 Write a JavaScript? Explain its uses and advantages. जावास्क्रिप्ट क्या है जावास्क्रिप्ट के उपयोग और फ़ायदे की बताइये।

Que:09 Explain in detail about JavaScript Element. जावास्क्रिप्ट के एलिमेंट को विस्तार से समझाइए।

Que:10 What is EPS? Explain types of EPS. EPS क्या है? EPS के प्रकार को समझाइए।

Que:11 Write about URL and Search Engine. यूआरएल और सर्च इंजन के बारें में लिखिए।

Que:12 What do you mean by E-commerce? Explain types of E-commerce. ई-कॉमर्स से आप क्या समझते हो? ई-कॉमर्स के प्रकार को समझाइए।

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Assignment Question | DCA 2nd Semester | Subject: – Internet and Web Technology

Assignment Question

Que:01 Write in detail about arpanet and growth of Internet. अरपानेट और इन्टरनेट के विकास को विस्तार से लिखिए।

Que:02 Write is detail about WWW? WWW के बारें में विस्तार से लिखिए।

Que:03 What is browsers? Explain its uses and advantages. ब्राउज़र क्या है ब्राउज़र के उपयोग और फ़ायदे की बताइये।

Que:04 Write in detail about TCP/IP reference model. टी सी पी/ IP रिफरेन्स मॉडल के बारें में विस्तार से समझाइए।

Que:05 What is E-mail? Explain Limitation of Email. ई मेल क्या है ? ईमेल की कमियां को समझाइए।

Que:06 What do you mean by Computer Network? Explain Application of Network. कंप्यूटर नेटवर्क से आप क्या समझते हो? कंप्यूटर नेटवर्क के अनुप्रयोग को लिखिए।

Que:07 What is HTML? Write Element of HTML. HTML क्या है HTML के अवयव को लिखिए।

Que:08 What is firewall? Explain types of firewall. फ़ायरवॉल क्या है? फ़ायरवॉल के प्रकार को समझाइए।

Que:09 What do you mean by Internet? Explain in detail about Application of internet. इन्टरनेट से क्या समझते हो इन्टरनेट के उपयोग को विस्तार से समझाइए।

Que:10 What do you mean by Website? Explain its types and Web Publishing. वेबसाइट से आप क्या समझते हो वेबसाइट के प्रकार और वेब पब्लिशिंग को विस्तार से समझाइए।

Que:11 Write in detail about information policy and copyright issue. इनफार्मेशन पालिसी और कॉपीराइट इशू के बारें में विस्तार से लिखिए।

Que:12 Explain Web design, web development and its advantages. वेब डिजाईन, वेब डेवलपमेंट एवम् इसके फायदे को विस्तार से समझाइए।

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What is Computer Virus in Hindi ? वायरस क्या है ? Virus के प्रकार की जानकारी

नमस्कार दोस्तों Computervidya में आपका स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम आपको Computer Virus in Hindi (computer Virus Kya Hai) के बारें में विस्तार से बताएँगे साथ ही दोस्तों वायरस के प्रकार और इन्टरनेट से जुड़े विभिन्न Malicious Program के बारें में विस्तार से बतायेंगें।


वायरस क्या है? ( Computer Virus in Hindi?)

वे सभी प्रोग्राम जो कंप्यूटर के लिए हार्मफुल या नुकसानदायक होते है उन सभी प्रोग्राम को कंप्यूटर वायरस कहा जाता है। वायरस कंप्यूटर का प्रोग्राम (निर्देशों का समूह) होता है जो एक होस्ट (Computer) से दूसरे होस्ट (computer) में स्वयं फैलकर (self-replicate) कर कंप्यूटर को हानि पहुचाते हैं, यह एक ऑटो एक्सीक्यूट (Auto-Execute) प्रोग्राम होता है जो कंप्यूटर में प्रवेश करके कंप्यूटर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते है।

कंप्यूटर वायरस शब्द को सबसे पहले सन् 1983 में Fred Cohen द्वारा दिया गया था।

What is Computer Virus in Hindi ? वायरस क्या है ? Virus के प्रकार की जानकारी


वायरस के प्रकार (Types of Computer Virus )

दोस्तों Computer Virus को विभिन्न केटेगरी में बाँटा गया है जो निम्नलिखित है।

    1. फाइल वायरस (File virus)
    2. बूट सेक्टर वायरस (Boot sector virus)
    3. माइक्रो वायरस (Micro virus)
    4. पॅालीमोरर्फिक वायरस (Polymorphic virus)
    5. ट्रोजन हॉर्स वायरस (Trojan Horse virus
    6. टाइम बम वायरस (Time Bum virus)
    7. पार्टीशन टेबल वायरस (Partition Table Virus)

फाइल वायरस क्या है? (File Virus in Hindi)

वे सभी वायरस जो फाइल के साथ Attach होकर कार्य करते है उन सभी वायरस को फाइल वायरस कहा जाता है ज्यादातर फाइल वायरस Executable File के साथ Attach हो जाते है। और जब यूजर उस Executable File को एक जगह से दुसरे जगह शेयर करता है या उस Executable File को रन किया जाता है तो यह वायरस एक्टिव हो जाता है।

What is Computer Virus in Hindi ? वायरस क्या है ? Virus के प्रकार की जानकारी

फाइल वायरस सबसे कॉमन वायरसों में से एक है यह वायरस ज्यादातर पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क इत्यादि दे डाटा शेयर करते समय यूजर के कंप्यूटर में घुस जाता है और कंप्यूटर सिस्टम को प्रभावित करता है।


बूट सेक्टर वायरस क्या है? (Boot Sector Virus)

वे सभी वायरस जो हमारें कंप्यूटर सिस्टम के बूट सेक्टर में स्टोर होते है और कंप्यूटर जब स्टार्ट होता है तो ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड होने में रूकावट करता है उन सभी वायरस को Boot Sector Virus कहा जाता है। बूट सेक्टर वायरस ऑपरेटिंग सिस्टम के बूटिंग फाइल में घुस जाते है और उनको इन्फेक्टेड कर देता है जिसके कारण कंप्यूटर स्टार्ट होने में काफी अधिक समय लेता है और इसके वजह से कंप्यूटर स्लो हो जाता है।

What is Computer Virus in Hindi ? वायरस क्या है ? Virus के प्रकार की जानकारी

बूट सेक्टर वायरस बहुत ही खतरनाक वायरस है यह ऑपरेटिंग सिस्टम के बूटिंग के साथ-साथ उसके कार्यप्रणाली को भी प्रभावित करता है। बूट सेक्टर वायरस को Detect तथा रिपेयर करने के लिए कंप्यूटर को बूट स्कैन करने की जरुरत पड़ती है। Quick Heal Antivirus, Avast Antivirus इत्यादि में बूट स्कैन की सुविधा होती है।


माइक्रो वायरस क्या है? (Micro Virus in Hindi)

वे सभी वायरस जो ज्यादातर मुख्यतः डॉक्यूमेंट से रिलेटेड फाइल, एक्सेल सीट इत्यादि में घुसकर उनको प्रभावित करते है इस प्रकार के वायरस को माइक्रो वायरस कहा जाता है।

What is Computer Virus in Hindi ? वायरस क्या है ? Virus के प्रकार की जानकारी

माइक्रो वायरस का कार्य माइक्रो प्रोग्राम की तरह होता है और यह डॉक्यूमेंट में बार-बार अपने आप कॉपी होकर डॉक्यूमेंट में रखे गए डाटा को प्रभावित करता है।


टाइम बम वायरस क्या है? (Time Bomb Virus Hindi)

वे सभी वायरस जो विशेष कंडीशन पर रन होते है उन्हें टाइम बम वायरस के नाम से जाना जाता है। ऐसे प्रोग्रामों में कंडीशन लगे होते है जिनके True होने पर यह एक्टिव हो जाते है और कंप्यूटर को प्रभावित करते है।

What is Computer Virus in Hindi ? वायरस क्या है ? Virus के प्रकार की जानकारी

टाइम बम वायरस प्रोग्राम के कंडीशन जब तक True नहीं होते यह एक सिंपल फाइल की तरह होते है और नुकसान नहीं पहुचाते है लेकिन जैसे ही कंडीशन True होता है यह एक्टिव होकर प्रभावित करते है।

►टाइम बम वायरस के उदहारण:-

दोस्तों इस प्रकार के वायरस का नाम टाइम बम, लॉजिक बम इसलिए रखा गया है क्योकिं यह टाइम बम की तरह होते है। जब तक बम के फटने का समय नहीं होता यह कोई नुकसान नहीं पहुचता है और जब टाइम आ जाता है तो एक साथ सभी चीजों को नष्ट कर देता है। कुछ वायरस का नाम दे रहे है जिनको टाइम बम की केटेगरी में रखा गया है जैसे:- “Happy Birthday”, “13 Friday” इत्यादि।


ट्रोजन हॉर्स वायरस क्या है? (Trojan Horse Virus)

वे सभी वायरस जिनका उपयोग यूजर के डाटा की चोरी करने या जासूसी करने के लिए किया जाता है उन्हें ट्रोजन हॉर्स वायरस कहा जाता है। ट्रोजन हॉर्स वायरस को प्रायः Spyware भी कहा जाता है इस प्रकार के वायरस बहुत ही खतरनाक होते है।

What is Computer Virus in Hindi ? वायरस क्या है ? Virus के प्रकार की जानकारी

ट्रोजन हॉर्स वायरस बहुत ही खतरनाक वायरस होते है क्योकिं इस प्रकार के वायरस कंप्यूटर प्रोग्राम के रूप में ही एक्टिव होते है जिसके कारण इनको पहचान करना असान नहीं होता है।

What is Computer Virus in Hindi ? वायरस क्या है ? Virus के प्रकार की जानकारी

►ट्रोजन हॉर्स वायरस के उदाहरण:-

हमारे कंप्यूटर में hvchost.exe एक महत्वपूर्ण प्रोग्राम है जिनके बिना कंप्यूटर नहीं चल सकता है ऐसे में ट्रोजन हौर्स एक और hvchost.exe रन कर देता है अब कंप्यूटर में दो hvchost.exe रन होते है जिसमे एक वायरस है और दूसरा ट्रोजन हौर्स होता है ऐसे में एंटीवायरस सॉफ्टवेर यह पहचान नहीं कर पाता की वायरस कौन सा है इस प्रकार ट्रोजन हौर्स को पहचान करना कठिन हो जाता है।


पार्टीशन टेबल वायरस क्या है? (Partition Table Virus)

वे सभी कंप्यूटर वायरस जो कंप्यूटर में उपस्थित हार्ड डिस्क के पार्टीशन टेबल में घुसकर उनको प्रभावित करता है उन सभी वायरस को पार्टीशन टेबल वायरस कहा जाता है इस प्रकार के वायरस प्रायः हार्ड डिस्क में उपस्थित डाटा को नुकसान नहीं पहुचाते है।

What is Computer Virus in Hindi ? वायरस क्या है ? Virus के प्रकार की जानकारी


पॅालीमोरर्फिक वायरस क्या है? (Polymorphic Virus)

वे सभी वायरस जो कंप्यूटर में बार-बार अपना रूप बदलकर कार्य करते है उन सभी वायरस को पॅालीमोरर्फिक वायरस कहा जाता है। इस प्रकार के वायरस को डिटेक्ट कर लिया जाये तो यह अपना फॉर्मेट Change करके दुसरे रूप में कंप्यूटर को प्रभावित करता है।

इस प्रकार के वायरस प्रोग्राम को बहुत ही खतरनाक वायरस माना जाता है क्योकिं यह वायरस हर बार अलग अलग रूप में कंप्यूटर को प्रभावित करते है।

►नोट :-
    1. इंडिया का सबसे पहला वायरस का नाम:- “हैप्पी बर्थडे जोशी
    2. सबसे पहले दिखने वाला पीसी वायरस:-“सी ब्रेन
    3. आज तक का सबसे Worst कंप्यूटर वायरस:-“आई लव यू

स्पायवेयर क्या है? (Spyware in Hindi)

दोस्तों spy का मतलब होता है – जासूसी करना। यह एक मिलिकिऔस Software है, जो यूजर को बिना किसी जानकारी दिए, उसके Personal Details को एकत्रित करता है।

यह software end-user के computer-device में email,visited-वेबसाइट के माध्यम से प्रवेश करता है,तथा हार्डडिस्क को scan व user के सेंसिटिव जानकारी(sensitive information) को चुरा लेता है,यह इन्टरनेट यूजर के लिए एक threat है,जो बिना user के authorization/permission के सिस्टम में डाउनलोड हो जाता है,और यह जब एक बार installed हो जाता है तो user के सभी इन्टरनेट एक्टिविटी को capture करके Id ,पासवर्ड जैसे जानकारी को चुराता है ।


वोर्म क्या है? (Worm in Hindi)

Worm एक खतरनाक Malicious Program है जो इंडिविजुअल (अकेले) फाइल के रूप में होता है यह किसी फाइल के साथ Attach नहीं होता है। Worm पुनः निर्मित हो सकते है और अपनी कॉपी अपने आप बनाते जाते है। वोर्म को रन होने के लिए होस्ट प्रोग्राम की जरुरत नहीं होती है।


एंटीवायरस क्या है? (Antivirus in Hindi)

Antivirus एक यूटिलिटी सॉफ्टवेर है इसे हम एंटी मॉल वेयर (Anti-Malware) भी कहते है एक ऐसा प्रोग्राम जो कंप्यूटर के वायरस से हमें सुरक्षा प्रदान करता है एंटीवायरस कहलाता है। एंटीवायरस एक ऐसा सॉफ्टवेर है तो एक्सटर्नल डिवाइस जैसे पेन ड्राइव, युएसबी ड्राइव, हार्ड डिस्क आदि स्त्रोतों से आने वाले वायरस से कंप्यूटर को सुरक्षित रखता है।

Antivirus को मुख्यतः सिस्टम में छुपे हुए वायरस का पता लगाने तथा उसे नष्ट करने के लिए बनाया जाता है। वर्तमान में अत्याधुनिक तकनीक के एंटीवायरस किसी सिस्टम में ऐडवेयर, स्पाईवेयर, key logger, बेक डोर से यूजर के डाटा को सुरक्षा प्रदान करता है। दोस्तों अगले पोस्ट में हम इस सबके बारें में विस्तार से जानकारी देंगे।

► Antivirus के कुछ उदहारण: –

कुछ प्रमुख एंटीवायरस जैसे:- Norton Antivirus, AVG Antivirus, Avast Antivirus, Zone Alarm, MCAfee Antivirus इत्यादि।

तो दोस्तों उम्मीद करते है कि इस पोस्ट वायरस क्या है? (What is computer Virus in Hindi) आपको जरुर पसंद आया होगा दोस्तों अगर यह पोस्ट (computer Virus kya hai) आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों को फेसबुक, व्हात्सप्प, इन्स्ताग्राम इत्यादि में शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो पोस्ट के निचे कमेंट करना ना भूलें। धन्यवाद् !……

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Cryptography in Hindi | Encryption in Hindi | Decryption kya hai?

 

Cryptography kya hai Hindi

नमस्कार दोस्तों Computervidya में आपका स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम आपको What is Cryptography in Hindi (Cryptography Kya Hai) के बारें में विस्तार से बताएँगे साथ ही Types of Cryptography in Hindi (क्रिप्टोग्राफी के प्रकार) तथा इसके Advantage और Disadvantage के बारें में भी बतायेंगें।

दोस्तों वर्तमान समय में इन्टरनेट का उपयोग सभी कर रहे है ऐसे में आपको यह जानना अति आवश्यक है क्योकिं इन्टरनेट का उपयोग करते समय आप Cryptography का उपयोग करके अपने Personal और Confidential Data को सुरक्षित कर सकते है। और यदि आप जानना चाहते है की क्रिप्टोग्राफी क्या है? और इसके कितने प्रकार होते है तो इसके लिए आप हमारे इस पोस्ट को पूरा पढ़े।


Cryptography क्या है? (Cryptography in Hindi)

क्रिप्टोग्राफी (Cryptography in Hindi) नेटवर्क का एक Security Method और इसके माध्यम से नेटवर्क में डाटा को Encrypt (इंक्रिप्ट) करके एक जगह से दूसरी जगह तक सिक्योरिटी के साथ Transmit किया जा सकता है। Cryptography में दो प्रकार के फंक्शन Encryption (इंक्रिप्शन) और Decryption (डिस्क्रिप्शन) परफॉर्म किए जाते हैं। Sender के द्वारा डाटा भेजते समय Encryption परफार्म किया जाता है तथा Receiver के साइड में डाटा रिसीव करने के लिए Decryption परफॉर्म किया जाता है। इंक्रिप्शन के माध्यम से सेंडर द्वारा भेजे जाने वाली डाटा को इंक्रिप्ट कर दिया जाता है अर्थात डाटा को Hash Algorithm के माध्यम से Code में बदल दिया जाता है जो Unreadable Format में होता है। जिससे की डाटा यदि नेटवर्क में Hack (हैक) भी हो जाता है तो उसे Read नहीं किया जा सकता है।

Cryptography in Hindi | Encryption in Hindi | Decryption kya hai?

Cryptography के माध्यम से नेटवर्क में भेजे जाने वाली डाटा को Authentication, Access Control, Data Confidentiality, Data Integrity और Non-repudiation इत्यादि प्रोवाइड किया जाता है अर्थात क्रिप्टोग्राफी की मदद से डाटा को नेटवर्क में एक जगह से दूसरी जगह पर सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है।

जब नेटवर्क में किसी डिवाइस को डाटा ट्रांसमिट करने की जरूरत पड़ती है तब वह डाटा या मैसेज को टाइप करता है। टाइप किए गए मैसेज या डाटा को हैश एल्गोरिथ्म के माध्यम से अनरीडेबल कोड में कन्वर्ट कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को ही इंक्रिप्शन कहा जाता है जोकि सेंडर के द्वारा परफॉर्म किया जाता है। और जो अनरीडेबल फॉरमैट में Data प्राप्त होता है उसे ही Cipher Text कहा जाता है। इस Cipher Text को नेटवर्क में Transmit कर दिया जाता है। और जब सेंडर साइड में सिफर टेक्स्ट पहुंचता है तो सेंडर के द्वारा सिफर टेक्स्ट पर डिक्रिप्शन स्किम लगाकर वापस प्लेन टेक्स्ट में बदल कर रिसीव कर लेता है। इस तरह क्रिप्टोग्राफी के माध्यम से डाटा को नेटवर्क में एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सकता है।


What is Plain Text (Plain Text kya hai?)

Sender के द्वारा Transmit किए जाने वाले ओरिजिनल डाटा या मैसेज को जो Readable Format में होता है। उस डाटा को Plain Text (प्लेन टेक्स्ट) कहां जाता है।

Cryptography in Hindi | Encryption in Hindi | Decryption kya hai?


What is Cipher Text (Cipher Text kya hai?)

जब Sender के द्वारा डाटा को ट्रांसमिट करते समय Encryption के माध्यम से Plain Text को हैश कोड में Convert कर दिया जाता है । तब उस कन्वर्टेड कोड या डाटा को ही Cipher Textकहा जाता है। Cipher Text यूजर के लिए Readable नहीं होता है। Cipher Text को रीड करने के लिए वापस Plain Text में convert करना पड़ता है।

Cryptography in Hindi | Encryption in Hindi | Decryption kya hai?


Encryption क्या है? (Encryption in Hindi?)

Cryptography में जिस प्रक्रिया के द्वारा Sender साइड में Plain Text को Cipher Text में Convert किया जाता है। उस मेथड को ही Encryption (एन्क्रिप्शन) कहा जाता है। एन्क्रिप्शन Sender के द्वारा perform किया जाता है।

Cryptography in Hindi | Encryption in Hindi | Decryption kya hai?

डाटा को एन्क्रिप्ट करने के लिए key का आवश्यकता होती है डाटा और key मेंHash Algorithm लगाकर उन्हें एन्क्रिप्ट किया जाता है एन्क्रिप्टेड डाटा को रीड नहीं किया जा सकता है और यह एन्क्रिप्शन की प्रक्रिया sender के द्वारा परफॉर्म किया जाता है।


Decryption क्या है? (Decryption in Hindi?)

Cryptography में जिस Method के द्वारा Receiver साइड में Cipher Text को वापस Plain Text में बदल दिया जाता है उस मेथड को Decryption (डिक्रिप्शन) कहा जाता है। डिक्रिप्शन Receiver के द्वारा perform किया जाता है।

Cryptography in Hindi | Encryption in Hindi | Decryption kya hai?

डाटा को डिक्रिप्ट करने के लिए key का आवश्यकता होती है डाटा और key में Hash Algorithm लगाकर उन्हें डिक्रिप्ट किया जाता है डाटा को डिक्रिप्ट करने पर वह plain text में वापस आ जाता है जिसके डाटा को रीड किया जा सकता है और यह डिक्रिप्शन की प्रक्रिया sender के द्वारा परफॉर्म किया जाता है।


Explain Types of Cryptography

दोस्तों क्रिप्टोग्राफी को दो प्रकार में बांटा गया है जो निम्नलिखित है।

    1. Symmetric Key Cryptography
    2. Asymmetric Key Cryptography

Cryptography in Hindi | Encryption in Hindi | Decryption kya hai?

Symmetric Key Cryptography

इस Cryptography को Shared key Cryptography एवम् Secret key Cryptography भी कहा जाता है। इस प्रकार के क्रिप्टोग्राफी में इंक्रिप्शन और डिस्क्रिप्शन एक ही Key के द्वारा परफॉर्म किया जाता है। जिसको Secret Key कहा जाता है।

Cryptography in Hindi | Encryption in Hindi | Decryption kya hai?

Symmetric क्रिप्टोग्राफी में Sender जिस secret key के माध्यम से डाटा को Encrypt करता है उसी Secret key के माध्यम से Receiver डाटा को Decrypt करता है।

Asymmetric Key Cryptography

इस Cryptography को Public key Cryptography भी कहा जाता है। इस Cryptography में Encryption और Decryption दोनों अलग-अलग Key के माध्यम से Perform किया जाता है। एन्क्रिप्शन की प्रक्रिया में sender के Public Key का उपयोग होता है जबकि Decryption की प्रक्रिया में रिसीवर के प्राइवेट की का उपयोग होता है।

Cryptography in Hindi | Encryption in Hindi | Decryption kya hai?

► तो दोस्तों उम्मीद करतें है की यह पोस्ट Cryptography in Hindi (Cryptography kya hai) आपको पसंद आया होगा अगर यह पोस्ट (Explain Cryptography in Hindi) आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों को शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो पोस्ट के निचे कमेंट करना न भूले। धन्यवाद्!

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Difference Between OSI and TCP/IP Model in Hindi Mein | OSI और TCP/IP में अंतर

नमस्कार दोस्तों! Computervidya में आपका स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम आपको OSI और TCP/IP मॉडल में अंतर (Difference Between OSI and TCP/IP Model in Hindi) में अंतर बताएँगे।

OSI और TCP/IP मॉडल में अंतर

SN OSI Model TCP Model
1 OSI मॉडल रिफरेन्स मॉडल है। OSI Model का उपयोग Network Concept को समझने या रिफरेन्स के लिए होता है। TCP/IP मॉडल प्रैक्टिकल मॉडल है। वर्तमान में TCP Model का उपयोग इन्टरनेट में हो रहा है।
2 OSI मॉडल में 7 लेयर होती है। TCP/IP मॉडल 4 लेयर होती है।
3 OSI मॉडल को ISO (International Standard Organization) ने Develop किया जिसे सन् 1984 में प्रस्तुत किया गया था। TCP/IP मॉडल को ARPANET (American Research Project Agency Network) ने Develop किया जिसे सन् 1974 में प्रस्तुत किया गया था। ।
4 OSI का पूरा नाम Open System Interconnection है। TCP/IP का पूरा नाम Transmission Control Protocol है तथा IP पूरा नाम Internet Protocol है।
5 OSI मॉडल Vertical Approach को Follow करता है। TCP/IP मॉडल Horizontal Approach को Follow करता है।
6 OSI मॉडल Physical Layer और Data Link Layer दो अलग लेयर है जिनका फंक्शन अलग-अलग है। TCP/IP मॉडल Physical Layer और Data Link Layer को एक लेयर Host to Network Layer में combine कर दिया है।
7 OSI मॉडल में सेशन लेयर और प्रेजेंटेशन लेयर दो अलग लेयर है। TCP/IP मॉडल में सेशन लेयर और प्रेजेंटेशन लेयर नहीं होता है।
8 OSI मॉडल का उपयोग Real World Network में नहीं होता है इसका उपयोग केवल रिफरेन्स के लिए हो रहा है। TCP/IP मॉडल का उपयोग Real World Network में हो रहा है हम आज भी टी सी पी/ आई पी मॉडल का उपयोग कर रहे है।

OSI Model in Hindi (OSI Model Kya hai?)

OSI का तात्पर्य Open System Interconnection है OSI रिफरेन्स मॉडल data communication का एक स्टैंडर्ड्स मॉडल है जिसके द्वारा नेटवर्क में Data Transmission के समय, कंप्यूटरों के हार्डवेयर और सॉफ्टवेर में होने वाले changes एवम् फंक्शन को 7 लेयर में डिफाइन किया गया है।

दुसरे शब्दों में, जब नेटवर्क में कंप्यूटर के मध्य डाटा ट्रांसमिशन होता है तो डाटा ट्रांसमिशन के प्रोसेस में कंप्यूटर द्वारा कई प्रकार के फंक्शन परफॉर्म किये जाते है जिसे OSI ने सात लेयर में डिफाइन किया है अर्थात OSI रिफरेन्स मॉडल 7 लेयर का एक framework है जिसके द्वारा नेटवर्क में कंप्यूटर और डिवाइसों के मध्य डाटा ट्रांसमिशन के समय होने वाले फंक्शन को सात लेयर में डिफाइन किया गया है।

दोस्तों, Open Interconnection का तात्पर्य एक ऐसा नेटवर्क कनेक्शन से है जिसमें विभिन्न कंपनीयों द्वारा बनाये जाने वाले कंप्यूटरों और नेटवर्क डिवाइसों को आपस में interconnect किया जा सके अर्थात एक ही नेटवर्क में सभी को Connect किया जा सके। वास्तव में OSI, ओपन इंटरकनेक्शन का एक स्टैण्डर्ड मॉडल है जो नेटवर्क कम्युनिकेशन के लिए एक इंटरनेशनल स्टैण्डर्ड बन चूका है क्योकिं विभिन्न प्रकारों के नेटवर्क डिवाइसों को बनाने वाले सभी निर्माता कंपनीयां अपने प्रोडक्ट को बनाते समय OSI रिफ़रेंस मॉडल का अनुपालन करता है।

Difference Between OSI and TCP/IP Model in Hindi Mein | OSI और TCP/IP में अंतर

TCP/IP Model in Hindi (TCP/IP kya hai?)

TCP/IP एक प्रैक्टिकल मॉडल है जिसका उपयोग पहले ARPANET में किया जाता था और वर्तमान में TCP/IP मॉडल का उपयोग इन्टरनेट में किया जा रहा है।

TCP/IP बहुत सारें प्रोटोकॉल का एक समूह है जिसके दो प्रमुख प्रोटोकॉल TCP (Transmission Control Protocol) और IP (Internet Protocol) प्रोटोकॉल के नाम पर इस मॉडल का नाम रखा गया है TCP/IP Model का उपयोग असमान नेटवर्क (Heterogeneous Networks) के बिच कम्युनिकेशन कराने के लिए किया जाता है। TCP प्रोटोकॉल का कार्य DATA को छोटे-छोटे भागों (सेगमेंट) में बाँटने का होता है और IP का कार्य इन डाटा पैकेट को नेटवर्क में सोर्स से डेस्टिनेशन तक पहुचाने का होता है।

Difference Between OSI and TCP/IP Model in Hindi Mein | OSI और TCP/IP में अंतर

 

दोस्तों इनके अलावा यदि आप OSI मॉडल और TCP/IP मॉडल को विस्तार से समझना चाहते है या फिर कंप्यूटर नेटवर्क के अन्य टॉपिक को पढ़ना चाहते है तो निचे दिए गए लिंक में जाकर उन्हें पढ़ सकते है।

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What is Motherboard in Hindi | Motherboard kya hai? | मदरबोर्ड क्या है?

नमस्कार दोस्तों! Computervidya में आपका स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम आपको मदरबोर्ड (Motherboard in Hindi) के बारें में विस्तार से बताएँगे। साथ ही दोस्तों हम जानेंगे कि Motherboard क्या होता है? Motherboard को कैसे identify करें? Motherboard के Component एवम् Work के बारें में जानेंगे साथ ही हम बताएँगे के कौन कौन से कंपनी के Motherboard अच्छे होते है जिन्हें आप Personal एवम Commercial उपयोग के लिए खरीद सकते है तो दोस्तों आइये देखते है: –

मदरबोर्ड क्या है? (What is Motherboard in Hindi)

दोस्तों हमारे कंप्यूटर या लैपटॉप में उपस्थित मुख्य सर्किट बोर्ड या इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड को Motherboard कहा जाता है। मदरबोर्ड हमारे कंप्यूटर का मुख्य डिवाइस है जो कंप्यूटर में उपस्थित सभी डिवाइसों के बिच इंटरफ़ेस का कार्य करता है अर्थात कंप्यूटर में उपस्थित सभी डिवाइसों के बिच कनेक्शन प्रोवाइड करने का कार्य करते है। दोस्तों अधिक जानकारी के लिए हमारें विडियो को पूरा देखें।

Motherboard का मुख्य कार्य प्रोसेसर, रैम और HDD के बिच कम्युनिकेशन को Allow करना होता है इनके अलावा कंप्यूटर में उपस्थित अन्य सभी डिवाइस के बिच में भी कनेक्शन प्रोवाइड करने का कार्य करता है। दोस्तों अधिक जानकारी के लिए हमारें विडियो को पूरा देखें।

Major Component of Motherboard

रैम, BIOS, CMOS, CPU इत्यादि। कुछ कंपोनेंट motherboard के पोर्ट के माध्यम से कनेक्टेड होते है जैसे मॉनिटर, कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर, स्कैनर इत्यादि। मदरबोर्ड में उपस्थित सभी कंपोनेंट के अधिक जानकारी के लिए विडियो को पूरा देखें।

कौन से कंपनी का मदरबोर्ड खरीदें?

दोस्तों वैसे तो बहुत सारें कंपनीयां के Motherboard हमारें यहाँ मिलते है। जिनमे से बहुत सारें कंपनी के मदरबोर्ड को मैंने स्वयं उपयोग किया है और मैंने लगभग 7 सालों से कंप्यूटर हार्डवेयर का कार्य कर रहा हु। अतः मेरे पर्सनल एक्सपीरियंस से मै कुछ कंपनी के नाम दे रहा हु जिनका मदरबोर्ड खरीदकर आप अपने पर्सनल और कमर्शियल कार्य कर सकते है विभिन्न Motherboard Company के नाम जैसे :- Gigabyte, Asus, MSI, Zebronics इत्यादि। आप अपने बजट के अनुसार इनके बोर्ड को उपयोग कर सकते है। दोस्तों अधिक जानकारी के लिए हमारें विडियो को पूरा देखे।

तो दोस्तों उम्मीद करतें है की यह पोस्ट Motherboard क्या है? (Motherboard kya hai) आपको पसंद आया होगा अगर यह पोस्ट (Motherboard in Hindi) आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों को शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो पोस्ट के निचे कमेंट करना न भूले। धन्यवाद्!

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How to Start Car Wash Business at Home || कम पैसे में कार वॉश बिज़नस शुरू करके खूब कमाए

Car Wash Business / कार वाश बिज़नस कैसे शुरू करें

नमस्कार दोस्तों computervidya में आपका स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम आपको कार वाश बिज़नेस (Car Wash Business in Low investment) के बारें में विस्तार से बतायेंगें। अधिक जानकारी के लिए आप पोस्ट को पूरा पढ़े तथा विडियो को पूरा देखें।

दोस्तों हमारे देश में दिनों-दिन कारों की संख्या बढती जा रही है अतः कार से जुड़े सभी बिज़नस आज के समय में बहुत ही फायदेमंद बन चूका है। लेकिन दोस्तों किसी भी बिज़नस को शुरू करने या कामयाब बनाने के लिए हमें तीन बातों का ध्यान रखना बहुत ही जरुरी होता है।

    1. बिज़नस में इन्वेस्टमेंट
    2. बिज़नस में लागत
    3. बिज़नस की मार्केटिंग
    4. बिज़नस में रिस्क

अतः दोस्तों अगर आप कार वाश बिज़नस करना चाहते है तो Car Wash Business ideas से जुड़े इन्वेस्टमेंट, प्रॉफिट, मार्केटिंग और रिस्क के बारें में जानना बहुत ही जरुरी है।

कार वाश बिज़नस करने के तरीके

दोस्तों कार वाश के प्रायः तीन तरीके उपयोग किये जाते है जो विदेशों में बहुत ही चलते है जिसमे पहला तरीका मोबाइल कार वाश बिज़नस (Mobile Car Wash Business) दूसरा तरीका किसी निश्चित स्थान में कार वाश बिज़नस करना और तीसरा तरीका ऑटोमेटिक कार वाश बिज़नस (Automatic Car Wash Business) शामिल है। मोबाइल कार वाश और ऑटोमेटिक कार वाश बिज़नस के बारें में हम आपको अगले विडियो में जानकारी देंगे।

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कार वाश बिज़नस में प्रॉफिट

दोस्तों यदि आप कार वाश बिज़नस शुरू करते है तो आज के ज़माने का सबसे अच्छा विकल्प है इस बिज़नस को शुरू करके आप प्रतिदिन 1000 रूपये से 5000 रूपये तक अच्छी खासी कमाई कर सकते है। आज के समय में ग्राहक फुल कार वाश का 500 रूपये तथा हाफ कार वाश का 250 रूपये तक देता है ऐसे में यदि आप एक दिन में 20 हाफ कार वाश और 10 फुल कार वाश भी करते है तो एक दिन में आप 10 हजार का बिज़नस असानी से कर सकते है।

कार वाश बिज़नस में इन्वेस्टमेंट

दोस्तों अगर आप कार वाश का बिज़नस शुरू करना चाहते है तो आपको निचे दिए गए सभी सामग्री को खरीदने की जरुरत पड़ेगी।

    1. 1000 sqft की जगह
    2. वाटर सप्लाई
    3. शेड कवर
    4. बाल्टी
    5. सम्पू
    6. स्पंज
    7. विंडो स्कुइज
    8. चेमुईस क्लॉथ
    9. प्रमोशनल प्लायर
    10. सिग्नेज
    11. कार वैक्स
    12. वाटर रिप्लेंट
    13. आर्मर
    14. बेकिंग सोडा
    15. लैदर रिस्टोरर
    16. एयर फ्रेशनर
    17. क्रोम पालिश
    18. वैक्कुम क्लीनर
    19. हाई प्रेशर पम्प
    20. कार वाश फोम टैंक

दोस्तों इन सभी सामग्री की डिटेल जानकारी के लिए उपर दिए हमारे विडियो को पूरा देखें।

कार वाश बिज़नस की मार्केटिंग

दोस्तों यदि आप कार वाश बिज़नेस कर रहे हो या करने की सोच रहे हो तो आपको बिज़नस की मार्केटिंग अच्छे से करनी होगी इसके लिए आप डिस्काउंट कार्ड, विजिटिंग कार्ड, माउथ टू माउथ, बैनर, पोस्टर इत्यादि छपवाकर अपने बिज़नस की मार्केटिंग करा सकते है इनके अलावा कार वाश एक सर्विस बेस्ड बिज़नस है अतः आप 24 सर्विस घंटे देकर अपने बिज़नस की मार्केटिंग कर सकते हो। अधिक जानकारी के लिए आप विडियो को पूरा देखे।

कार वाश बिज़नस में रिस्क

दोस्तों वैसे तो सभी बिज़नस में कुछ न कुछ रिस्क तो होते है लेकिन यह एक सर्विस बेस्ड बिज़नस है अतः यदि आप अच्छा सर्विस देते है और आपका व्यावहार ग्राहक के प्रति अच्छा है तो इस तरह के बिज़नस में रिस्क बहुत ही कम होता है क्योकिं दिनों दिन कारों की संख्या बढती जा रही है अतः यह भविष्य के लिए सिक्योर बिज़नस आईडिया है।

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Top 20 Business Idea for Woman at Home | महिलाए के लिए 20 घरेलू बिज़नस

Top 20 Business Idea for Woman

नमस्कार दोस्तों! Computervidya में आपका स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम आपको महिलाओं के लिए 20 घरेलु बिज़नस के बारें में बताएँगे। खासतौर पर घरेलु महिलाएं घर के काम काज की वजह से बाहर काम नहीं कर पाती है। कई बार ऐसा होता है की बच्चों की वजह से उन्हें घर पर ही रहना पड़ जाता है। लेकिन उन्हें घर में रहना पसंद भी नहीं होता है। ऐसे में यदि महिलाओं को घर में रहकर ही कुछ काम या घरेलु बिज़नस करने का मौका मिले तो उन्हें असानी से कर सकती है। अतः दोस्तों आज के इस विडियो में हम आपको 20 बेस्ट बिज़नस के बारें में बताएँगे जिन्हें घरेलु महिलाएं घर से असानी से करके अच्छी खासी कमाई कर सकती है तो दोस्तों आइये देखते है:-

तो दोस्तों उम्मीद करतें है की यह पोस्ट महिलाओं के लिए 20 बेस्ट बिज़नस आईडिया (Top 20 Business idea for woman in Hindi) आपको पसंद आया होगा अगर यह पोस्ट (गाँव के लिए 16 बेस्ट बिज़नेस) आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों को शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो पोस्ट के निचे कमेंट करना न भूले। धन्यवाद्!

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Best 16 Business for Village Area in India || गाँव में किये जाने वालें 16 बेस्ट बिज़नस

गाँव में किये जाने वालें 16 बेस्ट बिज़नस

नमस्कार दोस्तों! Computervidya में आपका स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम आपको गाँव में किये जाने वालें 16 Best Business के बारें में बताएँगे। दोस्तों यदि आप गाँव में रहते है और गाँव में रहकर की बिज़नस करना चाहते है तो आपके पास एक सुनहरा मौका है की आप इन 16 बिज़नस में किसी एक बिज़नस को करके अच्छी खासी कमाई कर सकते है तो दोस्तों आइये देखते है:-

तो दोस्तों उम्मीद करतें है की यह पोस्ट गाँव में किये जाने वालें 16 बेस्ट बिज़नस आईडिया (Top 16 Business ideas for village area in Hindi) आपको पसंद आया होगा अगर यह पोस्ट (गाँव के लिए 16 बेस्ट बिज़नेस) आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों को शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो पोस्ट के निचे कमेंट करना न भूले। धन्यवाद्!

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IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi

दोस्तों! यदि आप इन्टरनेट यूजर है तो आपने कभी न कभी IP Addressका नाम जरुर सुना होगा क्योकिं मोबाइल, कंप्यूटर और इन्टरनेट की दुनियाँ में IP Address के बिना कुछ नहीं हो सकता है। IP Address के माध्यम से ही नेटवर्क possible हो पाता है जिससे एक डिवाइस दुसरे डिवाइस से communicate कर पातें है तो दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे की IP Address क्या है? और IP Address कैसे काम करता है? तो दोस्तों आइये देखते है:-

दोस्तों! यदि आप इन्टरनेट यूजर है तो आपने कभी न कभी IP Addressका नाम जरुर सुना होगा क्योकिं मोबाइल, कंप्यूटर और इन्टरनेट की दुनियाँ में IP Address के बिना कुछ नहीं हो सकता है। IP Address के माध्यम से ही नेटवर्क possible हो पाता है जिससे एक डिवाइस दुसरे डिवाइस से communicate कर पातें है तो दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे की IP Address क्या है? और IP Address कैसे काम करता है? तो दोस्तों आइये देखते है:-


IP Address क्या है? (IP Address in Hindi?)

IP एड्रेस एक एड्रेस है जिसका उपयोग नेटवर्क में किसी भी डिवाइस या कंप्यूटर को identify करने के लिए उपयोग किया जाता है या दुसरे शब्दों में, IP Address नेटवर्क में होस्ट और राऊटर के मध्य एक यूनिक एड्रेस होता है जिसका उपयोग डिवाइस आपस में कम्युनिकेशन के लिए करते है। IP Address का पूरा नाम Internet Protocol Address होता हैं। यह एक unique identifying number होता है। IP Address का उपयोग नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक डिवाइस को identify (पहचान) करने के लिए किया जाता है।

दुसरे शब्दों में नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक कंप्यूटर या डिवाइस को पहचान करने के लिए एक एड्रेस दिया जाता है जिसे IP Address कहा जाता है। यह एक यूनिक एड्रेस होता है अर्थात नेटवर्क के प्रत्येक कंप्यूटर या डिवाइस का IP एड्रेस अलग अलग होता है।

Example: 192.168.1.1 (IPv4 version में)

►Part of IP Address (IP एड्रेस के पार्ट): –

IP एड्रेस को दो पार्ट में विभाजित किया गया है जो निम्नलिखित है:-

    1. Network Part
    2. Node Part

IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi

Network Part: – IP एड्रेस का यह portion नेटवर्क के एड्रेस को स्टोर करता है।

Node Portion: – IP एड्रेस का यह portion किसी भी नेटवर्क के पर्टिकुलर नोड के एड्रेस को स्टोर करता है।

IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi


IP Address का उपयोग क्यों किया जाता है?

इन्टरनेट से जुड़ने वाले सभी डिवाइस या कंप्यूटर को पहचान करने के लिए IP एड्रेस प्रदान किया जाता है IP एड्रेस के माध्यम से हम यह जान पाते है की जो मैसेज या डाटा आया है वह किस फिजिकल लोकेशन के कंप्यूटर से आया है। जिस प्रकार कम्युनिकेशन के लिए हम लोगो के एड्रेस बहुत जरुरी होते है उसी प्रकार कंप्यूटर से कम्युनिकेशन के लिए IP एड्रेस भी बहुत जरुरी होता है। इन्टरनेट में कंप्यूटर एक दुसरे को IP एड्रेस के माध्यम से ही डाटा या फाइल ट्रांसमिट कर पाते है।


IP Address को प्रदान कौन करता है?

IANA (Internet Assigned Numbers Authority) एक आर्गेनाइजेशन है जिसका मुख्य कार्य विभिन्न संस्थाओ एवम् ISP (Internet Service Provider) को IP Address की रेंज प्रदान करना होता है। उस IP Address की रेंज को ISP तथा संस्था अपने यूजर को प्रोवाइड करते है।


Internet Protocol क्या है?

IP का पूरा नाम इन्टरनेट प्रोटोकॉल है यह एक पैकेट-स्विच्ड प्रोटोकॉल (Packet-Switched Protocol) है। जो OSI और TCP/IP मॉडल के नेटवर्क लेयर पर कार्य करता है। इन्टरनेट प्रोटोकॉल एड्रेसिंग और रूटिंग के लिए responsible होता है यह प्रोटोकॉल नेटवर्क में डाटा पैकेट को सोर्स से डेस्टिनेशन तक ट्रांसमिट करने का कार्य करता है।

Internet protocol को connection-less प्रोटोकॉल भी कहा जाता है क्योकिं यह प्रोटोकॉल डाटा पैकेट को ट्रांसमिट करते समय acknowledgement का उपयोग नहीं करता है और न ही नेटवर्क का सेटअप करता है जिसके कारण डाटा पैकेट के डेस्टिनेशन तक पहुचने की गारेंटी नहीं होती है अतः इस प्रोटोकॉल को unreliable protocol भी कहा जाता है।


इन्टरनेट प्रोटोकॉल के वर्शन

इन्टरनेट प्रोटोकॉल के दो वर्शन है जो निम्नलिखित है: –

    1. IPv4 (Internet Protocol Version 4)
    2. IPv6 (Internet Protocol Version 6)

IPv4 in Hindi (IPv4 क्या है?)

IPv4 का तात्पर्य Internet Protocol Version 4 है। IPv4 में 32 बिट एड्रेस का उपयोग किया जाता है। वर्तमान में IPv4 एड्रेस का प्रयोग सबसे ज्यादा हो रहा है लेंकिन IPv4 के एड्रेस समाप्त होने वाला है जिसके कारण IPv6 का उपयोग भी होने लगा है वर्तमान में आने वाले नए डिवाइसों में IPv4 के साथ साथ IPv6 एड्रेस का भी उपयोग होने लगा है।

IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi

IPv4 में 32 बिटके एड्रेस का उपयोग होता है जो 4 octet में बंटा होता है जिसके प्रत्येक octet में 0 से 255 तक की value होती है।


IPv6 in Hindi (IPv6 क्या है?)

IPv6 का तात्पर्य Internet Protocol Version 6 है। IPv6में 128 बिट एड्रेस का उपयोग किया जाता है। IPv6 Address को 8 ब्लॉक में represent किया जाता है जिसके प्रत्येक ब्लॉक 16 बिटके होते है और प्रत्येक ब्लॉक हेक्साडेसिमल फॉर्मेट में होता है और ब्लॉक को कोलन (:) से अलग अलग किया जाता है।

IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi

IPv6 में 128 बिट के एड्रेस का उपयोग होता है अतः इसमें कुल IP Address की संख्या 2 की घात 128 अर्थात 340 Undecillion होती है जबकि IPv4 में 32 बिट के एड्रेस का उपयोग होता है अतः IPv4 में कुल IP Address की संख्या 2 के घात 32 अर्थात 4.3 बिलियन होती है। एक सर्वे के अनुसार दुनिया भर में 7 बिलियन लोग रहते है मान लीजिए यदि प्रत्येक व्यक्ति एक डिवाइस भी रखता है तो IPv4 की एड्रेस रेंज 4 बिलियन असानी से समाप्त हो जाती है ऐसे में हमें IPv6 की जरुरत पड़ती है अतः वर्तमान में आने वाले डिवाइस में IPv6 IP Address का उपयोग किया जा रहा है।


IPv4 और IPv6 में अंतर

    1. IPv4 का पूरा नाम इन्टरनेट प्रोटोकल वर्शन 4 है जिसमे 32 बिटके IP Address का उपयोग किया जाता है। जबकि IPv6 का पूरा नाम Internet Protocol Version 6 है जिसमें 128 बिटके IP Address का उपयोग किया जाता है।
    2. IPv4 में एड्रेस की संख्या IPv6 की तुलना में बहुत ही कम है IPv4 में IP Address की संख्या 2 की घात 32 अर्थात 4.3 Billion होती है जबकि IPv6 में IP एड्रेस की कुल संख्या 2की घात128 अर्थात 340 Undecillion होती है।
    3. IPv4 इन्टरनेट प्रोटोकॉल का पुराना वर्शन है जिसके IP एड्रेस पूरा उपयोग हो चूका है जबकि IPv6इन्टरनेट प्रोटोकॉल का नया वर्शन है जिसका उपयोग अभी अभी शुरू हुआ है।


IP Address का कॉन्फ़िगर मेथड

किसी भी कंप्यूटर या डिवाइस को IP Address प्रदान करने के 3 तरीके होते है जो निम्नलिखित है: –

    1. Manual Configuration
    2. Automatic Configuration with APIPA
    3. Automatic Configuration with DHCP
1.Manual Configuration: –

जब यूजर किसी भी कंप्यूटर या डिवाइस को मैन्युअली IP Address प्रोवाइड करता है तो इस मेथड को मैन्युअल कॉन्फ़िगरेशन कहा जाता है। इस मेथड से IP एड्रेस कॉन्फ़िगर करने में समय अधिक लगता है लेकिन नेटवर्क का मेंटेनेंस करना बहुत असान होता है।

IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi

2.Automatic Configuration with APIPA: –

APIPA का पूरा नाम Automatic Private IP Addressing है। इस मेथड में कंप्यूटर या डिवाइस को automatically IP एड्रेस assign हो जाता है इस मेथड में DHCP नहीं होता है साथ ही मैन्युअल मेथड की तुलना में इसमें नेटवर्क मेंटेनेंस कठिन होता है क्योकिं IP एड्रेस कोई सीरीज में नहीं होता है।

IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi

3. Automatic Configuration with DHCP: –

जब नेटवर्क में उपस्थित सभी कंप्यूटर या डिवाइस को DHCP सर्वर के माध्यम से IP Addressआटोमेटिक प्रोवाइड किया जाता है तो इस मेथड को DHCP मेथड कहा जाता है। DHCP का पूरा नाम Dynamic Host Control Protocol होता है। इस मेथड के माध्यम से नेटवर्क में IP Address को कॉन्फ़िगर हमें सर्वर में DHCP को enable करना पड़ता है।


IP Address के प्रकार

दोस्तों! IP Address के उपयोग के आधार पर इन्हें कई केटेगरी में बाँटा गया है जो निम्नलिखित है: –

Private IP Address (प्राइवेट IP एड्रेस क्या है)

प्राइवेट IP एड्रेस वह IP Address है जिसका उपयोग किसी भी नेटवर्क के अंदर में router और कंप्यूटर के बिच में कम्युनिकेशन के लिए किया जाता है। राऊटर इन्टरनल कम्युनिकेशन के लिए नेटवर्क से जुड़े सभी डिवाइस या कंप्यूटर को प्राइवेट IP एड्रेस assign करता है या इसे यूजर मैन्युअली कॉन्फ़िगर भी कर सकता है। प्राइवेट IP एड्रेस static या dynamicदोनों प्रकार के हो सकते है।

Public IP Address (पब्लिक IP एड्रेस क्या है)

पब्लिक IP एड्रेस वह IP Address है जिसका उपयोग नेटवर्क के बाहर या इन्टरनेट में डिवाइसों एवम् कंप्यूटर के बिच कम्युनिकेशन के लीये किया जाता है। सामान्यतः पब्लिक IP एड्रेस को ISP(Internet Service Provider) के द्वारा assign किया जाता है। वेब सर्वर, ईमेल सर्वर या कोई भी सर्वर इन्टरनेट से डायरेक्ट एक्सेस किये जा सकते है।

पब्लिक IP एड्रेस पुरे विश्व स्तर पर यूनिक एड्रेस होता है अर्थात इन्टरनेट पर किसी भी दो डिवाइस के पब्लिक IP एड्रेस समान नहीं हो सकते है। यह मुख्य IP एड्रेस होता है जिसका उपयोग बाहरी नेटवर्क या इन्टरनेट से कम्युनिकेशन के लिए उपयोग किया जाता है। पब्लिक आई पी एड्रेस static या dynamic दोनों प्रकार के हो सकते है।

उदाहरण: – मान लीजिए आपके घर के अन्दर कई कंप्यूटर है और आप घर के सभी कंप्यूटर को एक प्राइवेट IP एड्रेस के माध्यम से communicate करना चाहते है तो आपको एक राऊटर की जरुरत पड़ेगी तब इस स्थिति में राऊटर को ISP के माध्यम से पब्लिक IP एड्रेस मिलेगा। और आप राऊटर से सभी कंप्यूटर को connect करेंगे तब DHCP सर्वर के माध्यम से सभी कंप्यूटर को प्राइवेट आई पी एड्रेस मिलेगा।

Static IP Address

Static IP एड्रेस वह IP Address है जिसको डिवाइस या कंप्यूटर में manuallyप्रदान किया जाता है। इस IP एड्रेस को Static IP Address इसलिए कहा जाता है क्योकिं यह स्थायी होता है। यूजर जब तक डिवाइस के IP एड्रेस को change नहीं करता है वह change नहीं होता है।

Dynamic IP Address

डायनामिक इन्टरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस एक अस्थायी IP Address होता है जो नेटवर्क में connect होने वाले कंप्यूटर या नोड को प्रोवाइड किया जाता है। डायनामिक IP एड्रेस आटोमेटिक कॉन्फ़िगर होता है जो उस नेटवर्क में उपस्थित DHCP सर्वर के माध्यम से प्रदान किया जाता है।

नेटवर्क से जुड़ने वाले कंप्यूटर या डिवाइस को सामान्यतः डायनामिक IP एड्रेस उस नेटवर्क के ISP(internet service provider) के द्वारा प्रदान किया जाता है।

Public और Private IP Address में अंतर

    1. Private IP एड्रेस का उपयोग निजी स्थान में कंप्यूटरों के मध्य कम्युनिकेशन कराने के लिए किया जाता है जबकि पब्लिक IP एड्रेस का उपयोग इन्टरनेट में कम्युनिकेशन के लिए किया जाता है।
    2. पब्लिक IP एड्रेस वालें डिवाइस को बाहर के नेटवर्क या इन्टरनेट से डायरेक्ट एक्सेस किया जा सकता है जबकि प्राइवेट IP एड्रेस से डिवाइस को इन्टरनेट या बाहर से डायरेक्ट एक्सेस नहीं किया जा सकता है।

Static और Dynamic IP Address में अंतर

    1. Static IP एड्रेस स्थायी एड्रेस होते है जबकि Dynamic IP एड्रेस अस्थायी होते है।
    2. Dynamic IP एड्रेस वाले नेटवर्क में एक ही डिवाइस को बार–बार जुड़ने पर अलग–अलग IP एड्रेस assign होता है जबकि Static IP एड्रेस वाले नेटवर्क में एक ही डिवाइस के बार–बार जुड़ने पर भी उसका IP एड्रेस change नहीं होता है।
    3. Static IP एड्रेस को मैन्युअली प्रोवाइड किया जाता है जबकि डायनामिक IP एड्रेस को APIPA (Automatic Private IP Addressing) या DHCP (Dynamic Host Control Protocol) सर्वर के माध्यम से प्रदान किया जाता है।
    4. Static IP Address स्थायी होने के कारण नेटवर्क में किसी भी अन्य कंप्यूटर या डिवाइस प्रदान नहीं किया जा सकता है जबकि Dynamic IP एड्रेस नेटवर्क में अलग-अलग समय में अलग-अलग डिवाइस या कंप्यूटर को प्रदान किया जा सकता है।

IP Address Classes in Hindi

दोस्तों! IPv4 में नेटवर्क डिवाइसों के लिए Addressing System को 5 क्लासेस में बाँटा गया है और प्रत्येक क्लास को उसके first octet के आधार पर पहचाना जाता है: –

IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi
Class A IP Address in Hindi

जिन IP Address के first octet की रेंज 0 से 127 तक होती है उन्हें Class A आईपी एड्रेस कहा जाता है। क्लास A की IP रेंज 1.x.x.x से 127.x.x.x तक होती है। Class A का डिफ़ॉल्ट सबनेट मास्क 255.0.0.0 होता है और क्लास A में मैक्सिमम 126 नेटवर्क एड्रेस तथा 16777214 होस्ट एड्रेस उपलब्ध होते है।

IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi

Class A उपयोग बहुत बड़े बड़े आर्गेनाइजेशन में किया जाता है जिसके नेटवर्क में होस्ट की संख्या बहुत अधिक होती है उन कंपनी में क्लास A का उपयोग होता है।

Class B IP Address in Hindi

जिन IP Address की रेंज 128.0.x.x से 191.255.x.x तक होती है। उन्हें Class B Addresses कहा जाता है। Class B का डिफ़ॉल्ट सबनेट मास्क 255.255.0.0 होता हैऔर क्लास B में मैक्सिमम 16384 नेटवर्क एड्रेस तथा 65534 होस्ट एड्रेस उपलब्ध होते है।

IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi
Class C IP Address in Hindi

जिन IP Address की रेंज 192.0.0.x से 223.255.255.x तक होती है। उन्हें Class C Addresses कहा जाता है। Class C का डिफ़ॉल्ट सबनेट मास्क 255.255.255.0 होता हैऔर क्लास C में मैक्सिमम 2097152 नेटवर्क एड्रेस तथा 254 होस्ट एड्रेस उपलब्ध होते है।

IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi

क्लास C में IP Address का 3 पार्ट नेटवर्क के लिए तथा एक पार्ट होस्ट के लिए उपयोग होता है अर्थात Class C में नेटवर्क की संख्या नोड की संख्या से काफी अधिक होती है छोटे छोटे कंपनी, साइबर कैफे, स्कूल, कॉलेज इत्यादि में इसका उपयोग होता है। Class C का उपयोग अन्य सभी Class से अधिक होता है।

Class D IP Address in Hindi

जिन IP Address की रेंज 224.0.0.0 से 239.255.255.255 तक होती है। उन्हें Class D एड्रेस कहा जाता है। Class D में कोई भी सबनेट मास्क नहीं होता है Class D को Multi-casting के लिए रिज़र्व रखा गया है।

IP Address in Hindi | IP Address kya hai | IP Types in Hindi
Class E IP Address in Hindi

जिन IP Address की रेंज 240.0.0.0 से 255.255.255.255 तक होती है। उन्हें Class E Addresses कहा जाता है। Class E में कोई भी सबनेट मास्क नहीं होता है Class E को Experimental Purpose & Study के लिए रिज़र्व रखा गया है।

Conclusion

तो दोस्तों उम्मीद करते है की हमारी यह पोस्ट What is IP Address in Hindi (IP Address क्या है?) आपको जरुर पसंद आई होगी। अगर आपको पसंद आई हो तो अपने दोस्तों के इसे Facebook, whatsapp इत्यादि में शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो पोस्ट के निचे कमेंट करना ना भूलें। धन्यवाद्!…….

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What is TCP/IP Model in Hindi || TCP/IP मॉडल क्या है ? TCP/IP Model kya hai

नमस्कार दोस्तों Computervidya में आपका स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम आपको What is TCP/IP in Hindi (TCP/IP Kya Hai) के बारें में विस्तार से बताएँगे साथ ही Layer of TCP/IP in Hindi (TCP/IP के लेयर) तथा UDP और TCP के बारें में भी बतायेंगें।


TCP/IP का इतिहास

दोस्तों आज के समय के इन्टरनेट को शुरुवात में ARPANET कहा जाता था जिसे सयुक्त राष्ट्र अमेरिका के रक्षा विभाग के एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी (ARPA) के द्वारा सन् 1969 में बनाया गया था। उस समय ARPANET में जिस प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता था उसे NCP (Network Control Protocol) कहा जाता था। समय के साथ-साथ ARPANET का विकास बहुत तेजी से होने लगा जिसके कारण ARPANET को मैनेज करने के लिए नए प्रोटोकॉल की आवश्यकता पड़ने लगी क्योकिं NCP बहुत बड़े नेटवर्क को मैनेज करने में असफल था।

सन् 1974 में DRDA के दो वैज्ञानिक Vint Cerf और Robert Elliot Kahn ने पैकेट नेटवर्क इंटरकनेक्शन के लिए एक प्रोटोकॉल का विकास किया गया जिसका नाम TCP(Transmission Control Protocol) था और अन्तः NCP को TCP के द्वारा Replace कर दिया गया। इन दोनों Vint Cerf और Robert Elliot Kahn वैज्ञानिक को इन्टरनेट का जनक कहा जाता है।

सन् 1983 में ARPANET को TCP/IP से पूरी तरह से बदल दिया गया था और जैसे-जैसे नेटवर्क का विकास होते गया सन् 1990 में ARPANET का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो गया।अतः इस आधार पर हम कह सकते है की आज का टी सी पी/आई पी मॉडल का विकास ARPANET से हुआ है।


TCP/IP in Hindi (टी सी पी/आई पी मॉडल)

TCP/IP एक प्रैक्टिकल मॉडल है जिसका उपयोग पहले ARPANET में किया जाता था और वर्तमान में TCP/IP मॉडल का उपयोग इन्टरनेट में किया जा रहा है।

TCP/IP बहुत सारें प्रोटोकॉल का एक समूह है जिसके दो प्रमुख प्रोटोकॉल TCP (Transmission Control Protocol) और IP (Internet Protocol) प्रोटोकॉल के नाम पर इस मॉडल का नाम रखा गया है TCP/IP Model का उपयोग असमान नेटवर्क (Heterogeneous Networks) के बिच कम्युनिकेशन कराने के लिए किया जाता है। TCP प्रोटोकॉल का कार्य DATA को छोटे-छोटे भागों (सेगमेंट) में बाँटने का होता है और IP का कार्य इन डाटा पैकेट को नेटवर्क में सोर्स से डेस्टिनेशन तक पहुचाने का होता है।

What is TCP/IP Model in Hindi || TCP/IP मॉडल क्या है ? TCP/IP Model kya hai

TCP/IP मॉडल के लेयर

दोस्तों जिस तरह OSI मॉडल में 7 लेयर होते है उसी प्रकार TCP/IP मॉडल में 4 लेयर होते है लेकिन कई किताबों में इन 4 लेयर को 5 लेयर में डिवाइड करके बताया गया है। क्योकिं अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा इस टी सी पी/आई पी मॉडल को बनाकर प्रैक्टिकल उपयोग किया गया था और डॉक्यूमेंट प्रॉपर तरीके से नहीं बनाया गया था जिसके कारण अलग अलग बुक में अलग अलग लेयर बताया जाता है।

TCP/IP kya Hai
  • 4. Application layer
  • 3. Transport Layer
  • 2. Internet Layer
  • 1. Network Access Layer

नेटवर्क एक्सेस लेयर

यह TCP/IP मॉडल का पहला लेयर है जो नेटवर्क में डाटा ट्रांसमिशन के लिए Responsible होता है। यह लेयर OSI मॉडल के फिजिकल और डाटा लिंक लेयर दोनो के कार्य और फंक्शन को परफॉर्म करते है। नेटवर्क एक्सेस लेयर Node to Node delivery के लिए जिम्मेदार होता है।

What is TCP/IP Model in Hindi || TCP/IP मॉडल क्या है ? TCP/IP Model kya hai
► नेटवर्क एक्सेस लेयर के फंक्शन:-

नेटवर्क एक्सेस लेयर विभिन्न प्रकार के फंक्शन के लिए Responsible होता है जो निम्नलिखित है: –

    1. Data को binary bit के रूप में Represent एवम् ट्रांसमिट करना।
    2. bit को सिंक्रोनाइज करने का कार्य।
    3. Device के function और procedure को डिफाइन करना।
    4. Access Control
    5. Physical Addressing
► नेटवर्क एक्सेस लेयर में काम करने वाले डिवाइस: –

TCP/IP मॉडल के इस लेयर में केबल और विभिन्न प्रकार के डिवाइस जैसे: – हब, स्विच, मॉडेम,ब्रिज इत्यादि।


Internet Layer in TCP/IP (इन्टरनेट लेयर)

यह TCP/IP मॉडल का दूसरा लेयर है जो ट्रांसमिट होने वाले डाटा पैकेट के एड्रेस और रूट (Path) के लिए Responsible होते है। इन्टरनेट लेयर Source से Destination तक डाटा पैकेट को ट्रांसमिट करने के लिए Responsible होता है। इन्टरनेट लेयर में मुख्य रूप से राउटर (Router) काम करता है जो डाटा पैकेट के पाथ का निर्धारण करता है।

Explain TCP/IP in Hindi
► Internet Layer के Function: –

इन्टरने लेयर विभिन्न प्रकार के फंक्शन एवम् सर्विसेस के लिए Responsible होता है जो निम्नलिखित है: –

    1. Logical Addressing (IP Addressing)
    2. Routing Algorithm
    3. Best Path का selection करना।
► Internet Layer के Protocol: –

इन्टरनेट लेयर में मुख्य रूप से IP (Internet Protocol) कार्य करते है। इनके अलावा ARP, IGMP और ICMP प्रोटोकॉल इन्टरनेट लेयर में कार्य करते है।


Transport Layer in TCP/IP (ट्रांसपोर्ट लेयर)

यह TCP/IP मॉडल का तीसरा लेयर है जो Process to Process Delivery के लिए Responsible होता है। ट्रांसपोर्ट लेयर का मुख्य कार्य ट्रांसमिट किये जाने वाले डाटा या मैसेज को छोटे छोटे पार्ट अर्थात सेगमेंट में डिवाइड करना होता है साथ ही Data ट्रांसमिशन के लिए Flow Control एवम् Error Control जैसे ऑपरेशन को परफॉर्म करते है।

TCP/IP kya hai
► Transport Layer के Function: –

ट्रांसपोर्ट लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन को परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है: –

    1. Segmentation (डाटा को सेगमेंट में बाँटना)
    2. Re sequencing & Re-transmit
    3. Error Control
    4. Flow Contro
► Transport Layer के Protocol: –

ट्रांसपोर्ट लेयर में दो प्रोटोकॉल TCP(Transmission Control Protocol) और UDP(User Data Protocol) कार्य करते है।


TCP in Hindi (TCP क्या है?)

TCP का पूरा नाम Transmission Control Protocol है यह एक Connection Oriented एवम् Reliable प्रोटोकॉल है क्योकिं TCP डाटा ट्रांसमिट करने से पहले कनेक्शन सेटअप करता है और Reliable कनेक्शन होने के बाद ही डाटा ट्रांसमिट करता है। टी सी पी प्रोटोकॉल प्रत्येक डाटा पैकेट के ट्रांसमिशन के पहले और बाद में Acknowledgement भेजता है और यह कंफ़र्म करता है की डाटा पैकेट Successfully ट्रांसमिट हुआ है की नहीं। TCP में डाटा पैकेट के पहुचने की गारेंटी होती है अतः टी सी पी को reliable प्रोटोकॉल कहा जाता है।

► TCP प्रोटोकॉल के विशेषताएं : –

ट्रांसपोर्ट लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन को परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है: –

    1. Connection Oriented Protocol)
    2. Reliable Protocol
    3. Flow Control
    4. Congestion Control
    5. Slow Protocol Compare UDP

UDP in Hindi (UDP क्या है?)

UDP का पूरा नाम User Datagram Protocol है यह एक Connection-less Protocol है। क्योकिं UDP प्रोटोकॉल डाटा ट्रांसमिशन के लिए कनेक्शन Establish नहीं करता है और ना ही डाटा ट्रांसमिशन में acknowledgement का उपयोग करता है इसलिए UDP प्रोटोकॉल को Unreliable Protocol भी कहा जाता है। UDP में डाटा पैकेट के पहुचने की गारेंटी नहीं होती है इस लिए UDP को Unreliable Protocol कहा जाता है।

► UDP प्रोटोकॉल के विशेषताएं : –

ट्रांसपोर्ट लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन को परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है: –

    1. Connection-less Protocol)
    2. Unreliable Protocol
    3. Fast Protocol Compare UDP

Application Layer in TCP/IP (एप्लीकेशन लेयर)

यह TCP/IP मॉडल का सबसे उपरी लेयर है जो एप्लीकेशन को नेटवर्क सर्विसेस उपलब्ध कराने के लिए Responsible होती है।

What is TCP/IP in Hindi

उदाहारण: – एप्लीकेशन लेयर का उदाहरण जैसे ब्राउज़र, Skype, Team-viewer इत्यादि है जिसका उपयोग यूजर इन्टरनेट या नेटवर्क को एक्सेस करने के लिए करता है।

► Application Layer के फंक्शन : –

एप्लीकेशन लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन को परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है: –

      1. File Transfer
      2. File Access & Management
      3. Directory Services
      4. Network Access (Authentication)
      5. Mail Services
      6. Virtual Terminal
► Application Layer के Protocol: –

Application Layer में विभिन्न प्रकार के प्रोटोकॉल कार्य करते है जैसे HTTP(hypertext transfer protocol), FTP( file transfer protocol), SMTP( simple mail transfer Protocol), DNS(Domain Name system), Telnet, POP3, IMAP इत्यादि।


TCP/IP मॉडल का उपयोग

TCP/IP का उपयोग दो या दो से अधिक असमान नेटवर्क को आपस में Communicate करने के लिए किया जाता है। TCP/IP एक प्रैक्टिकल मॉडल है जिसका उपयोग पहले ARPANET में किया जाता था और वर्तमान में TCP/IP मॉडल का उपयोग इन्टरनेट में किया जा रहा है।

► तो दोस्तों उम्मीद करतें है की यह पोस्ट TCP/IP in Hindi (TCP/IP Model in Hindi) आपको पसंद आया होगा अगर यह पोस्ट (Explain TCP/IP in Hindi) आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों को शेयर करें और अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो पोस्ट के निचे कमेंट करना न भूले। धन्यवाद्!

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Explain OSI Reference Model in Hindi | What is OSI in Hindi | OSI Reference Model kya hai?

नमस्कार दोस्तों Computervidya में आपका स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम आपको OSI model in Hindi (OSI model Kya Hai) के बारें में विस्तार से बताएँगे साथ ही दोस्तों OSI model के लेयर और OSI model से जुड़े विभिन्न जानकारीके बारें में विस्तार से बतायेंगें।


OSI मॉडल का इतिहास

दोस्तों, सन् 1970 के दशक में, जब कंप्यूटर नेटवर्क का विकास (Growth) काफी अधिक होने लगा तब नेटवर्क create करने तथा नेटवर्क को मैनेजमेंट करने में Complexity बढ़ने लगा क्योकि इस समय अलग – अलग प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम के बिच में नेटवर्क Create किये जाने लगा तथा साथ ही विभिन्न कंपनीयों के द्वारा बनाये जाने वाले नेटवर्क डिवाइसों को भी नेटवर्क को क्रिएट करने में उपयोग किया जाने लगा।

अतः दोस्तों, हम कह सकते है जैसे-जैसे नेटवर्क में ग्रोथ होने लगी वैसे-वैसे ही नेटवर्क Create करने में Complexity (दिक्कत) बढ़ने लगी। जिसके कारण नेटवर्क create करने तथा नेटवर्क को मैनेजमेंट करने में problem होने लगी। इस प्रॉब्लम को identify करके OSI (International Organization for Standardization) ने सन् 1978 में Network Specifications का एक सेट (set) प्रस्तुत किया था। जो विभिन्न डिवाइसों को नेटवर्क में जोड़ने के लिए नेटवर्क आर्किटेक्चर (Network Architecture) का वर्णन करता है। इसके पश्चात् सन् 1984 में ISO (International Standards Organization) ने इस मॉडल का रिविजन (revision) प्रस्तुत किया जिसे ओपन सिस्टम इंटरकनेक्शन (OSI) रिफरेन्स मॉडल कहा गया।


OSI मॉडल क्या है? (OSI Model in Hindi)

OSI का तात्पर्य Open System Interconnection है OSI रिफरेन्स मॉडल data communication का एक स्टैंडर्ड्स मॉडल है जिसके द्वारा नेटवर्क में Data Transmission के समय, कंप्यूटरों के हार्डवेयर और सॉफ्टवेर में होने वाले changes एवम् फंक्शन को 7 लेयर में डिफाइन किया गया है।

दुसरे शब्दों में, जब नेटवर्क में कंप्यूटर के मध्य डाटा ट्रांसमिशन होता है तो डाटा ट्रांसमिशन के प्रोसेस में कंप्यूटर द्वारा कई प्रकार के फंक्शन परफॉर्म किये जाते है जिसे OSI ने सात लेयर में डिफाइन किया है अर्थात OSI रिफरेन्स मॉडल 7 लेयर का एक framework है जिसके द्वारा नेटवर्क में कंप्यूटर और डिवाइसों के मध्य डाटा ट्रांसमिशन के समय होने वाले फंक्शन को सात लेयर में डिफाइन किया गया है।

दोस्तों, Open Interconnection का तात्पर्य एक ऐसा नेटवर्क कनेक्शन से है जिसमें विभिन्न कंपनीयों द्वारा बनाये जाने वाले कंप्यूटरों और नेटवर्क डिवाइसों को आपस में interconnect किया जा सके अर्थात एक ही नेटवर्क में सभी को connect किया जा सके।

वास्तव में OSI, ओपन इंटरकनेक्शन का एक स्टैण्डर्ड मॉडल है जो नेटवर्क कम्युनिकेशन के लिए एक इंटरनेशनल स्टैण्डर्ड बन चूका है क्योकिं विभिन्न प्रकारों के नेटवर्क डिवाइसों को बनाने वाले सभी निर्माता कंपनीयां अपने प्रोडक्ट को बनाते समय OSI रिफ़रेंस मॉडल का अनुपालन करता है।

Explain OSI Reference Model in Hindi | What is OSI in Hindi | OSI Reference Model kya hai?

 

Application Support Block

application support block का कार्य नेटवर्क में communicate करने वाले डिवाइसों के सॉफ्टवेर प्रोग्राम को नेटवर्क से connect करने के लिए होता है। इस ब्लॉक के अंदर तीन लेयर application layer, Presentation layer और session layer आते है।

Network Support Block

Network support block नेटवर्क में data को move करने के लिए responsible होता है इसके अंतर्गत OSI मॉडल के 4 लोवर लेयर transport, network, data link और physical layer आते है।


OSI Reference Model के लेयर

OSI रिफरेन्स मॉडल 7 लेयर का एक framework है जिसके द्वारा नेटवर्क में कंप्यूटर और डिवाइसों के मध्य डाटा ट्रांसमिशन के समय होने वाले फंक्शन को सात लेयर में डिफाइन किया गया है जो निम्नलिखित है:-

              7. Application Layer
              6. Presentation Layer
              5. Session Layer
              4. Transport Layer
              3. Network Layer
              2. Data Link Layer
              1. Physical Layer

 

Explain OSI Reference Model in Hindi | What is OSI in Hindi | OSI Reference Model kya hai?

Physical Layer in OSI Model

यह OSI मॉडल का पहला लेयर है जो पूरी तरह से हार्डवेयर से सम्बंधित है इसका मुख्य कार्य डाटा को बिट के रूप में ट्रांसमिट करना होता है। नेटवर्क में एक नोड से दुसरे नोड में ट्रांसमिट होने वाले बिट के ट्रांसमिशन के लिए responsible होता है।

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फिजिकल लेयर के फंक्शन:-

फिजिकल लेयर विभिन्न प्रकार के फंक्शन के लिए Responsible होता है जो निम्नलिखित है: –

    1. Data को Binary bit के रूप में Represent एवम् ट्रांसमिट करना।
    2. bit को सिंक्रोनाइज करने का कार्य।
    3. Device के function और procedure को डिफाइन करना।

ओ एस आई मॉडल के इस लेयर में केबल और विभिन्न प्रकार के डिवाइस जैसे: – हब, स्विच, मॉडेम, ब्रिज इत्यादि।


2. Data Link Layer in OSI Model

यह OSI मॉडल का दूसरा लेयर है जो नेटवर्क में एक नोड से दुसरे नोड तक डाटा को फ्रेम के रूप में ट्रांसमिशन के लिए responsible होता है। यह लेयर node to node delivery के लिए जिम्मेदार होता है।

 

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डाटा लिंक लेयर के फंक्शन:-

फिजिकल लेयर विभिन्न प्रकार के फंक्शन के लिए responsible होता है जो निम्नलिखित है: –

    1. Framing
    2. Physical Addressing
    3. Flow Control
    4. Error Control
    5. Access control

3. Network Layer in OSI Model

यह OSI मॉडल का तीसरा लेयर है जो source से destination तक डाटा पैकेट को ट्रांसमिट करने के लिए responsible होता है। नेटवर्क लेयर का अन्य कार्य डाटा पैकेट की एड्रेसिंग तथा उसके लिए बेस्ट पाथ का निर्धारण करना है। नेटवर्क लेयर में मुख्य रूप से राउटर काम करता है जो डाटा पैकेट के पाथ का निर्धारण करता है। नेटवर्क लेयर source to destination delivery के लिए responsible होता है।

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नेटवर्क लेयर के फंक्शन:-

नेटवर्क लेयर विभिन्न प्रकार के फंक्शन के लिए responsible होता है जो निम्नलिखित है:-

    1. Logical Addressing (IP Addressing)
    2. Routing Algorithm
    3. Best Path का selection करना।
नेटवर्क लेयर के प्रोटोकॉल:-

नेटवर्क लेयर में मुख्य रूप से IP(Internet Protocol) कार्य करते है।


4. Transport Layer (ट्रांसपोर्ट लेयर)

यह OSI मॉडल का तीसरा लेयर है जो source से destination तक डाटा पैकेट को ट्रांसमिट करने के लिए responsible होता है। नेटवर्क लेयर का अन्य कार्य डाटा पैकेट की एड्रेसिंग तथा उसके लिए बेस्ट पाथ का निर्धारण करना है। नेटवर्क लेयर में मुख्य रूप से राउटर काम करता है जो डाटा पैकेट के पाथ का निर्धारण करता है। नेटवर्क लेयर source to destination delivery के लिए responsible होता है।

Explain OSI Reference Model in Hindi | What is OSI in Hindi | OSI Reference Model kya hai?

 

Transport के function:-

ट्रांसपोर्ट लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है:-

    1. Segmentation (डाटा को सेगमेंट में बाँटना)
    2. Re-sequencing & Re-transmit
    3. Error Control
    4. Flow Control
ट्रांसपोर्ट लेयर के प्रोटोकॉल:-

ट्रांसपोर्ट लेयर में दो प्रोटोकॉल TCP(Transmission Control Protocol) और UDP(User Data Protocol) कार्य करते है।


5. Session Layer (सेशन लेयर)

यह OSI मॉडल का पांचवां लेयर है जो डिवाइसों के बिच होने वाले कनेक्शन के लिए responsible होता है दुसरे शब्दों में सेशन लेयर का मुख्य कार्य डिवाइसों के बिच में होने वाले कनेक्शन को कण्ट्रोल करने के लिए किया जाता है। सेशन लेयर dialog control और synchronization के लिए responsible होता है।

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Session Layer के Function:-

सेशन लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है:-

    1. कम्युनिकेशन के लिए Connection establish करना।
    2. कम्युनिकेशन के लिए Connection चालू रखना।
    3. कम्युनिकेशन होने के बाद Connection बंद करना।
    4. Dialog Control
    5. Synchronization

6. Presentation Layer (प्रेजेंटेशन लेयर)

यह ओ एस आई मॉडल का छटवां लेयर है जो डाटा कन्वर्शन, डाटा कम्प्रेशन, इन्क्रिप्शन/डिक्रिप्शन के लिए responsible होता है।
प्रेजेंटेशन लेयर का मुख्य कार्य नेटवर्क में डिवाइसों के मध्य होने वाले ट्रांसमिशन में डाटा के फॉर्मेट को नियंत्रण करना होता है इस लेयर में डाटा को एनकोड तथा डिकोड भी किया जाता है साथ ही डाटा को encrypt एवम् decry-pt भी किया जाता है।

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उदाहरण:-

दोस्तों जब दो अलग अलग ऑपरेटिंग सिस्टम एवम् एप्लीकेशन वाले डिवाइसों के बिच कम्युनिकेशन होता है तो उस स्थिति में डाटा का फॉर्मेट अलग अलग हो सकता है इस स्थिति में प्रेजेंटेशन लेयर के माध्यम से डाटा ट्रांसलेट होता है।

Presentation layer के function:-

प्रेजेंटेशन लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन को परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है:-

    1. Data Translation (डाटा का ट्रांसलेशन करना)
    2. Data Encryption/Decryption
    3. Data Compression

7. Application Layer (एप्लीकेशन लेयर)

एप्लीकेशन लेयर OSI मॉडल का सबसे उपरी लेयर है जिसका मुख्य कार्य नेटवर्क सर्विसेस को एक्सेस करने के लिए एप्लीकेशन प्रोग्राम को enable करना होता है। एप्लीकेशन लेयर के माध्यम से प्रोग्राम नेटवर्क सर्विस तथा उसके रिसोर्स को एक्सेस करता है। दुसरे शब्दों में एप्लीकेशन लेयर network services और application के बिच में इंटरफ़ेस का कार्य करता है।

Explain OSI Reference Model in Hindi | What is OSI in Hindi | OSI Reference Model kya hai?

उदाहरण:- एप्लीकेशन लेयर का उदाहरण ब्राउज़र, जिसका उपयोग यूजर इन्टरनेट या नेटवर्क को एक्सेस करने के लिए करता है।

Application Layer के Function:-

एप्लीकेशन लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन को परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है:-

    1. File Transfer
    2. File Access & Management
    3. Directory Services
    4. Network Access (Authentication)
    5. Mail Services
    6. Virtual Terminal
एप्लीकेशन लेयर के प्रोटोकॉल:-

Application Layer में विभिन्न प्रकार के प्रोटोकॉल कार्य करते है जैसे HTTP(hypertext transfer protocol), FTP( file transfer protocol), SMTP( simple mail transfer Protocol), DNS(Domain Name system) इत्यादि।

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